Water Warrior कामेगौड़ा को कर्नाटक सरकार ने की आजीवन मुफ्त बस पास की घोषणा, PM मोदी ने भी की थी तारीफ

कर्नाटक (Karnataka) के मांड्या जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले कामेगौड़ा के तरफ लोगों को ध्यान तब गया जब पिछले सप्ताह 'मन की बात' (Mann Ki Baat) में पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने उनका नाम लेते हुए उनकी तुलना 'जल योद्धा' (Water Warrior) से की थी.

Water Warrior कामेगौड़ा को कर्नाटक सरकार ने की आजीवन मुफ्त बस पास की घोषणा,  PM मोदी ने भी की थी तारीफ

Water Warrior कामेगौड़ा की पूरी कहानी

कर्नाटक (Karnataka) के मांड्या जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले कामेगौड़ा के तरफ लोगों को ध्यान तब गया जब पिछले सप्ताह 'मन की बात' (Mann Ki Baat) में पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने उनका नाम लेते हुए उनकी तुलना 'जल योद्धा' (Water Warrior) से की थी. साथ ही उनका जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने अपने बल पर गांव दासनाडोडी और उसके आसपास के इलाकों में 16 से भी अधिक तालाब खोदे हैं. आपको बता दें कि 85 साल के कामेगौड़ा इस उम्र में भी अपने जानवरों को घास चराने ले जाते हैं साथ- साथ उन्होंने अपने गांव में नये तलाब खोदने का बीड़ा उठाया है.  कामेगौड़ा से इस पूरे मामले पर जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि उनके इलाके में पानी की काफी समस्या है इसलिए वह अपने क्षेत्र में पानी की समस्या को दूर करने के लिए और जल संरक्षण करने के लिए छोटे- छोटे तलाब बनाने के काम में जुटे है.

आपको जानकर हैरानी होगी कि अब तक कामेगौड़ा अपनी मेहनत से 16 तालाब खोद चुके हैं. यह भी हो सकता है कि उन्होंने जो 16 तालाब बनाए हैं वह बहुत बड़े न हो लेकिन उनकी कोशिश काफी बड़ी है. आज पूरे इलाके में इतने सारे तालाबों की वजह से एक नया जीवन मिला है. गौरतलब है कि  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi)  ने पिछले रविवार को 'मन की बात' (Mann ki Baat) कार्यक्रम में कामेगौड़ा का जिक्र करते हुए उनकी जिंदगी से पूरे देशवासियों को अवगत कराया.

NDTV ने 2018 में  कामेगौड़ा से उनके गांव में मुलाकात की. उस वक्त वह 82 साल के थे. इस शख्स के बारे में जितना भी कहा जाए कम है. चलिए तो आपको इस शख्स के जीवन को बेहद पास से अवगत कराते हैं. कामेगौड़ा एक छोटे से घर में रहते हैं. इस घर को कामेगौड़ा अब तक जितने भी पुरस्कार मिले हैं उससे सजाया गया है. वह अपने काम के लिए मिली पहचानों को दर्शाता है, जिसमें राज्य का राज्योत्सव पुरस्कार भी शामिल है. वह एनडीटीवी की टीम को अपने उन तालाबों के पास भी ले गए जिसे उन्होंने अपने हाथों से खोदा था और अब जानवर भी प्यासे नहीं रहते हैं.

कामेगौड़ा अपनी पूरी कहानी बताते हुए कहते हैं कि मैं 5 साल का था और मैं जंगली जानवर की तरह रहता था. मेरी मां के 10 बच्चे थे, मुझे अपनी मां से कोई खास लगाव नहीं था. मैं भेड़ और दूसरे जानवर के साथ सोता था क्योंकि मैं उनके ज्यादा करीब था.  मुझे चीड़िया और सांपो से कोई डर नहीं लगता था. अगर सच कहूं तो वह मुझे ज्यादा करीब लगते थे. मैंने जानवर को करीब से देखा है कि वह गर्मी में कितने ज्यादा परेशान हो जाते हैं और पानी के लिए इधर- उधर घूमते हैं.

मैंने जानवरों के इस दुख को तब देखा जब मैं जवान हुआ करता था. फिर मैंने सोचा कि अगर मैं इन जानवरों के दुख को कम नहीं कर पाया तो सच में मैं एक राक्षस हूं. और फिर मैंने तालाब खोदना शुरू किया. आपको बता दें कि कामेगौड़ा के इस कामयाबी के लिए कर्नाटक सरकार ने कामेगौड़ा को आजीवन मुफ्त बस पास की भी घोषणा की है ताकि वह कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम या केएसआरटीसी द्वारा संचालित बसों पर अपनी इच्छानुसार यात्रा कर सके. और उन्हें किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े.

गौड़ा कहते हैं कि उन्हें अपने परिवार से ज्यादा प्रिय है ये सब काम करना. लेकिन वह अपने पोते का जिक्र करते हुए कहते हैं कि उसे प्रकृति और पानी से प्यार है और मुझे उम्मीद है वह इसे प्रोत्साहित करेगा. आपको बता दें कि गौड़ा अपने बारे में बताते हुए कहते हैं कि मैं अपनी आजविका चलाने के लिए जेसीबी का उपयोग करता हूं. पूरे दिन की कीमत 6,000 रुपये से 8,000 रुपये या और प्रति घंटे 700 रुपये है. 

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 मैं अपने परिवार को सोना, नकदी दूंगा तो वे उसे बर्बाद कर देंगे. मेरी सेवा हमेशा उनके लिए रहेगी,  गौड़ा ने कहा.. "मेरा काम जंगल के जानवरों के लिए है. अगर मैं मर गया, तो मेरा नाम हमेशा रहेगा. यह तब तक रहेगा जब तक आकाश और पृथ्वी है. पैसा आता है और जाता है.

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पानी आने के बाद, जानवर यहां से पीते हैं और खुश होते हैं. और उन्हें देखकर, मैं खुश हूं. जब तक पृथ्वी और आकाश रहता है - मैंने ऐसे मजबूत तालाब बनाता रहूंगा.  मैंने जानवरों के लिए अच्छी चीजें बनाई हैं. उन्होंने कहा, मैंने सही काम किया है. भले ही मैं मर जाऊं लेकिन पौधे, जानवर, तालाब में गौड़ा की सेवा दिखेगी.