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प्राइम टाइम


'प्राइम टाइम' - 779 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • रवीश कुमार का ब्लॉग: रंग लाया छात्रों का संघर्ष, SSC ने ढाई साल की देरी के बाद CGL-2017 का रिजल्ट जारी किया

    रवीश कुमार का ब्लॉग: रंग लाया छात्रों का संघर्ष, SSC ने ढाई साल की देरी के बाद CGL-2017 का रिजल्ट जारी किया

    स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (SSC) की CGL 2017 की परीक्षा का परिणाम आ गया. यह रिजल्ट ढाई साल की देरी से आया है. छात्रों ने बहुत संघर्ष किया. परीक्षा पर सवाल उठा और जांच भी हुई. सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद परिणाम का रास्ता साफ़ हुआ तो एसएससी चुप हो गई. परिणाम निकालने में देरी होने लगी तो छात्र बेचैन होने लगे. छात्रों ने आवाज़ उठाई और प्राइम टाइम के ज़रिए आवाज़ और मुखर हुई.

  • अयोध्‍या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की समीक्षा आप कैसे करेंगे?

    अयोध्‍या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की समीक्षा आप कैसे करेंगे?

    सुप्रीम कोर्ट का फैसला कैसा है, इससे पहले कि आप जवाब दें, लोग ख़ुद ही बोल देते हैं कि चलो बवाल ख़त्म हुआ. लेकिन तब भी पहला सवाल तो रह ही जाता है कि फैसला कैसा था. यह वाकई तारीफ की बात है कि जनता ने संयम और परिपक्वता के साथ सामना किया. वो जनता यह भी जानना चाहेगी कि फैसला कैसा है. फैसले की नुक्ताचीनी से वह नहीं घबराने वाली. आम सहमति से आए इस फैसले को जब कानून की क्लास में पढ़ाया जाएगा तब शायद ही छात्रों के बीच आम सहमति बन पाएगी. ऐतिहासिक फैसला है इसलिए इसकी समीक्षा आज ही नहीं, लंबे समय तक होती रहेगी.

  • प्राइम टाइम इंट्रो: व्हाट्सएप कॉल में सेंध, पत्रकारों के फोन हुए हैक

    प्राइम टाइम इंट्रो: व्हाट्सएप कॉल में सेंध, पत्रकारों के फोन हुए हैक

    तो क्या व्हाट्सएप कॉल की जासूसी की जा सकती है? जिस व्हाट्सएप कॉल पर आम आदमी भी भरोसा करता है कि कोई सुन नहीं रहा होगा, उसे भी किसी सॉफ्टवेयर की मदद से हैक कर सुना जा सकता है. यह भरोसा टूटने पर आपको कैसा लगेगा?

  • कश्मीर में विदेशी सांसदों को लाने वाली इंटरनेशनल ब्रोकर कौन है?

    कश्मीर में विदेशी सांसदों को लाने वाली इंटरनेशनल ब्रोकर कौन है?

    कश्मीर के मामले में इंटरनेशनल बिजनेस ब्रोकर कौन है? इस पर न सरकार की तरफ से कुछ आया है और न ही इंटरनेशनल बिजनेस ब्रोकर ने अपनी तरफ से कुछ कहा है. कश्मीर जैसे संवेदनशील मामले में खुद को इंटरनेशनल बिजनेस ब्रोकर बताने वाली मादी शर्मा यानी मधु शर्मा की मदद भारत सरकार को क्यों लेनी पड़ी?

  • आंतरिक मामले में विदेशी सांसदों का दख़ल क्यों?

    आंतरिक मामले में विदेशी सांसदों का दख़ल क्यों?

    भारत का अभिन्न अंग है. भारत का आंतरिक मामला है. तो फिर भारत के अभिन्न और आंतरिक कश्मीर में बाहरी देशों के सांसदों के दौरे को सुविधाएं क्यों उपलब्ध कराई जा रही हैं. यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि जब भारत की लाइन अभिन्न और आतंरिकता की रही है तो इन सांसदों के निजी दौरे की सरकारी व्यवस्था क्यों कराई गई.

  • कश्मीर अंदरूनी मामला तो यूरोपीय सांसद क्यों करेंगे दौरा

    कश्मीर अंदरूनी मामला तो यूरोपीय सांसद क्यों करेंगे दौरा

    जिस कश्मीर का दौरा करने के लिए विदेशी पत्रकारों को अनुमति नहीं दी गई, दिल्ली स्थित राजनयिकों ने कश्मीर जाने की अनुमति मांगी तो सरकार ने मना कर दिया, अमरीका के कांग्रेसमैन क्रिस वॉन होलेन को श्रीनगर जाने का अनुरोध भारत ने ठुकरा दिया. अब ऐसा क्या हुआ कि भारत ने यूरोपीयन संघ के 27 सांसदों को कश्मीर जाने की अनुमति दे दी है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो: गोपाल कांडा और भारतीय राजनीति की बेशर्मी

    प्राइम टाइम इंट्रो: गोपाल कांडा और भारतीय राजनीति की बेशर्मी

    हरियाणा के सिरसा से विधायक गोपाल कांडा की बात क्या सिर्फ इसलिए हो रही है कि कांडा ने बीजेपी को सपोर्ट देने की बात कही है? क्या हम इस सवाल का जवाब ठोस रूप से जानते हैं कि अगर कांग्रेस को ज़रूरत होती तो गोपाल कांडा का सपोर्ट लेने से इंकार कर देती?

  • प्राइम टाइम इंट्रो: महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव परिणाम का विश्लेषण

    प्राइम टाइम इंट्रो: महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव परिणाम का विश्लेषण

    महाराष्ट्र और हरियाणा में बीजेपी की सरकार बन रही है. देवेंद्र फडणवीस और मनोहर लाल खट्टर ही मुख्यमंत्री होंगे. प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दोनों के पिछले कार्यकाल की तारीफ की है और आगे के लिए बधाई दे दी है. इस चुनाव में जनता ने अपनी तरफ से विपक्ष को भी मज़बूत किया है.

  • कलयुग के कथित भगवान पर आयकर विभाग का छापा

    कलयुग के कथित भगवान पर आयकर विभाग का छापा

    कल्कि भगवान बनकर लॉन्‍च हुए तमिलनाडू के एक बाबा के यहां 600 करोड़ की संपत्ति मिली है. लेकिन इससे बड़ी ख़बर यह है कि कल्कि भगवान देश छोड़ कर नहीं जाएंगे और आयकर विभाग का सामना करेंगे क्योंकि देश के कानून का सम्मान करते हैं. सही बात है, जिस देश के लोगों ने इतना पैसा दिया, उस देश के कानून पर विश्वास जता कर कल्कि भगवान ने देश का बड़ा सम्मान किया है. सीखना चाहिए विजय माल्या या नीरव मोदी को.

  • NEET परीक्षा में धांधली की सज़ा छात्र क्यों भुगतें?

    NEET परीक्षा में धांधली की सज़ा छात्र क्यों भुगतें?

    अगर आप छात्र हैं और किसी परीक्षा सिस्टम से गुज़र रहे हैं तो आपको मालूम है कि यहां सिर्फ परीक्षा ही नहीं देनी होती है. दुनिया में शायद ही कोई ऐसा देश हो, और आप किसी भी नॉन रेज़िडेंट इंडियन से पूछ सकते हैं, जहां परीक्षाओं को लेकर धांधली की इतनी ख़बरें आती हैं. मैं करीब दो साल से इस तरह के विषयों पर प्राइम टाइम कर रहा हूं. हर दिन सैकड़ों मैसेज और तस्वीरों से गुज़रता हूं. घंटों इन्हें पढ़ता रहता हूं. मैं चाहता हूं कि आप ये बात ध्यान से सुनें और इस शोध पर नोबेल देने की ज़रूरत नहीं है. इसका निष्कर्ष यह है कि आप इन परीक्षा सिस्टम के ज़रिए भारत के करोड़ों नौजवानों की ज़िंदगी पांच से दस साल तक बर्बाद कर सकते हैं.

  • भारतीय मूल के अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी समेत तीन को नोबेल पुरस्कार

    भारतीय मूल के अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी समेत तीन को नोबेल पुरस्कार

    आज का दिन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बुरी ख़बर लेकर आया है, मगर भारतीय मूल के अर्थशास्त्री के लिए बहुत ही अच्छी ख़बर लाया है. विश्व बैंक ने भारत की जीडीपी का अनुमान डेढ़ प्रतिशत घटा दिया है. 7.5 प्रतिशत से घटा कर 6 प्रतिशत कर दिया है. डेढ़ प्रतिशत की कमी बहुत होती है. दूसरी तरफ जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में एमए करने वाले अभिजीत विनायक बनर्जी को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिला है.

  • दुनिया की 90 फीसदी अर्थव्यवस्थाएं ढलान पर

    दुनिया की 90 फीसदी अर्थव्यवस्थाएं ढलान पर

    अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जियॉरजीवा ने कहा है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर में है. वो बढ़ तो रही है, लेकिन बढ़ने की रफ्तार बेहद धीमी है. बल्कि दो साल पहले दुनिया की अर्थव्यवस्था ऊपर की तरफ जा रही थी, लेकिन अब धीमी होने लगी है.

  • संयुक्त राष्ट्र की 74वीं आम सभा, दुनिया में बढ़ते टकराव पर कितना ध्यान?

    संयुक्त राष्ट्र की 74वीं आम सभा, दुनिया में बढ़ते टकराव पर कितना ध्यान?

    पांच दिनों तक चलने वाले इस भाषण में दुनिया भर के मुल्कों के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के भाषण से किस तरह की चिन्ताएं उभर रही हैं, उन भाषणों में समाधान का संकल्प कितना है या भाषण देने की औपचारिकता कितनी है, ईमानदारी कितनी है, इस लिहाज़ से भाषणों को देखा जाना चाहिए तभी हम समझ पाएंगे कि संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में भाषण का क्या मतलब है.

  • चीन में पत्रकारों को देना होगा चाटुकारिता का टेस्ट

    चीन में पत्रकारों को देना होगा चाटुकारिता का टेस्ट

    पत्रकारिता में चाटुकारिता करने वालों के लिए बुरी ख़बर है. अब तक चाटुकारिता को सबसे आसान बीट माना जाता था, लेकिन हर माल को सस्ता बनाकर बेचने वाले चीन ने चाटुकारिता को महंगा यानी मुश्किल बना दिया है. चीन में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा होने जा रही है, जिसमें राष्ट्रपित शी जिनपिंग के राजनीतिक विचारों और मार्क्सवाद से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे. जो इस परीक्षा में पास होगा उसी को प्रेस कार्ड मिलेगा.

  • सरकार ने दी कॉरपोरेट टैक्‍स में राहत, क्‍या आम आदमी को होगा फायदा?

    सरकार ने दी कॉरपोरेट टैक्‍स में राहत, क्‍या आम आदमी को होगा फायदा?

    अगले शुक्रवार का इंतज़ार कीजिए क्या पता आम लोगों का भी टैक्स से राहत मिल जाए, या क्या पता पुरानी पेंशन व्यवस्था ही बहाल हो जाए. वित्त मंत्री जिस तरह शुक्रवार को अपना नया बजट पेश कर रही हैं, राहतों का एलान कर रही हैं, उसमें कुछ भी उम्मीद की जा सकती है. आखिर कारपोरेट ने कब सोचा होगा कि सरकार उसे एक दिन 1 लाख 45 हज़ार का घाटा उठाकर करों में छूट देगी. इस फैसले को ऐतिहासिक और साहसिक बताया गया है.

  • झारखंड में पेड न्यूज का नया चेहरा

    झारखंड में पेड न्यूज का नया चेहरा

    पेड न्यूज़ का नया रूप आया है. आया है, तो क्या कमाल आया है. क्या आपने या किसी नॉन रेज़िडेंट इंडियन ने यह सुना है कि सरकार अपनी योजनाओं की तारीफ छपवाने के लिए टेंडर निकाले और पत्रकारों से कहे कि वे अर्जी दें कि कैसे तारीफ करेंगे? विदेशों में ऐसा होता है या नहीं, ये तो नान रेज़िडेंट इंडियन ही बता सकते हैं कि क्या वाशिंगटन पोस्ट, गार्डियन, न्यूयार्क टाइम्स अपने पत्रकारों से कहे कि वे सरकार का टेंडर लें, उसकी योजना की जमकर तारीफ करते हुए लेख लिखें और फिर उसे दफ्तर ले आएं ताकि फ्रंट पेज पर छाप सकें? इसलिए कहा कि ऐसा कमाल बहुत कम होता है. युगों-युगों में एक बार होता है जब चाटुकारिता आफिशियल हो जाती है. वैसे भी होती है लेकिन जब विज्ञापन निकले, तारीफ के पैसे मिलें, यह बताया जाए तो चाटुकारिता पारदर्शी हो जाती है.

  • सऊदी अरब के तेल ठिकाने पर हमला, भारत की अर्थव्यवस्था को कितना बड़ा झटका?

    सऊदी अरब के तेल ठिकाने पर हमला, भारत की अर्थव्यवस्था को कितना बड़ा झटका?

    सऊदी अरब के तेल के खदानों पर ड्रोन से हमला हुआ है. शनिवार की सुबह दो धमाके हुए जिसके कारण सऊदी अरब में तेल का उत्पादन घट गया है. दुनिया में हर दिन तेल का जितना उत्पादन होता है उसका पांच प्रतिशत उत्पादन घट गया है. अबक़ैक में दुनिया का सबसे बड़ा तेल संशोधन कारखाना है. ख़ुरैस तेल के खदान पर भी हमला हुआ है.

  • हर जंग जीतने के लिए नहीं, सिर्फ इसलिए लड़ी जाती है, ताकि दुनिया को बताया जा सके, कोई है, जो लड़ रहा है : रवीश कुमार

    हर जंग जीतने के लिए नहीं, सिर्फ इसलिए लड़ी जाती है, ताकि दुनिया को बताया जा सके, कोई है, जो लड़ रहा है : रवीश कुमार

    हिंदी पत्रकारिता के लिए गौरव का दिन है. आज फिलीपीन्स की राजधानी मनीला में एनडीटीवी इंडिया के रवीश कुमार को रेमॉन मैगसेसे सम्मान प्रदान किया गया है. उनको सम्मान देने वालों ने माना है कि रवीश कुमार उन लोगों की आवाज़ बनते हैं जिनकी आवाज़ कोई और नहीं सुनता. पिछले दो दशकों में एनडीटीवी में अलग-अलग भूमिकाओं में और अलग-अलग कार्यक्रमों के ज़रिए रवीश कुमार ने पत्रकारिता के नए मानक बनाए हैं. एक दौर में रवीश की रिपोर्ट देश की सबसे मार्मिक टीवी पत्रकारिता का हिस्सा बनता रहा. बाद में प्राइम टाइम की उनकी बहसें अपने जन सरोकारों के लिए जानी गईं. और जब सत्ता ने उनके कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया तो रवीश ने जैसे प्राइम टाइम को ही नहीं, टीवी पत्रकारिता को ही नई परिभाषा दे डाली. सरकारी नौकरियों और इम्तिहानों के बहुत मामूली समझे जाने वाले मुद्दों को, शिक्षा और विश्वविद्यालयों के उपेक्षित परिसरों को उन्होंने प्राइम टाइम में लिया और लाखों-लाख छात्रों और नौजवानों की नई उम्मीद बन बैठे. जिस दौर में पूरी की पूरी टीवी पत्रकारिता तमाशे में बदल गई है- राष्ट्रवादी उन्माद के सामूहिक कोरस का नाम हो गई है, उस दौर में रवीश की शांत-संयत आवाज़ हिंदी पत्रकारिता को उनकी गरिमा लौटाती रही है. मनीला में रेमॉन मैगसेसे सम्मान से पहले अपने व्याख्यान में उन्होंने कहा कि अब लोकतंत्र को नागरिक पत्रकार की बचाएंगे और वे ख़ुद ऐसे ही नागरिक पत्रकार की भूमिका में हैं.