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'विचारपेज' - 18 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक गिरे मनोबल वाले 'सैनिक' का खुला खत

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक गिरे मनोबल वाले 'सैनिक' का खुला खत

    हम पिछले काफी समय से ऐसी बातें सुनते आ रहे हैं जिसे लेकर भारतीय सेना के जवानों, अधिकारियों या कहें कि पूरी सेना का मनोबल गिरता है.

  • ‘रंगून’ के बाद कंगना और उनकी बेबाकी से बॉलीवुड कैसे निपटेगा?

    ‘रंगून’ के बाद कंगना और उनकी बेबाकी से बॉलीवुड कैसे निपटेगा?

    रंगून को जो शुरूआती प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं उससे लगता नहीं कि यह फिल्म कंगना की पिछली हिट तनू वेड्स मनु 2 के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की बराबरी कर पाएगी. इसी बॉक्स ऑफिस हिट की बदौलत कंगना ने रंगून में अपने पुरुष साथी कलाकार से एक रुपये ज्यादा की मांग करने की हिम्मत दिखाई थी.

  • यूपी की जूलियटों, खोल दो अपनी लटों को...बचा लो अपने रोमियो को

    यूपी की जूलियटों, खोल दो अपनी लटों को...बचा लो अपने रोमियो को

    प्रेम तो रोमियो और जूलियट दोनों को हुआ था, लेकिन एंटी रोमियो दल बनाने वालों को रोमियो ही क्यों खलनायक दिखा, इसके कारण गूगल जगत में ज्ञात नहीं हैं. रोमियो और जूलियट की प्रेम कहानी की पृष्ठभूमि में परिवारों की दुश्मनी है, जिसे यूपी में हिन्दू और मुसलमान की दुश्मनी में बदल दिया गया है.

  • मैं तो एक 'निकम्मा' पंजाबी मुंडा था, बिहार ने मुझे बचा लिया : पटना DIG की कलम से...

    मैं तो एक 'निकम्मा' पंजाबी मुंडा था, बिहार ने मुझे बचा लिया : पटना DIG की कलम से...

    बिहार के सतही और जल्दबाज़ी से किए गए आकलन में अक्सर इस जगह और यहां के लोगों की गर्मजोशी, प्यार और मेहरबानी का ज़िक्र नहीं किया जाता - खासतौर पर अगर आप यहां बाहर से रहने आए हैं.

  • देशभक्ति, एटीएम, नोटबंदी, सोशल मीडिया और फ़ुटबॉल में लुधकने का महात्म

    देशभक्ति, एटीएम, नोटबंदी, सोशल मीडिया और फ़ुटबॉल में लुधकने का महात्म

    धकना दरअसल एक व्यसन है, इसका असल मज़ा झुंड में ही है, चुनौती सिर्फ़ ये है कि इसकी शेल्फ़ लाइफ़ बहुत छोटी होती है. सिर्फ़ टाइमलाइन जितनी लंबी. ट्रेंडिंग लिस्ट जितनी बड़ी. तो ऐसे मे ज़रूरी है कि नए-नए धिक्कार-योग्य व्यवहार, शर्मनाक बयान, ओछे भाषण और टुच्चे ट्वीट की सप्लाई होती रहे.

  • एक त्रासदी जो हमसे सवाल करती है...

    एक त्रासदी जो हमसे सवाल करती है...

    भोपाल की ज़मीन और उस खूनी कारखाने में अब भी मौजूद हजारों टन जहरीले कचरे को हटाए बिना क्या भोपाल असल मायनों में स्वच्छ हो सकता है.

  • कहीं अमरीका वाला ट्रंप, दिल्ली वाला मंकी मैन तो नहीं है !

    कहीं अमरीका वाला ट्रंप, दिल्ली वाला मंकी मैन तो नहीं है !

    भारत में भी हर नेता को घूर रहे हैं, कहीं ये ट्रंप तो नहीं है, कहीं यही तो ट्रंप नहीं है लेकिन कैसे बोलें. आए दिन ट्रंप टाइप बयानों पर चैनलों की रातें रंगीन हो जाती हैं. क्या वो नेता ट्रंप हो सकता है जिसने कहा था कि जे एन यू में हर दिन हज़ारों शराब की बोतलें और कंडोम बिखरे मिलते हैं.

  • धान के नाम में बहुत कुछ रक्खा है...!!

    धान के नाम में बहुत कुछ रक्खा है...!!

    जापान में धान को प्रधानता दी जाती है. ऐसी बात नहीं है कि वहां अन्य फसलों की खेती नहीं होती है लेकिन यह बड़ी बात है कि वहां खेत का अर्थ धान के खेत से जुड़ा है. वहां धान की आराधना की बड़ी पुरानी परंपरा है.

  • रिपोर्टर की डायरी : गुस्सा, बेरुख़ी और बदसलूक़ी...कश्मीर

    रिपोर्टर की डायरी : गुस्सा, बेरुख़ी और बदसलूक़ी...कश्मीर

    रिपोर्टिंग करते हुए मैं श्रीनगर ही नहीं बल्कि बारामुला, सोपोर, कुलगाम, पट्टन और अनंतनाग जैसे इलाक़ों में गई वहां भी कई लोगों से बात की. लोगों में बेरुख़ी भी देखी और लाचारी भी.

  • #युद्धकेविरुद्ध : यकीन मानिए देशभक्ति इससे भी पहचानी जाएगी !

    #युद्धकेविरुद्ध : यकीन मानिए देशभक्ति इससे भी पहचानी जाएगी !

    सतर्क रहिए, सुरक्षित रहिए. सुरक्षा के हर संभव इंतजाम कीजिए. लेकिन असली दुश्मनों को भी पहचानिए. पहचानिए कि नौकरशाही की कौन सी कुर्सी देश के लिए खतरनाक काम कर रही है.

  • अखिलेश यादव ने हिंदुस्तानी बेटों को सांत्वना दी है 'हम same to same हैं'

    अखिलेश यादव ने हिंदुस्तानी बेटों को सांत्वना दी है 'हम same to same हैं'

    शुरुआत में दबे-कुचले स्वर में आज्ञाकारी पुत्र जैसे साउंडबाइट देते अखिलेश बाद में मुखर भी हुए तो भी बलात्कारियों का बचाव करते बयान नहीं सुने, अपने सहयोगियों को चोर कहते नहीं सुना. मायावती की चुटकी भी बुआ कहते हुए ही सुनी है. तो ऐसे विनम्रता से विद्रोह करने वाले अखिलेश दबे कुचले बेटों के लिए एक पायनियर बने हैं.

  • #मैंऔरमेरीहिन्दी : दुनिया की भाषा नहीं है अंग्रेज़ी...

    #मैंऔरमेरीहिन्दी : दुनिया की भाषा नहीं है अंग्रेज़ी...

    हमारे देश में हिन्दी की जो आज दुर्गति है, वह सिर्फ और सिर्फ इस अंग्रेजी के ही कारण है. अंग्रेजी की इस अमरबेल को हटा दीजिए, हिन्दी के साथ-साथ सारी भारतीय भाषायें हरहरा उठेंगी.

  • #मैंऔरमेरीहिन्दी : बचपन और ज्ञान की मौलिक भाषा

    #मैंऔरमेरीहिन्दी : बचपन और ज्ञान की मौलिक भाषा

    एक वह दौर था जब बच्चे अंग्रेजी में पास होने के लिए अपने 17 नंबरों को निबंध, आवेदन और सवालों से जोड़ लिया करते थे उसमें भी हम कभी ‘वंडर ऑफ साइंस’ और ‘अवर नेशनल लीडर महात्मा गांधी’ से ज्यादा कुछ नहीं सोच पाए, शहरी परिवेश में अब स्कूली शिक्षा में हिन्दी का ठीक वही हाल हो रहा है जो कभी इस तरह की अंग्रेजी का था.

  • पहले से बदल गया है कश्मीर...

    पहले से बदल गया है कश्मीर...

    इस नए कश्मीर में राष्ट्रीय मीडिया को भी दुश्मन की निगाह से देखा जा रहा है. आप रिपोर्ट करो लेकिन सिर्फ़ 'हमारे कश्मीर' के बारे मे. दूसरी तरफ़ का नहीं, अगर दूसरी तरफ़ की करोगे तो आप को भी बख्सा नहीं जाएगा.

  • लेह यात्रा पार्ट 2: क्या खारदुंग-ला पास है सबसे ऊंचा ?

    लेह यात्रा पार्ट 2: क्या खारदुंग-ला पास है सबसे ऊंचा ?

    खारदुंग-ला...एक ऐसा नाम जो जून-जुलाई-अगस्त में इंडिया में 'वर्ल्ड-फ़ेमस' हो जाता है. इतने साल के बाद पता लगा कि खारदुंग-ला तो दुनिया का सबसे ऊंचा मोटरेबल पास है ही नहीं. यह जानकारी स्थानीय लोगों ने भी दी.

  • बुलंदशहर मामले और प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर सीएम अखिलेश यादव से कुछ सवाल?

    बुलंदशहर मामले और प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर सीएम अखिलेश यादव से कुछ सवाल?

    2012 में यूपी में अखिलेश सरकार बनने के बाद गृह मंत्रालय के मुताबिक़ 50 से ज़्यादा साम्प्रदायिक दंगे हुए हैं जिनमें सैकड़ों लोगों की मौत हुई है. एनसीआरबी के मुताबिक़ हर 45 घंटे में प्रदेश के किसी हिस्से में एक पुलिस वाले के साथ मारपीट की जाती है.

  • विश्व बालश्रम निषेध दिवस पर विशेष : कामगार बच्चे हमें क्यों नहीं दिखते..?

    विश्व बालश्रम निषेध दिवस पर विशेष : कामगार बच्चे हमें क्यों नहीं दिखते..?

    कुछ परिस्थितियां हमें दिखाई नहीं देती, कुछ देखना नहीं चाहते, और कुछ के इतने आदी हो जाते हैं कि वह हमें असामान्य दिखाई ही नहीं देती। बच्चों से जुड़े सारे मुद्दों के हालात ही ऐसे हैं जिन पर समाज में बहुत कम संवाद हैं।

  • देखिए, समझिए और विश्लेषण कीजिए इन तथ्यों का...

    देखिए, समझिए और विश्लेषण कीजिए इन तथ्यों का...

    हमारी सरकारी व्यवस्थाओं का हाल देखिये, देखिये कि कैसे यह जन कल्याण की बेहद महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं नाकारा हो रही हैं या...इन्हें नाकारा बनाया जा रहा है? इसकी जवाबदेही कौन लेगा?

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