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प्रेमचंद का साहित्य


'प्रेमचंद का साहित्य' - 9 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • Munshi Premchand: खुद भी पढ़‍िए और अपने बच्‍चों को भी पढ़ाएं मुंशी प्रेमचंद की ये 5 कहानियां

    Munshi Premchand: खुद भी पढ़‍िए और अपने बच्‍चों को भी पढ़ाएं मुंशी प्रेमचंद की ये 5 कहानियां

    हिंदी साहित्य को नई उचाइयों तक पहुंचाने वाले मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि 8 अक्टूबर को मनाई जाती है. साहित्य में प्रेमचंद के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है. प्रेमचंद को उपन्यास के सम्राट माने जाते हैं. प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था. प्रेमचंद की कई कहानियां ग्रामीण भारत पर हैं. उन्होंने अपनी कहानियों के माध्यम से किसानों की हालत का वर्णन किया.

  • प्रेमचंद की कहानियां को आज भी भूले नहीं हैं लोग

    प्रेमचंद की कहानियां को आज भी भूले नहीं हैं लोग

    साहित्य जगत में मुंशी प्रेमचंद का स्थान उस ऊंचाई पर हैं जहां बिरले पहुंच पाये हैं. उनकी कहानियों में ग्रामीण भारत खासतौर पर किसानों की स्थिति का जो वर्णन है वह किसानों की आज की हालत से कोई खास भिन्न नहीं है.

  • प्रेमचंद के लेखन ने बदली हिंदी-उर्दू साहित्य की दिशा

    प्रेमचंद के लेखन ने बदली हिंदी-उर्दू साहित्य की दिशा

    प्रसिद्ध लेखक मुंशी प्रेमचंद के पौत्र आलोक राय का कहना है कि होरी और गोबर जैसे पात्रों के रचियता ने अपने ‘आधुनिक दृष्टिकोण’ और सहज अभिव्यक्ति से हिंदी तथा उर्दू साहित्य की दिशा बदल दी.

  • जन्‍मदिन विशेष: साहित्‍यकार जैनेंद्र कुमार ने 'मन' को दी महत्ता

    जन्‍मदिन विशेष: साहित्‍यकार जैनेंद्र कुमार ने 'मन' को दी महत्ता

    हिंदी साहित्य में प्रेमचंद के साहित्य की सामाजिकता के बाद व्यक्ति के 'निजत्व' की कमी खलने लगी थी, जिसे जैनेंद्र ने पूरी की. इसलिए उन्हें मनोविश्लेषणात्मक परंपरा का प्रवर्तक माना जाता है. वह हिंदी गद्य में 'प्रयोगवाद' के जनक भी थे. जैनेंद्र का जन्म 2 जनवरी, 1905 को अलीगढ़ के कौड़ियागंज गांव में हुआ था.

  • प्रेमचंद की इस नायिका ने मारा था दहेज लोभी पति के चेहरे पर तमाचा...!

    प्रेमचंद की इस नायिका ने मारा था दहेज लोभी पति के चेहरे पर तमाचा...!

    उपन्‍यासकार प्रेमचन्द ने कई महान कृतिया दी हैं. जिनमें से एक है 'निर्मला'. निर्मला का का निर्माण काल 1923 ई. और प्रकाशन का समय 1927 ई. है. प्रेमचन्द्र के उन उपन्यासों में निर्मला बहुत आगे माना जाता है जिन्‍होंने साहित्य के मानक स्थापित किए. इस उपन्‍यास में प्रेमचंद ने समाज में औरत के स्त्री और उसकी दशा का चित्रण पेश किया है.

  • प्रेमचंद की कहानी: पूस की रात

    <b>प्रेमचंद की कहानी: पूस की रात</b>

    प्रेमचंद की कहानी: पूस की रात कथा सम्राट प्रेमचंद ने हिन्‍दी के खजाने में कई अनमोल रत्‍न जोड़े हैं. प्रेमचंद का लेखन और उनकी रचानाएं जितनी प्रासंगिक उस समय में थीं, जब वह रची गईं, उतनी ही आज भी हैं. प्रेमचंद के उपन्यास और कहानियों में किसानों, मजदूरों और वर्ग में बंटे हुए समाज का मार्मिक चित्रण हैं.

  • प्रेमचंद को गूगल का अनोखा सलाम, 'गोदान' डूडल से किया याद

    प्रेमचंद को गूगल का अनोखा सलाम, 'गोदान' डूडल से किया याद

    कथाकार मुंशी प्रेमचंद की 136वीं सालगिरह पर गूगल इंडिया ने उन्हें अनोखे तरीके से याद किया है. सबसे बड़े सर्च इंजन ने अपने होम पेज पर प्रेमचंद के प्रसिद्ध उपन्यास 'गोदान' का डूडल लगाया है.

  • प्रेमचंद एक सदी बीत जाने के बाद भी उतने ही प्रासंगिक हैं : गुलजार

    प्रेमचंद एक सदी बीत जाने के बाद भी उतने ही प्रासंगिक हैं : गुलजार

    साहित्य के साथ गुलजार के रिश्ते में मुंशी प्रेमचंद का सबसे अधिक प्रभाव रहा है और प्रख्यात कवि-गीतकार का मानना है कि एक सदी बीत जाने के बाद भी प्रेमचंद की कृतियों ने अपनी प्रासंगिकता नहीं गंवाई है.

  • प्रेमचंद, रेणु और प्रसाद न होते तो हम समाज को कैसे समझ पाते : पीएम मोदी

    प्रेमचंद, रेणु और प्रसाद न होते तो हम समाज को कैसे समझ पाते : पीएम मोदी

    विश्व हिन्दी सम्मेलन के उद्घाटन पर पीएम मोदी ने कहा, मैं विदेशों में जहां भी जाता हूं, वहां लोग बेहद उत्साह के साथ हिन्दी को सुनते और समझते हैं। साहित्य वर्तमान का दर्पण होता है और साथ ही वह अपने समय के बारे में पूरी जानकारी देता है।