NDTV Khabar

साहित्‍य


'साहित्‍य' - 31 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • Valmiki Jayanti 2019: शरद पूर्णिमा को मनाई जाती है वाल्‍मीकि जयंती, जानिए शुभ मुहूर्त और महत्‍व

    Valmiki Jayanti 2019: शरद पूर्णिमा को मनाई जाती है वाल्‍मीकि जयंती, जानिए शुभ मुहूर्त और महत्‍व

    Valmiki Jayanti 2019: महर्षि वाल्‍मीकि (Maharishi Valmiki) ने संस्‍कृत साहित्‍य के पहले श्‍लोक की रचना की थी. संस्‍कृत साहित्‍य का यह पहला श्‍लोक रामायाण का भी पहला श्‍लोक बना.

  • Hindi Diwas 2019: जानिए क्यों हिंदी को नहीं मिल पाया भारत की राष्ट्रीय भाषा का दर्जा

    Hindi Diwas 2019: जानिए क्यों हिंदी को नहीं मिल पाया भारत की राष्ट्रीय भाषा का दर्जा

    14 सितंबर को देश भर में हिंदी दिवस मनाया जाता है. भारत विभिन्‍न्‍ताओं वाला देश है. यहां हर राज्‍य की अपनी अलग सांस्‍कृतिक, राजनीतिक और ऐतिहासिक पहचान है. यही नहीं सभी जगह की बोली भी अलग है. इसके बावजूद हिंदी भारत में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है. यही वजह है कि राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी ने हिंदी को जनमानस की भाषा कहा था. उन्‍होंने 1918 में आयोजित हिंदी साहित्‍य सम्‍मेलन में हिंदी को राष्‍ट्र भाषा बनाने के लिए कहा था.  Hindi Diwas 2019 know Why Hindi isn't the national language

  • आख़िरकार चले गए नामवर सिंह..

    आख़िरकार चले गए नामवर सिंह..

    हिंदी की आलोचना परंपरा में जो चीज़ नामवर सिंह को विशिष्ट और अद्वितीय बनाती है, वह उनकी सर्वसुलभ सार्वजनिकता है. वे किन्हीं अध्ययन कक्षों में बंद और पुस्तकों में मगन अध्येता और विद्वान नहीं थे, वे सार्वजनिक विमर्श के हर औजार का जैसे इस्तेमाल करते थे. उन्होंने किताबें लिखीं, अख़बारों और पत्रिकाओं में लेख लिखे और साहित्यिक पत्रिकाओं का संपादन किया.

  • नहीं रहीं मशहूर लेखिका कृष्णा सोबती

    नहीं रहीं मशहूर लेखिका कृष्णा सोबती

    एक किताब होती तो आपके लिए भी आसान होता लेकिन जब कोई लेखक रचते-रचते संसार में से संसार खड़ा कर देता है तब उस लेखक के पाठक होने का काम भी मुश्किल हो जाता है. आप एक किताब पढ़ कर उसके बारे में नहीं जान सकते हैं. जो लेखक लिखते लिखते समाज में अपने लिए जगह बनाता है, अंत में उसी के लिए समाज में जगह नहीं बचती है.

  • कैसा होगा साहित्‍य का नोबेल पुरस्‍कार विजेता...

    कैसा होगा साहित्‍य का नोबेल पुरस्‍कार विजेता...

    मोटे तौर पर साहित्य को हम कला का एक रूप मानते हैं. जिस तरह कला की समीक्षा के आधार नहीं बन पाए हैं, उसी तरह साहित्य की समीक्षा के लिए भी स्पष्‍ट आधार उपलब्ध नहीं हैं. एक अवधारणा रूपी आधार जरूर मिलता है कि कला का सौंदर्य पक्ष और उपयोगिता या उपादेयता वाला पक्ष देख लिया जाए.

  • हिंदी के गुणगान दिवस पर एक बात..

    हिंदी के गुणगान दिवस पर एक बात..

    कोई भाषा यह दावा नहीं कर सकती कि उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व है. क्योंकि भाषा संप्रेषण का एक माध्यम है. संप्रेषण का मतलब है कि जिससे बात की जाए उसकी समझ में आए. इसीलिए दो अलग अलग भाषाओं के बीच संप्रेषण की पहली शर्त है कि दोनों के बीच की एक और भाषा का निर्माण हो. कालक्रम में प्राकृत, संस्कृत, अपभ्रंश के रूप बदलती हुई आज हिंदी तक आई अपनी भाषा कोई अपवाद नहीं है.

  • भारत-पाक सीमा पर युद्ध लड़ चुके हैं महाबलेश्वर सैल, अब साहित्‍य के मिला ये बड़ा सम्‍मान

    भारत-पाक सीमा पर युद्ध लड़ चुके हैं महाबलेश्वर सैल, अब साहित्‍य के मिला ये बड़ा सम्‍मान

    कोंकणी के जाने-माने साहित्यकार महाबलेश्वर सैल को वर्ष 2016 के 26वें सरस्वती सम्मान के लिए चुना गया है. उनके उपन्यास 'हाउटन' के लिए उनको यह सम्मान दिया जाएगा. यह उपन्यास साल 2009 में प्रकाशित हुआ था. साहित्य के क्षेत्र में यह प्रतिष्ठित सम्मान केके बिरला फाउंडेशन की ओर से दिया जाता है.

  • प्रसून जोशी: 'जिन गानों पर महिलाओं को विरोध जताना चाहिए, उन्‍हीं पर वे नाच रही हैं...'

    प्रसून जोशी: 'जिन गानों पर महिलाओं को विरोध जताना चाहिए, उन्‍हीं पर वे नाच रही हैं...'

    प्रसून जोशी ने कहा कि हिंदी फिल्मों में महिलाओं को बहुत आपत्तिजनक तरीके से दिखाया जाता है. जोशी ने कहा कि महिलाओं को शायद ये पता भी नहीं होता कि वो किस बात पर डांस कर रही हैं.

  • आज से शुरू हो रहा है 'साहित्य का महाकुम्भ' जयपुर साहित्य महोत्सव

    आज से शुरू हो रहा है 'साहित्य का महाकुम्भ' जयपुर साहित्य महोत्सव

    गुलाबी नगरी जयपुर में आज से शुरू होने जा रहा है साहित्‍य का महाकुम्‍भ यानी जयपुर साहित्‍य महोत्‍सव. राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सदगुरू, गुलजार और एन वाल्डमैन आज पांच दिवसीय जयपुर साहित्य महोत्सव का उद्घाटन करेंगे.

  • जीने की राह बताते हैं स्‍वामी विवेकानंद के ये प्रमुख विचार...

    जीने की राह बताते हैं स्‍वामी विवेकानंद के ये प्रमुख विचार...

    स्वामी विवेकानंद को दुनिया भर में युवाओं के लिए एक मिसाल माना जाता है और उनका नाम आते ही मन में श्रद्धा और स्‍फूर्ति दोनों का संचार होने लगता है. स्‍वामी विवेकानंद से जुड़ी कई कहानियां और किस्‍से हैं जो जीवन और उद्देश्य बदलने के लिए प्रेरणा बन सकती हैं.

  • जेएनयू के छात्र आंदोलन के उमस भरे दिनों को बेबाक अंदाज में दर्शाती एक डायरी...

    जेएनयू के छात्र आंदोलन के उमस भरे दिनों को बेबाक अंदाज में दर्शाती एक डायरी...

    पिछले साल फरवरी में देश की राजधानी दिल्‍ली के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम के बाद जो विवाद शुरू हुआ, वह लंबे समय तक राष्‍ट्रीय सुर्खियों का सबब बना. तत्‍कालीन छात्र संघ अध्‍यक्ष समेत कई छात्रों की गिरफ्तारी हुई. उस घटना की पृष्‍ठभूमि में नए सिरे से 'राष्‍ट्र', 'राष्‍ट्रवाद', 'देशद्रोह' जैसे शब्‍दों की मीमांसा की गई.

  • वक्त रूकता नहीं कहीं थमकर, 2016 में साहित्‍य जगत की महत्‍वपूर्ण घटनाएं

    वक्त रूकता नहीं कहीं थमकर, 2016 में साहित्‍य जगत की महत्‍वपूर्ण घटनाएं

    'वक्त रूकता नहीं कहीं थमकर, इसकी आदत भी आदमी सी है.' एक कविता की इन्हीं पंक्तियों की मानिंद पिछला साल बीत गया और छोड़ गया हमारे दामन में कुछ यादें, कुछ बातें, कुछ वादे और कुछ नये इरादे. मशहूर अमेरिकी गीतकार बॉब डिलेन को वर्ष 2016 के लिए साहित्य का नोबल पुरस्कार मिलने के कारण वाद और प्रतिवाद में घिरे विश्व साहित्य को एक नया आयाम मिला.

  • 2016 में सबसे ज्यादा पढ़ी गईं ये बुक्स, किताबें खरीदनें में दिल्ली वाले रहे सबसे आगे

    2016 में सबसे ज्यादा पढ़ी गईं ये बुक्स, किताबें खरीदनें में दिल्ली वाले रहे सबसे आगे

    साल 2016 अपनी खट्टी-मीठी यादों के साथ हमें अलविदा कहने को तैयार है. हर साल की तरह ये साल भी हमें कुछ तोहफे देकर जा रहा है. उन तोहफों में कुछ खास किताबें भी हैं, जो इस साल आईं और लोगों ने उन्हें खूब पसंद किया.

  • शंख घोष ने नई ऊंचाईयों पर पहुंचाया बांग्‍ला साहित्‍य, मिल चुके हैं कई अवॉर्ड्स

    शंख घोष ने नई ऊंचाईयों पर पहुंचाया बांग्‍ला साहित्‍य, मिल चुके हैं कई अवॉर्ड्स

    शंख घोष की प्रमुख रचनाओं में आदिम लता-गुलमोमॉय, मूखरे बारो, सामाजिक नोय, बाबोरेर प्रार्थना, दिनगुली रातगुली और निहिता पातालछाया शामिल हैं. उन्हें कवि, आलोचक और विद्वान के तौर पर जाना जाता है और उनकी पहचान बांग्ला साहित्य में ऊर्जा भरने वाले कवि के रूप में है.

  • अच्छी कविताओं की कोई कमी नहीं है: डॉक्‍टर भगवती लाल व्यास

    अच्छी कविताओं की कोई कमी नहीं है: डॉक्‍टर भगवती लाल व्यास

    जाने-माने लेखक और कवि डॉक्‍टर भगवती लाल व्यास ने कहा कि अच्छी कविताओं की कोई कमी नहीं है और आज भी अच्छी कविताएं लिखी जा रही हैं. केके बिरला फाउंडेशन की ओर से बिहारी पुरस्कार प्राप्त करने के बाद व्यास ने कहा कि आज भी अच्छी कविताएं लिखी जा रही हैं.

  • हताशा के कोहरे में ढांढस बंधाएंगी प्रेमचंद की ये 10 बातें...

    हताशा के कोहरे में ढांढस बंधाएंगी प्रेमचंद की ये 10 बातें...

    माना की प्रेमचंद का साहित्‍य लेखन आज से सालों पहले हुआ, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि उनकी रचनाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी की लेखन काल में रही होंगी.

  • दुनिया के 30 महान वैज्ञानिकों पर आधारित किताब का हुआ विमोचन

    दुनिया के 30 महान वैज्ञानिकों पर आधारित किताब का हुआ विमोचन

    दुनिया के तीस महान वैज्ञानिकों के जीवन की कहानी बताने वाली एक किताब का दिल्‍ली में विमोचन किया गया, जिसमें चार भारतीय वैज्ञानिकों का जीवन परिचय भी शामिल है.

  • साहित्‍य के रंगों से सजा उत्तर-पूर्वी साहित्य महोत्सव शुरू

    साहित्‍य के रंगों से सजा उत्तर-पूर्वी साहित्य महोत्सव शुरू

    तीन दिन तक चलने वाला उत्तर-पूर्वी साहित्य महोत्सव आज से शुरू हो गया है. इस महोत्सव का शीषर्क ‘रीवर टॉक’ रखा गया है. इस महोत्सव में हिस्सा लेने प्रसिद्ध लेखक रस्किन बॉन्ड, उपमन्यू चटर्जी, जेरी पिंटो और अन्य लेखक आए हैं.