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विधानसभा चुनाव 2014


'विधानसभा चुनाव 2014' - 480 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • BJP के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ रहे बेटे के लिए छुपकर प्रचार कर रहे हैं कांग्रेस के बड़े नेता?

    BJP के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ रहे बेटे के लिए छुपकर प्रचार कर रहे हैं कांग्रेस के बड़े नेता?

    सूत्रों के मुताबिक, सुजय के करीबी माने जाने वाले कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता तो उन्हें एक राजनीतिक रणनीतिकार मानते हैं जिन्होंने 2014 में विधानसभा चुनावों में पिता की जीत सुनिश्चित करने के लिए काम किया था. सुजय ने 2017 में हुए जिला परिषद चुनावों में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

  • कांग्रेस का गंभीर आरोप, प्रधानमंत्री ने हलफनामों में भूखंड की गलत जानकारी दी, कार्रवाई करे चुनाव आयोग

    कांग्रेस का गंभीर आरोप, प्रधानमंत्री ने हलफनामों में भूखंड की गलत जानकारी दी, कार्रवाई करे चुनाव आयोग

    कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अपने पहले के चुनावी हलफनामों में गुजरात स्थित गांधीनगर के एक भूखंड के संदर्भ में गलत जानकारी देने का आरोप लगाया और कहा कि इस मामले का संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग को उचित कार्रवाई करनी चाहिए. पार्टी के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने दावा किया कि मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उन्हें एक भूखंड आवंटित किया गया था जिसको लेकर उन्होंने 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों और 2014 के लोकसभा चुनाव के अपने हलफनामों में विरोधाभासी जानकारियां दी हैं.

  • ओम प्रकाश राजभर के बागी तेवर : बीजेपी की हालत सांप-छछूंदर जैसी, न निगलते बन रहा और न उगलते

    ओम प्रकाश राजभर के बागी तेवर : बीजेपी की हालत सांप-छछूंदर जैसी, न निगलते बन रहा और न उगलते

    लोकसभा चुनाव के बीच में ही उत्तर प्रदेश में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओम प्रकाश राजभर के  एक बार फिर बगावती  तेवर सामने आये हैं.  इस बार तो इन्होने गठबंधन से अलग पूर्वांचल की 25 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान कर दिया है.  उनकी इस घोषणा के बाद बीजेपी सकते में हैं वह अपने नफ़ा नुकसान का भी आकलन कर रही है. एक यह भी कयास लगाया जा रहा है कि नाराज़ ओम प्रकाश को बीजेपी आखिरी तक मना लेगी क्योंकि पूर्वांचल में बीजेपी के लिये अपना दल के बाद भासपा यानी ओम प्रकाश राजभर की पार्टी बड़े मायने रखती है. इन्ही दो पार्टियों की कश्ती पर सवार होकर बीजेपी न सिर्फ 2014 में उत्तर प्रदेश में 73 सीट के रिकार्ड आंकड़े तक पहुंची थी बल्कि  2017 के विधानसभा में सूबे की सत्ता तक पहुंचने में भी कामयाब हुई थी.

  • EVM स्ट्रॉन्ग रूम पर खुद का ताला लगाना चाहते हैं BJP उम्मीदवार, जानें क्या है वजह

    EVM स्ट्रॉन्ग रूम पर खुद का ताला लगाना चाहते हैं BJP उम्मीदवार, जानें क्या है वजह

    तेलंगाना की 17 लोकसभा सीटों पर 11 अप्रैल को 62.69 प्रतिशत मतदान हुआ. इस चरण में पूर्व केन्द्रीय मंत्री रेणुका चौधरी और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन औवेसी चुनाव लड़ रहे थे. खम्मम में 75.28 जबकि हैदराबाद में 44.75 प्रतिशत मतदान हुआ. औवेसी हैदराबाद से ही चुनाव लड़ रहे थे. निजामाबाद लोकसभा सीट पर 68.33 प्रतिशत मतदान हुआ. 170 किसानों समेत 185 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे. 2014 में अविभाजित आंध्र प्रदेश विधानसभा और लोकसभा चुनाव में 70.75 प्रतिशत मतदान हुआ था.

  • जयपुर में 48 साल बाद महिला उम्मीदवार, 2014 में बीजेपी ने कांग्रेस को 5 लाख से ज्यादा वोटों से दी थी मात

    जयपुर में 48 साल बाद महिला उम्मीदवार, 2014 में बीजेपी ने कांग्रेस को 5 लाख से ज्यादा वोटों से दी थी मात

    राजस्थान में इस बार लोकसभा का चुनाव बेहद दिलचस्प है. पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने इस राज्य में सभी सीटें जीतकर कांग्रेस का सफाया कर दिया था. लेकिन उसके बाद के चुनावों में बीजेपी के वोट प्रतिशत में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई. अजमेर और अलवर में हुए लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी की हार हुई उसके बाद विधानसभा चुनाव में बीजेपी हारकर सत्ता से बाहर हो गई. हालांकि इस चुनाव में एग्जिट  और ओपिनियन पोल बीजेपी की बड़ी हार की ओर संकेत दे रह थे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ बीजेपी ने 75 सीटें जीत लीं. वहीं कांग्रेस भी बहुमत के आंकड़े को छू भर पाई थी.

  • लोकसभा चुनाव : बंगाल में सबसे ज्यादा मतदान, बिहार में सबसे कम, पहले चरण के मतदान की 10 बड़ी बातें

    लोकसभा चुनाव : बंगाल में सबसे ज्यादा मतदान, बिहार में सबसे कम, पहले चरण के मतदान की 10 बड़ी बातें

    लोकसभा चुनाव के पहले चरण के लिये बृहस्पतिवार को 20 राज्यों की 91 सीटों के लिये मतदान लगभग शांति पूर्ण रहा. हालांकि, कुछ राज्यों से छिटपुट हिंसा की खबरें सामने आईं. शाम पांच बजे तक के आंकड़ों के अनुसार सबसे कम बिहार में 50 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 81 प्रतिशत मतदान हुआ. वहीं उत्तर प्रदेश के चुनाव आयुक्त उमेश सिन्हा ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि पहले चरण के चुनाव में मतदान का स्तर सामान्य रहा. सिन्हा ने कहा कि अंतिम आंकड़े आने तक यह स्तर पिछले चुनाव की तुलना में लगभग बराबर ही होगा. उन्होंने कहा कि सभी 20 राज्यों की मतदान वाली सीटों पर सामान्य रूप से शांतिपूर्ण मतदान रहा. कुछ इलाकों में हिंसा और बाधा पहुंचाने की शिकायतें जरूर मिली जिन्हें तत्काल दूर कर दिया गया. उन्होंने बताया कि पहले चरण में 91 सीटों पर कुल 1239 उम्मीदवार चुनाव मैदान में है. आंध्र प्रदेश की 25 लोकसभा और 175 विधानसभा सीटों पर शाम छह बजे तक 74 प्रतिशत मतदान हुआ और तेलंगाना की 17 सीटों पर 60 प्रतिशत मतदान हुआ. जबकि संयुक्त आंध्र प्रदेश में 2014 के चुनाव में 76.64 प्रतिशत मतदान हुआ था.

  • छत्तीसगढ़ : सर्वे में मोदी सरकार के कामकाज पर क्या है लोगों की राय, विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी को कर दिया था साफ

    छत्तीसगढ़ : सर्वे में मोदी सरकार के कामकाज पर क्या है लोगों की राय, विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी को कर दिया था साफ

    बीते साल विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ की जनता ने 15 साल से सत्ता में काबिज बीजेपी को उखाड़ फेंका था. छत्तीसगढ़ की 90 सीटों में कांग्रेस को 68 सीटें मिली थीं जबकि बीजेपी को मात्र 15. आपको बता दें कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 11 में से 9 सीटें मिली थीं जबकि कांग्रेस मात्र एक ही सीट पाई थी.

  • पीएम मोदी के गृहराज्य गुजरात से भी बीजेपी के लिए नहीं है अच्छी खबर, इस सर्वे में हुआ खुलासा

    पीएम मोदी के गृहराज्य गुजरात से भी बीजेपी के लिए नहीं है अच्छी खबर, इस सर्वे में हुआ खुलासा

    एक सर्वे में गुजरात के मतदाताओं ने आम जन से जुड़े मुद्दों पर मोदी सरकार के कामकाज को औसत से भी कम रेटिंग दी है. जो साफ-साफ बीजेपी के लिए खतरे की घंटी है. 

  • लोकसभा चुनाव : क्या मायावती बन पाएंगी इस बार देश की पहली दलित प्रधानमंत्री?

    लोकसभा चुनाव : क्या मायावती बन पाएंगी इस बार देश की पहली दलित प्रधानमंत्री?

    बीएसपी सुप्रीमो मायावती खुद को पीएम पद का उम्मीदवार मानती हैं. उनका कहना है कि अगर केंद्र में सरकार चलाने का मौका मिला तो वह उत्तर प्रदेश की तर्ज पर देश का विकास करेंगी. यह बात उन्होंने विशाखापत्तनम में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही है. लेकिन इन सब के बीच एक बात जानकर हैरानी होगी की अब पहले चरण का मतदान होने में सिर्फ 5 ही दिन बचे हैं और उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रहीं मायावती की एक भी रैली राज्य में नहीं हुई हैं. उन्होंने अब तक चार रैलियों को संबोधित किया है जिनमें ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना हैं.

  • 20 दिन से चुप बैठे हैं नवजोत सिंह सिद्धू, नाराजगी ऐसी कि काम-धाम छोड़ चुके हैं, किसी के संपर्क में भी नहीं

    20 दिन से चुप बैठे हैं नवजोत सिंह सिद्धू, नाराजगी ऐसी कि काम-धाम छोड़ चुके हैं, किसी के संपर्क में भी नहीं

    साल 2014 में अमृतसर से अरुण जेटली को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू ने भारतीय जनता पार्टी छोड़ दी थी. सिद्धू ने पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी का हाथ थाम लिया था. बताया जा रहा है कि मोगा में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की रैली में उन्हें बोलने के लिए आमंत्रित नहीं करने पर भी वह नाराज हैं. इसके साथ ही उनके करीबी सूत्रों ने बताया कि वह इस बात से भी नाराज हैं कि वह छत्तीसगढ़ के लिए पार्टी के स्टार प्रचारकों की सूची में नहीं हैं, हालांकि वह देश भर में चुनाव प्रचार की मांग में बने हुए हैं.

  • लालू प्रसाद की गैरमौजूदगी, नीतीश का पाला बदलना, वोटबैंक का गणित, बिहार में महागठबंधन की राह कठिन

    लालू प्रसाद की गैरमौजूदगी, नीतीश का पाला बदलना, वोटबैंक का गणित, बिहार में महागठबंधन की राह कठिन

    लोकसभा चुनाव-2019  को देखते हुए बात अगर बिहार करें तो इस बार राष्ट्रीय जनता दल अपने अध्यक्ष और करिश्माई नेता लालू प्रसाद यादव की गैरमौजूदगी में चुनाव लड़ रही है. सवाल इस बात का है जिस तरह से लालू प्रसाद यादव ने अपने भाषणों के दम पर साल 2014 में शुरू हुई 'मोदी लहर' को एक साल बाद ही बिहार विधानसभा चुनाव में पटरी से उतार दिया था और नीतीश कुमार को सत्ता दिला दी थी.

  • नहीं हुआ विकास तो गुस्साए लोगों ने डिप्टी CM को गांव में घुसने नहीं दिया, बिना प्रचार के लौटना पड़ा

    नहीं हुआ विकास तो गुस्साए लोगों ने डिप्टी CM को गांव में घुसने नहीं दिया, बिना प्रचार के लौटना पड़ा

    2014 में पेद्दापुरम विधानसभा सीट से चुनाव जीतने वाले मंत्री को स्थानीय लोगों ने गांव में घुसने तक नहीं दिया. साथ में ही स्थानीय लोगों ने उनसे कोई बातचीत नहीं की. स्थानीय लोग गांव में विकास के कई काम नहीं होने की वजह से गुस्से में थे. आंध्र प्रदेश में 175 विधानसभा सीटों पर 11 अप्रैल को मतदान होगा, इसी दिन प्रदेश की 25 लोकसभा सीटों पर भी चुनाव होगा. मतगणना 23 मई को होगी.

  • राजस्थान में उपचुनाव और विधानसभा इलेक्शन में मिले झटकों से क्या उबर पाएगी बीजेपी?

    राजस्थान में उपचुनाव और विधानसभा इलेक्शन में मिले झटकों से क्या उबर पाएगी बीजेपी?

    राजस्थान में 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सभी 25 सीटें अपनी झोली में डालीं थीं, मगर उपचुनाव में दो सीटों पर हार का सामना करना पड़ा. क्या बीजेपी उपचुनाव के झटकों से इस बार लोकसभा चुनाव में उबर पाएगी.?

  • उत्तराखंड में टिहरी गढ़वाल सीट पर क्या बीजेपी लगा पाएगी जीत की 'हैट्रिक', माला राज्य लक्ष्मी शाह फिर हैं प्रत्याशी

    उत्तराखंड में टिहरी गढ़वाल सीट पर क्या बीजेपी लगा पाएगी जीत की 'हैट्रिक', माला राज्य लक्ष्मी शाह फिर हैं  प्रत्याशी

    उत्तराखंड में लोकसभा की 5 सीटें हैं. साल  2014 के चुनाव में बीजेपी ने सभी सीटें जीती थीं और विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को हराकर राज्य पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया था. टिहरी गढ़वाल लोकसभा सीट पर बीजेपी सांसद मालाराज्य लक्ष्मीशाह ने 446733 (57%) वोट पाकर जीत दर्ज की थी.

  • महाराष्ट्र के मंत्री ने NCP चीफ शरद पवार के गढ़ से BJP के चिह्न पर चुनाव लड़ने से किया इनकार

    महाराष्ट्र के मंत्री ने NCP चीफ शरद पवार के गढ़ से BJP के चिह्न पर चुनाव लड़ने से किया इनकार

    राकांपा नेता सुप्रिया सुले को 2014 आम चुनाव में बारामती से कड़ी टक्कर देने वाले जानकर ने कहा कि वह अपने आरएसपी चुनाव चिह्न से ही चुनाव लड़ना चाहते हैं. उन्होंने मीडिया से कहा, ‘मैंने भाजपा नेतृत्व को पहले ही कह दिया है कि मैं केवल हमारी पार्टी के चुनाव चिह्न पर लोकसभा चुनाव में उतरूंगा. विधानसभा चुनाव में भी हमारा यही रुख रहेगा.’

  • लोकसभा चुनाव 2019 : धार्मिक और प्रकृतिक पर्यटन वाले उत्तराखंड में बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला

    लोकसभा चुनाव 2019 : धार्मिक और प्रकृतिक पर्यटन वाले उत्तराखंड में बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला

    उत्तराखंड में पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पांचों लोकसभा सीटें जीती थीं और 2017 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने जोरदार जीत हासिल की. इस बार बीजेपी को कांग्रेस के अलावा सपा और बसपा मिलकर चुनौती दे रहे हैं. यहां सभी सीटों के लिए 11 अप्रैल को मतदान होगा.

  • Lok Sabha Election 2019: एक महीने से ज्यादा चलेगा चुनावी समर, पहली बार लागू होंगे ये नियम, 10 बड़ी बातें

    Lok Sabha Election 2019: एक महीने से ज्यादा चलेगा चुनावी समर, पहली बार लागू होंगे ये नियम, 10 बड़ी बातें

    चुनाव आयोग (Election Commision) द्वारा रविवार को बहुप्रतीक्षित 17वीं लोकसभा के चुनाव (Lok Sabha Election) कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही देश में 11 अप्रैल से शुरु होने वाला चुनावी समर एक महीने से अधिक समय तक चलेगा. जिसमें एक ओर भाजपा फिर से सत्तारूढ़ होने का हरसंभव प्रयास करेगी, वहीं विपक्षी दल एकजुट होकर मोदी सरकार को सत्ता से बेदखल करने की भरसक कोशिश करेंगे. आयोग ने लोकसभा और चार राज्यों- आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम में विधानसभा के चुनाव का कार्यक्रम घोषित दिया है. इसके तहत सात चरणों में 11 अप्रैल से 19 मई तक होने वाले मतदान के बाद 23 मई को मतगणना होगी. बता दें, साल 2014 में 16वीं लोकसभा का चुनाव नौ चरण में कराया गया था. 2019 के लोकसभा चुनाव में आपको कई नियम और प्रावधान पहली बार देखने को मिलेंगे. इस बार उम्मीदवारों को विज्ञापन देकर अपना आपराधिक रिकॉर्ड बताना होगा. इसके साथ ही उन्हें सोशल मीडिया अकांउट की जानकारी देना होगी.

  • छत्तीसगढ़: नाराज आदिवासियों को मनाने के लिए BJP ने खेला दांव, कांग्रेस के खेमे से खींचने के लिए बनाई यह रणनीति

    छत्तीसगढ़: नाराज आदिवासियों को मनाने के लिए BJP ने खेला दांव, कांग्रेस के खेमे से खींचने के लिए बनाई यह रणनीति

    उसेंडी बस्तर क्षेत्र के वरिष्ठ आदिवासी नेता हैं और वर्ष 1993 में वह पहली बार अविभाजित मध्यप्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए थे. वह वर्ष 2008 से वर्ष 2013 के दौरान रमन मंत्रिमंडल के सदस्य भी रहे हैं. वर्ष 2013 में अंतागढ़ विधानसभा सीट से चुने जाने के बाद वह वर्ष 2014 में कांकेर लोकसभा सीट के लिए निर्वाचित हुए हैं. वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण होने के बाद वर्ष 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 11 में से 10 सीटों पर जीत मिली थी. इस चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने कांग्रेस के टिकट से महासमुंद से जीत हासिल की थी.