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धारा 377


'धारा 377' - 59 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का पाकिस्तान पर हमला- 'जैसा पड़ोसी हमारे बगल में बैठा है, भगवान करे कि...'

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का पाकिस्तान पर हमला- 'जैसा पड़ोसी हमारे बगल में बैठा है, भगवान करे कि...'

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने पाकिस्तान पर करारा हमला बोला है. राजनाथ सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा कि सबसे बड़ी आशंका तो हमें हमारे पड़ोसी के बारे में रहती है. समस्या यह है कि आप दोस्त बदल सकते हैं, मगर पड़ोसी का चुनाव आपके हाथ में नहीं होता है और जैसा पड़ोसी हमारे बगल में बैठा है, परमात्मा करे कि ऐसे पड़ोसी किसी को न मिलें...'

  • SC में धारा 377 के खिलाफ केस जीतने वाली वकील खुद भी हैं लेस्बियन कपल, दुनिया के सामने कुबूला अपना प्‍यार

    SC में धारा 377 के खिलाफ केस जीतने वाली वकील खुद भी हैं लेस्बियन कपल, दुनिया के सामने कुबूला अपना प्‍यार

    मेनका और अरुंधति दोनों ही सफल वकील हैं. मेनका ने हावर्ड स्‍कूल से एलएलएम और ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डीफिल किया है.

  • आर्मी चीफ जनरल रावत बोले- सेना में गे-सेक्स की इजाजत नहीं

    आर्मी चीफ जनरल रावत बोले- सेना में गे-सेक्स की इजाजत नहीं

    सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत (General Bipin Rawat) ने कहा है कि वह सेना में गे-सेक्स (Gay Sex) की इजाजत नहीं देंगे. उन्होंने कहा कि समलैंगिक संबंधों पर सेना के अपने कानून हैं. आर्मी चीफ बिपिन रावत ने यह बयान सुप्रीम कोर्ट द्वारा वयस्कों के बीच समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के कुछ महीने बाद दिया है.

  • एआईएमपीएलबी की महिला शाखा ने तीन तलाक विधेयक को बताया महिला विरोधी

    एआईएमपीएलबी की महिला शाखा ने तीन तलाक विधेयक को बताया महिला विरोधी

    उन्होंने कहा कि यह विडम्बना है कि हमारे देश में पुरुषों और महिलाओं को शादी से पहले, विवाहत्तेर और यहां तक कि कई संबंध रखने की आजादी है. उन्होंने कहा कि धारा 377 को अपराध की श्रेणी से बाहर किया जाना निजी और दीवानी मामलों में आजादी की एक मिसाल है. उन्होंने सवाल किया कि फिर क्यों एक मुस्लिम पुरूष को तलाक देने पर सजा दी जाए. ज़ोहरा ने कहा कि बोर्ड ने पहले भी कहा है और फिर से कहता है कि एक साथ तीन तलाक देना तलाक की मानक प्रक्रिया नहीं है और जो इस प्रथा का इस्तेमाल करेंगे उनका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा.

  • Flashback 2018: सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में सुनाये ये 5 अहम फैसले, जो बन गए नजीर

    Flashback 2018: सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में सुनाये ये 5 अहम फैसले, जो बन गए नजीर

    सुप्रीम कोर्ट के लिहाज से यह साल ऐतिहासिक रहा. कोर्ट के कई फैसले समानता और सशक्तिकरण की दिशा में नजीर बने. एक तरफ सुप्रीम कोर्ट ने 158 साल पुराने व्यभिचार-रोधी कानून को रद्द कर दिया है और कहा है कि व्यभिचार अपराध नहीं है. तो दूसरी तरफ धारा 377 को रद्द करते हुए कहा कि अब समलैंगिकता अपराध नहीं है.

  • यौन रूझान को 'स्वतंत्र अभिव्यक्ति' बताने के तर्क से असहमत : अरुण जेटली

    यौन रूझान को 'स्वतंत्र अभिव्यक्ति' बताने के तर्क से असहमत : अरुण जेटली

    वित्त मंत्री अरूण जेटली ने शनिवार को कहा कि सहमति से बने समलैंगिक संबंध को अपराध के दायरे से बाहर करने के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के उस हिस्से से वह सहमत नहीं हैं जिसमें कहा गया है कि यौन रूझान स्वतंत्र अभिव्यक्ति का हिस्सा है. जेटली ने कहा कि उन्हें लगता है कि इससे स्कूल, छात्रावास, जेल या सेना के मोर्चे पर समलैंगिक या बाईसेक्सुअल गतिविधि के किसी भी स्वरूप को रोके जाने पर सवाल उठता है.

  • सुप्रीम कोर्ट के ये हैं 5 जज, जिन्होंने समलैंगिकता के बाद अब व्यभिचार को किया अपराध से बाहर

    सुप्रीम कोर्ट के ये हैं 5 जज, जिन्होंने समलैंगिकता के बाद अब व्यभिचार को किया अपराध से बाहर

    158 साल पुराने कानून IPC 497 (व्यभिचार) की वैधता  (Adultery under Section 497) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपना फैसला सुना दिया. सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने व्यभिचार को आपराधिक कृत्य बताने वाले दंडात्मक प्रावधान को सर्वसम्मति से निरस्त किया. सुप्रीम कोर्ट ने 157 साल पुराने व्यभिचार को रद्द कर दिया और कहा कि किसी पुरुष द्वारा विवाहित महिला से यौन संबंध बनाना अपराध नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि व्यभिचार कानून असंवैधानिक है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि व्यभिचार कानून मनमाना और भेदभावपूर्ण है. यह लैंगिक समानता के खिलाफ है. मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा के संविधान पीठ ने यह फैसला सुनाया है. बता दें कि इस पीठ ने ही धारा 377 पर अपना अहम फैसला सुनाया था. इससे पहले इसी बेंच ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से अलग किया था. तो चलिए जानते हैं उन पांचों जजों के बारे में...

  • मोहन भागवत बोले- राम मंदिर जल्द बनाने से हिंदू-मुस्लिम के बीच तनाव होगा खत्म, मॉब लिंचिंग समेत इन 10 मुद्दों पर रखी RSS की राय

    मोहन भागवत बोले- राम मंदिर जल्द बनाने से हिंदू-मुस्लिम के बीच तनाव होगा खत्म, मॉब लिंचिंग समेत इन 10 मुद्दों पर रखी RSS की राय

    आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अयोध्या में राम मन्दिर का शीघ्र निर्माण होना चाहिए और विश्वास व्यक्त किया कि इससे हिंदुओं एवं मुस्लिमों के बीच तनाव खत्म हो जाएगा. भगवान राम को “इमाम-ए-हिंद” बताते हुए भागवत ने कहा कि वह देश के कुछ लोगों के लिए भगवान नहीं हो सकते लेकिन वह समाज के सभी वर्ग के लोगों के लिए भारतीय मूल्यों के एक आदर्श हैं. उन्होंने कहा, 'एक संघ कार्यकर्ता, संघ प्रमुख और राम जन्मभूमि आंदोलन के एक हिस्से के तौर पर मैं चाहता हूं कि भगवान राम की जन्मभूमि (अयोध्या) में जल्द से जल्द भव्य राम मंदिर बनाया जाए.' संघ के तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन उन्होंने कहा, ‘अब तक यह हो जाना चाहिए था. भव्य राम मंदिर का निर्माण हिंदू-मुस्लिम के बीच तनाव की एक बड़ी वजह को खत्म करने में मदद करेगा और अगर मंदिर शांतिपूर्ण तरीके से बनता है तो मुस्लिमों की तरफ अंगुलियां उठनी बंद हो जाएंगी.' उन्होंने कहा कि यह देश की संस्कृति और 'एकजुटता को मजबूत' करने का मामला है, यह देश के करोड़ों लोगों के विश्वास का मुद्दा है. उन्होंने इस मुद्दे पर बातचीत का भी समर्थन किया लेकिन कहा कि अंतिम फैसला राम मंदिर समिति के पास होगा जो मंदिर के निर्माण के लिए आंदोलन चला रही है.

  • ...जब माथे पर लाल बिंदी और काले रंग का दुपट्टा ओढ़े दिखे क्रिकेटर गौतम गंभीर

    ...जब माथे पर लाल बिंदी और काले रंग का दुपट्टा ओढ़े दिखे क्रिकेटर गौतम गंभीर

    क्रिकेटर गौतम गंभीर हाल ही में दिल्‍ली में आयोजित एक कार्यक्रम में जब माथे पर बिंदी लगाए और दुपट्टा ओढ़े हुए नजर आए तो हर कोई उन्‍हें देखकर हैरान रह गया. दरअसल गंभीर किन्‍नरों के प्रति समर्थन जताने के लिए इस कार्यक्रम में पहुंचे थे. उनकी इस पहल की देशभर में सराहना हासिल हुई है. गौरतलब है कि गौतम सामाजिक और चैरिटी कार्यों में बढ़ चढ़कर भागीदारी करते रहे हैं. मैदान पर भले ही वे आक्रामक तेवरों वाले क्रिकेटर के रूप में नजर आते रहे हों, लेकिन राष्‍ट्र से जुड़े मुद्दों को लेकर उनकी राय अथवा उनकी ओर से उठाए गए कदमों में परिपक्‍वता देखने को मिली है.छत्तीसगढ़ में पिछले साल अप्रैल में हुए नक्‍सली हमले में शहीद हुए 25 जवानों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च वहन करने का ऐलान करके उन्‍होंने देश के प्रति अपने कर्तव्‍य भाव का अहसास कराया था. समाज में उपेक्षा और भेदभाव के शिकार किन्‍नर समाज के प्रति समर्थन जताने के लिए जब गौतम पहुंचे तो किन्‍नर समाज ने दुपट्टा ओढ़ाकर और बिंदी लगाकर उनका स्‍वागत किया. 

  • समलैंगिक मामलों में पीड़ित के नाबालिग होने पर कोर्ट से राहत की संभावना नहीं

    समलैंगिक मामलों में पीड़ित के नाबालिग होने पर कोर्ट से राहत की संभावना नहीं

    भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 377 के तहत समलैंगिक यौन संबंध को लेकर दर्ज मामलों की संख्या के लिहाज से उत्तर प्रदेश सबसे आगे है और उसके बाद केरल का स्थान है. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते इस कानून को आंशिक रूप से निरस्त कर दिया था.

  • Section 377: देश के इस राज्य में धारा 377 के तहत दर्ज समलैंगिंक संबंध मामलों की संख्या सबसे ज्यादा

    Section 377: देश के इस राज्य में धारा 377 के तहत दर्ज समलैंगिंक संबंध मामलों की संख्या सबसे ज्यादा

    धारा 377 के तहत समलैंगिक यौन संबंध को लेकर दर्ज मामलों की संख्या के लिहाज से उत्तर प्रदेश सबसे आगे है. इसके  बाद केरल का स्थान है. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते इस कानून को आंशिक रूप से निरस्त कर दिया था. धारा 377 के तहत 2014 से 2016 के बीच कुल 4,690 मामले दर्ज किए गए. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, 2016 में धारा 377 के तहत समलैंगिक यौन संबंधों के 2,195 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2015 में  1,347 और 2014 में 1,148 मामले दर्ज किए गए. 2016 में सबसे ज्यादा 999 ऐसे मामले उत्तर प्रदेश में सामने आए. इसके बाद केरल (207) का स्थान था.

  • धारा 377 पर फैसला कोर्ट के विवेक पर छोड़ने के लिये सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस चंद्रचूड़़ ने सरकार की आलोचना की

    धारा 377 पर फैसला कोर्ट के विवेक पर छोड़ने के लिये सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस चंद्रचूड़़ ने सरकार की आलोचना की

    भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को चुनौती देने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर फैसला अदालत के विवेक पर छोड़ने के सरकार के रुख पर उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश ने निराशा व्यक्त की और कहा कि नेताओं की तरफ से इस तरह की शक्तियों को न्यायाधीशों पर छोड़ने का काम रोजाना हो रहा है. दो वयस्कों के बीच सहमति से समलैंगिक संबंधों को अपराध के दायरे से बाहर करने वाली उच्चतम न्यायालय की पांच सदस्यीय संविधान पीठ में शामिल न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को कहा कि धारा 377 मामले में फैसला औपनिवेशिक मूल के कानूनों और संवैधानिक मूल्यों का सही प्रतिनिधित्व करने वाले कानूनों के बीच लड़ाई की भावना का सही मायने में प्रतिनिधित्व करता है.

  • समलैंगिकता के फैसले पर अनेक सवाल

    समलैंगिकता के फैसले पर अनेक सवाल

    सुप्रीम कोर्ट के प्रांगण में मीडिया द्वारा फोटोग्राफी निषेध है. इसके बावजूद समलैंगिकता पर फैसले के बाद पूरा परिसर इन्द्रधनुषीय रंग से सराबोर हो गया. दो वयस्‍क लोगों का निजी सम्बन्ध मानते हुए समलैंगिकता को सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक संरक्षण प्रदान किया परन्तु इस फैसले के लिए अपनाई गयी कानूनी प्रक्रिया पर अनेक सवाल खड़े हो गये हैं.

  • Section 377 खत्म होने के बाद इस शख्स ने मनाई ऐसी खुशी, माता-पिता बोले- अब हमारा बेटा अपराधी नहीं

    Section 377 खत्म होने के बाद इस शख्स ने मनाई ऐसी खुशी, माता-पिता बोले- अब हमारा बेटा अपराधी नहीं

    सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता (Homosexuality) को अपराध की श्रेणी से हटा दिया है. इसके अनुसार आपसी सहमति से दो वयस्कों के बीच बनाए गए समलैंगिक संबंधों को अब अपराध नहीं माना जाएगा.

  • आठ देशों में समलैंगिक संबंध बनाने वालों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान

    आठ देशों में समलैंगिक संबंध बनाने वालों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान

    सुप्रीम कोर्ट द्वारा समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के साथ ही भारत उन 125 अन्य देशों के साथ जुड़ गया, जहां समलैंगिकता वैध है. हालांकि दुनियाभर में अब भी 72 ऐसे देश और क्षेत्र हैं जहां समलैंगिक संबंध को अपराध समझा जाता है. इनमें 45 वे देश भी हैं जहां महिलाओं का आपस में यौन संबंध बनाना गैर कानूनी है.

  • NEWS FLASH: बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पहुंचे पीएम मोदी और अमित शाह

    NEWS FLASH: बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पहुंचे पीएम मोदी और अमित शाह

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को पहले विश्व मोबिलिटी शिखर सम्मेलन ‘मूव’ का उद्घाटन करेंगे. सम्मेलन में अन्य बातों के अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन और साझा मोबिलिटी को प्रोत्साहन जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी.

  • धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद समलैंगिक शादी को कानूनी मान्‍यता दिलाने पर नजर

    धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद समलैंगिक शादी को कानूनी मान्‍यता दिलाने पर नजर

    धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को समलैंगिक अपनी आज़ादी के तौर पर देख रहे हैं. उनका कहना है कि उनकी लंबी लड़ाई अपने मुकाम तक पहुंची है. अब उनकी नज़र समलैंगिक शादी को क़ानूनी मान्यता दिलाने पर है.

  • निजता में घुसपैठ सरकार का काम नहीं

    निजता में घुसपैठ सरकार का काम नहीं

    कई बार सर्वोच्च अदालत के कुछ फैसलों को इसलिए नहीं पढ़ा जाना चाहिए कि वो आपके हिसाब से आया है, बल्कि इसलिए भी पढ़ा जाना चाहिए कि फैसले तक पहुंचने से पहले तर्कों की प्रक्रिया क्या है. उसकी भाषा क्या है, भाषा की भावना क्या है.