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'ब्लॉग' - 924 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • रवीश कुमार का ब्लॉग: 'सर सैय्यद डे' पर AMU के एक छात्र डॉ. शोएब अहमद से मुलाकात

    रवीश कुमार का ब्लॉग: 'सर सैय्यद डे' पर AMU के एक छात्र डॉ. शोएब अहमद से मुलाकात

    अलीगढ़ के छात्रों को पता भी है या नहीं कि उनके लिए कोई हसन कमाल साहब इतना सोचते हैं. उनके कारण कुछ ऐसे ही जुनूनी लोगों से मुलाक़ात हुई जो अपने छात्रों की हर संभव मदद के लिए बेताब थे. पैसे और हुनर दोनों से मदद करने के लिए. हसन कमाल वैसे तो बेहद ख़ूबसूरत भी हैं और इंसान भी बड़े अच्छे. अपने काम करने के शहर के चप्पे चप्पे से जानते हैं जैसे कोई अलीगढ़ का छात्र अपने शहर की गलियों को जानता होगा. उनकी मुस्तैदी का क़ायल हो गया. हाथ में एक घड़ी पहन रखी है. आई-फोन वाली. कदमों का हिसाब रखते हैं. शायद इसीलिए फिट भी हैं.

  • कोर्ट में मामला भूमि विवाद का, लेकिन मीडिया के लिए आस्था

    कोर्ट में मामला भूमि विवाद का, लेकिन मीडिया के लिए आस्था

    भारत के इतिहास में यह सबसे लंबा, सबसे हिंसक, सबसे विवादास्पद और सबसे राजनीतिक भूमि विवाद है. इस विवाद को राजनीति के मैदान में लड़ा गया. दावों और प्रतिदावों के बीच इससे संबंधित हिंसा में न जाने कहां-कहां लोग मारे गए. हिन्दू भी मारे गए, मुस्लिम भी मारे गए. अंत में लड़ते-झगड़ते सब इस बिन्दु पर पहुंचे कि जो भी अदालत का फैसला होगा, सब मानेंगे. अदालतों का फैसला भी रेगिस्तान की गर्मी और ऊंचे पहाड़ों की थकान से गुज़रते हुए अब अंजाम पर पहुंचता दिख रहा है. 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढहा दी गई. उस मामले में कौन-कौन शामिल थे, इस पर पता लगाने के लिए 17 साल तक लिबरहान आयोग की सुनवाई चली. यूपी के ट्रायल कोर्ट में जारी है, मगर अपराधी सजा से दूर हैं. इस सवाल को मौजूदा बहस से गायब कर दिया गया है. मर्यादा पुरुषोत्तम राम के नाम पर जो मर्यादाएं तोड़ी गईं उन पर न प्रायश्चित है और न अदालत का फैसला.

  • PMC खाताधारकों की मुश्किलें कब दूर होंगी?

    PMC खाताधारकों की मुश्किलें कब दूर होंगी?

    लोकतंत्र में संख्या बेमानी हो गई है. चुनाव में इस संख्या के दम पर जीत तो हासिल कर लेते हैं, लेकिन उसके बाद इस संख्या का कोई मोल नहीं रह जाता. इसलिए जब पेड़ों के काटने के खिलाफ लोग प्रदर्शन करते हैं तो उन पर सख्त धाराएं लगा दी जाती हैं, ताकि उनकी ज़िंदगी मुकदमों में उलझकर रह जाएं और इस बात से किसी को फर्क नहीं पड़ता है. उसी शहर में जब हज़ारों लोग अपने पैसे की वापसी को लेकर सड़क पर उतरते हैं तो वही शहर उनसे भी बेगाना हो जाता है. उनकी संख्या जितनी भी हो बेमानी हो जाती है. जनता जब जनता की नहीं होती है तो संख्या फिर संख्या नहीं रह जाती, ज़ीरो हो जाती है.

  • अर्थव्यवस्था का ढलान जारी है फिर भी आयोजनों की भव्यता तूफानी है

    अर्थव्यवस्था का ढलान जारी है फिर भी आयोजनों की भव्यता तूफानी है

    आपको पता होगा कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत के दौरे पर हैं. चीन का भारत आना हमेशा ही महत्वपूर्ण घटना है. इस दौरे के लिए कहा गया है कि अनौपचारिक है.कोई एजेंडा नहीं है. दोनों नेता बयान नहीं देंगे. लेकिन इसका मतलब नहीं कि दौरा महत्वपूर्ण नहीं है.अनौपचारिक बातचीत में कई उलझे हुए मसलों पर खुलकर बातचीत होती है. दोनों नेता एक दूसरे का मन टोहते हैं.

  • चीन के राष्ट्रपति का भारत दौरा, क्‍या दोनों देशों के रिश्‍ते बेहतर होंगे?

    चीन के राष्ट्रपति का भारत दौरा, क्‍या दोनों देशों के रिश्‍ते बेहतर होंगे?

    चेन्नई एयरपोर्ट पर ऐसे जहाज़ों को उतारने की क्षमता थी इसलिए यह जगह उसके हिस्से आया. चेन्नई से 56 किमी दूर बंगाल की खाड़ी के तट पर महाबलीपुरम है जिसे मामल्लापुरम कहा जाता था. यह नाम पल्लव राजा नरसिम्हावर्मन प्रथम के नाम पर पड़ा जिन्हें महान योद्धा कहा जाता था. पल्लव राजा के काल में एक ही चट्टान को काट कर कलाकृति बनाने का कौशल समृद्ध हुआ जिसे द्रविड़ स्थापत्य कला के रूप में जाना जाता है.

  • नई पीढ़ी के साथ बदल रही है शिवसेना

    नई पीढ़ी के साथ बदल रही है शिवसेना

    शिवसेना की स्थापना 19 जून 1966 को महाराष्ट्र की अस्मिता और मराठी भाषियों के अधिकार और न्याय दिलाने के लिए हुई थी. साठ के दशक में मुम्बई में गुजराती और दक्षिण भाषियों का वर्चस्व बढ़ रहा था. शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने मराठी मन की उस व्यथा को देखा उसे समझा और अपने ओजस्वी भाषणों से मराठी मन को आकर्षित कर न सिर्फ एक मजबूत संगठन खड़ा किया बल्कि मराठियों की खोई अस्मिता को फिर से स्थापित किया. आज बाल ठाकरे भले जीवित नही हैं लेकिन शिवसैनिक आज भी उनके लिए सब कुछ समर्पित करने को तैयार रहते हैं. पर अब शिवसेना बदल रही है खासकर ठाकरे परिवार की तीसरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाले आदित्य ठाकरे की सोच अलग है.

  • दलित अल्पसंख्यक से अन्याय की बात करना गलत कैसे?

    दलित अल्पसंख्यक से अन्याय की बात करना गलत कैसे?

    क्या महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के छह छात्रों को इसलिए निलंबित कर दिया गया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था. इस पत्र में दलित और अल्पसंख्यकों के साथ हो रही मॉब लिचिंग और बलात्कार की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई गई है. कश्मीर का भी ज़िक्र है और असम में नेशनल रजिस्टर आफ सिटिजन्स का भी मसला है.

  • जल जमाव के बाद बिहार की राजनीति में सुशील मोदी को लेकर इतने सवाल क्यों?

    जल जमाव के बाद बिहार की राजनीति में सुशील मोदी को लेकर इतने सवाल क्यों?

    पटना शहर से जल जमाव की समस्या फ़िलहाल ख़त्म हो गई है. इस जल जमाव के यूं तो कई कारण रहे लेकिन वो चाहे भाजपा समर्थक हों या विरोधी, सब मानते हैं कि अगर एक व्यक्ति जिसकी लापरवाही का सबने ख़ामियाज़ा उठाया वो हैं सुशील मोदी. और राजधानी पटना की इस नरकीय स्थिति ने सबसे ज़्यादा नुक़सान किसी की व्यक्तिगत और राजनीतिक छवि को पहुंचाया है तो वो हैं बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी. सुशील मोदी ने पटना की हर समस्या में आम लोगों के साथ खड़े होकर अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक छवि चमकाई और साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी को लगातार पिछली पांच विधानसभा चुनावों से हर सीट पर जीत दिलाई. उसी सुशील मोदी ने इस बार के पानी में, उनके समर्थकों के अनुसार सब कुछ खोया है.

  • रवीश कुमार का ब्लॉग : राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों का विरोध सभी बैंकरों के लिए सबक है

    रवीश कुमार का ब्लॉग : राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों का विरोध सभी बैंकरों के लिए सबक है

    राजस्थान के दस शहरों में 4 अक्तूबर से ‘क्रॉस सेलिंग’ के ख़िलाफ़ राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक के कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे हैं. ‘क्रॉस सेलिंग’ के खेल को समझना ज़रूरी है. बीमा कंपनी जब अपना उत्पाद बेचेगी तो उसके लिए कर्मचारी रखेगी, एजेंट रखेगी, रोज़गार भी बढ़ेगा. म

  • घोर आर्थिक असफलता के बाद भी मोदी सरकार की राजनीतिक सफलता शानदार

    घोर आर्थिक असफलता के बाद भी मोदी सरकार की राजनीतिक सफलता शानदार

    भारतीय खाद्य निगम के चरमराने की ख़बरें आने लगी हैं. इसी के ज़रिए भारत सरकार किसानों से अनाज ख़रीदती है. सरकार उसके बदले में निगम को पैसे देती है जिसे हम सब्सिडी बिल के रूप में जानते हैं. 2016 तक तो भारतीय खाद्य निगम को सब्सिडी सरप्लस में मिलती थी. जितना चाहिए होता था उससे अधिक. लेकिन 2016-17 में जब उसे चाहिए था एक लाख 10 हज़ार करोड़ तो मिला 78000 करोड़. बाकी का 32,000 करोड़ नेशनल स्मॉल सेविंग्स फंड (NSSF) से कर्ज़ लिया. जिस तरह से भारत सरकार रिज़र्व बैंक की बचत से पैसे लेने लगी है उसी तरह से निगम यह काम पहले से कर रहा था. जैसे-जैसे ज़रुरत पड़ी NSSF कर्ज़ लेने लगा. नतीजा 2016-17 का वित्त वर्ष समाप्त होते ही NSSF से लिया गया कर्ज़ा 70,000 करोड़ का हो गया.

  • यूपी और एमपी के सिपाहियों में अनैतिकता के जाल से निकलने की छटपटाहट

    यूपी और एमपी के सिपाहियों में अनैतिकता के जाल से निकलने की छटपटाहट

    उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के सिपाही मुझे पत्र लिख रहे हैं. उन पत्रों को पढ़ने से पहले ही सिपाही बंधुओं की ज़िंदगी का अंदाज़ा है. अच्छी बात यह है कि उनके भीतर अपनी ज़िंदगी की हालत को लेकर चेतना जागृत हो रही है. यह सही है कि हमारी पुलिस व्यवस्था अमानवीय है और अपने कुकृत्यों के जरिए लोगों के जीवन में भयावह पीड़ा पैदा करती है. लेकिन यह भी सही है कि इसी पुलिस व्यवस्था में पुलिस के लोग भी अमानवीय जीवन झेल रहे हैं. उनकी अनैतिकता सिर्फ आम लोगों को पीड़ित नहीं कर रही है बल्कि वे खुद अपनी अनैतिकता के शिकार हैं. झूठ, भ्रष्टाचार और लालच ने उनकी ज़िंदगी में कोई सुख-शांति नहीं दी है.

  • लद्दाख डायरी : नए सांसदों को ऐसे मिलता है संसद में अपना सिक्का जमाने का मौका

    लद्दाख डायरी : नए सांसदों को ऐसे मिलता है संसद में अपना सिक्का जमाने का मौका

    लोकसभा में अनुच्छेद 370 पर हो रही बहस के दौरान एक नए युवा सांसद को बोलने का मौका मिला. वह सांसद थे लद्दाख के 34 वर्षीय जामयांग सेरिंग नामग्याल. नामग्याल ने संसद में जोरदार भाषण दिया था और जब इस बार मैं लेह गया तो उनसे मिलने का मौका मिला. मैंने उनसे पूछा कि आखिर आप जैसे युवा सांसद को आर्टिकल 370 जैसे विषय पर बोलने का मौका कैसे मिला? नामग्याल का कहना था कि 'यह सच है कि संसद में युवाओं को बोलने का मौका कम मिलता है. इसके कई कारण हैं. युवाओं को अपने में आत्मविश्वास लाना होगा. उन्हें विषय को पढ़ना होगा. साथ ही उन्हें संसदीय नियमों की जानकारी लेनी होगी. मेरे साथ भी यही हुआ.'

  • एक दलित को विभागाध्यक्ष बनने से क्यों रोक रहा है दिल्ली विश्वविद्यालय?

    एक दलित को विभागाध्यक्ष बनने से क्यों रोक रहा है दिल्ली विश्वविद्यालय?

    श्यौराज सिंह बेचैन की आत्मकथा का नाम है- 'मेरा बचपन मेरे कंधों पर.' यह आत्मकथा बताती है कि एक दलित बचपन कैसा होता है. बचपन बीत गया, लेकिन अपनी दलित पहचान का सलीब अब भी अपने कंधों पर लेकर घूमने को मजबूर हैं श्यौराज सिंह बेचैन. वे दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में पढ़ाते हैं. वरिष्ठता क्रम में बीते महीने की तेरह तारीख़ को उनको विभागाध्यक्ष बनाया जाना था. बताया जाता है कि बारह तारीख़ को विश्वविद्यालय ने उनसे दस्तावेज़ लिए, उनके नाम पर लगभग मुहर लगा दी.

  • गर्भ में बेटियों को कब तक मारता रहेगा यह देश?

    गर्भ में बेटियों को कब तक मारता रहेगा यह देश?

    सुप्रीम कोर्ट से आ रही इस खबर को नोट किया जाना चाहिए. बल्कि ये खबरें चिन्ता में डालने वाली हैं. भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में आरोपी गौतम नवलखा ने सुप्रीम कोर्ट में अपने खिलाफ एफआईआर रद्द करने की याचिका लगाई थी. इस याचिका पर सुनवाई से तीन बेंच और पांच जजों ने अलग कर लिया है. इनमें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई भी शामिल हैं. आज पांचवे जज जस्टिस रवींद भट्ट ने भी इस मामले से किनारा कर लिया. जब यह मामला तीन जजों की बेंच जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस बीआर गवई के सामने आया तो तीनों जजों ने सुनवाई से अलग कर लिया.

  • सभी को रास आ रहा है राजनाथ सिंह का बदला हुआ 'शिकारी' स्वरूप

    सभी को रास आ रहा है राजनाथ सिंह का बदला हुआ 'शिकारी' स्वरूप

    केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने खुद को नरेंद्र मोदी सरकार में 'सर्वश्रेष्ठ शिकारी' के रूप में ढाल लिया है. वह नपे-तुले अंतराल पर पाकिस्तान के खिलाफ आग उगलते, उसे चेताते सुनाई देते हैं. कभी वह पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) को लेकर दावा करते हैं, कभी वह चेतावनी देते सुनाई देते हैं कि भारत परमाणु हथियारों के 'पहले इस्तेमाल नहीं' की नीति से बंधा हुआ नहीं है.

  • जलवायु परिवर्तन को लेकर कितनी गंभीर है सरकार?

    जलवायु परिवर्तन को लेकर कितनी गंभीर है सरकार?

    शुक्रवार को कम से कम 28 देशों के 20 लाख लोग और स्कूल छात्र अपना काम और पढ़ाई छोड़कर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ सड़क पर उतरे. स्पेन, न्यूज़ीलैंड, नीदरलैंड्स के कुल जनसंख्या के 3.5 प्रतिशत लोग इस प्रदर्शन में हिस्सा लिए. प्रदर्शन से पहले न्यूज़ीलैंड के लोगों ने वहां के संसद के नाम एक चिट्ठी भी लिखी. इस चिट्ठी में उन्होंने मांग की कि दश में क्लाइमेट इमरजेंसी घोषित की जाए. साथ ही जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए अलग-अलग कॉउंसिल भी बनाई जाए. उधर, कनाडा के 85 शहर में जलवायु परिवर्तन के खिलाफ प्रदर्शन किया गया.

  • चार्टर्ड एकाउंटेंसी के छात्र प्रदर्शन के लिए मजबूर क्यों?

    चार्टर्ड एकाउंटेंसी के छात्र प्रदर्शन के लिए मजबूर क्यों?

    तीन दिनों से प्रदर्शन करने के बाद भी चार्टर्ड अकाउंटेंसी के छात्रों को कोई आश्वासन नहीं मिला है. ट्विट पर ट्रेंड कराने के बाद भी ICAI की तरफ से कोई बात करने नहीं आया है. ट्विटर पर ट्रेंड कराने के साथ-साथ छात्र दिल्ली के आईटीओ स्थित ICAI के मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं. द इंस्टीट्यूट चार्टर्ड अकाउंटेंट आफ इंडिया का मुख्यालय है यहां. तीन दिनों से प्रदर्शन करने के बाद भी इनसे कोई बात करने नहीं आया है. एक बयान आया है जिसमें कहा है कि छात्रों को री-चेकिंग का अधिकार नहीं दिया जाएगा. छात्रों का कहना है कि आगे की सभी परीक्षाओं में भी री-चेकिंग की सुविधा होनी चाहिए.

  • शिनजियांग डायरी 3 : चीन के इस इलाके के हालात की सच्चाई के कई पक्ष

    शिनजियांग डायरी 3 : चीन के इस इलाके के हालात की सच्चाई के कई पक्ष

    शिनजियांग डायरी का ये आखिरी हिस्सा चीन से लौटने के करीब महीने भर बाद लिख रही हूं. इसलिए नहीं कि वक्त नहीं मिला या इच्छा नहीं हुई, बल्कि इसलिए कि इस बीच इस पर मेरी बनाई डॉक्युमेंट्री 'चीन का चाबुक' ऑन एयर हो गई और मैं देखना चाहती थी कि इस पर प्रतिक्रिया क्या होती है. क्योंकि सीधे तौर पर भारत से जुड़ा मुद्दा नहीं है तो यह भी लगा कि पता नहीं लोग देखें ना देखें. लेकिन यूट्यूब पर सवा लाख से भी ज्यादा लोगों ने देखा और अधिकतर ने सराहा. कुछ ने कुछ सवाल भी पूछे.