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प्रेमचंद News in Hindi


'प्रेमचंद' - 34 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • Munshi Premchand: खुद भी पढ़‍िए और अपने बच्‍चों को भी पढ़ाएं मुंशी प्रेमचंद की ये 5 कहानियां

    Munshi Premchand: खुद भी पढ़‍िए और अपने बच्‍चों को भी पढ़ाएं मुंशी प्रेमचंद की ये 5 कहानियां

    हिंदी साहित्य को नई उचाइयों तक पहुंचाने वाले मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि 8 अक्टूबर को मनाई जाती है. साहित्य में प्रेमचंद के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है. प्रेमचंद को उपन्यास के सम्राट माने जाते हैं. प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था. प्रेमचंद की कई कहानियां ग्रामीण भारत पर हैं. उन्होंने अपनी कहानियों के माध्यम से किसानों की हालत का वर्णन किया.

  • क्या आज भी मौजूद हैं नमक के दरोगा?

    क्या आज भी मौजूद हैं नमक के दरोगा?

    मित्रों मुंशी प्रेमचंद की कहानी नमक का दरोगा का ये अंश है. इस कहानी को दोबारा सालों बाद इसलिए पढ़ी कि शनिवार को मैं किसी पैरामिलिट्री के अफसर के पास बैठा था उन्होंने मुझे बताया कि ISS यानी इंडियन साल्ट सर्विसेज यानी भारतीय नमक सेवा अब भी देश में मौजूद है. देशभर में करीब दर्जनभर अधिकारी हैं जो नमक की गुणवत्ता और उसकी सप्लाई पर नजर रखते हैं.

  • आज भी उपेक्षा का शिकार हैं मुंशी प्रेमचंद का घर और गांव

    आज भी उपेक्षा का शिकार हैं मुंशी प्रेमचंद का घर और गांव

    अब पूरे साल उन्हें सभी उनके हाल पर छोड़ देंगे. तमाम घोषणाओं के बावजूद मुंशी प्रेमचंद का घर और गांव आज भी उपेक्षा का शिकार हैं और जो कुछ बना भी है, वह बस यूं ही खड़ा है, बिना किसी काम के.

  • उत्तर प्रदेश : लमही गांव में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर उनके प्रति बरसा एक दिन का प्यार

    उत्तर प्रदेश : लमही गांव में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर उनके प्रति बरसा एक दिन का प्यार

    कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती उनके गांव लमही मनाया गया. सरकारी महकमों ने अपनी फ़र्ज़ अदायगी की तो प्राइवेट स्कूल, रंगकर्मी, साहित्यकार और पत्रकारों ने भी अपने कथाकार को याद किया. अब पूरे साल उन्हें सभी उनके अपने हाल पर छोड़ देंगे. तमाम घोषणाओं के बावजूद मुंशी प्रेमचंद का घर और गांव आज भी उपेक्षा का शिकार है. मुंशी जी की जयंती पर उनके पात्र होरी, माधव, घीसू की गहरी संवेदना से जुड़े कलाकार नाटक के जरिए उन्हें याद कर रहे थे. लमही में हर साल उनका जन्म दिवस मनाया जाता है. सरकारी महकमे फ़र्ज़ अदायगी का टेंट भी लगाते हैं. स्मारक स्थल पर कार्यक्रम होते हैं और गांव में मेले जैसा माहौल रहता है. लेकिन अपने कथाकार के प्रति एक दिन के इस प्यार पर गांव के लोगों के अंदर एक दर्द भी है.

  • मुंशी प्रेमचंद के पैतृक घर को मिली बिजली, आपूर्ति रोके जाने पर हो गया था विवाद

    मुंशी प्रेमचंद के पैतृक घर को मिली बिजली, आपूर्ति रोके जाने पर हो गया था विवाद

    उत्तरप्रदेश विद्युत निगम ने वाराणसी के बाहरी इलाके में लमही में स्थित महान उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद के पैतृक मकान में बिजली की आपूर्ति बहाल कर दी है. दरअसल, लेखक की 139 वीं जयंती के कुछ दिन पहले पिछले सप्ताह उनके मकान की बिजली आपूर्ति रोके जाने से विवाद पैदा हो गया था. हालांकि, वराणसी के जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने इससे इनकार किया कि महान कथाकार के पैतृक गांव में मकान की बिजली आपूर्ति रोक दी गई थी.

  • Book Review: समकालीन कथा परिदृश्‍य में 'लमही'

    Book Review: समकालीन कथा परिदृश्‍य में 'लमही'

    लमही इससे पहले भी अन्‍य कतिपय विशेषांकों के अलावा समकालीन उपन्‍यास-परिदृश्‍य पर औपन्‍यासिक शीर्षक से दो विशेषांक प्रकाशित कर चुकी है.

  • सुशील मोदी का बड़ा खुलासा- लालू यादव ने बिहार में BJP की सरकार बनाने के लिए की थी मदद की पेशकश

    सुशील मोदी का बड़ा खुलासा- लालू यादव ने बिहार में BJP की सरकार बनाने के लिए की थी मदद की पेशकश

    बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने दावा किया कि राजद प्रमुख लालू यादव ने पेशकश की थी कि अगर चारा घोटाला मामले में सीबीआई नरमी बरते तो वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को धूल चटाकर भाजपा की सरकार बनाने में मदद करेंगे. पटना में सुशील मोदी ने कहा कि लालू ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के पास अपने दूत के तौर पर पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रेमचंद गुप्ता को दो बार भेजा था और बाद में गुप्ता के साथ जेटली से स्वयं भी मिले थे, पर उनकी पेशकश ठुकरा दी गई थी.

  • सुशील मोदी का दावा: लालू ने नीतीश का 'इलाज' करने के बदले जेटली से मांगी थी चारा घोटाले से बचाने की मदद

    सुशील मोदी का दावा: लालू ने नीतीश का 'इलाज' करने के बदले जेटली से मांगी थी चारा घोटाले से बचाने की मदद

    पटना में एक संवाददाता सम्मेलन में मोदी ने कहा कि झारखंड उच्च न्यायालय ने चारा घोटाले के मामले में फंसे लालू प्रसाद के पक्ष में तब फैसला सुनाते हुए कहा कि था इस घोटाले से जुड़े अन्य मामलों में ट्रायल की जरूरत नहीं है क्योंकि सभी मामले एक तरह के हैं. इसके बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय गई थी. मोदी ने कहा, 'लालू प्रसाद ने इसके बाद अपने दूत प्रेमचंद गुप्ता को भाजपा नेता अरुण जेटली के पास भेजा और मदद मांगी.'

  • किस्सागोई के पुरोधा ज्ञान चतुर्वेदी पर लमही का विशेष अंक, कुछ यूं उकेरी जीवनी

    किस्सागोई के पुरोधा ज्ञान चतुर्वेदी पर लमही का विशेष अंक, कुछ यूं उकेरी जीवनी

    सच कहा जाए तो जिस विट और व्यंजना से लैस इन व्यंग्यकारों का रचना संसार रहा है उसकी झलक इससे आगे की पीढ़ी में बहुत कम दिखाई पड़ती है. इस वक्त व्यंग्य के सर्वाधिक लोकप्रिय लेखक ज्ञान चतुर्वेदी हैं जिन पर प्रेमचंद की परंपरा को आगे बढ़ाने वाली पत्रिका लमही ने विशेषांक निकाल कर उन्हें वर्ष 2018 के लमही सम्मान से भी विभूषित किया है.

  • प्रेमचंद की कहानियां को आज भी भूले नहीं हैं लोग

    प्रेमचंद की कहानियां को आज भी भूले नहीं हैं लोग

    साहित्य जगत में मुंशी प्रेमचंद का स्थान उस ऊंचाई पर हैं जहां बिरले पहुंच पाये हैं. उनकी कहानियों में ग्रामीण भारत खासतौर पर किसानों की स्थिति का जो वर्णन है वह किसानों की आज की हालत से कोई खास भिन्न नहीं है.

  • लेखकों, कवियों की पहचान को संजोता जामिया का प्रेमचंद अभिलेखागार

    लेखकों, कवियों की पहचान को संजोता जामिया का प्रेमचंद अभिलेखागार

    पुराने लेखकों और कवियों की कृतियां, अच्छी तस्वीरें एवं उनसे जुड़ी जानकारी इंटरनेट या किसी एक स्थान पर शायद ही सटीक रूप से मिलती हैं.

  • प्रेमचंद और रूसी लेखक दोस्तोएवेस्की की कहानियों पर बनी फिल्म

    प्रेमचंद और रूसी लेखक दोस्तोएवेस्की की कहानियों पर बनी फिल्म

    राज ने फिल्म प्रेमचंद और दोस्तोएवेस्की कहानियों की दुनिया का विलय करने के बारे में बताया, "दोनों लेखक दुनिया के दो अलग हिस्सों से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए तुरंत इसे मिलाने का प्रयास नहीं किया."

  • प्रेमचंद के लेखन ने बदली हिंदी-उर्दू साहित्य की दिशा

    प्रेमचंद के लेखन ने बदली हिंदी-उर्दू साहित्य की दिशा

    प्रसिद्ध लेखक मुंशी प्रेमचंद के पौत्र आलोक राय का कहना है कि होरी और गोबर जैसे पात्रों के रचियता ने अपने ‘आधुनिक दृष्टिकोण’ और सहज अभिव्यक्ति से हिंदी तथा उर्दू साहित्य की दिशा बदल दी.

  • जन्‍मदिन विशेष: साहित्‍यकार जैनेंद्र कुमार ने 'मन' को दी महत्ता

    जन्‍मदिन विशेष: साहित्‍यकार जैनेंद्र कुमार ने 'मन' को दी महत्ता

    हिंदी साहित्य में प्रेमचंद के साहित्य की सामाजिकता के बाद व्यक्ति के 'निजत्व' की कमी खलने लगी थी, जिसे जैनेंद्र ने पूरी की. इसलिए उन्हें मनोविश्लेषणात्मक परंपरा का प्रवर्तक माना जाता है. वह हिंदी गद्य में 'प्रयोगवाद' के जनक भी थे. जैनेंद्र का जन्म 2 जनवरी, 1905 को अलीगढ़ के कौड़ियागंज गांव में हुआ था.

  • .....और ढहा दिया गया मुंशी प्रेमचंद का 'घर'

    .....और ढहा दिया गया मुंशी प्रेमचंद का 'घर'

    कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद ने जिस किराए के घर में कथा संसार रचा, सहेजने की बजाय प्रशासन ने लोगों के लिए 'खतरा' बताकर उसे चंद समय में ढाह दिया और समाज का पहरुआ बनने का ढोंग करने वाले सिर्फ तमाशबीन बने रहे.

  • हताशा के कोहरे में ढांढस बंधाएंगी प्रेमचंद की ये 10 बातें...

    हताशा के कोहरे में ढांढस बंधाएंगी प्रेमचंद की ये 10 बातें...

    माना की प्रेमचंद का साहित्‍य लेखन आज से सालों पहले हुआ, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि उनकी रचनाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी की लेखन काल में रही होंगी.

  • प्रेमचंद की इस नायिका ने मारा था दहेज लोभी पति के चेहरे पर तमाचा...!

    प्रेमचंद की इस नायिका ने मारा था दहेज लोभी पति के चेहरे पर तमाचा...!

    उपन्‍यासकार प्रेमचन्द ने कई महान कृतिया दी हैं. जिनमें से एक है 'निर्मला'. निर्मला का का निर्माण काल 1923 ई. और प्रकाशन का समय 1927 ई. है. प्रेमचन्द्र के उन उपन्यासों में निर्मला बहुत आगे माना जाता है जिन्‍होंने साहित्य के मानक स्थापित किए. इस उपन्‍यास में प्रेमचंद ने समाज में औरत के स्त्री और उसकी दशा का चित्रण पेश किया है.

  • प्रेमचंद की कहानी: पूस की रात

    <b>प्रेमचंद की कहानी: पूस की रात</b>

    प्रेमचंद की कहानी: पूस की रात कथा सम्राट प्रेमचंद ने हिन्‍दी के खजाने में कई अनमोल रत्‍न जोड़े हैं. प्रेमचंद का लेखन और उनकी रचानाएं जितनी प्रासंगिक उस समय में थीं, जब वह रची गईं, उतनी ही आज भी हैं. प्रेमचंद के उपन्यास और कहानियों में किसानों, मजदूरों और वर्ग में बंटे हुए समाज का मार्मिक चित्रण हैं.

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