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किसान आंदोलन


'किसान आंदोलन' - 172 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • 'भारत बचाओ' रैली: सोनिया गांधी का हमला, 'मोदी-शाह का एक ही एजेंडा, लोगों को लड़वाओ और मुद्दे से ध्यान हटाओ'

    'भारत बचाओ' रैली: सोनिया गांधी का हमला, 'मोदी-शाह का एक ही एजेंडा, लोगों को लड़वाओ और मुद्दे से ध्यान हटाओ'

    उस दौरान सोनिया गांधी ने कहा, 'अब समय आ गया है कि हम लोग अपने-अपने घरों से निकले और आंदोलन करें. आज जब मैं अपने अन्नदाता किसान भाइयों की ओर देखती हूं तो मुझे बहुत दुख होता है. उन्हें खाद नहीं मिलती. पानी-बिजली की सुविधाएं नहीं मिलतीं. फसल के उचित दाम नहीं मिलते. ऐसे में सरकार को बताइए कि हम उनके खिलाफ संघर्ष को तैयार हैं कि नहीं.'

  • जब अमेरिका ने दी गेहूं रोक देने की धमकी, तब लाल बहादुर शास्‍त्री ने दिया था ऐसा जवाब

    जब अमेरिका ने दी गेहूं रोक देने की धमकी, तब लाल बहादुर शास्‍त्री ने दिया था ऐसा जवाब

    देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) का जन्म 2 अक्टूबर (2 October) 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था. शास्त्री महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) को अपना गुरु मानते थे. उन्हें गांधी जी के असहयोग आंदोलन में हिस्सा लेने के चलते कुल सात वर्षों की जेल हुई थी. गरीबों की सेवा में अपना जीवन समर्पित करने वाले शास्त्री देश के रेल मंत्री, परिवहन एवं संचार मंत्री, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, गृह मंत्री एवं नेहरू जी की बीमारी के दौरान बिना विभाग के मंत्री रहे.

  • Lal Bahadur Shastri: कई मील नंगे पांव चलकर स्कूल जाते थे लाल बहादुर शास्त्री, जानिए उनसे जुड़ी 10 बातें

    Lal Bahadur Shastri: कई मील नंगे पांव चलकर स्कूल जाते थे लाल बहादुर शास्त्री, जानिए उनसे जुड़ी 10 बातें

    Lal Bahadur Shastri Jayanti: देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) की जयंती 2 अक्टूबर (2 October) को मनाई जाती है. लाल बहादुर शास्त्री ने अपना पूरा जीवन गरीबों की सेवा में समर्पित कर दिया था. शास्त्री का जन्म उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में दो अक्टूबर, 1904 को शारदा प्रसाद और रामदुलारी देवी के घर हुआ था. देश की आजादी में लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri)  का खास योगदान है. साल 1920 में शास्त्री (Shastri) भारत की आजादी की लड़ाई में शामिल हो गए थे. स्वाधीनता संग्राम के जिन आंदोलनों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही उनमें 1921 का असहयोग आंदोलन, 1930 का दांडी मार्च और 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन उल्लेखनीय हैं. शास्त्री ने ही 'जय जवान, जय किसान' का नारा दिया था. आइये जानते हैं लाल बहादुर शास्त्री से जुड़ी 10 बातें....

  • ...जब धरने पर बैठे पूर्व CM शिवराज सिंह रात में करने लगे भजन-कीर्तन, सांसद ने बजाई डफली, देखें VIDEO

    ...जब धरने पर बैठे पूर्व CM शिवराज सिंह रात में करने लगे भजन-कीर्तन, सांसद ने बजाई डफली, देखें VIDEO

    बता दें, मध्य प्रदेश में अतिवृष्टि और बाढ़ से पीड़ित किसानों को मुआवजा दिए जाने की मांग को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को विधानसभावार धरना-प्रदर्शन किया था. इस दौरान भाजपा नेताओं ने राज्य की कमलनाथ सरकार को किसान विरोधी बताया. राज्य में सत्ता से बाहर होने के बाद भाजपा का यह दूसरा बड़ा आंदोलन था, जिसमें पार्टी के तमाम नेताओं ने हिस्सा लिया.

  • प्रियंका गांधी बोलीं, BJP सरकार किसानों की बात करती है, लेकिन जब वे दिल्ली आते हैं तो...

    प्रियंका गांधी बोलीं, BJP सरकार किसानों की बात करती है, लेकिन जब वे दिल्ली आते हैं तो...

    कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) ने किसानों के आंदोलन (Farmer Protest) के बहाने एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है. प्रियंका गांधी वे ट्वीट कर कहा, 'क्या कारण है कि किसानों को दिल्ली आकर अपनी मांग उठाने से रोक दिया जाता है?

  • मध्यप्रदेश के किसान आज से शुरू करेंगे आंदोलन, दो संगठन करेंगे नेतृत्व

    मध्यप्रदेश के किसान आज से शुरू करेंगे आंदोलन, दो संगठन करेंगे नेतृत्व

    मध्यप्रदेश के किसान बुधवार से आंदोलन करने जा रहे हैं, इसका नेतृत्व दो संगठन भारतीय किसान यूनियन और भारतीय.किसान संघ करेंगे.

  • महाराष्ट्र सरकार को मांगें पूरी करने के लिए किसानों ने दो माह का वक्त दिया, आंदोलन खत्म

    महाराष्ट्र सरकार को मांगें पूरी करने के लिए किसानों ने दो माह का वक्त दिया, आंदोलन खत्म

    महाराष्ट्र में जमीन के हक के साथ ही दूसरी मांगों को पूरा करने के लिए लॉन्ग मार्च कर रहे किसानों ने आंदोलन खत्म कर दिया है. यानी अब मुंबई के लिए लॉन्ग मार्च नहीं होगा. सरकार से बातचीत के बाद आंदोलन खत्म करने की घोषणा हुई. मांगें पूरी करने के लिए किसानों ने सरकार को दो महीने का वक्त दिया है.

  • चौधरी चरण सिंह की जयंती और किसान दिवस के मौके पर पढ़ें उनकी पूरी कहानी, सिर्फ दो मिनट में

    चौधरी चरण सिंह की जयंती और किसान दिवस के मौके पर पढ़ें उनकी पूरी कहानी, सिर्फ दो मिनट में

    Chaudhary Charan Singh Birth Anniversary: चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर,1902 को गाजियाबाद जिले के नूरपुर गांव में एक जाट परिवार में हुआ था. उन्होंने स्वाधीनता आंदोलन के समय राजनीति में प्रवेश किया.

  • जब-जब जिस पार्टी ने किया किसानों की कर्ज माफी का किया वादा, उसने मारी चुनाव में बाजी!

    जब-जब जिस पार्टी ने किया किसानों की कर्ज माफी का किया वादा, उसने मारी चुनाव में बाजी!

    कांग्रेस ने इन चुनावों के दौरान वादा किया कि उनकी सरकार बनने के बाद 10 दिनों के भीतर किसानों का कर्ज माफ कर दिया जाएगा. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने खुद कई रैलियों को संबोधित करते हुए यह वादा किया था और घोषणा पत्र में भी इसका जिक्र किया गया. इतना ही नहीं कांग्रेस ने किसानों के मुद्दों को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना भी साधा. इसके बाद कांग्रेस ने पांच राज्यों में से राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जीत भी हासिल की.

  • देश के अन्नदाता दिल्ली आए, हम रोशनी का इंतजाम भी न कर पाए

    देश के अन्नदाता दिल्ली आए, हम रोशनी का इंतजाम भी न कर पाए

    देश भर के कोने-कोने से जब हजारों किसान दिल्ली के दिल से अपनी व्यथा-कथा कहने आए तो क्या देश की राजधानी किसानों के लिए मामूली रोशनी का इंतजाम नहीं कर पाई. रामलीला मैदान के तकरीबन आधे हिस्से में लगा किसानों का शामियाना रोशनी से उतनी ही दूर था जितनी दूरी अक्सर शहर और गांवों में रहती है. 

  • आंदोलनकारी किसानों ने कहा- राहुल गांधी ने वादे किए, समय आने पर हिसाब लेंगे

    आंदोलनकारी किसानों ने कहा- राहुल गांधी ने वादे किए, समय आने पर हिसाब लेंगे

    दिल्ली में किसानों के आंदोलन में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई विपक्षी दलों के नेता पहुंचे. इन नेताओं ने किसानों से उनकी समस्याएं सुलझाने के वादे किए. किसानों का कहना है कि सारी सरकारें एक जैसी होती हैं. कांग्रेस ने अपने शासन काल में कुछ नहीं किया. अब वादे किए हैं तो समय आने पर हिसाब लिया जाएगा.

  • किसानों की रैली में विपक्षी एकता का हुआ प्रदर्शन, नेताओं ने मोदी सरकार पर जमकर निकाली भड़ास

    किसानों की रैली में विपक्षी एकता का हुआ प्रदर्शन, नेताओं ने मोदी सरकार पर जमकर निकाली भड़ास

    दिल्ली में किसानों की रैली में विपक्षी एकता का प्रदर्शन हुआ. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल सहित कई नेता किसानों को समर्थन देने पहुंचे.

  • आखिर क्यों दिल्ली की सड़कों पर उतरा देश का अन्नदाता, हजारों किसानों का आज संसद मार्च, 10 बड़ी बातें

    आखिर क्यों दिल्ली की सड़कों पर उतरा देश का अन्नदाता, हजारों किसानों का आज संसद मार्च, 10 बड़ी बातें

    किसानों को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए एक बार फिर से देशभर के किसान देश की राजधानी दिल्ली की सड़कों पर जमा हुए हैं. किसानों की कर्जमाफी और फसलों की लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य दिए जाने समेत कई मांगों को लेकर विभिन्न राज्यों के किसान (Kisan Mukti March) दिल्ली के रामलीला मैदान पहुंच गए हैं. दो दिवसीय किसान मुक्ति मार्च का आज यानी शुक्रवार को दूसरा और आखिरी दिन है और किसान आज अपनी मांगों को लेकर संसद मार्च करेंगे. किसानों ने सरकार और प्रशासन को चेताया है कि अगर उन्हें संसद की ओर जाने से रोका गया तो फिर वे न्यूड प्रदर्शन करेंगे. किसान (Kisan Mukti March) इस बार सिर्फ दो मांगों को लेकर यह आंदोलन कर रहे हैं. उनकी पहली मांग है कि उन्हें कर्ज से पूरी तरह मुक्ति दी जाए और दूसरी अपनी दूसरी मांग में फसलों की लागत का डेढ़ गुना मुआवजा चाहते हैं. ऐतिहासिक रामलीला मैदान पर लाल टोपी पहने और लाल झंडा लिए किसानों ने 'अयोध्या नहीं, कर्ज माफी चाहिए' जैसे नारे लगाते दिखे.

  • किसान मुक्ति मार्च में महिलाएं भी शामिल, कर्ज माफी की मांग बुलंद की

    किसान मुक्ति मार्च में महिलाएं भी शामिल, कर्ज माफी की मांग बुलंद की

    बढ़ते बैंक कर्ज, फसल की बर्बादी, कर्ज चुकाने के तरीकों का अभाव और आश्रित बड़े परिवारों जैसे कुछ साझे मुद्दों को लेकर गुरुवार को महिला किसान सड़कों पर उतरीं. सत्ता के केंद्र तक अपनी आवाज पहुंचाने की उम्मीद लेकर देश के कोने-कोने से आए हजारों किसानों ने अपनी मांगें मनवाने के लिए दो दिवसीय विरोध प्रदर्शन शुरू किया.

  • दिल्ली में किसानों के आंदोलन को सभी वर्गों के लोगों का समर्थन मिला

    दिल्ली में किसानों के आंदोलन को सभी वर्गों के लोगों का समर्थन मिला

    किसानों को कर्ज मुक्त बनाने और फसल की लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य दिए जाने की मांग को लेकर दो दिवसीय आंदोलन के पहले दिन गुरुवार को किसानों के साथ डाक्टर, वकील, पूर्व सैनिक, पेशेवर और छात्रों सहित समाज के तमाम वर्गों के लोगों के समूह रामलीला मैदान में एकत्र हो गए. देश के विभिन्न भागों से दिल्ली के प्रवेश मार्गों पर एकत्र होकर आंदोलनकारियों का रामलीला मैदान तक पैदल और वाहनों से पहुंचने का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा.

  • बड़े मुद्दों के पीछे-पीछे अपनी तक़लीफों को ढोता हुआ दिल्ली आ गया है किसान...

    बड़े मुद्दों के पीछे-पीछे अपनी तक़लीफों को ढोता हुआ दिल्ली आ गया है किसान...

    देश भर में घूम-घूमकर किसानों को संगठित करने और उन्हें मार्च के लिए तैयार करने में किसान नेताओं का बड़ा रोल होता है. किसानों की नेतागीरी करना ही कौन चाहेगा. मुद्दों की लड़ाई इतनी लंबी हो जाती है कि नेता की ज़िंदगी गुज़र जाती है. किसानों के मुद्दे बदलते भी नहीं. अमूमन एक ही मुद्दे के लिए बार-बार सरकार के सामने खड़ा होना पड़ता है. कुछ समय बाद मीडिया को हर किसान नेता घिसा-पिटा लगने लगता है. उन्हें तवज्जो देना बंद कर देता है. हर चुनाव के साथ किसान नेता पुराना हो जाता है और दो क़दम पीछे की ओर धकेल दिया जाता है. सरकारों ने बड़ी चालाकी से ऐसे कितने ही किसान नेता ख़त्म कर दिए. कमाल यह है कि इसके बाद भी नए किसान नेता खड़े हो गए हैं. 

  • रामलीला मैदान में जुटे देश भर के हजारों किसान, कहा - 'अयोध्या नहीं, कर्ज माफी चाहिए', संसद कूच आज

    रामलीला मैदान में जुटे देश भर के हजारों किसान, कहा - 'अयोध्या नहीं, कर्ज माफी चाहिए', संसद कूच आज

    अपनी मांगों को लेकर विभिन्न राज्यों के किसान (Kisan Mukti March) दिल्ली के रामलीला मैदान पहुंच गए हैं. वह एक बार फिर केंद्र सरकार की घेराबंदी करेंगे. किसान (Kisan Mukti March) इस बार सिर्फ दो मांगों को लेकर यह आंदोलन कर रहे हैं. उनकी पहली मांग है कि उन्हें कर्ज से पूरी तरह मुक्ति दी जाए और दूसरी अपनी दूसरी मांग में फसलों की लागत का डेढ़ गुना मुआवजा चाहते हैं.

  • दिल्ली में जुटे हजारों किसान, आज 26 किलोमीटर पदयात्रा; कल संसद मार्च

    दिल्ली में जुटे हजारों किसान, आज 26 किलोमीटर पदयात्रा; कल संसद मार्च

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक बार फिर हजारों किसान आंदोलन करने जा रहे हैं. यह आंदोलन दो दिन 29 और 30 नवंबर को होगा. सिर्फ दो मांगों को लेकर किए जा रहे इस आंदोलन में देश भर के किसान शामिल हो रहे हैं. किसानों की मांग है कि उन्हें कर्ज से पूरी तरह मुक्ति दी जाए और फसलों की लागत का डेढ़ गुना मुआवजा दिया जाए.

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