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'साहित्य' - 293 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • CBSE Exam 2020: 12वीं के स्टूडेंट्स ऐसे करें अंग्रेजी सब्जेक्ट की तैयारी, ये हैं एक्सपर्ट की टिप्स

    CBSE Exam 2020: 12वीं के स्टूडेंट्स ऐसे करें अंग्रेजी सब्जेक्ट की तैयारी, ये हैं एक्सपर्ट की टिप्स

    सीबीएसई (CBSE) में 12वीं में अंग्रेजी (CBSE English Paper) के 2 पेपर होते हैं, एक कोर और दूसरा इलेक्टिव. कोर पेपर (CBSE English Core Paper) भाषा और साहित्य की बुनियादी समझ के लिए होता है. वहीं, इलेक्टिव पेपर (CBSE English Elective Paper) एक एडवांस्ड लेवल का पेपर होता है और इसमें साहित्य के विभिन्न तकनीकी पहलु शामिल हैं.

  • मुसलमान ने साहित्य पढ़ाया तो कौन सा संकट आ गया? BHU विवाद पर संघ

    मुसलमान ने साहित्य पढ़ाया तो कौन सा संकट आ गया? BHU विवाद पर संघ

    बीएचयू के संस्कृत धर्म विज्ञान संकाय में डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति पर मचे घमासान के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संस्था संस्कृत भारती के अखिल भारतीय महामंत्री श्रीश देवपुजारी ने कहा कि अगर मुसलमान ने साहित्य पढ़ाया तो कौन सा संकट आ गया? संस्कृत भारती ने छात्रों से आंदोलन वापस लेने और फिरोज खान से निर्भय होकर विश्वविद्यालय में शिक्षण करने की अपील की है.

  • शंबूक पैदा होते रहेंगे, संस्कृत का क्या होगा?

    शंबूक पैदा होते रहेंगे, संस्कृत का क्या होगा?

    पूर्व वैदिक काल के वे ऋषि निश्चय ही तेजस्वी रहे होंगे जिन्होंने संस्कृत जैसी समृद्ध भाषा रची. अपनी बहुत सारी विसगंतियों के बावजूद वैदिक साहित्य का एक हिस्सा विश्व की ज्ञान और दर्शन की परंपरा का अनमोल हिस्सा है. पाणिनी जैसे उद्भट वैयाकरण ने 1500 साल पहले 4000 सूत्रों जैसी 'अष्टाध्यायी' रच डाली थी और व्याकरण के नियम निर्धारित किए थे, यह सोच कर भी विस्मय होता है. उनके पहले संस्कृत ने कालिदास जैसे महाकवि पैदा किए और शूद्रक जैसे अद्भुत नाटककार. रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ इस भाषा में लिखे गए जो दुनिया में अपनी तरह के अद्वितीय ग्रंथ हैं. लेकिन ऐसा क्या हुआ कि ऐसी अद्भुत अद्वितीय भाषा कालक्रम में लगभग विलोप के कगार पर पहुंच गई?

  • Ayodhya Case: पूर्व बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने कहा- गलत है सुप्रीम कोर्ट का फैसला, इसमें कई खामियां हैं

    Ayodhya Case: पूर्व बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने कहा- गलत है सुप्रीम कोर्ट का फैसला, इसमें कई खामियां हैं

    पूर्व भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने अयोध्या मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के फैसले की रविवार को आलोचना की लेकिन कहा कि मुस्लिम समुदाय को इसे स्वीकार करना चाहिए. सिन्हा यहां मुंबई साहित्य महोत्सव में बोल रहे थे. ऐतिहासिक फैसले के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय का फैसला गलत निर्णय है, इसमें कई खामियां हैं लेकिन मैं फिर भी मुस्लिम समुदाय से फैसले को स्वीकार करने के लिए कहूंगा.’’ उन्होंने कहा, ‘‘चलिए आगे बढ़ते हैं. उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद कोई फैसला नहीं है.’’

  • सेना के पूर्व अफसर को जासूसी के आरोप में पकड़ा, जेल में रहस्यमय मौत

    सेना के पूर्व अफसर को जासूसी के आरोप में पकड़ा, जेल में रहस्यमय मौत

    दिल्ली में सेना के एक पूर्व अफसर से जासूसी के आरोप में पूछताछ हुई. आरोप साबित न होने पर उसे एक किताब चोरी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया लेकिन तिहाड़ जेल जाते ही उसकी रहस्यमय हालात में मौत हो गई. अब अफसर के घर वाले आरोप लगा रहे हैं कि उसकी हत्या कराई गई है. सेना की पैराशूट रेजिमेंट में कैप्टन रहे 65 साल के मुकेश चोपड़ा को एक नवंबर को चीन के लिए जासूसी करने के आरोप में पकड़ा गया. उनसे दिल्ली पुलिस, आईबी, रॉ और मिलिट्री इंटेलिजेंस के लोगों ने लंबी पूछताछ की.

  • जानें साहित्य के Nobel Prize से जुड़ीं रोचक और खास बातें...

    जानें साहित्य के Nobel Prize से जुड़ीं रोचक और खास बातें...

    सबसे कम उम्र में साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाले (Nobel Laureate) 41-वर्षीय रुडयार्ड किपलिंग (Rudyard Kipling) थे, जिन्हें 1907 में पुरस्कृत किया गया था, और सबसे बड़ी उम्र में साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाली लेखिका 88-वर्षीय डोरिस लेसिंग (Doris Lessing) थीं, जिन्हें 2007 में यह पुरस्कार प्रदान किया गया.

  • Nobel Prize: ओल्गा टोकार्कज़ुक को 2018 का और पीटर हैंडके को 2019 का साहित्य का Nobel Prize

    Nobel Prize: ओल्गा टोकार्कज़ुक को 2018 का और पीटर हैंडके को 2019 का साहित्य का Nobel Prize

    वर्ष 2018 के लिए पोलिश लेखिका ओल्गा टोकार्कज़ुक (Olga Tokarczuk) को साहित्य के नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize in Literature) से सम्मानित किया गया है. वर्ष 2019 के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize in Literature) ऑस्ट्रियाई लेखक पीटर हैंडके (Peter Handke) को दिया गया है.

  • Nobel Prize: क्यों दिया जाता है नोबेल पुरस्कार, जानिए इसके बारे में सबकुछ

    Nobel Prize: क्यों दिया जाता है नोबेल पुरस्कार, जानिए इसके बारे में सबकुछ

    नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) अद्वितीय कार्य करने वाले लोगों और संस्थाओं को हर साल दिया जाता है. यह पुरस्कार (Nobel Prize) शांति, साहित्य, भौतिकी, केमिस्ट्री, मेडिसिन और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में दिया जाता है. नोबेल पुरस्कारों की स्थापना अल्फ्रेड नोबेल (Alfred Nobel) के वसीयतनामे के अनुसार 1895 में हुई. अल्फ्रेड ने अपनी वसीयत में लिखा कि उनका सारा पैसा नोबेल फाउंडेशन (Nobel Foundation) के नाम कर दिया जाए और इन पैसों से नोबेल पुरस्कार दिया जाए. नोबेल पुरस्कारों का प्रशासकीय कार्य नोबेल फाउंडेशन देखता है.

  • Munshi Premchand: खुद भी पढ़‍िए और अपने बच्‍चों को भी पढ़ाएं मुंशी प्रेमचंद की ये 5 कहानियां

    Munshi Premchand: खुद भी पढ़‍िए और अपने बच्‍चों को भी पढ़ाएं मुंशी प्रेमचंद की ये 5 कहानियां

    हिंदी साहित्य को नई उचाइयों तक पहुंचाने वाले मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि 8 अक्टूबर को मनाई जाती है. साहित्य में प्रेमचंद के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है. प्रेमचंद को उपन्यास के सम्राट माने जाते हैं. प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था. प्रेमचंद की कई कहानियां ग्रामीण भारत पर हैं. उन्होंने अपनी कहानियों के माध्यम से किसानों की हालत का वर्णन किया.

  • अल्पना मिश्र: मनुष्यता पर गहराते संकट को बयान करता है 'अस्थि फूल'

    अल्पना मिश्र: मनुष्यता पर गहराते संकट को बयान करता है 'अस्थि फूल'

    स्त्री-पुरुष के संबंध में बदलाव तो आया है, लेकिन उतना भी नहीं आ पाया. देखने में तो आज स्त्री घर से बाहर निकल रही है. नौकरी कर रही है. पैसा भी कमा रही है, लेकिन उस पैसे पर अभी भी उसका अधिकार नहीं है. अगर वह अपना पैसा खर्च करती है तो उसका हिसाब भी देना होता है. ये जो चीजें हैं ये स्त्री और पुरुष के संबंध में अधिकारों को निर्धारित करती हैं.

  • Congress नेता शशि थरूर ने कहा, भारत में अब सहिष्णुता के लिये कोई जगह नहीं, सिर्फ ‘स्पष्ट विभेद’ है

    Congress नेता शशि थरूर ने कहा, भारत में अब सहिष्णुता के लिये कोई जगह नहीं, सिर्फ ‘स्पष्ट विभेद’ है

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने शनिवार को पुणे अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव में कहा कि भारत अब एक ऐसा देश बन गया है जहां या तो आप इस तरफ हैं या उस तरफ और इसके बीच सहिष्णुता के लिये कोई जगह नहीं है. उन्होंने इस राजनीतिक 'ध्रुवीकरण' के लिए “सत्ताधारी दल” के कृत्यों और पसंद को जिम्मेदार ठहराया.

  • हिन्दी में गुनना-बुनना मुमकिन नहीं रह गया, सो हश्र तो यही होना था...

    हिन्दी में गुनना-बुनना मुमकिन नहीं रह गया, सो हश्र तो यही होना था...

    पुरानी-नई किताबों की जिल्द की अलग-सी गंध आज भी पढ़ने का शौक ज़िन्दा रखे हुए है... सो, आप लोगों से अब सिर्फ यही कहना चाहता हूं, खुद भी कुछ न कुछ पढ़ने की आदत डालें, और अपने बच्चों को देखने दें कि आप क्या कर रहे हैं, ताकि वे भी वैसे ही बन सकें... और यकीन मानिए, अगर ऐसा हो पाया, तो हिन्दी की दशा सुधारने के लिए हर साल मनाए जाने वाले हिन्दी दिवस की ज़रूरत नहीं रहेगी...

  • किताब छप जाने से कुछ नहीं होता, छपते रहने से होता है : सुरेंद्र मोहन पाठक

    किताब छप जाने से कुछ नहीं होता, छपते रहने से होता है : सुरेंद्र मोहन पाठक

    पल्प फिक्शन साहित्य की दुनिया के जाने-माने लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक की आत्मकथा ‘हम नहीं चंगे, बुरा न कोय’ का लोकार्पण बुधवार को दिल्ली के त्रिवेणी ऑडिटोरियम में हुआ. लोकार्पण के कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए सुरेन्द्र मोहन पाठक ने कहा, 'किताब छप जाने से कुछ नहीं होता, छपते रहने से होता है. मैं, मेरा ख़ुद का कॉम्पिटिटर हूं. लगातार कोशिश करने से मैंने ये मुक़ाम हासिल किया है.'

  • झारखंड के देवघर में बनेगा 'बाबा वैद्यनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय', राज्‍य सरकार ने दी मंजूरीं

    झारखंड के देवघर में बनेगा 'बाबा वैद्यनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय', राज्‍य सरकार ने दी मंजूरीं

    मंत्री नीरा यादव ने बताया कि प्रारंभ में संस्कृत विश्वविद्यालय में वेद-वेदान्त, ज्योतिष, साहित्य, व्याकरण समेत सात स्नातकोत्तर विभागों की स्थापना का निर्णय लिया गया है.

  • पुस्तक समीक्षाः दलित विमर्श को आगे बढ़ाता संवाद है 'ओमप्रकाश वाल्मीकि का अंतिम संवाद'

    पुस्तक समीक्षाः दलित विमर्श को आगे बढ़ाता संवाद है 'ओमप्रकाश वाल्मीकि का अंतिम संवाद'

    पुस्तक समीक्षाः किताब में समाज, जाति और धर्म से जुड़े अनेक प्रासंगिक सवाल हैं जिनका वाल्मीकि ने तार्किक एवं बेबाक जवाब दिया है. दसअसल, यह किताब मात्र संवाद भर नहीं, साहित्य में दलित विमर्श और समाज में दलितोत्थान के प्रयासों का एक पारदर्शी चेहरा है, जिसमें उनकी कमियां एवं अच्छाइयां सब स्पष्ट हो गई हैं.

  • पीएम मोदी ने इशारों में पाकिस्‍तान पर साधा निशाना, कहा- आतंकवाद को पनाह देने वालों के खिलाफ सख्‍त होना जरूरी

    पीएम मोदी ने इशारों में पाकिस्‍तान पर साधा निशाना, कहा- आतंकवाद को पनाह देने वालों के खिलाफ सख्‍त होना जरूरी

    शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "हमारा लक्ष्य स्वस्थ सहयोग को मज़बूत करना है..." उन्होंने इसके लिए नया फॉर्मूला 'HEALTH' भी दिया, जिसका अर्थ है - H - स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग (Health Cooperation), E - आर्थिक सहयोग (Economic Cooperation), A - वैकल्पिक ऊर्जा (Alternative Energy), L - साहित्य तथा संस्कृति (Literature and Culture), T - आतंकवाद-मुक्त समाज (Terrorism-free Society) तथा H - मानवीय सहयोग (Humanitarian Cooperation).'

  • गोसाई दत्त यूं बने सुमित्रानंदन पंत, जानिए उनके बारे में सब कुछ

    गोसाई दत्त यूं बने सुमित्रानंदन पंत, जानिए उनके बारे में सब कुछ

    सुमित्रानंदन पंत की आज जयंती (Sumitranandan Pant Jayant) है. हिंदी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक सुमित्रानंदन पंत (Sumitranandan Pant) का जन्म 20 मई, 1900 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के कौसानी गांव में हुआ था. उनका नाम गुसाईं दत्त था. वह गंगादत्त पंत की आठवीं संतान थे. उन्होंने अपना नाम बदलकर सुमित्रानंदन पंत रख लिया था. झरना, बर्फ, पुष्प, लता, भ्रमर-गुंजन, उषा-किरण, शीतल पवन, तारों की चुनरी ओढ़े गगन से उतरती संध्या ये सब तो सहज रूप से काव्य का उपादान बने. निसर्ग के उपादानों का प्रतीक व बिम्ब के रूप में प्रयोग उनके काव्य की विशेषता रही. उनका व्यक्तित्व भी आकर्षण का केंद्र बिंदु था. 

  • पुस्तक दिवस कौन मनाता है?

    पुस्तक दिवस कौन मनाता है?

    जैसे-जैसे हम किताबों से दूर होते जा रहे हैं, किताबों को लेकर हम ज्यादा प्रेम जताने लगे हैं. जो लोग कहते हैं कि उन्हें किताबें पढ़ना अच्छा लगता है, उनमें वाकई दस फ़ीसदी लोग ही वाकई नियमित तौर पर किताबें पढ़ते हैं. बाकी किताबों के बारे में पढ़ लेते हैं.