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रवीश कुमार


'रवीश कुमार' - more than 1000 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • सोशल मीडिया के अभियान जमीन पर कहां?

    सोशल मीडिया के अभियान जमीन पर कहां?

    सेल्फी से क्या किसी योजना को बढ़ावा मिलता है, उसकी सफलता सुनिश्चित होती है, क्या सेल्फी से प्रेरणा मिलती है, अगर इसका जवाब हां में होता तो आज हमारे देश में प्रेरणा की बाढ़ आ चुकी होती. हर लम्हा सोशल मीडिया पर अनगिनत तादाद में सेल्फी अपलोड होती रहती है. गुरु पूर्णिमा के दिन भारत के मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने एक वीडियो मेसेज जारी किया है और सेल्फी विद गुरु करने की बात की है.

  • सबकुछ काफी ठीक है बस अर्थव्यवस्था में नौकरी, सैलरी और सरकार के पास पैसे नहीं हैं...

    सबकुछ काफी ठीक है बस अर्थव्यवस्था में नौकरी, सैलरी और सरकार के पास पैसे नहीं हैं...

    जून में निर्यात का आंकड़ा 41 महीनों में सबसे कम रहा है. आयात भी 9 प्रतिशत कम हो गया है जो कि 34 महीने में सबसे कम है. सरकार मानती है कि दुनिया भर में व्यापारिक टकरावों के कारण ऐसा हुआ है. सरकार ने 2018-19 और 2019-20 के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों पर सरचार्ज लगाकर 17000 करोड़ वसूले हैं.

  • हमारे समाज में बच्चियां कितनी सुरक्षित?

    हमारे समाज में बच्चियां कितनी सुरक्षित?

    इन सब व्यवस्थाओं के बाद भी 24,212 मामलों में से मात्र 911 मामलों में ही फैसला आ सका है. यह रिकॉर्ड बेहद साधारण है. ख़राब भी कहा जा सकता है. 11,981 बलात्कार के मामलों में जांच ही चल रही है. 4871 मामलों में पुलिस अदालत को रिपोर्ट सौंप सकी है. 6449 मामलों में ट्रायल शुरू हो सकी है. 911 मामलों में सज़ा हुई है. 

  • रवीश कुमार का ब्लॉग : लोगों की आंखें अंधी, कान बहरे, मुंह से ज़ुबान ग़ायब है, चीन में सच बताने के लिए कोई बचा नहीं

    रवीश कुमार का ब्लॉग : लोगों की आंखें अंधी, कान बहरे, मुंह से ज़ुबान ग़ायब है, चीन में सच बताने के लिए कोई बचा नहीं

    ''उन्मुक्त आवाज़ की जगह सिमट गई है. आप स्वतंत्र पत्रकार हैं, कहना ख़तरनाक हो गया है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शासन में ऐसे पत्रकार ग़ायब हो गए हैं. सरकार ने दर्जनों पत्रकारों को प्रताड़ित किया है और जेल में बंद कर दिया है. समाचार संस्थाओं ने गहराई से की जाने वाली रिपोर्टिंग बंद कर दी है. चीन में शी जिनपिंग के साथ मज़बूत नेता का उफान फिर से आया है. इसका नतीजा यह हुआ है कि चीन के प्रेस में आलोचनात्मक रिपोर्टिंग बंद हो गई है. यह संपूर्ण सेंसरशिप का दौर है. हमारे जैसे पत्रकार करीब करीब विलुप्त हो गए हैं'. 43 साल की पत्रकार ज़ांग वेनमिन का यह बयान न्यूयार्क टाइम्स में छपा है.

  • राम का नाम आराधना के लिए या हत्या के लिए?

    राम का नाम आराधना के लिए या हत्या के लिए?

    इस सवाल पर लौट आइये इससे पहले कि हम जवाब देने के बजाए नज़रें चुराने लगें. राम का नाम साधना और अराधना के लिए है या इसके नाम पर हत्या करने के लिए है. अभी भले लगता हो कि हमारी ड्राइंग रूम से दूर शायद दिल्ली से बहुत दूर कुछ लोगों का यह काम है और भारत जैसे देश में अपवाद हैं तो आप गलती कर रहे हैं. इनके पीछे की सियासी खुराक कहां से आ रही है, आप इतने भी भोले नहीं है कि सब बताना ही पड़े.

  • धोनी का लौटना देखा नहीं गया...

    धोनी का लौटना देखा नहीं गया...

    महेंद्र सिंह धोनी के रन आउट होने को लेकर अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट लिखी. रवीश कुमार ने लिखा- आज मन उदास है. रन आउट होकर धोनी को लौटता देख अच्छा नहीं लगा. धोनी को मैदान में उतरने से पहले बल्ले को सूंघते देखा. लगा जैसे समझा रहे हों कि आज साथ देना. आज खेलना है.

  • कर्नाटक के बहाने विपक्ष के खात्मे का प्लान

    कर्नाटक के बहाने विपक्ष के खात्मे का प्लान

    कर्नाटक कांग्रेस के नेता डीके शिवकुमार मुंबई के रेनासां होटल में जाना चाहते थे, मुंबई एयरपोर्ट से सीधे पोवई स्थित रेनेसां होटल मुंबई पहुंच गए. पुलिस के हाथ में विधायकों का पत्र था. शिवकुमार के हाथ में होटल में कमरे की बुकिंग का कागज़. पुलिस ने शिवकुमार को रोक दिया. कहा कि विधायको ने पत्र लिखा है कि उन्हें सुरक्षा चाहिए, क्योंकि उन्हें डर है कि शिवकुमार और मुख्यमंत्री कुमारस्वामी कभी भी अंदर आ सकते हैं. हम भारत के भोले भाले लोग विपक्ष की सरकारों को निरंगत ढ़हते ढ़हाते देख रहे हैं.

  • आर्थिक सर्वे और बजट के आंकड़ों में अंतर कैसे?

    आर्थिक सर्वे और बजट के आंकड़ों में अंतर कैसे?

    श्रीनिवासन जैन ने एक रिपोर्ट की है. बजट से 1 लाख 70 हज़ार करोड़ का हिसाब ग़ायब है. प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य रथिन रॉय ने आर्थिक सर्वे और बजट का अध्ययन किया. उन्होंने देखा कि आर्थिक सर्वे में सरकार की कमाई कुछ है और बजट में सरकार की कमाई कुछ है. दोनों में अंतर है. बजट में राजस्व वसूली सर्वे से एक प्रतिशत ज्यादा है. यह राशि 1 लाख 70 हज़ार करोड़ की है, क्या इतनी बड़ी राशि की बजट में चूक हो सकती है.

  • यशंवत सिन्हा इस तरह से अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में बने थे वित्त मंत्री

    यशंवत सिन्हा इस तरह से अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में बने थे वित्त मंत्री

    इसकी जानकारी खुद यशवंत सिन्हा ने ट्विटर पर अपने ट्वीट के जरिए दी. उन्होंने ट्वीट कर लिखा, ''मेरी आत्मकथा 'रिलेंटलेस' (Relentless) पुस्तक 15 जुलाई को पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी द्वारा आईआईसी के मल्टिपर्पज हॉल में शाम 6 बजे विमोचन किया जाएगा.''

  • 'आतंकवाद को वैधता' देने वाली संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट पर भारत ने जताया कड़ा ऐतराज

    'आतंकवाद को वैधता' देने वाली संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट पर भारत ने जताया कड़ा ऐतराज

    इस रिपोर्ट के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि ओएचसीएचआर की रिपोर्ट की अगली कड़ी जम्मू कश्मीर की स्थिति पर उसके पिछले झूठे और राजनीति से प्रेरित विमर्श की निरंतरता भर है.

  • फ़ीस वृद्धि का दौर शुरू हो गया, चुनाव ख़त्म हो गया है...

    फ़ीस वृद्धि का दौर शुरू हो गया, चुनाव ख़त्म हो गया है...

    नेशनल लॉ स्कूल की फ़ीस बढ़ा दी गई है. हर साल की फ़ीस 50 हज़ार महंगी हो गई है. डिजिटल इंडिया के छात्रों को इंटरनेट फ़ीस साढ़े बारह हज़ार देने होते हैं और लाइब्रेरी फ़ीस के लिए दस हज़ार. 27 फ़ीसदी वृद्धी हुई है. पांच साल की पढ़ाई ढाई लाख और महंगी हो गई है. छात्रों ने मुझे मैसेज किया है.

  • अपने समय से पीछे रह गए लोगों के लिए समय से आगे की ख़बरें

    अपने समय से पीछे रह गए लोगों के लिए समय से आगे की ख़बरें

    उस छोटी सी जगह में रोज़ 9 से 10,000 गाड़ियां आती हैं. 1500 बसें आती हैं. 80,000 लोग आते हैं. 14 से 24 घंटे तक कतार में इंतज़ार करते हैं. तब जाकर दर्शन करते हैं. व्यस्तता से भरी इस दुनिया के इसी समय में दर्शन के लिए 24 घंटे कतार में होने का धीरज कहीं बचा हुआ है. वैसा ही जैसा हज़ारों वर्ष पूर्व रहा होगा.

  • 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए ये बजट कितना प्रभावी?

    5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए ये बजट कितना प्रभावी?

    मोदी सरकार पार्ट- 2 का पहला बजट आ गया. चुनाव ख़त्म हो चुका है इसलिए बजट में हल्ला हंगामा कम है. इसका संदेश यह भी है कि अगर सरकार के आर्थिक क्रिया कलापों को देखना समझना है तो बजट के बाहर भी देखना होगा. जिन्हें सिर्फ बजट में देखने की आदत है उनके लिए बजट में भाषण भी है. सवाल है बजट जैसे विस्तृत दस्तावेज़ को साबुन तेल के दामों में उतार-चढ़ाव से देखा जाए या उन नीतियों को लागू करने के लिए पैसे के इंतज़ाम और पैसे के ख़र्च के हिसाब से देखा जाए.

  • मोदी सरकार का ये आर्थिक सर्वे क्या इशारा कर रहा है?

    मोदी सरकार का ये आर्थिक सर्वे क्या इशारा कर रहा है?

    अर्थव्यवस्था की हालत क्या है. जो ख़बरें बिजनेस अखबारों में छप रही हैं उन्हें देखकर लगता है कि चुनौतियां गंभीर होती जा रही हैं. लगातार 9 महीने से ऑटोमोबिल कंपनियों में उत्पादन ठप्प है. लघु एवं मझोले उद्योग का विकास रुक गया है. इनके लिए लोन की कमी हो गई है. जिन संस्थाओं से लोन मिलता है, उनकी हालत खराब है. एकर आरटीआई के अनुसार वित्त वर्ष 2019 में दूसरी तरफ मुदा लोन का एनपीए 126 प्रतिशत बढ़ा है. बैंकों की अपनी पूंजी लड़खड़ा रही है. वो सरकार की मदद पर निर्भर है.

  • पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव मामले में 17 जुलाई को आएगा फैसला

    पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव मामले में 17 जुलाई को आएगा फैसला

    पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव मामले में 17 जुलाई को फैसला आएगा.इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा था, 'कुलभूषण मामले में कुछ हफ्तों में फैसले की घोषणा होगी. इस केस में मौखिक जानकारी साझा कर दी गई है. फैसले की घोषणा इंटरनेशनल कोर्ट करेगा. तारीख की घोषणा भी उन्हीं के द्वारा होगी.'

  • ...और इस तरह जलवायु परिवर्तन के प्रश्नों पर बनता गया मेरा ज्ञान तंत्र

    ...और इस तरह जलवायु परिवर्तन के प्रश्नों पर बनता गया मेरा ज्ञान तंत्र

    नदियों और जल के बारे में अनुपम मिश्र से कितना कुछ जाना. उनके संपर्क के कारण इस विषय से जुड़े कई बेहतरीन लोगों से मिला. चंडी प्रसाद भट्ट जी के संपर्क में आया, उनके काम को जाना. अनुपम जी के कारण ही ऐसे कई लोगों को जाना जो इस समस्या की आहट को पहले पहचान चुके थे और बचाने की पहल कर रहे थे. 'आज भी खरे हैं तालाब' का मुक़ाबला नहीं.

  • CTN यानि CLEAN THE NATION, ठीक जैसे ऑरवेल के 1984 की THOUGHT POLICE

    CTN यानि CLEAN THE NATION, ठीक जैसे ऑरवेल के 1984 की THOUGHT POLICE

    नाज़ी दौर के इतिहास को पलटिए आपको एक शब्द मिलेगा Cleansing जिसे यहूदियों की सफाई के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता था. उनकी बस्तियों की Cleansing से लेकर नस्ल की Cleansing तक का संदर्भ आपको जगह-जगह मिलेगा. आबादी के एक हिस्से को मिटा देने को Cleansing कहते हैं. जार्ज ऑरवेल की एक किताब है 1984. उसका कोई भी पन्ना आप पढ़ लें. एक Thought Police का ज़िक्र आता है, विचार पुलिस कह सकते हैं.

  • क्या गांधी परिवार से बाहर कोई कांग्रेस का नेतृत्व कर सकता है?

    क्या गांधी परिवार से बाहर कोई कांग्रेस का नेतृत्व कर सकता है?

    कितनी आसानी से कई नेता कांग्रेस छोड़ कर बीजेपी में चले गए. आना जाना लगा रहता है मगर एक दूसरे दल में जाने की बेचैनी बता रही है कि कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता के भीतर कांग्रेस नहीं है. उसकी विचारधारा बहुत कमज़ोर पड़ चुकी है. पार्टी में बचे हुए नेता पार्टी के लिए कम बीजेपी में जाने के लिए ज़्यादा बचे हुए हैं. उनके भीतर अगर कांग्रेस होती तो वे रूकते.