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प्राइम टाइम


'प्राइम टाइम' - 755 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • भारत की अर्थव्यवस्था में मंदी जैसे हालात क्यों?

    भारत की अर्थव्यवस्था में मंदी जैसे हालात क्यों?

    न्यूज़ चैनल देखने से लगता है कि सारा देश कश्मीर, आबादी और आरक्षण को लेकर व्यस्त है. हो सकता है कि सारा देश व्यस्त हो भी, लेकिन डेढ़ लाख बैंकर इन विषयों को लेकर व्यस्त नहीं हैं. बल्कि इस शनिवार और रविवार तो उन्हें टीवी देखने का भी मौका नहीं मिला होगा कि कश्मीर पर नया बयान क्या आया है. उन्हें यह भी पता नहीं होगा कि चर्चा में दूसरे एंगल से प्रवेश पाने के लिए शिवराज सिंह चौहान और साध्वी प्रज्ञा ने जवाहर लाल नेहरू को अपराधी कहा है. नेहरू को कुछ भी बोलकर आप चैनलों के स्क्रीन पर टिकर से लेकर टिक टैक तक जगह पा सकते हैं. चूंकि नेता लोग नेहरू को अपराधी बताने में व्यस्त हैं, इसलिए डेढ़ लाख बैंकरों से कहा गया होगा कि कम से कम आप लोग अर्थव्यवस्था को लेकर कुछ व्यस्त रहें और आइडिया दें कि भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन का कैसे बनाया जा सकता है.

  • क्या इंटरनेट के बिना विरोध प्रदर्शन मुमकिन नहीं?

    क्या इंटरनेट के बिना विरोध प्रदर्शन मुमकिन नहीं?

    दुनिया भर में सरकारी पाबंदियों का दायरा बदलता भी जा रहा है और उनका घेरा कसता भी जा रहा है. धरना-प्रदर्शन या आंदोलन करना मुश्किल होता जा रहा है. आवाज़ दबाना आसान हो गया है. भले ही असहमति के स्वर की संख्या लाखों में हो मगर अब यह संभव है और हो भी रहा है कि पहले की तुलना में इन्हें आसानी से दबा दिया जाता है, खासकर तब जब कहा जाता है कि सूचना के बहुत सारे माध्यम हो गए हैं.

  • बाढ़ की वजह इंसानों की बनाई नीतियां?

    बाढ़ की वजह इंसानों की बनाई नीतियां?

    ज़मीन पर बाढ़ के कारण इंसानों की बनाई नीतियां हैं जिसे मैन मेड क्राइसिस कहते हैं. प्राकृतिक संसाधनों का बेख़ौफ़ इस्तमाल जलवायु परिवर्तन के कारणों को बढ़ाता है. इस बाढ़ को दो तरह से समझिए. दो महीने की बारिश अगर दो हफ्ते में हो जाए तो क्या होगा. क्यों ऐसा हो रहा है. आप मानें या न मानें जो लोग ऊंचे बांधों, कार्बन उत्सर्जन, और नदियों के किनारे निर्माण कार्यों को लेकर चेतावनी देते रहे हैं, जिन्हें हम एक्सपर्ट कहते हैं, बुलाते हैं और सुनकर भुला देते हैं, उनका मज़ाक उड़ाते हैं, लेकिन उनकी एक एक बात सही साबित होती जा रही है.

  • जम्मू-कश्मीर का भरोसा जीतने की मोदी की कोशिश

    जम्मू-कश्मीर का भरोसा जीतने की मोदी की कोशिश

    प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में आतंकवाद से लड़ते हुए जान देने वाले जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के जवानों अफसरों और नागरिकों को भी याद किया. गुलामदीन, कर्नल सोनम वांग्चुक, रुखसाना कौसर, औरंगजेब. संविधान में भरोसा करने वाले नागरिकों सो भरोसा दिलाया कि उनके सपने पूरे होंगे.

  • क्‍या धारा 370 की धार खत्‍म करने से पहले कश्‍मीर की राय ली गई?

    क्‍या धारा 370 की धार खत्‍म करने से पहले कश्‍मीर की राय ली गई?

    जम्मू कश्मीर और लद्दाख अब दो हिस्सों में बंट गया. पहले राज्य था अब केंद्र शासित प्रदेश हो गया. मुख्यमंत्री का पद समाप्त हो गया. राज्यपाल का पद समाप्त हो गया. दिल्ली की तरह उपराज्यपाल का पद होगा और पुलिस केंद्र सरकार के पास होगी. जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश होगा. लद्दाख अलग केंद्र शासित प्रदेश होगा. लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी.

  • रैमॉन मैगसेसे पुरस्‍कार मिलने पर रवीश कुमार ने दर्शकों को कहा शुक्रिया

    रैमॉन मैगसेसे पुरस्‍कार मिलने पर रवीश कुमार ने दर्शकों को कहा शुक्रिया

    हर चैनल पर एक ही कटेंट है, एक ही ख़बर है, आप चैनल बदल सकते हैं मगर चैनल के बदलने से डिबेट का टॉपिक नहीं बदल जाता

  • रवीश कुमार को मिला रैमॉन मैगसेसे पुरस्कार तो प्रियंका गांधी ने किया ट्वीट, लिखा- आलोचना के विवेक की मशाल को जिंदा रखने वाले पत्रकार...

    रवीश कुमार को मिला रैमॉन मैगसेसे पुरस्कार तो प्रियंका गांधी ने किया ट्वीट, लिखा- आलोचना के विवेक की मशाल को जिंदा रखने वाले पत्रकार...

    प्रियंका गांधी ट्वीट किया: "सच कहने का साहस और आलोचना के विवेक की मशाल को जिंदा रखने वाले पत्रकार रवीश कुमार को रैमॉन मैग्सेसे पुरस्कार मिलने पर बधाई. मैं उनके धैर्य का आदर करती हूं."

  • मायावती ने रवीश कुमार को ट्विटर पर दी बधाई, बोलीं- उम्मीद है कि देश का मीडिया जगत...

    मायावती ने रवीश कुमार को ट्विटर पर दी बधाई, बोलीं- उम्मीद है कि देश का मीडिया जगत...

    रैमॉन मैगसेसे अवार्ड फाउंडेशन ने इस संबंध में कहा, "रवीश कुमार का कार्यक्रम 'प्राइम टाइम' 'आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है." उनके इस सम्मान पर बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने भी ट्विटर के जरिए बधाई दी है.

  • 'रैमॉन मैगसेसे' पुरस्कार से सम्मानित रवीश कुमार पहले देखते थे NDTV में चिट्ठियों का काम, 10 बातें

    'रैमॉन मैगसेसे' पुरस्कार से सम्मानित रवीश कुमार पहले देखते थे NDTV में चिट्ठियों का काम, 10 बातें

    एनडीटीवी के रवीश कुमार को 'रैमॉन मैगसेसे' पुरस्कार 2019 से शुक्रवार को सम्मानित किया गया है. इस पुरस्कार को नोबेल पुरस्कार का एशियाई संस्करण माना जाता है. प्रशस्ति पत्र में 44 वर्षीय कुमार को भारत के सबसे प्रभावी टीवी पत्रकारों में से एक बताया गया है. वह एनडीटीवी इंडिया में पत्रकार हैं. उनका नाम उन पांच व्यक्तियों में शुमार है जिन्हें इस पुरस्कार का विजेता घोषित किया गया है. प्रशस्ति पत्र में कहा गया कि कुमार का कार्यक्रम “प्राइम टाइम” “आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.’’ साथ ही इसमें कहा गया, “अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.” इस साल के रमन मैगसेसे पुरस्कार के चार अन्य विजेताओं में म्यामां के ‘को स्वे विन’, थाइलैंड की ‘अंगखाना नीलापाइजित’, फिलीपीन के ‘रैयमुंडो पुजंते कायाबायऐब’ और दक्षिण कोरिया के ‘किम जोंग की’ शामिल हैं. 1957 में शुरू हुए इस पुरस्कार को एशिया का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है.

  • विश्‍वास मत की प्रक्रिया पूरी करने की मियाद क्‍या हो?

    विश्‍वास मत की प्रक्रिया पूरी करने की मियाद क्‍या हो?

    कर्नाटक विधानसभा में विश्वास मत पेश तो हो गया है. अब इस बात पर बहस हो रही है कि स्पीकर एक ही दिन में विश्वास मत की प्रक्रिया पूरी करें. कर्नाटक के राज्यपाल ने भी कहा है कि विश्वास मत एक दिन में पूरा हो. क्या संविधान में ऐसी कोई प्रक्रिया है कि राज्यपाल स्पीकर से कहें कि वे किसी प्रक्रिया को कब पूरी करें.

  • सोशल मीडिया के अभियान जमीन पर कहां?

    सोशल मीडिया के अभियान जमीन पर कहां?

    सेल्फी से क्या किसी योजना को बढ़ावा मिलता है, उसकी सफलता सुनिश्चित होती है, क्या सेल्फी से प्रेरणा मिलती है, अगर इसका जवाब हां में होता तो आज हमारे देश में प्रेरणा की बाढ़ आ चुकी होती. हर लम्हा सोशल मीडिया पर अनगिनत तादाद में सेल्फी अपलोड होती रहती है. गुरु पूर्णिमा के दिन भारत के मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने एक वीडियो मेसेज जारी किया है और सेल्फी विद गुरु करने की बात की है.

  • हमारे समाज में बच्चियां कितनी सुरक्षित?

    हमारे समाज में बच्चियां कितनी सुरक्षित?

    इन सब व्यवस्थाओं के बाद भी 24,212 मामलों में से मात्र 911 मामलों में ही फैसला आ सका है. यह रिकॉर्ड बेहद साधारण है. ख़राब भी कहा जा सकता है. 11,981 बलात्कार के मामलों में जांच ही चल रही है. 4871 मामलों में पुलिस अदालत को रिपोर्ट सौंप सकी है. 6449 मामलों में ट्रायल शुरू हो सकी है. 911 मामलों में सज़ा हुई है. 

  • राम का नाम आराधना के लिए या हत्या के लिए?

    राम का नाम आराधना के लिए या हत्या के लिए?

    इस सवाल पर लौट आइये इससे पहले कि हम जवाब देने के बजाए नज़रें चुराने लगें. राम का नाम साधना और अराधना के लिए है या इसके नाम पर हत्या करने के लिए है. अभी भले लगता हो कि हमारी ड्राइंग रूम से दूर शायद दिल्ली से बहुत दूर कुछ लोगों का यह काम है और भारत जैसे देश में अपवाद हैं तो आप गलती कर रहे हैं. इनके पीछे की सियासी खुराक कहां से आ रही है, आप इतने भी भोले नहीं है कि सब बताना ही पड़े.

  • कर्नाटक के बहाने विपक्ष के खात्मे का प्लान

    कर्नाटक के बहाने विपक्ष के खात्मे का प्लान

    कर्नाटक कांग्रेस के नेता डीके शिवकुमार मुंबई के रेनासां होटल में जाना चाहते थे, मुंबई एयरपोर्ट से सीधे पोवई स्थित रेनेसां होटल मुंबई पहुंच गए. पुलिस के हाथ में विधायकों का पत्र था. शिवकुमार के हाथ में होटल में कमरे की बुकिंग का कागज़. पुलिस ने शिवकुमार को रोक दिया. कहा कि विधायको ने पत्र लिखा है कि उन्हें सुरक्षा चाहिए, क्योंकि उन्हें डर है कि शिवकुमार और मुख्यमंत्री कुमारस्वामी कभी भी अंदर आ सकते हैं. हम भारत के भोले भाले लोग विपक्ष की सरकारों को निरंगत ढ़हते ढ़हाते देख रहे हैं.

  • आर्थिक सर्वे और बजट के आंकड़ों में अंतर कैसे?

    आर्थिक सर्वे और बजट के आंकड़ों में अंतर कैसे?

    श्रीनिवासन जैन ने एक रिपोर्ट की है. बजट से 1 लाख 70 हज़ार करोड़ का हिसाब ग़ायब है. प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य रथिन रॉय ने आर्थिक सर्वे और बजट का अध्ययन किया. उन्होंने देखा कि आर्थिक सर्वे में सरकार की कमाई कुछ है और बजट में सरकार की कमाई कुछ है. दोनों में अंतर है. बजट में राजस्व वसूली सर्वे से एक प्रतिशत ज्यादा है. यह राशि 1 लाख 70 हज़ार करोड़ की है, क्या इतनी बड़ी राशि की बजट में चूक हो सकती है.

  • 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए ये बजट कितना प्रभावी?

    5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए ये बजट कितना प्रभावी?

    मोदी सरकार पार्ट- 2 का पहला बजट आ गया. चुनाव ख़त्म हो चुका है इसलिए बजट में हल्ला हंगामा कम है. इसका संदेश यह भी है कि अगर सरकार के आर्थिक क्रिया कलापों को देखना समझना है तो बजट के बाहर भी देखना होगा. जिन्हें सिर्फ बजट में देखने की आदत है उनके लिए बजट में भाषण भी है. सवाल है बजट जैसे विस्तृत दस्तावेज़ को साबुन तेल के दामों में उतार-चढ़ाव से देखा जाए या उन नीतियों को लागू करने के लिए पैसे के इंतज़ाम और पैसे के ख़र्च के हिसाब से देखा जाए.

  • मोदी सरकार का ये आर्थिक सर्वे क्या इशारा कर रहा है?

    मोदी सरकार का ये आर्थिक सर्वे क्या इशारा कर रहा है?

    अर्थव्यवस्था की हालत क्या है. जो ख़बरें बिजनेस अखबारों में छप रही हैं उन्हें देखकर लगता है कि चुनौतियां गंभीर होती जा रही हैं. लगातार 9 महीने से ऑटोमोबिल कंपनियों में उत्पादन ठप्प है. लघु एवं मझोले उद्योग का विकास रुक गया है. इनके लिए लोन की कमी हो गई है. जिन संस्थाओं से लोन मिलता है, उनकी हालत खराब है. एकर आरटीआई के अनुसार वित्त वर्ष 2019 में दूसरी तरफ मुदा लोन का एनपीए 126 प्रतिशत बढ़ा है. बैंकों की अपनी पूंजी लड़खड़ा रही है. वो सरकार की मदद पर निर्भर है.

  • क्या गांधी परिवार से बाहर कोई कांग्रेस का नेतृत्व कर सकता है?

    क्या गांधी परिवार से बाहर कोई कांग्रेस का नेतृत्व कर सकता है?

    कितनी आसानी से कई नेता कांग्रेस छोड़ कर बीजेपी में चले गए. आना जाना लगा रहता है मगर एक दूसरे दल में जाने की बेचैनी बता रही है कि कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता के भीतर कांग्रेस नहीं है. उसकी विचारधारा बहुत कमज़ोर पड़ चुकी है. पार्टी में बचे हुए नेता पार्टी के लिए कम बीजेपी में जाने के लिए ज़्यादा बचे हुए हैं. उनके भीतर अगर कांग्रेस होती तो वे रूकते.