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भीमा कोरेगांव


'भीमा कोरेगांव' - 79 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • कोरेगांव-भीमा मामले में गौतम नवलखा को राहत, गिरफ्तारी से सुरक्षा की अवधि 4 हफ्ते के लिए बढ़ी

    कोरेगांव-भीमा मामले में गौतम नवलखा को राहत, गिरफ्तारी से सुरक्षा की अवधि 4 हफ्ते के लिए बढ़ी

    न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने गौतम नवलखा से कहा कि इस मामले में गिरफ्तारी से पहले जमानत के लिये वह संबंधित अदालत में जाएं. महाराष्ट्र सरकार के वकील ने जब नवलखा को और अंतरिम संरक्षण दिये जाने का विरोध किया तो पीठ ने सवाल किया कि उन्होंने एक साल से ज्यादा समय तक उनसे पूछताछ क्यों नहीं की थी. 

  • प्रधानमंत्री को खत लिखना कब गुनाह हो गया?

    प्रधानमंत्री को खत लिखना कब गुनाह हो गया?

    भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में एक आरोपी गौतम नवलखा के मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई. जस्टिस अरुण मिश्र और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच में सुनवाई हुई. गौतम नवलखा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जनवरी 2018 में जब एफआईआर हुई थी उसमें गौतम नवलखा का नाम नहीं है. अगस्त 2018 से उनकी गिरफ्तारी पर अदालत की तरफ से रोक लगी है मगर तब से लेकर अब तक पुलिस ने उनसे कोई पूछताछ नहीं की है. गौतम नवलखा हिंसा के ख़िलाफ हैं. वे सीपीआई माओइस्ट के सदस्य नहीं हैं. सिर्फ कुछ ज़ब्त काग़ज़ात के आधार पर कार्रवाई की गई है. सिंघवी ने कोर्ट से मांग की कि गौतम नवलखा को अदालत से मिला संरक्षण बढ़ाया जाना चाहिए तिस पर अदालत ने आदेश दिया है कि जब तक इस मामले की सुनवाई चल रही है, गिरफ्तारी नहीं हो.

  • जब तक सुनवाई जारी है, गौतम नवलखा को गिरफ्तार न किया जाए : सुप्रीम कोर्ट

    जब तक सुनवाई जारी है, गौतम नवलखा को गिरफ्तार न किया जाए : सुप्रीम कोर्ट

    भीमा कोरेगांव केस में सुप्रीम कोर्ट ने गौतम नवलखा को राहत देते हुए महाराष्ट्र सरकार से कहा है कि जब तक कोर्ट में सुनवाई जारी है उनको गिरफ्तार नहीं किया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से नवलखा के खिलाफ सबूत भी मांगे हैं. मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को 3 बजे होगी इससे पहले महाराष्ट्र सरकार ने नवलखा की याचिका का विरोध किया था.

  • भीमा-कोरेगांव हिंसा मामला : प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई सहित 3 जजों ने अब तक खुद को सुनवाई से अलग किया

    भीमा-कोरेगांव हिंसा मामला :  प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई सहित 3 जजों ने अब तक खुद को सुनवाई से अलग किया

    भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि अभी तक 3 सुप्रीम कोर्ट के जजों ने सुनवाई से खुद को अलग किया है. प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस बीआर गवई, और जस्टिस रविन्द्र भट्ट ने खुद को सुनवाई से अलग किया था. जस्टिस गवई जिस तीन जजों की बेंच में शामिल थे, उसने इसलिए इनकार किया कि यह बेंच आगे भी चलने वाली है. 

  • गर्भ में बेटियों को कब तक मारता रहेगा यह देश?

    गर्भ में बेटियों को कब तक मारता रहेगा यह देश?

    सुप्रीम कोर्ट से आ रही इस खबर को नोट किया जाना चाहिए. बल्कि ये खबरें चिन्ता में डालने वाली हैं. भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में आरोपी गौतम नवलखा ने सुप्रीम कोर्ट में अपने खिलाफ एफआईआर रद्द करने की याचिका लगाई थी. इस याचिका पर सुनवाई से तीन बेंच और पांच जजों ने अलग कर लिया है. इनमें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई भी शामिल हैं. आज पांचवे जज जस्टिस रवींद भट्ट ने भी इस मामले से किनारा कर लिया. जब यह मामला तीन जजों की बेंच जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस बीआर गवई के सामने आया तो तीनों जजों ने सुनवाई से अलग कर लिया.

  • भीमा कोरेगांव हिंसा मामला: गौतम नवलखा की याचिका पर सुनवाई से जस्टिस भट्ट ने खुद को किया अलग, अब तक पांच जज हो चुके हैं अलग

    भीमा कोरेगांव हिंसा मामला: गौतम नवलखा की याचिका पर सुनवाई से जस्टिस भट्ट ने खुद को किया अलग, अब तक पांच जज हो चुके हैं अलग

    13 सितंबर को बॉम्बे हाई कोर्ट ने भीमा-कोरेगांव हिंसा और माओवादियों के साथ कथित जुड़ाव के लिए गौतम नवलखा के खिलाफ दर्ज मामले को खारिज करने से इनकार करते हुए कहा था कि मामले में प्रथम दृष्टया तथ्य दिखता है.न्यायमूर्ति रंजीत मोरे और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की पीठ ने कहा था, मामले की व्यापकता को देखते हुए हमें लगता है कि पूरी छानबीन जरूरी है. पीठ ने कहा कि यह बिना आधार और सबूत वाला मामला नहीं है.

  • एल्गार परिषद मामला : नोएडा में दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर के घर पर छापा

    एल्गार परिषद मामला : नोएडा में दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर के घर पर छापा

    दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) के प्रोफ़ेसर हनी बाबू के नोएडा के आवास पर पुणे पुलिस ने छापा मारा. एल्गार परिषद केस (भीमा-कोरेगांव) मामले में उनसे पूछताछ की गई. उनके पास से कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव जब्त कर ली गई. दिल्ली यूनिवर्सिटी के इंग्लिश के प्रोफेसर हनी बाबू के नोएडा के सेक्टर 78 स्थित आवास पर पुणे पुलिस ने मंगलवार को एल्गार परिषद मामले में छापेमारी की. पुलिस की इस छापेमारी से इलाके में हड़कंप मच गया. प्रोफेसर बाबू के कथित माओवादी संपर्कों (अर्बन नक्सल) को लेकर छापेमारी की गई. घंटों पूछताछ के बाद पुलिस कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव अपने साथ ले गई जिसे बाद में वापस करने की बात कही.

  • खतरनाक चीजों की सूची

    खतरनाक चीजों की सूची

    पिछले कुछ दिनों में भारत में जो 'न्यू नॉर्मल' बनाया गया है, उसका असर बहुत सारी चीज़ों पर पड़ा है. ऐसे में यह ज़रूरी है कि ख़तरनाक चीज़ों की एक सूची बनाई जाए जिनसे हम सब बच सकें. इस सूची में सबसे ताज़ा प्रविष्टि दुनिया के महानतम उपन्यासों में गिने जाने वाले लियो टॉल्स्टॉय के 'वार एंड पीस' की है. इस उपन्यास को महाराष्ट्र पुलिस ने ख़तरनाक माना है. इसे भीमा कोरेगांव केस में गिरफ़्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ता वर्नेन गोंजाल्वेस के ख़िलाफ़ सबूत के तौर पर पेश किया गया है. आदरणीय बॉम्बे हाइकोर्ट ने भी गोंजाल्वेस से पूछा कि वे ऐसी किताब क्यों पढ़ते हैं जो किसी दूसरे देश के युद्ध के बारे में है.

  • भीमा कोरेगांव केस: आरोपी से कोर्ट ने पूछा- आपने घर पर ‘वार एंड पीस’ किताब क्यों रखी थी?

    भीमा कोरेगांव केस: आरोपी से कोर्ट ने पूछा- आपने घर पर ‘वार एंड पीस’ किताब क्यों रखी थी?

    न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल की पीठ ने गोन्जाल्विस और अन्य आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा ऐसी किताबें और सीडी पहली नजर में संकेत देते हैं कि वे राज्य के खिलाफ कुछ सामग्री रखते थे. 

  • भीमा कोरेगांव मामला : सुप्रीम कोर्ट से आरोपी सुरेंद्र गडलिंग व चार अन्य को राहत नहीं मिली

    भीमा कोरेगांव मामला : सुप्रीम कोर्ट से आरोपी सुरेंद्र गडलिंग व चार अन्य को राहत नहीं मिली

    भीमा कोरेगांव मामले में सुप्रीम कोर्ट से आरोपी सुरेंद्र गडलिंग व चार अन्य को राहत नहीं दी. तय दिनों में चार्जशीट दाखिल न करने पर बाइडिफाल्ट जमानत के हकदार नहीं होंगे.

  • आनंद तेलतुंबड़े की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई 22 फरवरी को होगी

    आनंद तेलतुंबड़े की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई 22 फरवरी को होगी

    प्रतिबंधित माओवादी संगठनों से संपर्क और भीमा कोरेगांव हिंसा के लिए जिम्मेदार होने का आरोप झेल रहे प्रोफेसर आनंद तेलतुंबड़े की अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई सोमवार को टल गई. बॉम्बे हाईकोर्ट मामले की सुनवाई 22 फरवरी को करेगा.

  • आनंद तेलतुंबडे को बचाए रखना होगा

    आनंद तेलतुंबडे को बचाए रखना होगा

    लेकिन भारत में पढ़ाई-लिखाई छोड़ कर, विचार-विमर्श भूल कर, वे गिरफ़्तारी से बचने की कोशिश में लगे हुए हैं. पहले उनके ख़िलाफ़ हिंसा भड़काने का मामला दर्ज किया गया, फिर उनके माओवादी लिंक खोजे गए, सीधे प्रधानमंत्री की हत्या की साज़िश से उन्हें जोड़ दिया गया, अदालत ने राहत दी तो पुलिस ने इसकी परवाह नहीं की, उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया. हाइकोर्ट की फटकार पर छोड़ा गया.

  • आगरा में रेंगती नागरिकता, पुणे में तेलतुम्बडे को लेकर चुप नागरिकता

    आगरा में रेंगती नागरिकता, पुणे में तेलतुम्बडे को लेकर चुप नागरिकता

    अब आपको याद भी नहीं होगा कि प्रधानमंत्री की हत्या की कथित साज़िश में गिरफ्तार सुधा भारद्वाज जैसों के साथ क्या हो रहा होगा? मीडिया और राजनीति आपके सामने आतंकवाद के ख़तरे परोसते रहे. पहले बताया कि आतंकवाद के लिए एक खास धर्म के लोग ज़िम्मेदार हैं. एक दुश्मन का चेहरा दिखाया गया. फिर अचानक आपके ही बीच के लोगों को उसके नाम पर उठाया जाने लगा.

  • कोर्ट ने आनंद तेलतुंबड़े की गिरफ्तारी को बताया गैरकानूनी, दिया रिहा करने का आदेश

    कोर्ट ने आनंद तेलतुंबड़े की गिरफ्तारी को बताया गैरकानूनी, दिया रिहा करने का आदेश

    पुणे की एक अदालत ने भीमा कोरेगांव हिंसा के मामले में गिरफ्तार आनंद तेलतुंबड़े  (Anand Teltumbde) को रिहा करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने गिरफ्तारी को गैर-कानूनी करार देते हुए यह आदेश दिया है. आपको बता दें कि पुणे पुलिस ने दलित स्कॉलर तेलतुंबडे (Anand Teltumbde) को शनिवार की सुबह मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था.

  • भीमा कोरेगांव हिंसा मामला: आरोपी आनंद तेलतुंबडे को पुणे पुलिस ने किया मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार

    भीमा कोरेगांव हिंसा मामला: आरोपी आनंद तेलतुंबडे को पुणे पुलिस ने किया मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार

    महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में आरोपी आनंद तेलतुंबडे को गिरफ्तार कर लिया गया है. पुणे पुलिस ने दलित स्कॉलर तेलतुंबडे को शनिवार की सुबह मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया है.

  • भीमा कोरेगांव हिंसा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने आनंद तेलतुंबडे के खिलाफ FIR रद्द करने से किया इनकार

    भीमा कोरेगांव हिंसा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने आनंद तेलतुंबडे के खिलाफ FIR रद्द करने से किया इनकार

    कोर्ट ने आनंद (Anand Teltumbde)  की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि वह चार हफ्ते में जमानत याचिका दाखिल करें. बता दें कि आनंद (Anand Teltumbde)  ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 24 दिसंबर के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया गया था. याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि तेलतुंबडे के खिलाफ अभियोग चलाने लायक सामग्री है.

  • भीमा कोरेगांव मामला : चार्जशीट दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित

    भीमा कोरेगांव मामला : चार्जशीट दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित

    भीमा कोरेगांव मामले में सुरेंद्र गडलिंग व अन्य चार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने के लिए 90 दिनों से अतिरिक्त वक्त देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है. महाराष्ट्र सरकार की अर्जी पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित किया.

  • भीमा-कोरेगांव का आज 201वां विजय दिवस : 5 हज़ार पुलिसकर्मी, 1200 होमगार्ड, CRPF की 12 टीमें, 500 सीसीटीवी और 11 ड्रोन तैनात, 10 बड़ी बातें

    भीमा-कोरेगांव का आज 201वां विजय दिवस : 5 हज़ार पुलिसकर्मी, 1200 होमगार्ड, CRPF की 12 टीमें, 500 सीसीटीवी और 11 ड्रोन तैनात, 10 बड़ी बातें

    कोरेगांव-भीमा संघर्ष की एक और वर्षगांठ नजदीक होने के साथ पुणे पुलिस इस बार पूरी चौकसी बरत रही है ताकि कोई अप्रिय घटना ना हो. पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक संदीप पाटिल ने पीटीआई-भाषा से कहा कि इस बार जय स्तंभ के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था की गयी है. गौरतलब है कि एक जनवरी, 2018 को पुणे के पास स्थित कोरेगांव-भीमा में भड़की जातीय हिंसा मामले को एक साल होने को है. ऐसे में पुणे पुलिस यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह अलर्ट है कि इस बार हिंसा की कोई घटना नहीं हो. महाराष्ट्र के लिए वर्ष की शुरूआत हिंसा से हुई थी और अगले कुछ महीने तक यह मामला कुछ ना कुछ कारणों से लगातार चर्चा में बना रहा. भीमा-कोरेगांव संघर्ष की 200वीं वर्षगांठ के पहले तनाव व्याप्त हो गया था क्योंकि कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने आयोजन का विरोध किया था. पुणे से 40 किलोमीटर दूर कोरेगांव-भीमा में जय स्तंभ पर हर साल लोग इकट्ठा होते हैं. लेकिन पिछले साल हिंसा भड़कने पर भीड़ ने वाहनों में आग लगा दी और दुकानों-मकानों में तोड़फोड़ की थी. पुणे के पूर्व शासक पेशवा और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच 1818 में लड़ाई हुई थी.