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रवीश कुमार


'रवीश कुमार' - 555 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • रवीश कुमार का ब्‍लॉग: क्या लगता है आपको, यूपी में कौन जीतेगा!

    रवीश कुमार का ब्‍लॉग: क्या लगता है आपको, यूपी में कौन जीतेगा!

    यूपी में कौन जीत रहा है, इस सवाल के दागते ही फन्ने ख़ां बनकर घूम रहे पत्रकारों के पाँव थम जाते हैं. लंबी गहरी साँस लेने लगते हैं. उनके चेहरे पर पहला भाव तो यही आता है कि दो मिनट दीजिये, नतीजा बताता हूँ लेकिन दो मिनट बीत जाने के बाद चेहरे का भाव बदल जाता है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : बीएमसी चुनावों में जनता की क्या है मांग?

    प्राइम टाइम इंट्रो : बीएमसी चुनावों में जनता की क्या है मांग?

    30,000 करोड़ से अधिक के बजट वाली बृह्न मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी के चुनाव हो रहे हैं. पौने तीन करोड़ की आबादी 227 पार्षदों को चुनने के लिए 21 फरवरी को मतदान करने जा रही है. मुंबई में वार्डों का नामकरण संख्या के हिसाब से नहीं होता है. अंग्रेज़ी अल्फाबेट से होता है. ए से लेकर टी नाम वाले वार्ड होते हैं यहां. क्‍यू, आई, जे, ओ नाम के वार्ड क्यों नहीं हैं, ये मैं नहीं जानता हूं. जबकि ए से टी के बीच ये चारों आते हैं.

  • सफदरजंग अस्पताल के बाहर खड़ी एंबुलेंस की कहानी हमसे कुछ कहना चाहती है...

    सफदरजंग अस्पताल के बाहर खड़ी एंबुलेंस की कहानी हमसे कुछ कहना चाहती है...

    दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के बाहर के सर्विस लेन में खड़ी पचासों एंबुलेंसों को देखकर जाने क्यों लगा कि कोई कहानी होगी. पहली नजर में देखकर मुड़ गया कि वही कहानी होगी कि पड़ोस के राज्यों में अस्पताल अच्छे नहीं होंगे, वहां से मरीज एम्स या सफदरजंग लाए जाते होंगे. मन नहीं माना तो एक बार फिर लौट कर गया कि कुछ और जानने का प्रयास किया जाए. एंबुलेंस के चालक थके हुए थे. आंखें लाल थीं मगर सब अपनी गाड़ी से उतर आए. अपनी समस्या बताने के लिए.

  • क्या पत्रकार को मतदान करना चाहिए?

    क्या पत्रकार को मतदान करना चाहिए?

    इस बार कई चुनावों के बाद मतदान करने का मौका मिला. वर्ना हर बार मतदान यहां होता था और हम कहीं और रिपोर्टिंग की ड्यूटी पर होते थे. मैं ख़ुद भी अपील करता रहा हूं कि बड़ी संख्या में मतदान करें. इसलिए यह बात कचोटती भी थी कि मतदान नहीं किया. पहले सोचता था कि जवानों की तरह पत्रकारों को भी पोस्टल बैलेट से मतदान की अनुमति मिले ताकि वे ड्यूटी पर रहते हुए मतदान कर सकें. लेकिन अब मेरी राय बदल रही है.

  • हिन्दू समधन और मुस्लिम समधन में ठनठन के किस्से और वैलेंटाइन डे के जलवे!

    हिन्दू समधन और मुस्लिम समधन में ठनठन के किस्से और वैलेंटाइन डे के जलवे!

    एक के सर पर आंचल और एक के सर पर दुपट्टा. एक साड़ी में और दूसरी सलवार सूट में. उम्र का फासला तो उतना नहीं रहा होगा मगर मजहब के फासले के मिटने की खिलखिलाहट दबी ज़ुबान में मुझ तक पहुंच रही थी. मैं अंतर्जातीय और अंतरधार्मिक ब्याह रचाने वाले जोड़ों के अनुभव से बातें कर रहा था. मुझसे रहा नहीं गया, दोनों की तरफ मुड़ गया. दोनों समधनें साथ ही बैठी थीं. चाहतीं तो अपने-अपने बच्चों के बगल में बैठ सकती थीं. सफेद सूट में मुस्लिम समधन और लाल साड़ी में हिन्दू समधन. ऐसा दृश्य कहां देखने को मिलता है. आम परिवारों की मां और अम्मी जान के लिए आसान नहीं रहा होगा अपने बच्चों के अंतरधार्मिक विवाह को स्वीकार करना और उसे लेकर खुद को समझाना.

  • हिन्दू समधन और मुस्लिम समधन में ठनठन के किस्से और वैलेंटाइन डे के जलवे!

    हिन्दू समधन और मुस्लिम समधन में ठनठन के किस्से और वैलेंटाइन डे के जलवे!

    एक के सर पर आंचल और एक के सर पर दुपट्टा. एक साड़ी में और दूसरी सलवार सूट में. उम्र का फासला तो उतना नहीं रहा होगा मगर मजहब के फासले के मिटने की खिलखिलाहट दबी ज़ुबान में मुझ तक पहुंच रही थी. मैं अंतर्जातीय और अंतरधार्मिक ब्याह रचाने वाले जोड़ों के अनुभव से बातें कर रहा था. मुझसे रहा नहीं गया, दोनों की तरफ मुड़ गया. दोनों समधनें साथ ही बैठी थीं. चाहतीं तो अपने-अपने बच्चों के बगल में बैठ सकती थीं. सफेद सूट में मुस्लिम समधन और लाल साड़ी में हिन्दू समधन. ऐसा दृश्य कहां देखने को मिलता है. आम परिवारों की मां और अम्मी जान के लिए आसान नहीं रहा होगा अपने बच्चों के अंतरधार्मिक विवाह को स्वीकार करना और उसे लेकर खुद को समझाना.

  • जेएनयू प्रसंग से फैले उन्माद को पंचर करती है 'जॉली एलएलबी-2'

    जेएनयू प्रसंग से फैले उन्माद को पंचर करती है 'जॉली एलएलबी-2'

    एक ऐसे समय में जब न्यायपालिका पर सरकार के भारी पड़ने की ख़बरें आती रहती हैं, एक फिल्म न्यायपालिका की तरफ से जनता में अपनी गवाही देने आई है. फिल्म की कहानी आख़िरी सीन से शुरू होती है. कैमरा जब उठने के अंदाज़ में ज़ूम आउट होता हुआ कोर्ट रूम से बाहर आने लगता है, जाते-जाते जज साहब 3 करोड़ लंबित मुकदमों और इक्कीस हज़ार जजों की संख्या का हाल बताते हुए कहते हैं कि कभी-कभी तो ऐसे केस आते हैं जब लगता है कि बदबूदार कोर्ट रूम में अपने होने का मकसद सार्थक हो रहा है.

  • यूपी की जूलियटों, खोल दो अपनी लटों को...बचा लो अपने रोमियो को

    यूपी की जूलियटों, खोल दो अपनी लटों को...बचा लो अपने रोमियो को

    प्रेम तो रोमियो और जूलियट दोनों को हुआ था, लेकिन एंटी रोमियो दल बनाने वालों को रोमियो ही क्यों खलनायक दिखा, इसके कारण गूगल जगत में ज्ञात नहीं हैं. रोमियो और जूलियट की प्रेम कहानी की पृष्ठभूमि में परिवारों की दुश्मनी है, जिसे यूपी में हिन्दू और मुसलमान की दुश्मनी में बदल दिया गया है.

  • मुरादाबाद में मुकाबला : विलायती बनाम बादशाही दवाखाना

    मुरादाबाद में मुकाबला : विलायती बनाम बादशाही दवाखाना

    मुरादाबाद की दीवारों पर लिखे नारों से सावधान. आपको भ्रम हो सकता है कि यहां मुकाबला सपा, बसपा और भाजपा के बीच नहीं है बल्कि गुप्त रोग का प्रकट इलाज करने वाले बादशाही दवाखाना और विलायती दवाखाना के बीच है. चुनाव आयोग ने दीवारों पर लिखे तमाम दलों के नारों को पुतवा दिया है. लिहाजा नेताओं से ज्यादा सेक्स समस्या को दूर करने वालों के घोषणापत्र लाल और नीली स्याही से लिखे नजर आते हैं. मुरादाबाद स्टेशन रोड की दीवारों से लगा कि सेक्स रोग महामारी की शक्ल ले चुका है या ये हो सकता है कि दवाखाना वाले ही महामारी बन चुके हैं.

  • रवीश कुमार का ब्‍लॉग: ग़ैर जाटवों को समेटती बसपा के मुश्किल रास्ते

    रवीश कुमार का ब्‍लॉग: ग़ैर जाटवों को समेटती बसपा के मुश्किल रास्ते

    यह लड़का वहाँ खड़ा था जहाँ खड़े होने की जगह नहीं थी. दो टाँग वालों की भीड़ में वह एक टाँग पर खड़ा था. अपने नेता मायावती को एक झलक देखने की वह बेताबी क्या होती है, न तो इसे फ़िल्म स्टार की दीवानगी से समझ सकते हैं और न ही क्रिकेट स्टार की दीवानगी से.

  • जाट..भारत की राजनीति की बेचैन आत्मा!

    जाट..भारत की राजनीति की बेचैन आत्मा!

    सांप्रदायिक जूनून समुदायों को बदल देता है. हठी बना देता है. कोई भी पक्ष आसानी से अपनी बात से पीछे नहीं हटता है. पश्चिम उत्तर प्रदेश के जाटों का यह भोलापन मुझे बहुत पसंद आया कि वे अपने ग़ुस्से की बात को कबूल कर रहे हैं.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : इस बजट में स्‍मार्ट सिटी का क्‍या हुआ?

    प्राइम टाइम इंट्रो : इस बजट में स्‍मार्ट सिटी का क्‍या हुआ?

    आम बजट की समीक्षा का दौर चल रहा है. अभी चलेगा. हर साल स्मार्ट सिटी की धूम रहती थी मगर इस बार के बजट भाषण में स्मार्ट सिटी को जगह नहीं मिली. मीडिया भी लगता है कि स्मार्ट सिटी से थक गया है. भाषण में तो नहीं था, प्रमुख योजनाओं के व्यय के खांचे में जाकर देखा तो पता चला कि मोदी सरकार की इस महत्वकांक्षी योजना का बजट कम हुआ है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : किसानों के लिए आम बजट में क्या है ख़ास?

    प्राइम टाइम इंट्रो : किसानों के लिए आम बजट में क्या है ख़ास?

    सरकार मानती है कि मौजूदा वित्त वर्ष में खेती में 4.1 प्रतिशत की दर से विकास होने जा रहा है. सरकार किसानों की आमदनी डबल करना चाहती है. इसके लिए वित्त मंत्री ने 2017-18 के लिए 10 लाख करोड़ के कर्ज़ का प्रावधान किया है. छोटे और सीमांत किसानों को कोपरेटिव बैंक से जोड़ने के लिए कदम उठाए जाएंगे. प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसायटी को कोपरेटिव बैंक से जोड़ा जाएगा. इसके लिए तीन साल में 1900 करोड़ खर्च किये जाएंगे.

  • नोटबंदी का अर्थव्यवस्था पर कितना असर? मुख्‍य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियन से रवीश कुमार की बातचीत

    नोटबंदी का अर्थव्यवस्था पर कितना असर? मुख्‍य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियन से रवीश कुमार की बातचीत

    आज वित्त मंत्री अरुण जेटली आम बजट पेश करेंगे. इससे पहले मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियन ने एनडीटीवी ने ख़ास बातचीत की. उन्होंने नोटबंदी पर सरकार का नज़रिया रखा और कहा कि टैक्स कलेक्शन कम नहीं हुआ.

  • बीजेपी अपने इस विज्ञापन से ख़ुद जाल में फंस सकती है....

    बीजेपी अपने इस विज्ञापन से ख़ुद जाल में फंस सकती है....

    मंगलवार सुबह-सुबह बीजेपी उत्तरप्रदेश के फेसबुक पेज पर पार्टी के इस प्रचार पोस्टर को देखकर चुनावी विज्ञापनों की चालाकी पकड़ने का मन कर गया. इस पोस्टर में जो आंकड़े दिए गए हैं वे तथ्य के हिसाब से सही हैं मगर जिस रिपोर्ट के आधार पर दिए गए हैं, उसी में और भी ऐसे तथ्य हैं जो बीजेपी पर भी भारी पड़ सकते हैं.

  • जेएनयू में दिलीप यादव की भूख हड़ताल और चुप रहने की भेड़चाल

    जेएनयू में दिलीप यादव की भूख हड़ताल और चुप रहने की भेड़चाल

    दिलीप यादव जेएनयू में कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठा है. कई दिनों से भूख हड़ताल के कारण उसे अस्पताल में भर्ती न कराया गया होता तो शायद ही किसी की नजर जाती. दिलीप यादव जिस मुद्दे के लिए अपनी जान से खेल रहा है, कायदे से वे हिन्दी भाषी समाज के मुद्दे होने चाहिए थे. हिन्दी अखबारों के जिला संस्करणों में इसे छा जाना चाहिए था.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : फर्जीवाड़े का ये खेल कैसे चलता रहता है?

    प्राइम टाइम इंट्रो : फर्जीवाड़े का ये खेल कैसे चलता रहता है?

    एम्स और सफदरजंग अस्पताल में फ़र्ज़ी डॉक्टरों का एक गिरोह पकड़ा गया. पुलिस के मुताबिक ये गिरोह छह साल से फ़र्ज़ी आई कार्ड और लेटरहेड के सहारे काम कर रहा था. पैसे लेकर मरीज़ों को भर्ती करा देता था. मगर कोई डॉक्टर कैसे फ़र्ज़ी हो सकता है. ये फ़र्ज़ी डॉक्टर क्या होता है. क्या इसे भी दवा लिखने आती है, इंजेक्शन से लेकर ऑपरेशन आता होगा.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : टिकट बंटवारे में जमकर चला परिवारवाद

    प्राइम टाइम इंट्रो : टिकट बंटवारे में जमकर चला परिवारवाद

    अब मतदाता को तय करना है कि वो चुनाव में सरकार चुने या उम्मीदवार चुने. उम्मीदवार चुनते वक्त दल-बदल, परिवारवाद का भी इलाज करे. वैसे मतदाता का काम उम्मीदवार चुनना होता है, सरकार चुनना उसका काम नहीं है. आप मतदाता ही बता सकेंगे कि राजनीति और राजनीतिक दल के भीतर प्रतिभाओं को कौन ज़्यादा रोक रहा है. पैसा या परिवारवाद.