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राकेश कुमार मालवीय


'राकेश कुमार मालवीय' - 44 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • क्या स्कूल में श्रम करना अपराध है...?

    क्या स्कूल में श्रम करना अपराध है...?

    बुनियादी तालीम इस जमाने में बीते दिनों की बात ही लगती है, क्योंकि इसमें श्रम पर जोर दिया गया है. खेती, किसानी, साफ-सफाई, खाना बनाने, सिलाई, कढ़ाई, चित्रकारी और बहुत सारी गतिविधियों पर जोर दिया गया है, अब ये काम यदि स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल कर लिए जाएं, तो अख़बार या टीवी चैनल की ख़बर बनते देर नहीं लगेगी.

  • क्या उचित है 14 साल की लड़की से 52 साल के आदमी की शादी

    क्या उचित है 14 साल की लड़की से 52 साल के आदमी की शादी

    अक्षय तृतीया के दिन छपे अखबार में पहले पन्ने पर खबर आई. शीर्षक है '14 साल की लड़की की 52 साल के वकील से शादी वैध : कोर्ट' . इसकी सबहेडिंग में लिखा गया है कि 'बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि हम युवती का भला देख रहे हैं अब समाज में कोई और उसे पत्नी के रूप में स्वीकार नहीं करेगा.' देश में हिंदू कैलेंडर की जो तारीख बाल विवाह के लिए बदनाम मानी जाती है उस दिन पहले पन्ने पर छपी यह खबर हमें सोचने पर मजबूर करती है. बाल विवाह के तमाम कानूनों, प्रावधानों और अभियानों के बीच यह निर्णय एक व्यक्ति का जीवन बचाने के लिए भले ही इस शादी को वैध करार दे रहा हो, लेकिन आप सोचिए कि इस निर्णय का संदेश क्या जाने वाला है?

  • लो ये नोटबंदी फिर जवाब मांगने लगी?

    लो ये नोटबंदी फिर जवाब मांगने लगी?

    एक अखबार के पहले पन्ने पर यह खबर है कि नोटबंदी के निर्णय पर देश का रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया सहमत नहीं था. नोटबंदी के ढाई घंटे पहले तक भी इस निर्णय पर सवाल किए गए थे और शंका जताई गई थी कि जिस लक्ष्य को लेकर यह फैसला लिया जा रहा है वह इससे हासिल नहीं होगा! यानी काला धन के लौटने पर आशंका जताई गई थी. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में सूचना के अधिकार के तहत एक आवेदन से यह बात ऐन चुनाव के वक्त एक बार फिर सामने आ गई है. हालांकि मुख्यधारा के अखबारों ने इस खबर को कोई खास तवज्जो नहीं दी.

  • Blog: इस कुएं को देखें और सोचें कि हम मनुष्य हुए या नहीं?

    Blog: इस कुएं को देखें और सोचें कि हम मनुष्य हुए या नहीं?

    महात्मा गांधी ने कहा था ‘जब तक हम अछूतों को गले नहीं लगाएंगे हम मनुष्य नहीं कहला सकते. मगर बुंदेलखंड के इस गांव की दशा दयनीय है.

  • पातालकोट बिका बाज़ार में...

    पातालकोट बिका बाज़ार में...

    सत्तर साल पहले के भारतीयों ने भी जब संविधान की प्रस्तावना आत्मार्पित की, तब समता, स्वतंत्रता, न्याय की बात का बड़ा ध्यान रखा. लेकिन उदारीकरण के बाद के केवल तीसरे दशक तक ही पूंजी के तांडव ने वह तमाशा किया, जिसमें केवल अपने लाभ के लिए संसाधनों पर कब्जा, कब्जे से अधिकतम लूट. लूट किसी भी कीमत पर. इसकी ताजा मिसाल पातालकोट का वह हिस्सा है, जिसे किसी और ने नहीं, सरकार ने एक कंपनी को साहसिक गतिविधियों के नाम पर दिया. कंपनी ने बहुत बेहयाई से वहां अपने कब्जे की बागड़ भी लगाकर 'लाभ कमाने की फैक्टरी' भी चालू कर ली.

  • जानिए भारतरत्न नानाजी देशमुख के गोद लिए गांव का सीधा हाल

    जानिए भारतरत्न नानाजी देशमुख के गोद लिए गांव का सीधा हाल

    नानाजी देशमुख ने सक्रिय राजनीति से अवकाश लेकर जो क्षेत्र चुना, उसमें सतना का मझगवां इलाका भी है. यहां उनकी संस्था ने कृषि विज्ञान केन्द्र की स्थापना की. यह इलाका चित्रकूट से 30 किलोमीटर दूर है. चित्रकूट में ग्रामोदय विश्वविद्यालय की स्थापना की. उस वक्त इस इलाके में डाकुओं का खासा आतंक था. इस क्षेत्र में उन्होंने ग्रामीण विकास का जमीनी काम शुरू किया.

  • यह कैसा गणतंत्र बना रहे हैं हम ?

    यह कैसा गणतंत्र बना रहे हैं हम ?

    ऐसे में हम गणतंत्र का गुणगान जरूर कर सकते हैं, लेकिन 2 साल 11 महीने और 18 दिन में 166 बैठकों के बाद बनी संविधान नाम की किताब की मूल भावना के साथ जो कुछ भी हो रहा है, उसे देश कैसे स्वीकार कर सकता है ? अमीरी—गरीबी की खाई को केवल इस तर्क से तो नहीं स्वीकार किया जा सकता कि यह खाई तो हमेशा से ही रही है, नीति—नियंताओं को यह देखना होगा कि यह खाई लगातार बढ़ती जा रही है.

  • भोपाल गैसकांड की बरसी : देश के दूसरे सबसे स्वच्छ शहर में आज भी मौजूद है सैकड़ों टन ज़हरीला कचरा

    भोपाल गैसकांड की बरसी : देश के दूसरे सबसे स्वच्छ शहर में आज भी मौजूद है सैकड़ों टन ज़हरीला कचरा

    आइए, बरसी आ गई है, जो लोग इसे भूल गए हैं, या जिन्हें इस बारे में कुछ पता नहीं है, उन्हें बता दें कि 1984 में 2 और 3 दिसंबर के बीच की रात भोपाल शहर पर कहर बनकर टूटी थी. यह हादसा दुनिया की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक था, जब यूनियन कार्बाइड कारखाने से एक खतरनाक ज़हरीली गैस रिसी थी, और पूरे शहर को अपनी चपेट में ले लिया था. इस मामले में सरकार ने 22,121 मामलों को मृत्यु की श्रेणी में दर्ज किया था, जबकि 5,74,386 मामलों में तकरीबन 1,548.59 करोड़ रुपये की मुआवज़ा राशि बांटी गई, लेकिन क्या मुआवज़ा राशि बांट दिया जाना पर्याप्त था.

  • देश के अन्नदाता दिल्ली आए, हम रोशनी का इंतजाम भी न कर पाए

    देश के अन्नदाता दिल्ली आए, हम रोशनी का इंतजाम भी न कर पाए

    देश भर के कोने-कोने से जब हजारों किसान दिल्ली के दिल से अपनी व्यथा-कथा कहने आए तो क्या देश की राजधानी किसानों के लिए मामूली रोशनी का इंतजाम नहीं कर पाई. रामलीला मैदान के तकरीबन आधे हिस्से में लगा किसानों का शामियाना रोशनी से उतनी ही दूर था जितनी दूरी अक्सर शहर और गांवों में रहती है. 

  • विश्व स्तनपान सप्ताह पर विशेष: एक छोटे से कारण से भारत की अर्थव्यवस्था का करोड़ों का नुकसान

    विश्व स्तनपान सप्ताह पर विशेष: एक छोटे से कारण से भारत की अर्थव्यवस्था का करोड़ों का नुकसान

    हम सोचते हैं कि देश को बड़े मामलों से नुकसान पहुंचता है, जब शेयर बाजार बैठ जाता है, डॉलर के मुकाबले रुपया गिर जाता है, वगैरह-वगैरह. पर सोचिए कि एक छोटी सी आदत का न होना, या उसके विषय में भ्रांति होने से भी देश भारी गड्ढे में चला जाता है.

  • जो भूख से मरीं, सिर्फ दिल्ली की नहीं, देश की नागरिक थीं

    जो भूख से मरीं, सिर्फ दिल्ली की नहीं, देश की नागरिक थीं

    जिस दिन देश की राजधानी दिल्ली में तीन बच्चियों की भूख से मौत की ख़बर पढ़ी, ठीक उसी दिन अख़बार में एक और ख़बर थी कि अकेले मध्य प्रदेश में 55 लाख टन गेहूं सरप्लस है.

  • जी हां, यह हिंदुस्तान का ही एक मकान है...

    जी हां, यह हिंदुस्तान का ही एक मकान है...

    तस्वीर देखकर आप तय कर लीजिए कि इसे घर कहा जाएगा या नहीं कहा जाएगा. हम सोचते हैं कि केवल शहरों में ही बेघरबार लोग सड़कों पर सोते हैं, जिन्हें सड़कों या गलियारों में सोने से रोकने के लिए कीलें ठुकवा दी जाती हैं.

  • टीबी को घेर लि‍या है 'नि‍जीकरण की बीमारी' ने

    टीबी को घेर लि‍या है 'नि‍जीकरण की बीमारी' ने

    यह भी तय कि‍या जाना चाहि‍ए कि यदि 2025 तक देश से टीबी खत्‍म हो रहा है तो क्‍या उसे इस तेज गति से अपना दायरा फैला रहीं और लोगों को गरीबी में धकेल रहीं नि‍जी स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं ले जाएंगी, या इसका रास्‍ता स्‍वास्‍थ्‍य बीमा के जरि‍ए खोजा जाएगा, जि‍सका एक वि‍श्‍लेषण यह भी कहता है कि यह सार्वजनि‍क स्‍वास्‍थ्य सेवाओं के लि‍ए घातक ही साबि‍त होगा.

  • एक साल में कहां गायब हो गए 63 हजार बच्चे?

    एक साल में कहां गायब हो गए 63 हजार बच्चे?

    नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की 2016 की रिपोर्ट में मिसिंग चिल्ड्रन के बारे में जो आंकड़े आते हैं उनमें सबसे ज्‍यादा चौंकाने वाला तथ्य यह है कि एक साल में इस सेक्शन के तहत गायब होने वाले बच्चों की संख्या में 63407 बच्चे और जुड़ गए हैं.

  • क्या ट्रैक्टर के लिए कार जैसा लोन मिल सकता है ?

    क्या ट्रैक्टर के लिए कार जैसा लोन मिल सकता है ?

    सवाल यह है कि जब मध्‍यमवर्गीय नौकरीपेशा वर्ग पर बैंक इतनी आसानी से भरोसा कर सकती है, जि‍स पर भी मंदी की मार से नौकरी जाने का खतरा लगातार मंडराता ही रहता है, तब वह कि‍सानों पर ऐसा भरोसा क्‍यों नहीं कर पाती ? क्‍या बैंकों का नजरि‍या भी यह नहीं बताता कि भारत के अंदर कि‍सानों की हालत इतनी ज्‍यादा खराब है, जि‍स पर बैंक भरोसा ही नहीं करते और उनको उस ‘फोर पीज’ से भी नीचे की कैटेग‍री में डाल दि‍या गया है, जि‍न्‍हें बैंक लोन देने से कतराते हैं. आपको शायद याद हो, क्‍योंकि यह ज्‍यादा पुरानी बात नहीं जब खेती को जीवन जीने के संसाधनों में ‘सबसे उत्तम’ माना-कहा जाता था.

  • कैसे पूरा होगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गरीबी हटाओ का नारा?

    कैसे पूरा होगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गरीबी हटाओ का नारा?

    इधर देश के प्रधानमंत्री ने गरीबी हटाओ का नारा दिया और उसके दो दिन बाद ग्लोबल हंगर इंडेक्स ने बताया कि भारत इसमें तीन अंक नीचे खिसक गया है.

  • अब भी अधूरा है एक शि‍क्षक का 'दिवास्वप्न'... जानते हैं यह क्या है?

    अब भी अधूरा है एक शि‍क्षक का 'दिवास्वप्न'... जानते हैं यह क्या है?

    शिक्षक दिवस के मौके पर आप 85 पेज की एक छोटी सी किताब को पढ़कर इतना सब कुछ हासिल कर सकते हैं जो न केवल आपकी कक्षाओं में अपितु जीवन में बड़े रूप में काम आ सकता है

  • रियल लाइफ में भी ‘मेरा बाप चोर है!’

    रियल लाइफ में भी ‘मेरा बाप चोर है!’

    आपको दीवार फिल्म याद है! दीवार फिल्म का अमिताभ बच्चन यानी ‘विजय’ याद है. आपको विजय के हाथ पर लिखा ‘मेरा बाप चोर है’ याद है? होगा ही… आखिर इसी फिल्म के बलबूते तो सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का करियर परवान चढ़ा. अलबत्ता हाथ पर लिखी यह इबारत रील पर सबसे बड़ा ड्रामा साबित हुई.