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रवीश कुमार


'रवीश कुमार' - 591 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • प्राइम टाइम इंट्रो : चक्रव्यूह में फंसे किसानों का रचनात्मक प्रदर्शन

    प्राइम टाइम इंट्रो : चक्रव्यूह में फंसे किसानों का रचनात्मक प्रदर्शन

    किसान चक्रव्यूह में फंसे हैं. ऐसा नहीं है कि सरकारें कुछ नहीं करती हैं लेकिन उनका करना काफी नहीं है. किसानों ने जो रचनात्मकता दिखाई है उससे उनकी बेचैनी समझ में आती है. कुछ लोग निंदा भी कर रहे होंगे कि इतना अतिवाद क्यों. कई बार करुणा दिखानी चाहिए. समझने की कोशिश करनी चाहिए कि क्यों कोई मुंह में चूहा दबा रहा है, ज़मीन पर दाल-भात बिछाकर खा रहा है. वो क्या कहना चाहता है, क्या पाना चाहता है. ऐसी ही ज़िद और रचनात्मकता चाहिए किसानों को अपनी समस्या से निकलने के लिए. प्रदर्शन के लिए भी और खेती के तौर तरीके बदल देने के लिए भी....ऐसा ही ज़ोर लगाना होगा महंगी खेती के चक्र से निकलने के लिए...

  • प्राइम टाइम इंट्रो : सीबीएसई के पास सभी स्कूलों की निगरानी के लिए क्या कोई तंत्र है?

    प्राइम टाइम इंट्रो : सीबीएसई के पास सभी स्कूलों की निगरानी के लिए क्या कोई तंत्र है?

    सीबीएसई ने फिर से दोहराया है कि स्कूल किताब, नोटबुक, स्टेशनरी, यूनिफार्म नहीं बेचेंगे और बोर्ड के नियमों का पालन करेंगे. स्कूल बिजनेस नहीं है बल्कि समाज सेवा है. सभी स्कूलों से कहा गया है कि वे एनसीईआरटी या सीबीएसई की किताबों का ही इस्तेमाल करें. अभिभावकों पर अलग किताबें खरीदने का दबाव न बनाएं. इस तरह के निर्देश तो राजस्थान के शिक्षा मंत्री ने भी जारी किए हैं. अब सवाल है कि जिन्हें बाध्य किया गया है अधिक दाम पर चीज़ें खरीदने के लिए, क्या उनके पैसे वापस होंगे? जिन्हें 800 की जगह 2000 के जूते खरीदने के लिए कहा गया है क्या उन्हें वापस होंगे? क्या सीबीएसई के पास सभी स्कूलों की निगरानी करने का कोई तंत्र है भी या हम सिर्फ उम्मीद करते रहते हैं?

  • प्राइम टाइम इंट्रो : स्कूलों पर जनसुनवाई - हर साल क्यों बढ़ती है इतनी फीस?

    प्राइम टाइम इंट्रो : स्कूलों पर जनसुनवाई - हर साल क्यों बढ़ती है इतनी फीस?

    schoolfee@ndtv.com पर हज़ारों ईमेल आए हैं. मैंने सारे तो नहीं मगर कई सौ मेल तो पढ़े ही हैं. यह तय है कि देश भर के प्राइवेट स्कूलों में इस साल 15 से 80 फ़ीसदी तक वृद्धि हुई है. हैदराबाद के एक स्कूल ने 50 फीसदी फ़ीस बढ़ा दी है. ये सब मैं ईमेल के आधार पर बता रहा हूं. क्या किसी माता-पिता की एक साल में सैलरी इतनी बढ़ती है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : स्कूलों पर जनसुनवाई - कॉशन मनी नहीं लौटाते स्कूल

    प्राइम टाइम इंट्रो : स्कूलों पर जनसुनवाई - कॉशन मनी नहीं लौटाते स्कूल

    एक ईमेल आया है कि अगर मैं स्कूलों पर जनसुनवाई एक महीना तक करता रहूं तब भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि स्कूल नेताओं और अधिकारियों के होते हैं. अदालतों के आदेश भी नहीं मानते. मैं स्वीकार करता हूं कि उनकी यह बात सही है, लेकिन आज न कल नेताओं को स्कूलों की मनमानी के सवाल पर आना होगा.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : क्‍या ट्रांसपोर्ट के नाम पर भी स्कूलों में लूट मची है?

    प्राइम टाइम इंट्रो : क्‍या ट्रांसपोर्ट के नाम पर भी स्कूलों में लूट मची है?

    आज कल कई स्कूल पीली वाली बस तो खरीदने लगे हैं मगर बहुत से बच्चे अभी भी वैन से ही जाते हैं. बस का किराया तय करने का कोई सर्वमान्य फार्मूला नहीं है. किसी किसी स्कूल में तो घर 100 मीटर दूर है फिर भी बस से जाना अनिवार्य है. ऐसा कुछ माता पिता ने ई-मेल कर बताया है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : क्या सभी स्कूलों में एक ही किताब होनी चाहिए?

    प्राइम टाइम इंट्रो : क्या सभी स्कूलों में एक ही किताब होनी चाहिए?

    बेशक कई प्राइवेट स्कूल हैं जिन्होंने अच्छे मूल्य और शिक्षा का मानदंड कायम किये हैं. शायद इन्हीं अच्छे स्कूलों के नाम और ब्रांडिंग का फायदा उठाकर दूसरे पब्लिक स्कूल माता-पिता का शोषण कर रहे हैं. इसलिए चंद अच्छे प्राइवेट स्कूलों का लाभ उनके नाम पर या उनके बहाने प्राइवेट स्कूलों को दुकान बनाकर चला रहे लोगों को नहीं मिलना चाहिए.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : चंपारण सत्‍याग्रह के 100 साल बाद भी क्‍या हम गांधी को जानते हैं?

    प्राइम टाइम इंट्रो : चंपारण सत्‍याग्रह के 100 साल बाद भी क्‍या हम गांधी को जानते हैं?

    15 अप्रैल 1917 के दिन गांधी मोतिहारी पहुंचे थे. मोतिहारी आने से पहले न तो ज़िले का नाम ठीक से जानते थे न वहां पहुंचने का रास्ता मालूम था. न उन्होंने कभी नील का पौधा देखा था. 18 अप्रैल को जब गांधी मोतिहारी कोर्ट की तरफ जा रहे थे, ये बताने कि वे ज़िला छोड़ने की आज्ञा का पालन नहीं करेंगे, किसानों की व्यथा सुनेंगे तो उस वक्त उनके साथ दो हज़ार किसान चल रहे थे.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : पाकिस्तान में एक और भारतीय को फांसी

    प्राइम टाइम इंट्रो : पाकिस्तान में एक और भारतीय को फांसी

    कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान में फांसी की सज़ा सुनाई गई है. पाकिस्तान कुलभूषण पर रॉ का जासूस होने का आरोप लगाता रहा है. पाकिस्तान का कहना है कि उसके पास बलूचिस्तान में भारत की दखलंदाजी और जासूसी के सबूत हैं. पाकिस्तान की सेना की इंटर सर्विसेज़ पब्लिक रिलेशन ने कहा है कि सेना की अदालत ने जाधव को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने और बलूचिस्तान में हिंसा भड़काने के आरोप में दोषी पाया है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : नकली गौरक्षकों के बहकावे में आने से पहले

    प्राइम टाइम इंट्रो : नकली गौरक्षकों के बहकावे में आने से पहले

    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और 6 राज्यों को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है. तहसीन पूनावाला और शहज़ाद पूनावाला ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है कि गौ रक्षा के नाम पर दलितों और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाले संगठनों पर उसी तरह प्रतिबंध लगाया जाए जैसे सिमी जैसे संगठन पर लगाया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा था लेकिन जवाब नहीं मिला तो नोटिस जारी कर दिया है.

  • प्राइम टाइम : गाय के नाम पर...

    प्राइम टाइम : गाय के नाम पर...

    6 अगस्‍त 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि 70-80 प्रतिशत गौरक्षक फर्जी होते हैं.' गौ रक्षा या गौ हत्या के संदर्भ में दो ढाई साल में जितनी भी बहसें हुई हैं उनमें सरकार की तरफ से सबसे बड़ा और प्रमाणिक बयान यही है कि 70-80 फीसदी गौ रक्षक फर्जी होते हैं. उम्मीद है प्रधानमंत्री अब भी अपनी इस राय पर कायम होंगे. हमें यह नहीं मालूम कि प्रधानमंत्री की इस अपील का राज्य सरकारों पर क्या असर पड़ा. कम से कम मौजूदा विवाद के संदर्भ में राजस्थान के गृह मंत्री ही बता सकते हैं कि उन्होंने प्रधानमंत्री की अपील पर फर्जी गौ रक्षकों या गौ रक्षा के नाम पर दुकान चलाने वालों की कोई फाइल बनाई है या नहीं.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : क्या रैंकिंग सही तस्वीर पेश करती है किसी कॉलेज या शिक्षा व्यवस्था की?

    प्राइम टाइम इंट्रो : क्या रैंकिंग सही तस्वीर पेश करती है किसी कॉलेज या शिक्षा व्यवस्था की?

    दावे के साथ तो नहीं कह सकता मगर इंडिया टुडे, आउटलुक और वीक जैसी अंग्रेजी की साप्ताहिक पत्रिकाओं ने सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों की रेटिंग शुरू की. पहली बार इंडिया टुडे ने कॉलेजों की रैंकिंग कब की थी इसका तो ध्यान नहीं मगर दस बारह साल से यह पत्रिका रेटिंग तो कर ही रही है. हर साल बेस्ट कॉलेज का विशेषांक आता था. नंबर वन कॉलेज की तस्वीर होती थी. खुशहाल छात्रों की तस्वीर होती थी, जिन्हें देखकर लगता था कि भारत में भी नंबर वन कॉलेज हैं. हम सबने इन विशेषांकों को देखा ही होगा. इसके बाद कई एजेंसियां और न्यूज़ चैनल नंबर वन, नंबर टू बनाने लगे जिनमें प्राइवेट कॉलेजों का बोलबाला होने लगा. फिर भी कुछ कॉलेज तमाम तरह की सूचियों में स्थायी भाव से बने रहे. ऐसा नहीं है कि उस वक्त सरकार कॉलेजों की ग्रेडिंग नहीं कर रही थी.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : यूपी में योगी सरकार का बड़ा फैसला, किसानों की कर्ज माफी का वादा पूरा

    प्राइम टाइम इंट्रो : यूपी में योगी सरकार का बड़ा फैसला, किसानों की कर्ज माफी का वादा पूरा

    यूपी के किसानों के लिए बड़ी खबर है. योगी मंत्रिमंडल की पहली कैबिनेट में किसानों की कर्ज माफी कर दी गई है. चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री ने वादा किया था कि बीजेपी सरकार के कैबिनेट की पहली बैठक में कर्जा माफ कर दिया जाएगा. योगी सरकार ने यह वादा पूरा कर दिया है. वादा लघु और सीमांत किसानों के बारे में ही था. स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि यूपी में दो करोड़ 15 लाख लघु और सीमांत किसान हैं. इन किसानों का 30,729 करोड़ रुपये का ऋण माफ कर दिया गया है. इन किसानों का एक लाख रुपये तक का फसली ऋण माफ किया जाएगा. जिन लोगों ने एक लाख तक की फसली ऋण लिया है उनके खाते से इतनी राशि माफ कर दी जाएगी. इसके अलावा सात लाख किसानों का एनपीए भी माफ होगा. यानी जो लोन किसान देने की हालत में नहीं हैं वह भी माफ कर दिया गया. सात लाख किसानों का एनपीए एमाउंट 5630 करोड़ माफ कर दिया गया है. कुल मिलाकर योगी सरकार ने 36, 359 हजार करोड़ किसानों का कर्ज़ा माफ कर दिया है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : क्या चुनने का अधिकार भी धर्म से जुड़ा है?

    प्राइम टाइम इंट्रो : क्या चुनने का अधिकार भी धर्म से जुड़ा है?

    शराब सोच रही थी कि वो बच जाएगी क्योंकि सबका ध्यान मांस पर है. जबकि आफ़त उस पर भी आई हुई थी. मांस ने चालाकी की. यूपी में घिर गया तो नॉर्थ ईस्ट पहुंच गया, फिर केरल चला गया. शराब फंस गई. राष्ट्रीय राजमार्ग यानी नेशनल हाइवे और राजकीय राजमार्ग यानी स्टेट हाइवे के 500 मीटर इधर-उधर अब कोई शराब की दुकान नहीं हुआ करेगी. आदेश सुप्रीम कोर्ट का है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : अदालतों में क्यों टलती रहती है सुनवाई?

    प्राइम टाइम इंट्रो : अदालतों में क्यों टलती रहती है सुनवाई?

    सुप्रीम कोर्ट से एक अच्छी शुरुआत हो रही है. इस बार गर्मी की छुट्टियों में 28 में से 15 जज तीन महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करेंगे. इसके लिए तीन तीन जजों की बेंच बनाई गई है. तीन तलाक, बहुविवाह के साथ-साथ व्हाट्सऐप, फेसबुक करने वालों की निजता के अधिकार पर भी सुनवाई होगी. एक और मामला है. अवैध रूप से जो शर्णार्थी आए हैं उनके बच्चों को नागरिकता दिये जाने के मामले में भी सुनवाई होगी.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : नोटबंदी के बाद मेहनत की कमाई बचाने की लड़ाई

    प्राइम टाइम इंट्रो : नोटबंदी के बाद मेहनत की कमाई बचाने की लड़ाई

    दिल्ली स्थित भारतीय रिजर्व बैंक के बाहर जमा लोगों की दास्तान नोटबंदी की सियासी कामयाबी के सामने कुछ भी नहीं है. फिर भी जब ऐतिहासिक कामयाबी की किताब लिखी जाएगी तो उम्मीद है ये लोग फुटनोट्स में दर्ज किये जायेंगे. फुटनोट्स मतलब किताब के पन्नों के सबसे नीचे लिखी छोटी छोटी जानकारियां.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : क्‍या चुनावी चंदे में बचेगी पारदर्शिता?

    प्राइम टाइम इंट्रो : क्‍या चुनावी चंदे में बचेगी पारदर्शिता?

    दिसंबर 2013 में लोकपाल कानून बन गया लेकिन 2017 आ गया, लोकपाल कौन है, इसका ज़िक्र न बैंकिंग सर्विस क्रोनिकल में मिलेगा न ही प्रतियोगिता दर्पण में क्योंकि लोकपाल बना ही नहीं है. आखिर जिस कानून को बनाने के लिए इतना घनघोर आंदोलन चला, उस कानून के बन जाने के बाद लोकपाल क्यों नहीं बना, लोकपाल का ढांचा क्यों नहीं बना. इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हुई है, फैसला सुरक्षित है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : क्‍या आधार अनिवार्य होने से भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम?

    प्राइम टाइम इंट्रो : क्‍या आधार अनिवार्य होने से भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम?

    1 फरवरी को लोकसभा में वित्त मंत्री ने वित्त विधेयक 2017 पेश किया था जिसपर 21 मार्च और 22 मार्च को चर्चा हुई और इसमें सुझाए गए संशोधनों और प्रावधानों को कानूनी रूप दिया गया. इसके तहत जो संशोधन पास हुए हैं उसे लेकर संसद से बाहर सवाल किया जा रहा है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : मरीज़ के परिजन क्यों आपा खो रहे हैं?

    प्राइम टाइम इंट्रो : मरीज़ के परिजन क्यों आपा खो रहे हैं?

    सवाल ख़ुद से पूछना चाहिए कि क्या हम हर हाल में हिंसा की संस्कृति के ख़िलाफ़ हैं. अगर हैं तो क्या सभी प्रकार की हिंसा के ख़िलाफ़ बोल रहे हैं. आख़िर क्यों है कि पुलिस और अदालत के रहते हुए कई संगठन गले में का पट्टा डालकर खाने से लेकर पहनावे की तलाशी लेने लगते हैं. क्यों लोग इलाज में चूक होने पर सीधा डॉक्टरों को ही मारने लगते हैं.