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जस्टिस दीपक मिश्रा


'जस्टिस दीपक मिश्रा' - 162 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • NDTV से बोले जस्टिस कुरियन, 'स्‍वतंत्र रूप से फैसले नहीं ले रहे थे पूर्व चीफ जस्टिस'

    NDTV से बोले जस्टिस कुरियन, 'स्‍वतंत्र रूप से फैसले नहीं ले रहे थे पूर्व चीफ जस्टिस'

    हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए और जनवरी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले 4 जजों में शामिल जस्टिस कुरियन जोसेफ़ ने NDTV से कहा कि पूर्व चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा स्वतंत्र तौर पर फ़ैसले नहीं ले रहे थे बल्कि वो किसी बाहरी प्रभाव में फ़ैसले ले रहे थे.

  • जब CJI रंजन गोगोई ने कहा- पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा क्रिकेट बॉल से टेनिस खेलते हैं, जानें पूरा मामला

    जब CJI रंजन गोगोई ने कहा- पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा क्रिकेट बॉल से टेनिस खेलते हैं, जानें पूरा मामला

    मौजूदा चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया रंजन गोगोई ने कहा कि पिछले 6 साल में जस्टिस मिश्रा के साथ उनकी दोस्ती रही और कुछ मामलों में मतभेद भी रहे. तो वहीं जस्टिस मिश्रा ने कहा कि मतभेद तब मनभेद में बदलते हैं जब झगड़ा शोहरत का हो.

  • सीजेआई दीपक मिश्रा हालात के शिकार बने : विकास सिंह

    सीजेआई दीपक मिश्रा हालात के शिकार बने : विकास सिंह

    चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के विदाई समारोह में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के चेयरमैन विकास सिंह ने कहा CJI मिश्रा हालात का शिकार बने, ये दुर्भाग्यपूर्ण है. उनके ऊपर भी आरोप लगाए गए.

  • पत्रकारों के सवालों के जवाब में सवाल ही दाग दिए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने

    पत्रकारों के सवालों के जवाब में सवाल ही दाग दिए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने

    सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा अपने अंतिम कार्यदिवस पर प्रेस लाउंज में पत्रकारों के साथ चाय पीने पहुंचे. प्रेस लाउंज में आते ही उन्होंने कहा कि पंखे बंद किए जाएं क्योंकि वे आवाज करते हैं. उन्हें आवाज अच्छी नहीं लगती. जब भी पत्रकार सवाल पूछने लगते तो वे कहते, “मैं यहां आपका गेस्ट हूं. मुझसे सवाल मत पूछो.”

  • जस्टिस गोगोई ने की CJI दीपक मिश्रा की तारीफ, बोले - नागरिक स्वतंत्रता के मामले में उनका बहुत अधिक योगदान है

    जस्टिस गोगोई ने की CJI दीपक मिश्रा की तारीफ, बोले - नागरिक स्वतंत्रता के मामले में उनका बहुत अधिक योगदान है

    उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम अपने सांविधानिक आदर्शो पर सही मायने में कायम करने में विफल रहे, तो हम एक दूसरे को मारते रहेंगे और नफरत करते रहेंगे.’’

  • फेयरवेल भाषण में बोले CJI दीपक मिश्रा, 'जस्टिस विद इक्विटी' तभी सार्थक होगा जब हर व्यक्ति को न्याय मिलेगा

    फेयरवेल भाषण में बोले CJI दीपक मिश्रा, 'जस्टिस विद इक्विटी' तभी सार्थक होगा जब हर व्यक्ति को न्याय मिलेगा

    चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा (Justice Dipak Misra) मंगलवार को रिटायर हो रहे हैं. अपने फेयरवेल पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि मैं लोगों को इतिहास के तौर पर जज नहीं करता. उन्होंने कहा कि मैं यह भी नहीं कह सकता कि अपनी जुबान रोको, ताकि मैं बोल सकूं. मैं आपकी बात सुनूंगा और अपने तरीके से अपनी बात रखूंगा. मैं लोगों को इतिहास से नहीं उनकी गतिविधियों और सोच से जज करता हूं. उन्होंने कहा कि समता के साथ न्याय यानी 'जस्टिस विद इक्विटी' तब सार्थक होगा जब देश के सुदूर इलाके के हर व्यक्ति को न्याय मिलेगा.

  • हिंसक भीड़ के सरकारी/निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में SC आज सुना सकता है अहम फैसला

    हिंसक भीड़ के सरकारी/निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में SC आज सुना सकता है अहम फैसला

    इस साल सावन में कुछ कांवड़ियों ने ऐसा उत्पात और तांडव मचाया कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना गंभीर बात है.

  • Sabarimala Temple Verdict: सबरीमाला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जानें मंदिर के प्रमुख पुजारी ने क्या कहा 

    Sabarimala Temple Verdict: सबरीमाला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जानें मंदिर के प्रमुख पुजारी ने क्या कहा 

    केरल में सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं की रोक पर से शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने बैन हटा दिया. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में केरल के सबरीमाला स्थित अय्यप्पा स्वामी मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दे दी. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने 4:1 के बहुमत के फैसले में कहा कि केरल के सबरीमाला मंदिर में रजस्वला आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लैंगिक भेदभाव है और यह परिपाटी हिन्दू महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करती है. मगर इस फैसले पर सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी ने निराशा जताई है. 

  • Bhima-Koregaon Case : सुप्रीम कोर्ट ने कहा - मामले की SIT जांच नहीं होगी, नज़रबंदी चार हफ्ते तक बनी रहेगी

    Bhima-Koregaon Case : सुप्रीम कोर्ट ने कहा - मामले की SIT जांच नहीं होगी, नज़रबंदी चार हफ्ते तक बनी रहेगी

    भीमा- कोरेगांव हिंसा के सिलसिले में नक्सल से जुड़े होने के आरोप में पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने फैसला दिया कि हैदराबाद में वामपंथी कार्यकर्ता और कवि वरवर राव, मुंबई में कार्यकर्ता वरनन गोन्जाल्विस और अरुण फरेरा, छत्तीसगढ़ में ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज और दिल्ली में रहने वाले गौतम नवलखा को जमानत नहीं दी जाएगी   और अगले चार हफ्ते तक उन्हें घर में नजर बंद रखा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि इस  मामले की SIT से जांच नहीं कराई जाएगी. बता दें कि गत 29 अगस्त को इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दखल देते हुए उन्हें उनके घरों में ही हाउस अरेस्ट रखने के आदेश जारी किए थे. तभी से वे अपने घरों में नजरबंद हैं. याचिका रोमिला थापर, देवकी जैन, प्रभात पटनायक, सतीश देशपांडे और माया दारूवाला की ओर से दाखिल की गई है. इसमें सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में SIT जांच और पांचों को जमानत की मांग की गई है. 20 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था और महाराष्ट्र पुलिस की केस डायरी भी ले ली थी.

  • Sabarimala Temple Case: अब सभी महिलाओं के लिए खुला सबरीमाला मंदिर का दरवाजा, सुप्रीम कोर्ट ने प्रवेश पर से बैन हटाया

    Sabarimala Temple Case:  अब सभी महिलाओं के लिए खुला सबरीमाला मंदिर का दरवाजा, सुप्रीम कोर्ट ने प्रवेश पर से बैन हटाया

    केरल के सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple Case) में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश के मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ आज यानी शुक्रवार को फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत से अपने फैसले में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर लगे बैन को हटा दिया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब सबरीमाला मंदिर के दरवाजे सभी महिलाओं के लिए खोल दिये गये.  फिलहाल 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं थी. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट को केरल के सबरीमाला मंदिर में 10-50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर रोक को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने आठ दिनों तक सुनवाई करने के उपरांत 1 अगस्त को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन और अन्य ने इस प्रथा को चुनौती दी है. उन्होंने यह कहते हुए कि यह प्रथा लैंगिक आधार पर भेदभाव करती है, इसे खत्म करने की मांग की है. याचिकाकर्ताओं का यह भी कहना है कि यह संवैधानिक समानता के अधिकार में भेदभाव है. एसोसिएशन ने कहा है कि मंदिर में प्रवेश के लिए 41 दिन से ब्रहचर्य की शर्त नहीं लगाई जा सकती क्योंकि महिलाओं के लिए यह असंभव है.

  • क्या सबरीमाला मंदिर में सभी महिलाओं को मिलेगी एंट्री? सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ का फैसला आज, 10 बातें

    क्या सबरीमाला मंदिर में सभी महिलाओं को मिलेगी एंट्री? सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ का फैसला आज, 10 बातें

    केरल के सबरीमला मंदिर (Sabarimala Temple Case) में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश के मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ आज यानी शुक्रवार को फैसला सुनाएगी. फिलहाल 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट को केरल के सबरीमाला मंदिर में 10-50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर रोक को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाना है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने आठ दिनों तक सुनवाई करने के उपरांत 1 अगस्त को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

  • सुप्रीम कोर्ट के ये हैं 5 जज, जिन्होंने समलैंगिकता के बाद अब व्यभिचार को किया अपराध से बाहर

    सुप्रीम कोर्ट के ये हैं 5 जज, जिन्होंने समलैंगिकता के बाद अब व्यभिचार को किया अपराध से बाहर

    158 साल पुराने कानून IPC 497 (व्यभिचार) की वैधता  (Adultery under Section 497) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपना फैसला सुना दिया. सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने व्यभिचार को आपराधिक कृत्य बताने वाले दंडात्मक प्रावधान को सर्वसम्मति से निरस्त किया. सुप्रीम कोर्ट ने 157 साल पुराने व्यभिचार को रद्द कर दिया और कहा कि किसी पुरुष द्वारा विवाहित महिला से यौन संबंध बनाना अपराध नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि व्यभिचार कानून असंवैधानिक है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि व्यभिचार कानून मनमाना और भेदभावपूर्ण है. यह लैंगिक समानता के खिलाफ है. मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा के संविधान पीठ ने यह फैसला सुनाया है. बता दें कि इस पीठ ने ही धारा 377 पर अपना अहम फैसला सुनाया था. इससे पहले इसी बेंच ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से अलग किया था. तो चलिए जानते हैं उन पांचों जजों के बारे में...

  • Supreme Court verdict on Adultery : चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा- महिला का मास्टर नहीं होता है पति , फैसले की 10 बातें

    Supreme Court verdict on Adultery : चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा- महिला का मास्टर नहीं होता है पति , फैसले की 10 बातें

    व्यभिचार कानून की वैधता (Supreme Court verdict on Adultery under Section 497) पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जो भी कानून महिला को उसकी गरिमा से विपरीत या भेदभाव करता है वो संविधान के कोप को आमंत्रित करता है.  ऐसे प्रावधान असंवैंधानिक है. सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ ने 9 अगस्त को व्यभिचार की धारा IPC 497 पर फैसला सुरक्षित रखा था. पीठ के सामने मसला उठा था कि आइपीसी की धारा 497  ध अंसवैधानिक है या नहीं, क्योंकि इसमें सिर्फ पुरुषों को आरोपी बनाया जाता है, महिलाओं को नहीं. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा- महिला का मास्टर नहीं होता है पति. जानिए दस बातें

  • जानें कौन हैं सुप्रीम कोर्ट के वे 5 जज, जिन्होंने आधार की संवैधानिकता पर दिया बड़ा फैसला

    जानें कौन हैं सुप्रीम कोर्ट के वे 5 जज, जिन्होंने आधार की संवैधानिकता पर दिया बड़ा फैसला

    आधार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपने फैसले में केन्द्र की महत्वाकांक्षी योजना आधार को संवैधानिक रूप से वैध करार दिया. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा कि आधार का लक्ष्य कल्याणकारी योजनाओं को समाज के वंचित तबके तक पहुंचाना है और वह ना सिर्फ व्यक्तिगत बल्कि समुदाय के दृष्टिकोण से भी लोगों के सम्मान का ख्याल रखती है. शीर्ष अदालत ने कहा कि आधार जनहित में बड़ा काम कर रहा है और आधार का मतलब है अनोखा और सर्वश्रेष्ठ होने के मुकाबले अनोखा होना बेहतर है. संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा कि आधार को अब बैंक खाते से लिंक करने की जरूरत नहीं होगा. साथ ही कोर्ट ने कहा कि स्कूलों में भी अब आधार की अनिवार्यता नहीं होगी. 

  • आरक्षण और अयोध्‍या जैसे मामलों को छोड़कर अब राष्ट्रीय महत्व के मामलों की लाइव स्ट्रीमिंग को सुप्रीम कोर्ट ने दी इजाजत

    आरक्षण और अयोध्‍या जैसे मामलों को छोड़कर अब राष्ट्रीय महत्व के मामलों की लाइव स्ट्रीमिंग को सुप्रीम कोर्ट ने दी इजाजत

    सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की बेंच ने बुधवार को फैसला सुनाया है. पीठ में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ शामिल हैं.

  • अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग : सुप्रीम कोर्ट कल सुनाएगा फैसला

    अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग : सुप्रीम कोर्ट कल सुनाएगा फैसला

    राष्ट्रीय महत्व के मामलों में अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग पर सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की बेंच बुधवार को फैसला सुनाएगी. पीठ में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ शामिल हैं. 24 अगस्त को राष्ट्रीय महत्व के मामलों में अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था.

  • दागी नेताओं को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, कोर्ट ने कहा- बिना सजा के चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता, फैसले की 10 बातें

    दागी नेताओं को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, कोर्ट ने कहा- बिना सजा के चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता, फैसले की 10 बातें

    राजनीति में अपराधीकरण को लेकर को लेकर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों का संविधान पीठ ने कहा कि करप्शन एक नाउन है. चीफ जस्टिस ने कहा कि करप्शन राष्ट्रीय आर्थिक आतंक बन गया है. भारतीय लोकतंत्र में संविधान के भारी मेंडेट के बावजूद राजनीति में अपराधीकरण का ट्रेंड बढ़ता जा रहा है. कोर्ट ने कहा कि कानून का पालन करना सबकी जवाबदेही है. कोर्ट ने कहा कि वक्त आ गया है कि संसद ये कानून लाए ताकि अपराधी राजनीति से दूर रहें. पब्लिक लाइफ में आने वाले लोग अपराझ राजनीति से ऊपर हों. राष्ट्र तत्परता से संसद द्वारा कानून का इंतजार कर रहा है. कोर्ट ने इस फैसले से दागी नेताओं को राहत मिली है. कोई ने कहा है कि सिर्फ़ आरोप तय होने से किसी को अयोग्य करार नहीं दिया जा सकता है और बिना सज़ा के चुनाव लड़ने पर रोक नहीं लगाई जा सकती है.

  • जस्टिस रंजन गोगोई आज लेंगे देश के 46वें CJI पद की शपथ, जानिये उनके बारे में सबकुछ...

    जस्टिस रंजन गोगोई आज लेंगे देश के 46वें CJI पद की शपथ, जानिये उनके बारे में सबकुछ...

    सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्‍ठ जज जस्टिस रंजन गोगोई बुधवार को देश के अगले मुख्‍य न्‍यायाधीश का पदभार संभालेंगे. उन्हें राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शपथ दिलाएंगे. इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ के साथ केसों की सुनवाई करेंगे. जस्टिस गोगोई इस पद पर पहुंचने वाले पूर्वोत्‍तर भारत के पहले मुख्‍य न्‍यायधीश होंगे. जस्टिस गोगोई देश के 46वें प्रधान न्‍यायाधीश होंगे और 17 नंवबर, 2019 तक उनका कार्यकाल होगा. जस्जिट गोगोई 10 बजकर 45 मिनट पर देश के 46वें मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेंगे. बता दें कि न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने न्यायपालिका के शीर्ष पद तक पहुंचने के लिए एक लंबा सफर तय किया है. 18 नवंबर, 1954 को जन्मे न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने डिब्रूगढ़ के डॉन बॉस्को स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा अर्जित की और दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इतिहास की पढ़ाई की. न्यायमूर्ति रंजन गोगोई (63) जनवरी में सुप्रीम कोर्ट के तीन अन्य वरिष्ठतम न्यायाधीशों के साथ संवाददाता सम्मेलन कर तथा उसके चार महीने बाद अपने एक बयान से सुर्खियों में आए थे.

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