NDTV Khabar

रवीश कुमार


'रवीश कुमार' - more than 1000 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • नागरिकता संशोधन बिल में मुस्लिम शरणार्थी क्यों नहीं?

    नागरिकता संशोधन बिल में मुस्लिम शरणार्थी क्यों नहीं?

    वसुधैव कुटुंबकम वाले भारत में आपका स्वागत है. पूरी दुनिया को कुटुंब यानी परिवार मानने वाले भारत की संसद में एक विधेयक पेश हुआ है. जिस भारत के सभी धर्मों को मानने वाले लोगों ने दुनिया के कई देशों में स्वेच्छा से नागिरकता ली है, उन्हें मिली भी है, उनके भारत में एक विधेयक पेश हुआ है. जिन्हें हम नॉन रेजिडेंट इंडियन कहते हैं उन्हें भी यह जानना चाहिए कि नागिरकता संशोधन विधेयक के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश यानी सिर्फ तीन पड़ोसी देशों से प्रताड़ना यातना के शिकार हिन्दू, ईसाई, पारसी, जैन, सिख और बौद्ध को नागरिकता दी जाएगी. इसमें एक मज़हब का नाम नहीं है. मुसलमान का.

  • उन्नाव की पीड़िता का निधन हो गया, अगला पब्लिक ओपिनियन कब बनेगा?

    उन्नाव की पीड़िता का निधन हो गया, अगला पब्लिक ओपिनियन कब बनेगा?

    उन्नाव की पीड़िता का निधन हो गया. कोर्ट जाने के रास्ते उसे जला दिया गया. वो जीना चाहती थी लेकिन नहीं जी सकी. व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी और सोशल मीडिया के इस कथित पब्लिक ओपिनियन का दोहरापन चौबीस घंटे में ही खुल गया.

  • भारत बोला- पाकिस्तान की मेहमाननवाजी का लुत्फ उठाते हुए खुले में घूम रहा है 26/11 का मास्टरमाइंड हाफिज सईद

    भारत बोला- पाकिस्तान की मेहमाननवाजी का लुत्फ उठाते हुए खुले में घूम रहा है 26/11 का मास्टरमाइंड हाफिज सईद

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने मीडिया से कहा, 'हम सब जानते हैं कि इन हमलों का दोषी कौन है और हम यह भी जानते हैं कि इसका मास्टरमाइंड कौन है. हमें पता है कि मास्टरमाइंड खुले में घूम रहा है और पाकिस्तान की मेहमाननवाजी का लुत्फ उठा रहा है. हमने उनके साथ सारे सबूत सांझा किया है. कार्रवाई करना पाकिस्तान की जिम्मेदारी है. पाकिस्तान बहानेबाजी कर रहा है. वैश्विक समुदाय को लग रहा है कि पाकिस्तान मुंबई हमलों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए गंभीर नहीं है.'

  • क्या ऐसे ही भारत में इंसाफ़ होगा?

    क्या ऐसे ही भारत में इंसाफ़ होगा?

    फास्ट ट्रैक कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट के जजों को अपने कोर्ट रूम में ताला लगाकर शिमला चले जाना चाहिए और वहां बादाम छुहाड़ा खाना चाहिए. क्योंकि उनका काम खत्म हो गया है. क्योंकि सोशल मीडिया से लेकर संविधान की शपथ लेकर सासंद बने और टीवी पर आने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तेलंगाना पुलिस की एक असामाजिक करतूत को सही ठहरा दिया है. पुरुषों के अलावा बहुत सी महिलाएं भी उस पब्लिक ओपिनियन को बनाने में लगी हैं और अपने बनाए ओपिनियन की आड़ में इस एनकाउंटर को सही ठहरा रही हैं.

  • हिन्दी प्रदेश को कचरे के ढेर में बदलने के लिए एक और तैयारी पूरी : नागरिकता संशोधन विधेयक

    हिन्दी प्रदेश को कचरे के ढेर में बदलने के लिए एक और तैयारी पूरी : नागरिकता संशोधन विधेयक

    जिस तरह से धारा 370 की राजनीति कश्मीर के लिए कम हिन्दी प्रदेशों को भटकाने के लिए ज़्यादा थी उसी तरह से नागरिकता संशोधन बिल असम या पूर्वोत्तर के लिए हिन्दी प्रदेशों के लिए ज़्यादा है. इन्हीं प्रदेशों में एक धर्म विशेष को लेकर पूर्वाग्रह इतना मज़बूत है कि उसे सुलगाए रखने के लिए ऐसे मुद्दे लाए जाते हैं ताकि वह अपने पूर्वाग्रहों को और ठोस कर सके. लगे कि जो वह सोच रहा है उसके लिए ही किया जा रहा है. इसकी भारी क़ीमत देश चुका रहा है.

  • नागरिकता देने में धार्मिक आधार पर भेदभाव क्यों?

    नागरिकता देने में धार्मिक आधार पर भेदभाव क्यों?

    राष्ट्रवाद की चादर में लपेटकर सांप्रदायिकता अमृत नहीं हो जाती है. उसी तरह जैसे ज़हर पर चांदी का वर्क चढ़ा कर आप बर्फी नहीं बना सकते हैं. हम चले थे ऐसी नागरिकता की ओर जो धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करती हो, लेकिन पहुंचने जा रहे हैं वहां जहां धर्म के आधार पर नागरिकता का फैसला होगा. नागरिकता को लेकर बहस करने वाले लोग पहले यही फैसला कर लें कि इस देश में किस-किस की नागरिकता अभी तय होनी है

  • क्या आज का भारत हाजी हबीब के लिए नागरिकता रजिस्टर का विरोध करेगा?

    क्या आज का भारत हाजी हबीब के लिए नागरिकता रजिस्टर का विरोध करेगा?

    असम की आबादी साढ़े तीन करोड़ ही है. नागरिकता रजिस्टर के नाम राज्य ने 1600 करोड़ फूंक दिए. राज्य के करीब 4 साल बर्बाद हुए. 2019 के अगस्त में जब अंतिम सूची आई तो मात्र 19 लाख लोग उसमें नहीं आ सके. इनमें से भी 14 लाख हिन्दू हैं. बाकी 5 लाख के भी कुछ रिश्तेदार भारतीय हैं और कुछ नहीं. इन सबको फॉरेन ट्रिब्यूनल में जाने का मौका मिलेगा. उसके बाद तय होगा कि आप भारत के नागरिक हैं या नहीं. वहां भी केस को पूरा होने में छह महीने से साल भर कर समय लग सकता है.

  • बिना इंटरनेट कश्मीर में पत्रकारिता सूनी और डीयू में कैसे जी रहे हैं शिक्षक

    बिना इंटरनेट कश्मीर में पत्रकारिता सूनी और डीयू में कैसे जी रहे हैं शिक्षक

    कश्मीर में आम लोगों के लिए 120 दिनों से इंटरनेट बंद है. पांच अगस्त से इंटरनेट बंद है. कश्मीर टाइम्स की अनुराधा भसीन ने दस अगस्त को सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी कि बगैर इंटरनेट के पत्रकार अपना मूल काम नहीं कर पा रहे हैं तो उन्हें छूट मिलनी चाहिए. इस केस को लेकर पहली सुनवाई 16 अगस्त हुई और नवंबर के महीने तक चली. बहस पूरी हो चुकी है और फैसले का इंतज़ार है. मगर बगैर इंटरनेट के कश्मीर के पत्रकार क्या कर रहे हैं. वे कैसे खबरों की बैकग्राउंड चेकिंग के लिए तथ्यों का पता लगा रहे हैं. दुनिया में यह अदभुत प्रयोग हो रहा है. न्यूयार्कर को इसी पर रिसर्च करना चाहिए कि बगैर इंटरनेट के अखबार छप सकते हैं. कश्मीर के न्यूज़ रूम में इंटरनेट बंद है लेकिन सरकार ने पत्रकारों के लिए एक मीडिया सुविधा केंद्र बनाया है.

  • रवीश कुमार का ब्‍लॉग : JNU ने छात्रों के बीच एक सपना दिखाया है कि यूनिवर्सिटी JNU जैसी होनी चाहिए

    रवीश कुमार का ब्‍लॉग : JNU ने छात्रों के बीच एक सपना दिखाया है कि यूनिवर्सिटी JNU जैसी होनी चाहिए

    हर दौर में जेएनयू बरकार रहे. जेएनयू को बदनाम करने की कोशिशें चलती रहेंगी लेकिन इस यूनिवर्सिटी ने वाकई छात्रों के बीच एक सपना दिखाया है कि यूनिवर्सिटी जेएनयू जैसी होनी चाहिए.

  • विशेष तौर पर सक्षम लोगों से समाज का सलूक कैसा

    विशेष तौर पर सक्षम लोगों से समाज का सलूक कैसा

    तीन दिसंबर को International Day of Persons with Disabilities के तौर पर मनाया जाता है. 1992 में संयुक्त राष्ट्र ने यह दिन इसलिए तय किया था ताकि इसके बहाने आम लोगों और सरकारों के बीच अलग से शारीरिक और मानसिक तौर पर सक्षमता को लेकर समझ बने और उनके हिसाब से अधिकारों की समझ समाज में बने. ताकि अगर जब हम देखें कि कोई इमारत, कोई सड़क या बाज़ार या दफ्तर इस लिहाज़ से न हो तो पहला सवाल ये दिमाग में आए कि इसका न होना, संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है. कुछ दिन पहले मैं कैलिफोर्निया गया था. वहां के मांटेरे में एक पब्लिक बस देखी. मैं हैरान हो गया पूरी प्रक्रिया को देखकर.

  • मोदी जी देखिए उद्योगपति हर्ष गोयनका गोविंद प्रसाद की कविता ट्वीट कर रहे हैं...

    मोदी जी देखिए उद्योगपति हर्ष गोयनका गोविंद प्रसाद की कविता ट्वीट कर रहे हैं...

    यह गुड साइन नहीं है. उद्योगपति गोरख पांडे की कविता पढ़ने लग जाएं...क्या पता जोश में कोई बग़ावत कर बैठे. यह सामान्य कविता नहीं है. यह जनता के लिए लिखी गई है. जब मालिक पढ़ने लगे तो समझना चाहिए कि इस बार मुक्ति की पुकार ऊपर से आ रही है. सूट-बूट वाले अपनी टाई ढीली कर रहे हैं. बोलना चाहते हैं...

  • चुभने लगी है फ़ीस की सूई छात्रों को, अब IIMC के पत्रकारों ने किया आंदोलन

    चुभने लगी है फ़ीस की सूई छात्रों को, अब IIMC के पत्रकारों ने किया आंदोलन

    इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC), नई दिल्ली के छात्र ट्यूशन फीस, हॉस्टल और मेस चार्ज में बढ़ोत्तरी के खिलाफ कैंपस में 3 दिसंबर 2019 से हड़ताल कर रहे हैं.

  • क्या कॉर्पोरेट जगत सरकार से डरा हुआ है?

    क्या कॉर्पोरेट जगत सरकार से डरा हुआ है?

    एक प्रश्न है. 20 अंकों का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न है. भय का माहौल है यह बोलने से साबित होता है या नहीं बोलने से साबित होता है. क्योंकि राहुल बजाज के बोलने के बाद कहा जाने लगा कि भय का माहौल होता तो आप बोल नहीं पाते. चूंकि आप बोल सके इसलिए भय का माहौल नहीं है. आप बोल पा रहे हैं इसका सबसे बड़ा प्रमाण है कि अमित शाह विस्तार से जवाब दे रहे हैं. इससे साबित होता है कि भय का माहौल नहीं है.

  • राहुल बजाज के 'डर के माहौल' वाले बयान के बाद रवीश कुमार की चिट्ठी, CII FICCI के नाम

    राहुल बजाज के 'डर के माहौल' वाले बयान के बाद रवीश कुमार की चिट्ठी, CII FICCI के नाम

    राहुल बजाज के बयान को मामूली बताने के लिए अभी तक कुछ अख़बारों में विज्ञापन दे देना था जैसे टेक्सटाइल वालों ने विज्ञापन देकर बताया था कि कैसे उनका सेक्टर बर्बाद हो गया है. तुरंत बयान दें कि सब ठीक है और भारत सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाला देश है. जब आपकी कार की स्पीड साठ से उतर कर बीस पर आती है तब आपको पता चलता है कि कार सुपर स्पीड से चल रही है.

  • रवीश कुमार का ब्लॉग : नोटबंदी के बाद से ही इकॉनमी पर 'दूरगामी' की बूटी पिला रही है सरकार

    रवीश कुमार का ब्लॉग :  नोटबंदी के बाद से ही इकॉनमी पर 'दूरगामी' की बूटी पिला रही है सरकार

    नोटबंदी एक बोगस फ़ैसला था. अर्थव्यवस्था को दांव पर लगा कर जनता के मनोविज्ञान से खेला गया. उसी समय समझ आ गया था कि यह अर्थव्यवस्था के इतिहास का सबसे बोगस फ़ैसलों में से एक है लेकिन फिर खेल खेला गया. कहा गया कि दूरगामी परिणाम होंगे. तीन साल बाद उन दूरगामियों का पता नहीं है.

  • हैदराबाद रेप कांड की राजनीति और राजनीतिक समाज की धूर्तता

    हैदराबाद रेप कांड की राजनीति और राजनीतिक समाज की धूर्तता

    24,212 बलात्कार और यौन हिंसा के मामले इस साल के पहले छह महीने में दर्ज हुए हैं. यह आंकड़ा सुप्रीम कोर्ट में राज्यों के हाईकोर्ट और पुलिस प्रमुखों ने दिया. इसमें बच्चियों, किशोरियों के साथ बच्चे भी हैं लेकिन लड़कियों की संख्या अधिक है. यानी हर दिन बलात्कार और यौन हिंसा के 132 मामले होते हैं. 18 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ. क्या आप इन्हें सांप्रदायिक बना सकते हैं? जो सड़ चुके हैं उनका कुछ नहीं किया जा सकता. जो लोग ऐसी घटना के अपराधियों के मज़हब के सहारे ये खेल खेलते हैं उनका चेहरा कई बार बेनक़ाब हो चुका है.

  • रवीश कुमार ने अपने फेसबुक पर शेयर की एक ज़रूरी अपील

    रवीश कुमार ने अपने फेसबुक पर शेयर की एक ज़रूरी अपील

    आज मैं एक लड़की, एक ज़िम्मेदार नागरिक और एक पुलिस अधिकारी होने के नाते कुछ प्रिवेंटिव एक्शन व ज़रूरी कदम सभी को सजेस्ट करना चाहती हूं, जो हर हालत में हर लड़की और उनके परिजनों तक पहुंचें.

  • अर्थव्यवस्था का बुरा हाल, गिरती विकास दर बढ़ती मुश्किलें

    अर्थव्यवस्था का बुरा हाल, गिरती विकास दर बढ़ती मुश्किलें

    इस साल जीडीपी की दूसरी तिमाही के आंकड़े आ गए हैं. जीडीपी दर पिछली तिमाही से भी घट गई है. 5 प्रतिशत से घट कर 4.5 प्रतिशत पर आ गई है. पिछली 26 तिमाही में यह सबसे खराब प्रदर्शन है. इसके पहले 2012-13 की मार्च तिमाही में जीडीपी 4.3 प्रतिशत हो गई थी. उस वक्त यानी 2012-13 में जीडीपी एक दशक में सबसे कम थी.