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विवेक रस्तोगी


'विवेक रस्तोगी' - 16 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • 'ओ साथी रे... तेरे बिना भी क्या जीना...'

    'ओ साथी रे... तेरे बिना भी क्या जीना...'

    'दूर का राही', 'दूर गगन की छांव में' चला गया है, लेकिन मेरा हिन्दुस्तानी दिल हमेशा कहेगा... 'गाता रहे मेरा दिल...'

  • दरअसल, डरे हुए नहीं हैं आडवाणी, चेता रहे हैं कांग्रेस को...

    दरअसल, डरे हुए नहीं हैं आडवाणी, चेता रहे हैं कांग्रेस को...

    जो कांग्रेसी आडवाणी के ब्लॉग के आधार पर कह रहे हैं कि उन्होंने हार कबूल कर ली है, उन्हें ब्लॉग को पढ़ना चाहिए, क्योंकि हार का डर कम से कम मुझे तो उनके आलेख में नहीं दिखाई दिया...

  • खिलाड़ी नहीं, विश्व रिकॉर्डों की किताब है...

    खिलाड़ी नहीं, विश्व रिकॉर्डों की किताब है...

    आप कहेंगे, इतना कुछ कहा, लेकिन खिलाड़ी का नाम नहीं बताया... यकीन मानिए, नाम लिखने की ज़रूरत ही महसूस नहीं हुई... आप कहिए, ज़रूरत है क्या...?

  • 'सिर्फ बुरा' नहीं था रावण...

    'सिर्फ बुरा' नहीं था रावण...

    किसी को भी बुरा कहने से पहले उसके गुण, अच्छाइयां भी याद कर लें, क्योंकि भगवान रामचंद्र का विरोधी और शत्रु होने के बावजूद रावण 'सिर्फ बुरा' ही नहीं था...

  • क्योंकि मुझे प्यार है अपने बेटे से...

    क्योंकि मुझे प्यार है अपने बेटे से...

    मैं आपसे, और अपने-आप से भी, वादा करता हूं, कि मेरा बेटा बालिग़ होने से पहले मेरी कार को हाथ नहीं लगा पाएगा, क्योंकि मैं अपने बेटे से बहुत प्यार करता हूं... आप भी करते हैं न...?

  • दिल्ली की सड़कें, साइकिल की सवारी...

    दिल्ली की सड़कें, साइकिल की सवारी...

    मेरी सोच कहती है कि छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर हम इस तेज़-रफ़्तार ज़िन्दगी में कुछ रफ़्तार हासिल कर सकते हैं, वरना वे दिन अब ज़्यादा दूर नहीं, हम सब साइकिल से सफर किया करेंगे...

  • कसूरवार हम हैं, अच्युतानंदन नहीं...

    कसूरवार हम हैं, अच्युतानंदन नहीं...

    और हां, एक आखिरी नसीहत अच्युतानंदन जी के लिए... क्या आपने कभी सोचा है कि अगर आप मुख्यमंत्री नहीं होते, तो संदीप के घर पर आपके साथ ऐसा व्यवहार होता, जो लिखा भी न जा सके...

  • कब जागेगा इंडिया, एक नई सुबह में...

    कब जागेगा इंडिया, एक नई सुबह में...

    बातचीत या शान्ति-वार्ता से पाकिस्तान के कान पर जूं भी नहीं रेंगती - इसका कितनी बार और सबूत चाहते हैं हम... कब जागेगा इंडिया, एक नई सुबह में, जिसमें आतंकवाद से इस तरह नहीं डरना पड़ेगा...

  • हिन्दुस्तान, हिन्दुस्तानी बच्चे, और हिन्दी की हालत...

    हिन्दुस्तान, हिन्दुस्तानी बच्चे, और हिन्दी की हालत...

    जो बच्चा आज उनतालीस, उनचास, उनसठ, उनत्तर और उनासी के बीच फर्क नहीं समझेगा, उसके लिए आने वाले दिनों में आम देशवासियों से बात करना, और देश के गौरव को समझना क्योंकर मुमकिन होगा... सो, आइए, भाषागत राजनीति में उलझे बिना ऐसे काम करें, जिससे हिन्दी और समृद्ध, और सशक्त हो...

  • क्या यह सिर्फ एक बलात्कार है...?

    क्या यह सिर्फ एक बलात्कार है...?

    क्या ऐसा कुछ नहीं हो सकता कि अंतर्तम को झकझोरकर रख देने और गंभीरता से सोचने के लिए मजबूर कर देने वाली ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके...

  • आ गया मुंहतोड़ जवाब देने का समय...

    आ गया मुंहतोड़ जवाब देने का समय...

    हां, यह सही है कि नक्सलियों के लिए हथियार उठा लेने की यह नौबत क्यों आई, इस पर विचार करना, और उस वजह को जड़ से खत्म करना भी हमारा और हमारी सरकार का ही दायित्व है...

  • आइए, दिल्ली को सुंदर बनाएं...

    आइए, दिल्ली को सुंदर बनाएं...

    याद रखें, कोई शहर कितना भी सुंदर हो, सड़क पर हादसों में मरते हुए लोग उसे वीभत्स और डरावना बना देते हैं, दोस्तों...

  • आए तुम याद मुझे... गाने लगी हर धड़कन...

    आए तुम याद मुझे... गाने लगी हर धड़कन...

    'दूर का राही', 'दूर गगन की छांव में' चला गया है, लेकिन मेरा हिन्दुस्तानी दिल हमेशा कहेगा... 'गाता रहे मेरा दिल...'

  • याद रहे, मेरा मुल्क न हार जाए...

    याद रहे, मेरा मुल्क न हार जाए...

    मैं नहीं जानता, कोर्ट क्या कहेगी, क्या करेगी... वहां मंदिर बनेगा या मस्जिद... कौन जीतेगा, कौन हारेगा... लेकिन इतना जानता हूं, अगर फसाद हुए तो मेरा-आपका मुल्क हार जाएगा...

  • आखिर सभी को है मां और बहन की ज़रूरत...

    आखिर सभी को है मां और बहन की ज़रूरत...

    आश्चर्यजनक रूप से किसी भी कामना के लिए लिंगभेद पूरी तरह खत्म हो जाता है, और भक्त चाहे पुरुष हो या स्त्री, कामनापूर्ति के लिए प्रमुखतः देवियों की ही शरण ली जाती है...

  • ज़रूरत है समझदार बाप-भाइयों की...

    ज़रूरत है समझदार बाप-भाइयों की...

    इस समाज को आज अच्छे और समझदार बाप और भाइयों की ज़रूरत है, ताकि 'मां' सुरक्षित और संतुष्ट रहकर जी सके...