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  • दुनिया में कोरोना संक्रमण को लेकर क्या-क्या हो रहा है

    दुनिया में कोरोना संक्रमण को लेकर क्या-क्या हो रहा है

    कोरोना वायरस से संबंधित किसी भी रिपोर्ट में संक्रमित लोगों और मरने वालों की संख्या लगातार बदल रही है. इसका ध्यान रखें. इन खबरों को पढ़ते हुए आतंकित नहीं होना है. बल्कि सतर्क रहने का प्रण मज़बूत करना है. आपकी सतर्कता ही जान बचाएगी. 

  • कोरोनावायस से जंग लड़ने के लिए करीब 5,900 करोड़ रुपये की मदद देगी गूगल, CEO सुंदर पिचाई ने किया ये ट्वीट

    कोरोनावायस से जंग लड़ने के लिए करीब 5,900 करोड़ रुपये की मदद देगी गूगल, CEO सुंदर पिचाई ने किया ये ट्वीट

    COVID-19 Lockdown: सुंदर पिचाई ने अपने ब्लॉग पोस्ट में लिखा- "80 करोड़ डॉलर की इस राशि में दुनियाभर में पिछले एक साल से सक्रिय छोटे एवं मझोले कारोबार को गूगल एड क्रेडिट के रूप में 34 करोड़ डॉलर मिलेंगे. इसका नोटिफिकेशन उनके गूगल एड खाते पर नजर आएगा.

  • एक दिन में बढ़ गए कोरोना के 10,000 मामले, आखिर क्यों पिछड़ गया अमरीका लड़ाई में?

    एक दिन में बढ़ गए कोरोना के 10,000 मामले, आखिर क्यों पिछड़ गया अमरीका लड़ाई में?

    अमरीका में एक दिन में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ों की संख्या 10,000 बढ़ गई है. इस छलांग से अमरीका चीन और इटली से भी आगे निकल गया है. अमरीका में संक्रमित मरीज़ों की संख्या 85,500 हो गई है. चीन में 81,782 मामले सामने आ चुके हैं और इटली में 80,589 मामले. चीन में 81,000 मामलों में से 74,000 ठीक हो चुके हैं. लेकिन अमरीका में करीब 86,000 केस में से 800 के आस-पास ही ठीक हुए हैं. ध्यान रखिएगा कि संक्रमित मरीज़ों की संख्या दुनिया भर में पल पल बदल रही है.

  • विदेश से आकर जो भी छिपे बैठे हैं, बाहर आएं, खुद बताएं डरे नहीं

    विदेश से आकर जो भी छिपे बैठे हैं, बाहर आएं, खुद बताएं डरे नहीं

    बाली, इंडोनेशिया से एक भारतीय जोड़ा आया. उसे शम्शबाद एयरपोर्ट पर 14 दिनों के लिए क्वारेंटिन में रखा गया. दोनों वहां से भाग गए. उसके बाद बंगलुरू-हज़रत निज़ामुद्दीन ट्रेन में सवार हो गए जो दिल्ली जा रही थी. टिकट कंडक्टर की नज़र उनके सामान पर पड़ी और शक हुआ. पुलिस बुलाई गई और दोनों पकड़े गए. रेलवे ने 12 ऐसे संदिग्ध यात्रियों की पहचान की है जिन्होंने अलग अलग समय में यात्राएं की हैं. जो संक्रमित पाए गए हैं.

  • कोरोना वायरस : रवीश कुमार ने की दिल्ली के सीएम केजरीवाल से अपील

    कोरोना वायरस : रवीश कुमार ने की दिल्ली के सीएम केजरीवाल से अपील

    शहर बंद होने की स्थिति में है. दिहाड़ी मज़दूरी कर जीने वाले लोगों के भोजन की व्यवस्था करनी चाहिए. बहुत से रेहड़ी पटरी वाले खोमचे वालों की बिक्री बंद सी हो गई है. डॉ. मैथ्यू का सुझाव है कि आप सभी लोगों से अपील करें कि अपने घर में दो रोटी अलग से बना लें और एक कटोरी सब्ज़ी. इसे रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के ज़रिए जमा करें. वॉलेंटियर बनाए जो लोगों को उनकी जगह पर जाकर रोटी और सब्ज़ी दें.

  • कोरोना वायरस से डरने की नहीं, इन छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देने की जरूरत

    कोरोना वायरस से डरने की नहीं, इन छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देने की जरूरत

    कोरोना वायरस को हल्के में लेना नहीं चाहिए, लोगों को अपना ख्याल रखना चाहिए. डॉक्टर और सरकार जो भी सलाह दे रही है उसे पूरी तरह मानना चाहिए. लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है. आप कहां जा रहे हैं, क्या कर रहे हैं, कितने लोगों से मिल रहे हैं, इस सब पर आपको ध्यान देना चाहिए. सरकार ने यह सलाह दी है कि 200 से ज्यादा लोग एक जगह जमा नहीं होने चाहिए, लेकिन लोग इस पर ध्यान नहीं देते हैं.

  • इस दिल्ली में भीड़ के पास बंदूकें कहां से आईं?

    इस दिल्ली में भीड़ के पास बंदूकें कहां से आईं?

    दिल्ली दंगों में मरने वालों की संख्या 53 हो गई है. जीटीबी अस्तपाल में 44, लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल मे 3, राम मनोहर लोहिया में 5 और जगप्रवेश अस्पताल में 1 की मौत हुई है. पुलिस दंगों की जांच में जुट गई है. दंगों के मामले में 600 से अधिक एफआईआर हुई है. हर दिन कहीं न कहीं एक नया वीडियो उभर आता है जो इस हिंसा को समझने का नया मौका देता है. हमने पहले के कार्यक्रम में भी कहा है कि वीडियो अपने आप में संपूर्ण नहीं हो सकते यानी शुरू कहां से हुआ या खत्म कब हुआ पता नहीं चलता है. लेकिन वीडियो में जो होता हुआ दिख रहा है वो भी कम महत्वपूर्ण नहीं है.

  • दिल्ली के दंगों में जाति, मजहब से ऊपर भी कई इंसान दिखे

    दिल्ली के दंगों में जाति, मजहब से ऊपर भी कई इंसान दिखे

    दिल्ली दंगों के बीच जब दंगाइयों को मज़हब और राजनीति के हिसाब से बांटकर देखा जा रहा है तभी ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने सनक के इस भयंकर दौर में भी बंटने और बांटने की राजनीति से इनकार कर दिया. दिल्ली दंगे को कवर करने गए कई पत्रकारों ने लिखा है कि हिन्दू और मुसलमान के बीच ऐसा भयंकर दंगा कभी नहीं देखा. उन्हें लगा है कि भरोसे की हर दीवार ढहा दी गई है. लेकिन उन्हीं खंडहरों से ऐसी कहानियां भी निकलकर आ रही हैं जो यकीन पैदा करती हैं कि दिल्ली अपनी इस ग़लती पर अफ़सोस करेगी और भरोसे की नई दीवार भी बनेगी.

  • दिल्ली में मेरे लिए ये भारी रात थी

    दिल्ली में मेरे लिए ये भारी रात थी

    दिल्ली नहीं, हमारा दिल जल रहा है, हम जल रहे हैं और हमारे रिश्ते जल रहे हैं. जहां बचपन से हर कौम के लोगों को साथ रहते, खुशियां-गम बांटते देखा, उन लोगों को ऐसे लड़ते देखना बहुत मुश्किल है. ये वो दिल्ली है जिसने भेदभाव किए बिना हर किसी को आसरा दिया, अपना सहारा दिया. आज उसी दिल्ली में लोगों को अपनी पहचान बताने में डर लग रहा है. मैंने कभी सोचा नहीं था कि कभी दंगे के डर का सामना मुझे भी करना पड़ेगा. लेकिन कल रात मुझे डर लगा, बहुत डर लगा.

  • क्या समिति और NGO से चलने लगा है विदेश मंत्रालय

    क्या समिति और NGO से चलने लगा है विदेश मंत्रालय

    एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार की ज़ुबान फिसल गई और उन्होंने नागरिक अभिनंदन समिति का नाम ले लिया.

  • क्या है फेक न्यूज का नया सरगना डीप फेक वीडियो?

    क्या है फेक न्यूज का नया सरगना डीप फेक वीडियो?

    झूठ के पैर नहीं होते लेकिन टेक्नालॉजी ने झूठ को ताकतवर बना दिया है. अभी ही हम जैसे लोग परेशान हैं कि जो बात कहीं नहीं होती वो भी तस्वीर के साथ लिखकर वायरल हो रहा होता है. आल्ट न्यूज़ जैसी साइट वायरल तस्वीर और वायरल वीडियो के पीछे का झूठ तो पकड़ लेते हैं लेकिन वो उन सभी के पास नहीं पहुंच पाता है जिनके व्हाट्स ऐप के इनबाक्स में झूठ पहुंचा होता है.

  • क्या ऐसे ट्रंप की नजरों से छुप जाएगी गरीबी?

    क्या ऐसे ट्रंप की नजरों से छुप जाएगी गरीबी?

    अभी तो माहौल जम रहा था कि अमेरिका से राष्ट्रपति ट्रंप का जहाज़ उड़ेगा और न्यूज़ चैनलों पर ईवेंट कवरेज का मजमा जमेगा..सूत्रों के हवाले से खूब हलवे बनाए जाएंगे, कुछ बातों का पता होगा, कुछ का पता ही नहीं होगा लेकिन तभी आज ट्रंप साहब ने होली जैसे बन रहे मूड को बिगाड़ दिया. उन्हें सोचना चाहिए था कि हम कुछ न पता चले उसके लिए कितनी मेहनत कर रहे हैं. जबकि हमें पता है कि ट्रंप साहब के पास ड्रोन कैमरा है. इसके बाद भी हमने दीवार बनाई ताकि गरीबों का घर न दिखे. अब ट्रंप साहब कार से उतरकर ड्रोन तो उड़ाएंगे नहीं. इस दीवार से अलग एक और दीवार है. मोटेरा स्टेडियम की तरफ. उस बस्ती की दीवार को रंगा जा रहा है, ईस्टमैन कलर वाले लुक में.

  • ऐसे देशभक्तों से सावधान!

    ऐसे देशभक्तों से सावधान!

    प्रधानमंत्री की आलोचना इस देश की आलोचना है, सरकार के ख़िलाफ़ कुछ कहना या करना देश के ख़िलाफ़ कुछ करना और कहना है. बाक़ी ज़रूरी सवालों पर जो सरलीकृत राय है- मसलन, तीन तलाक का ख़ात्मा बिल्कुल उचित है, पाकिस्तान में सताए जा रहे हिंदू भारत न आएं तो कहां जाएं, कश्मीर में धारा 370 तो ख़त्म होनी ही चाहिए थी, मुसलमानों को ज़्यादा बच्चे पैदा नहीं करने चाहिए, पाकिस्तान को नेस्तनाबूद कर देना चाहिए- वही इनकी भी राय है.

  • क्या शाहीन बाग से मुगल राज आ जाएगा?

    क्या शाहीन बाग से मुगल राज आ जाएगा?

    शाहीन बाग का धरना शांतिपूर्ण ही रहा, कोई हिंसा नहीं हुई फिर भी इस धरने को लेकर सरकार के मंत्री से लेकर बीजेपी के सांसदों ने क्या-क्या नहीं कहा. इस धरने को लेकर खतरे की ऐसी-ऐसी कल्पना पेश की गई जैसे लगा कि भारत में कोई शासन व्यवस्था ही नहीं है. किसी मोहल्ले की भीड़ आकर दिल्ली पर मुगल राज कायम कर देगी. मुगलों का राज मोहल्ले से नहीं निकला था. इतिहास का इस तरह से देखा जाना आबादी के उस हिस्से को बीमार करने लगेगा जिन्हें यह समझाया जा रहा है कि एक मोहल्ले में धरने पर बैठे लोग हिन्दुस्तान जैसे विशाल मुल्क पर मुगल राज कायम कर देंगे. इस शाहीन बाग को बदनाम करने के लिए क्या-क्या नहीं हुआ.

  • क्या कभी स्कूली शिक्षा पर भी लड़ा जाएगा चुनाव?

    क्या कभी स्कूली शिक्षा पर भी लड़ा जाएगा चुनाव?

    90 के दशक के आखिरी हिस्से से अचानक भारत की राजनीति को बिजली सड़क पानी के मुद्दे से पहचाना जाने लगा. इससे बिजली और सड़क का कुछ भला तो हुआ लेकिन पानी पीछे छूट गया. शिक्षा और स्वास्थ्य का तो नंबर ही नहीं आया. दिल्ली विधानसभा का चुनाव शायद पहला चुनाव है जिसमें शिक्षा का सवाल केंद्र में आते आते रह गया. बेशक दिल्ली का चुनाव स्कूल से शुरू होता है लेकिन शाहीन बाग को पाकिस्तान, गद्दार और आतंकवाद से जोड़ने की सियासी आंधी के कारण पिछड़ता जा रहा है. हिन्दी प्रदेशों के लिए जिनमें से दिल्ली शिक्षा का आखिरी पड़ाव है, यह मुद्दा नई राजनीति को जन्म दे सकता है या दे सकता था. बिहार यूपी और अन्य हिन्दी प्रदेशों से शिक्षा के कारण भी लाखों लोगों का पलायन हुआ है. लोगों ने खराब स्कूलों और कॉलेज की कीमत इतनी चुकाई है कि वे बच्चों को पढ़ाने के लिए शहर बदलने लगे और ट्यूशन और कोचिंग का खर्चा उनकी ज़िंदगी की जमा पूंजी निगल गया. स्कूल अगर राजनीति के केंद्र में आता है तो यह मसला दिल्ली सहित हिन्दी प्रदेशों की राजनीति बदल देगा.

  • सांप्रदायिक तूफ़ान के भंवर में दिल्ली का चुनाव

    सांप्रदायिक तूफ़ान के भंवर में दिल्ली का चुनाव

    सुप्रीम कोर्ट का डेटा है कि 2019 में जनवरी से जून के बीच बच्चों खासकर लड़कियों के खिलाफ 24000 से अधिक बलात्कार के मामले दर्ज हुए थे. 2018 में भारत में 33,977 बलात्कार के केस दर्ज हुए हैं. क्या किसी केस में प्रधानमंत्री और अमित शाह बचाते हुए देखे गए हैं? राष्ट्रीय अपराध शाखा ब्यूरो के रिकार्ड के अनुसार 2018 में दिल्ली में बलात्कार के 1217 मामले दर्ज हुए थे.

  • शाहीन बाग को बचाना भारत को बचाना है

    शाहीन बाग को बचाना भारत को बचाना है

    शाहीन बाग में करीब 40 दिन से आंदोलन चल रहा है- बल्कि वह लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शन को एक नई गरिमा, नई कलात्मकता, नई ऊंचाई और नई जनतांत्रिकता दे रहा है. कविता, संगीत, चित्रकला, नाटक, संस्थापन कला- सब इस आंदोलन की जान हैं. दूर-दूर से लोग यहां बस यह देखने आ रहे हैं कि विरोध प्रदर्शन कितना खूबसूरत हो सकता है. दूर-दराज के इलाक़ों में शाहीन बाग बनाने की कोशिश हो रही है.

  • रवीश कुमार का ब्लॉग: मोदी जी को 400 नहीं 545 सीट दीजिए लेकिन उनकी भाषा मत लीजिए

    रवीश कुमार का ब्लॉग: मोदी जी को 400 नहीं 545 सीट दीजिए लेकिन उनकी भाषा मत लीजिए

    छह साल बाद अर्थव्यवस्था फेल है. इस दौरान जिनकी ज़िंदगी बर्बाद हुई उसे सुधरने में बहुत वक्त लग जाएगा. आप प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री की भाषा देखिए.

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