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प्रेमचंद जयंती


'प्रेमचंद जयंती' - 10 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • उत्तर प्रदेश : लमही गांव में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर उनके प्रति बरसा एक दिन का प्यार

    उत्तर प्रदेश : लमही गांव में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर उनके प्रति बरसा एक दिन का प्यार

    कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती उनके गांव लमही मनाया गया. सरकारी महकमों ने अपनी फ़र्ज़ अदायगी की तो प्राइवेट स्कूल, रंगकर्मी, साहित्यकार और पत्रकारों ने भी अपने कथाकार को याद किया. अब पूरे साल उन्हें सभी उनके अपने हाल पर छोड़ देंगे. तमाम घोषणाओं के बावजूद मुंशी प्रेमचंद का घर और गांव आज भी उपेक्षा का शिकार है. मुंशी जी की जयंती पर उनके पात्र होरी, माधव, घीसू की गहरी संवेदना से जुड़े कलाकार नाटक के जरिए उन्हें याद कर रहे थे. लमही में हर साल उनका जन्म दिवस मनाया जाता है. सरकारी महकमे फ़र्ज़ अदायगी का टेंट भी लगाते हैं. स्मारक स्थल पर कार्यक्रम होते हैं और गांव में मेले जैसा माहौल रहता है. लेकिन अपने कथाकार के प्रति एक दिन के इस प्यार पर गांव के लोगों के अंदर एक दर्द भी है.

  • मुंशी प्रेमचंद के पैतृक घर को मिली बिजली, आपूर्ति रोके जाने पर हो गया था विवाद

    मुंशी प्रेमचंद के पैतृक घर को मिली बिजली, आपूर्ति रोके जाने पर हो गया था विवाद

    उत्तरप्रदेश विद्युत निगम ने वाराणसी के बाहरी इलाके में लमही में स्थित महान उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद के पैतृक मकान में बिजली की आपूर्ति बहाल कर दी है. दरअसल, लेखक की 139 वीं जयंती के कुछ दिन पहले पिछले सप्ताह उनके मकान की बिजली आपूर्ति रोके जाने से विवाद पैदा हो गया था. हालांकि, वराणसी के जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने इससे इनकार किया कि महान कथाकार के पैतृक गांव में मकान की बिजली आपूर्ति रोक दी गई थी.

  • प्रेमचंद की कहानी: पूस की रात

    <b>प्रेमचंद की कहानी: पूस की रात</b>

    प्रेमचंद की कहानी: पूस की रात कथा सम्राट प्रेमचंद ने हिन्‍दी के खजाने में कई अनमोल रत्‍न जोड़े हैं. प्रेमचंद का लेखन और उनकी रचानाएं जितनी प्रासंगिक उस समय में थीं, जब वह रची गईं, उतनी ही आज भी हैं. प्रेमचंद के उपन्यास और कहानियों में किसानों, मजदूरों और वर्ग में बंटे हुए समाज का मार्मिक चित्रण हैं.

  • प्रेमचंद को गूगल का अनोखा सलाम, 'गोदान' डूडल से किया याद

    प्रेमचंद को गूगल का अनोखा सलाम, 'गोदान' डूडल से किया याद

    कथाकार मुंशी प्रेमचंद की 136वीं सालगिरह पर गूगल इंडिया ने उन्हें अनोखे तरीके से याद किया है. सबसे बड़े सर्च इंजन ने अपने होम पेज पर प्रेमचंद के प्रसिद्ध उपन्यास 'गोदान' का डूडल लगाया है.

  • मुंशी प्रेमचंद की 135वीं जयंती पर विशेष

    मुंशी प्रेमचंद की 135वीं जयंती पर विशेष

    एक सदी पहले जब मुंशी प्रेमचंद का नन्हा किरदार हामिद ‘ईदगाह’ जा रहा था, तो उसके जीवन की सबसे बड़ी विडंबना गरीबी और यतीम होना थी, लेकिन उसके बालसुलभ हौसले के दीये को मुंशी जी ने गुरबत की आंधी में बुझने नहीं दिया।

  • प्रेमचंद@135 : बेहतर तो होता कि आज आप प्रासंगिक न होते

    प्रेमचंद@135 : बेहतर तो होता कि आज आप प्रासंगिक न होते

    देश का मीडिया मुंबई बम काण्ड के दोषी याकूब मेमन की फांसी पर बहस मुबाहिसों में फंसा हुआ है। उसके पास उस सामाजिक सरोकार के लिए उतना समय नहीं है, जिसे मुंशी प्रेमचंद ने अपनी कथावस्तु बनाया था।

  • दयाशंकर मिश्र का ब्लॉग : प्रेमचंद की याद में हामिद का टूटा हुआ चिमटा

    दयाशंकर मिश्र का ब्लॉग : प्रेमचंद की याद में हामिद का टूटा हुआ चिमटा

    आज हिंदी कहानी के युगपुरुष की 135वीं जयंती पर दयाशंकर मिश्र उनके मासूम पात्र को नए जमाने में रखकर जो फैंटेसी गढ़ रहे हैं, उसमें गरीबी से जीता हामिद सांप्रदायिकता से पस्तहाल नजर आता है...

  • प्रेमचंद@135 : समय से कितने आगे थे, 'लिव इन' पर एक सदी पहले ही लिख चुके थे

    प्रेमचंद@135 : समय से कितने आगे थे, 'लिव इन' पर एक सदी पहले ही लिख चुके थे

    'लिव इन रिलेशन' जैसे संबंध आज के दौर में सामने आए हैं, लेकिन प्रेमचंद ने तो उस जमाने में जब 'गौना' के बगैर पति-पत्नी आपस मे मिल भी नहीं सकते थे, 'मिस पद्मा' जैसी कहानी लिखी जिसका विषय 'लिव इन रिलेशन' है।

  • 135वीं जयंती पर विशेष : रंगमंच की जान है प्रेमचंद की हिंदुस्तानी भाषा

    135वीं जयंती पर विशेष : रंगमंच की जान है प्रेमचंद की हिंदुस्तानी भाषा

    मुंबई की 'आइडियल ड्रामा एंड इंटरटेनमेंट एकेडमी' (आइडिया) मुंशी प्रेमचंद की कहानियों का नाट्य रूपांतरण और प्रदर्शन इसलिए भी करती है क्योंकि इससे न सिर्फ नए कलाकारों की हिन्दी की समझ बेहतर होती है बल्कि उनके उच्चारण भी सुधर जाते हैं।

  • सौ साल बाद भी प्रासंगिक हैं प्रेमचंद, रंगमंच पर भी असर बरकरार

    सौ साल बाद भी प्रासंगिक हैं प्रेमचंद, रंगमंच पर भी असर बरकरार

    भारतीय मनोरंजन उद्योग के केंद्र मुंबई में फिल्म के विषय, निर्माण की तकनीक के बेहद विकसित हो जाने के बावजूद रंगमंच पर प्रेमचंद आज भी अपने खासे असर के साथ मौजूद हैं। मुंबई में प्रेमचंद की कहानियों की रंगमंचीय प्रस्तुतियों का सिलसिला कई दशकों से अनवरत चल रहा है।