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उपन्यास


'उपन्यास' - 95 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • किताब-विताब : लोक और भाषा के रस में पगा उपन्यास

    किताब-विताब : लोक और भाषा के रस में पगा उपन्यास

    एक रंगकर्मी और रंग निर्देशक के रूप में हृषीकेश सुलभ की पहचान इतनी प्रबल रही है कि इस बात की ओर कम ही ध्यान जाता है कि वे बहुत समर्थ कथाकार भी रहे हैं. उनका नया‌ उपन्यास 'अग्निलीक' हमें मजबूर करता है कि हम उन्हें समकालीन उपन्यासकारों की भी प्रथम पंक्ति में रखें.

  • मोदी-शाह के CAB में मुस्लिमों के लिए क्यों नहीं है जगह...?

    मोदी-शाह के CAB में मुस्लिमों के लिए क्यों नहीं है जगह...?

    वर्ष 1993 में, एक बांग्लादेशी लेखिका ने, जिन्हें अपने मुल्क में लोकप्रिय होने के बावजूद बाहर ज़्यादा लोग नहीं जानते थे, अपना चौथा उपन्यास प्रकाशित किया. इस उपन्यास में एक ऐसे हिन्दू परिवार की कहानी थी, जिसका बांग्लादेश के प्रति लगाव उस साम्प्रदायिक हिंसा की वजह से कम होता चला गया, जिसका सामना उन्हें करना पड़ा. यह उपन्यास 'लज्जा' दुनियाभर में बेस्टसेलर बना, लेकिन अपने ही वतन में इस पर पाबंदी लगी.

  • खुशवंत सिंह के उपन्यास को भारतीय रेलवे ने बताया अश्लील, स्टेशन के स्टॉल से हटाने के दिए निर्देश

    खुशवंत सिंह के उपन्यास को भारतीय रेलवे ने बताया अश्लील, स्टेशन के स्टॉल से हटाने के दिए निर्देश

    रमेश चंद्र रत्न ने संवाददाताओं से कहा, "अधिकारियों को भी इसके लिये सचेत किया और निर्देशित किया है कि अश्लील चीजें किसी बुक स्टॉल पर नहीं मिलने दें." उन्होंने कहा, "हम कोई चीज ऐसी नहीं चलने देना चाहते हैं जिससे नई पीढ़ी को कोई आघात पहुंचे."

  • A Delhi Obsession: जुनून, प्रेम और विश्वास की कहानी है एमजी वसांजी की नई किताब

    A Delhi Obsession: जुनून, प्रेम और विश्वास की कहानी है एमजी वसांजी की नई किताब

    कनाडा के उपन्यासकार एमजी वसांजी का उपन्यास 'A Delhi Obsession' दिल्ली के क्लब के शांत वातावरण के बीच, जुनून, प्रेम और विश्वास की एक अप्रत्याशित कहानी को उजागर करता है. यह उपन्यास आपको अपनी गहन दुविधाओं का सामना करने के लिए मजबूर करेगा. यह किताब बेहद संवेदनशील होने के साथ ही पाठकों के नज़रिए को प्रभावित करने वाली है.

  • Munshi Premchand: खुद भी पढ़‍िए और अपने बच्‍चों को भी पढ़ाएं मुंशी प्रेमचंद की ये 5 कहानियां

    Munshi Premchand: खुद भी पढ़‍िए और अपने बच्‍चों को भी पढ़ाएं मुंशी प्रेमचंद की ये 5 कहानियां

    हिंदी साहित्य को नई उचाइयों तक पहुंचाने वाले मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि 8 अक्टूबर को मनाई जाती है. साहित्य में प्रेमचंद के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है. प्रेमचंद को उपन्यास के सम्राट माने जाते हैं. प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था. प्रेमचंद की कई कहानियां ग्रामीण भारत पर हैं. उन्होंने अपनी कहानियों के माध्यम से किसानों की हालत का वर्णन किया.

  • नेमिचन्द्र जैन के जन्मशती वर्ष पर 16 सितंबर को दिल्ली में विचार गोष्ठी

    नेमिचन्द्र जैन के जन्मशती वर्ष पर 16 सितंबर को दिल्ली में विचार गोष्ठी

    प्रसिद्ध कवि, आलोचक, रंग समीक्षक और नटरंग प्रतिष्ठान के संस्थापक नेमिचन्द्र जैन के जन्मशती वर्ष पर जारी आयोजनों के सिलसिले में 16 सितंबर को नटरंग प्रतिष्ठान की ओर से 'उपन्यास पर एकाग्र' विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की जाएगाी. इसकी अध्यक्षता लेखिका मृदुला गर्ग करेंगी. विचार गोष्ठी के तीन सत्र होंगे.

  • खतरनाक चीजों की सूची

    खतरनाक चीजों की सूची

    पिछले कुछ दिनों में भारत में जो 'न्यू नॉर्मल' बनाया गया है, उसका असर बहुत सारी चीज़ों पर पड़ा है. ऐसे में यह ज़रूरी है कि ख़तरनाक चीज़ों की एक सूची बनाई जाए जिनसे हम सब बच सकें. इस सूची में सबसे ताज़ा प्रविष्टि दुनिया के महानतम उपन्यासों में गिने जाने वाले लियो टॉल्स्टॉय के 'वार एंड पीस' की है. इस उपन्यास को महाराष्ट्र पुलिस ने ख़तरनाक माना है. इसे भीमा कोरेगांव केस में गिरफ़्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ता वर्नेन गोंजाल्वेस के ख़िलाफ़ सबूत के तौर पर पेश किया गया है. आदरणीय बॉम्बे हाइकोर्ट ने भी गोंजाल्वेस से पूछा कि वे ऐसी किताब क्यों पढ़ते हैं जो किसी दूसरे देश के युद्ध के बारे में है.

  • 13 साल की बच्ची ने लिखा उपन्यास, दिखाया सपनों का देश, जहां लोगों की जगह हैं सिर्फ बिल्लियां

    13 साल की बच्ची ने लिखा उपन्यास, दिखाया सपनों का देश, जहां लोगों की जगह हैं सिर्फ बिल्लियां

    आतंकवाद प्रभावित जम्मू कश्मीर के त्राल क्षेत्र में 13 वर्षीय एक बच्ची ने एक उपन्यास लिखा है, जो एक सपनों के देश कि कहानी है, जहां सभी इंसानों की जगह बिल्लियों ने ले ली है.

  • FlashBack 2018: साल 2018 की वो 5 चर्चित किताबें, जो आपको जरूर पढ़नी चाहिए

    FlashBack 2018: साल 2018 की वो 5 चर्चित किताबें, जो आपको जरूर पढ़नी चाहिए

    5 Most Popular Books of 2018: साल 2018 किताबों के लिए महत्वपूर्ण रहा. इस साल कहानी, उपन्यास, कविता, कथेतर और तमाम विधाओं में किताबें प्रकाशित हुईं और इन किताबों की खूब चर्चा भी हुई.

  • Man Booker Prize: आयरलैंड की लेखिका Anna Burns को 'मिल्कमैन' के लिए मिला मैन बुकर पुरस्कार

    Man Booker Prize: आयरलैंड की लेखिका Anna Burns को 'मिल्कमैन' के लिए मिला मैन बुकर पुरस्कार

    लेखिका एना बर्न्स (Irish Author Anna Burns) को उनके उपन्यास ‘मिल्कमैन’ के लिए मैन बुकर पुरस्कार (Man Booker Prize 2018) मिला है. वह उत्तरी आयरलैंड की पहली लेखिका हैं जिन्हें अंग्रेजी भाषा साहित्य के इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया.

  • भीड़तंत्र का बढ़ता दबदबा भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए खतरा: अरुधंति रॉय

    भीड़तंत्र का बढ़ता दबदबा भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए खतरा: अरुधंति रॉय

    बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुधंति रॉय ने भारत में भीड़तंत्र के बढ़ते दबदबे को लेकर भय प्रकट किया और कहा कि यह देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए यह एक बहुत बड़ा खतरा है. वर्ष 1997 में अपने पहले उपन्यास 'द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स' को लेकर विश्व के इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को जीतने वाली रॉय को उनके लेखन को लेकर कानूनी रुप से अदालत में घसीटा गया था.

  • अमिताभ बच्चन के 76वें जन्मदिन को ऐसे खास बनाएंगी उनकी बेटी, ये होगा श्वेता बच्चन का तोहफा...

    अमिताभ बच्चन के 76वें जन्मदिन को ऐसे खास बनाएंगी उनकी बेटी, ये होगा श्वेता बच्चन का तोहफा...

    रोजमर्रा की जिंदगी को बयां करता श्वेता बच्चन नंदा का पहला उपन्यास 'पैराडाइज टावर्स (Paradise Towers)' अमिताभ बच्चन के 76वें जन्मदिन की पूर्व संध्या पर 10 अक्टूबर को प्रकासित होगा.

  • SC का मलयालम उपन्यास मीशा पर बैन लगाने से इनकार

    SC का मलयालम उपन्यास मीशा पर बैन लगाने से इनकार

    सुप्रीम कोर्ट ने मलयालम उपन्यास मीशा पर बैन लगाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने किताब पर बैन लगाने वाली याचिका को भी खारिज कर दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि लेखक की कल्पना को स्वतंत्रता का आनंद लेना चाहिए. दरसअल उपन्यास में मंदिर जाने वाली हिंदू महिलाओं के चरित्र को लेकर उठाए सवाल उठाये गए थे.

  • अमृता प्रीतम की जिंदगी में खास रही 31 तारीख, प्रेम के लिए तलाशा खुद का ठीहा

    अमृता प्रीतम की जिंदगी में खास रही 31 तारीख, प्रेम के लिए तलाशा खुद का ठीहा

    Amrita Pritam: गुजरांवाला पंजाब में आज के ही दिन यानी 31 अगस्त, 1919 में पैदा अमृता प्रीतम का बचपन लाहौर में बीता. सरस्वती की कृपा से उनकी लेखनी किशोर होते होते ही चल पड़ी और अपने जीवनकाल में उन्होंने सौ से ज्यादा कृतियां लिखीं जिनमें कविताएं, कहानियां, उपन्यास, संस्मरण, जीवनी व उनकी अपनी आत्मकथा रसीदी टिकट प्रमुख हैं.

  • Book Review: लड़की के लाखों रुपयों को लूटने वाले हैंडसम फ्रॉड की कहानी है सुरेंद्र मोहन पाठक की 'कॉनमैन'

    Book Review: लड़की के लाखों रुपयों को लूटने वाले हैंडसम फ्रॉड की कहानी है सुरेंद्र मोहन पाठक की 'कॉनमैन'

    लगभग 4 साल बाद सुनील सीरीज को वापस लाते हुए पाठक ने अपने पाठकों को चौंकाया है. पॉकेट बुक्स में अब तक कुल 299 उपन्यास प्रकाशित हो चुकी सुनील सीरीज की यह 122वीं श्रृंखला है. हालांकि सुरेंद्र मोहन पाठक की पुस्तक 'कॉनमैन' का अंग्रेजी संस्करण 'द डेथ ऑफ अ कॉनमैन' भी आ चुका है.

  • 'हसीनाबाद' : सपने और सच के बीच का फ़ासला

    'हसीनाबाद' : सपने और सच के बीच का फ़ासला

    यह अंदाज़ा था कि गीताश्री जब उपन्यास लिखेंगी तो कोई स्त्री-गाथा उसके केंद्र में होगी. 'हसीनाबाद' को पढ़ते हुए इस स्तर पर उनसे निराशा नहीं होती. उनके उपन्यास के केंद्र में गोलमी नाम की एक युवा नृत्यांगना है जो 'सपने देखती नहीं बुनती है'.

  • Rahul Gandhi ने अनुराग कश्यप के 'सैक्रेड गेम्स' पर किया कुछ इस तरह का ट्वीट, बॉलीवुड का यूं आया रिएक्शन

    Rahul Gandhi ने अनुराग कश्यप के 'सैक्रेड गेम्स' पर किया कुछ इस तरह का ट्वीट, बॉलीवुड का यूं आया रिएक्शन

    विक्रम चंद्रा के उपन्यास 'सैक्रेड गेम्स' पर आधारित वेब सीरीज में इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल के साथ-साथ बोफोर्स घोटाला और शाहबानो मामले का उल्लेख किया गया है. इन्हीं मामलों ने राजीव गांधी के प्रधानमंत्री काल में तूफान ला दिया था.

  • टैगोर की बड़ी रचना और प्रधानमंत्री की छोटी सी चूक

    टैगोर की बड़ी रचना और प्रधानमंत्री की छोटी सी चूक

    विश्व भारती के दीक्षांत समारोह में आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को याद करते हुए उनका रिश्ता गुजरात से खोज निकाला. यह जानकारी दी कि अहमदाबाद में रहते हुए उन्हें 'क्षुधित पाषाण' लिखने का ख़याल आया. लेकिन यहां भी उनसे एक चूक हो गई. 'क्षुधित पाषाण' एक कहानी है जिसे उन्होंने उपन्यास बता डाला. इस कहानी पर दो फ़िल्में भी बन चुकी हैं. गुलज़ार की फिल्म 'लेकिन' भी इसी कहानी पर केंद्रित है.

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