NDTV Khabar

सुधीर जैन


'सुधीर जैन' - 91 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • एग्जिट पोल की अटकलभर से पूंजी बाजार बमबम...

    एग्जिट पोल की अटकलभर से पूंजी बाजार बमबम...

    एग्जिट पोल में मोदी सरकार की जीत की अटकल लगते ही शेयर बाजार की बांछें खिल गईं. सोमवार को बाजार खुलते ही एक मिनट के भीतर बाजार के सांड ने दौड़ लगा दी.

  • भयावह जलसंकट की आहट

    भयावह जलसंकट की आहट

    सब कुछ छोड़ देश चुनाव में लगा रहा. भोजन पानी के इंतजाम से भी ध्यान हट गया. इस बीच पता चल रहा है कि देश में पानी को लेकर इमरजेंसी जैसे हालात बनते जा रहे हैं. सरकारी तौर पर अभी सिर्फ महाराष्ट्र और गुजरात के भयावह हालात की जानकारी है.

  • न्यूनतम आय योजना कितनी नायाब

    न्यूनतम आय योजना कितनी नायाब

    न्यूनतम आय की गारंटी के वायदे ने भारी असर पैदा कर दिया. इसका सबूत यह कि वायदों के बड़े-बड़े खिलाड़ी भौंचक हैं. केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली को जल्दबाजी में इस योजना को ब्लफ, यानी झांसा कहना पड़ा. खैर, यह तो चुनावी माहौल में एक दूसरे की राजनीतिक मारकाट की बात है, लेकिन यह भी हकीकत है कि अपने अनुभवी लोकतंत्र में नागरिक अब जागरूक हो चला है.

  • अब तक कहां छिपे बैठे हैं चुनावी मुद्दे

    अब तक कहां छिपे बैठे हैं चुनावी मुद्दे

    अनुमान यह लगता है कि इस बार के चुनाव में किसानों और देश के युवावर्ग के दुख या संकट को कम करने के लिए व्यावहारिक योजना पेश करने की होड़ मचेगी. खासतौर पर मौजूदा सरकार की बेदखली की कोशिश करने वाले विपक्ष के नेताओं में यही होड़ मचेगी कि कौन सबसे ज्यादा विश्वसनीय तरीके से अपनी योजनाएं पेश कर पाता है.

  • पुलवामा हमला : शास्त्रों में शस्त्र की भूमिका देखने का वक्त

    पुलवामा हमला : शास्त्रों में शस्त्र की भूमिका देखने का वक्त

    पुलवामा हमला हुए आठ दिन हो गए. अब तक नहीं सोच पाए कि क्या करें. हमले के बाद फौरन ही कुछ नया कहना भी जरूरी था. सो राजनीतिक तौर पर सेना को कुछ भी करने की छूट देने का बयान जारी किया गया. सरकार ने कहा कि सेना जो करना चाहे उसे वह करने की अनुमति है. इसके अलावा एक और काम हुआ. सरकार ने पाकिस्तान का सर्वाधिक तरजीही देश का दर्जा खत्म कर दिया.

  • मसला मुख्य चुनावी मुद्दे का : 'मोदी हटाओ' या 'मोदी बचाओ'

    मसला मुख्य चुनावी मुद्दे का : 'मोदी हटाओ' या 'मोदी बचाओ'

    पहले ऐसा कभी नहीं हुआ कि चुनाव में गिनती के दिन बचे हों और यह पता न चले कि मुख्य मुद्दा क्या बनेगा. हो सकता है, चुनावी पंडितों ने कुछ भांप लिया हो, लेकिन वे अभी बता न रहे हों. हो यह भी सकता है कि इसका इंतजार किया जा रहा हो कि पहले गठबंधनों की एक निश्चित शक्ल बन जाए फिर वाकयुद्ध शुरू हो. फिर भी सत्ता और विपक्ष की तरफ से माहौल बनाए रखने के लिए अब तक जो कहा गया है, उससे एक मुद्दा ज़रूर निकलकर आ रहा है - वह है, सरकार हटाओ या सरकार बचाओ.

  • सवर्ण जातियों को आरक्षण का झुनझुना

    सवर्ण जातियों को आरक्षण का झुनझुना

    सरकार ने एक और गजब कर दिया. एक और गजब का मतलब यह कि जिस तरह कालेधन के जरिए हर एक को 15 लाख देने का और दो करोड़ युवाओं को हर साल नौकरी देने का गजब किया गया था वैसा ही गजब. बस फर्क यह है कि पुराने गजब चुनाव के पहले सत्ता हासिल करने के लिए थे और नया गजब सत्ता बचाने के लिए दिखाई देता है.

  • 'The Accidental Prime Minister' से फिर उठेगी कथा और इतिहास की बात

    'The Accidental Prime Minister' से फिर उठेगी कथा और इतिहास की बात

    मसला यह था कि क्या किसी ऐतिहासिक चरित्र को नई कथा में ढाला जा सकता है. खैर, जिन्होंने विवाद खड़ा किया, उन्हें क्या और कितना हासिल हुआ, इसका पता नहीं चला. आखिर मामला सुलटा लिया गया. फिल्म रिलीज़ हुई. लेकिन साहित्य जगत में एक सवाल ज़रूर उठा और उठा ही रह गया कि क्या ऐतिहासिक चरित्रों के साथ उपन्यासबाजी या कहानीबाजी की जा सकती है, या की जानी चाहिए, या नहीं की जानी चाहिए...? कला या अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर क्या किसी ऐतिहासिक चरित्र को वैसा चित्रित किया जा सकता है, जैसा वह न रहा हो...? यह सवाल भी कि क्या कोई कलाकार किसी का चरित्र चित्रण ग्राहक की मांग के आधार पर कर सकता है...?

  • पूर्व चुनाव आयुक्त अचानक सनसनीखेज बने

    पूर्व चुनाव आयुक्त अचानक सनसनीखेज बने

    रिटायर होने के कुछ ही घंटे बाद पूर्व चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने एक रहस्य उजागर करके सनसनी फैला दी. उन्होंने कहा कि नोटबंदी से कालेधन पर कोई फर्क नहीं पड़ा. यानी चुनावों में कालेधन का अभी भी खूब इस्तेमाल हो रहा है. पूर्व चुनाव आयुक्त की बात से तो ऐसा भी लग रहा है कि कालेधन का इस्तेमाल पहले से भी ज्यादा बढ़ गया. उनकी यह बात बहुतेरी बातों पर सोचने को मज़बूर करती है.

  • राफेल खरीद कांड, अपराधशास्त्र के नज़रिये से...

    राफेल खरीद कांड, अपराधशास्त्र के नज़रिये से...

    अदालत ने विमान के दाम के बारे में किसी तरह की सुनवाई से फिलहाल इंकार कर दिया. अदालत ने कहा कि जब तक विमान के दाम के बारे में जानकारी सार्वजनिक नहीं होती, तब तक इस मामले में कोई बात नहीं होगी. हालांकि अदालत ने यह ज़रूर कहा कि यह फैसला करना पड़ेगा कि सरकार से इसे सार्वजनिक करने के लिए कहा जा सकता है या नहीं. बहरहाल, बुधवार को राफेल खरीद में कथित घोटाले में खरीद प्रकिया पर अदालत ने आरोपियों और शिकायतकर्ताओं को तफसील से सुना.

  • सरकार का पिंड नहीं छूटा नोटबंदी कांड से

    सरकार का पिंड नहीं छूटा नोटबंदी कांड से

    कल यानी गुरुवार को नोटबंदी की दूसरी बरसी थी. विश्वप्रसिद्ध अर्थशास्त्री और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नोटबंदी के हादसे को याद दिलाया. उन्होंने बताया कि देश की अर्थव्यवस्था को चैपट करने में नोटबंदी की क्या और कितनी भूमिका रही.

  • ठीकरा फुड़वाने के लिए रिजर्व बैंक अपना सिर तैयार रखे...

    ठीकरा फुड़वाने के लिए रिजर्व बैंक अपना सिर तैयार रखे...

    देश की माली हालत को लेकर रहस्य पैदा हो गया है. रिज़र्व बैंक और सरकार के बीच कुछ चल पड़ने की खबरें हैं. क्या चल रहा है? ये अभी नहीं पता. उजागर न किए जाने का कारण यह है कि आम तौर पर रिजर्व बैंक और सरकार के बीच कुछ भी चलने की बातें तब तक नहीं की जातीं जब तक सरकार कोई फैसला न ले ले. लेकिन हैरत की बात ये है कि सरकार ने आश्चर्यजनक रूप से रिजर्व बैंक के बारे में एक बयान जारी किया है. कुछ गड़गड़ होने का शक पैदा होने के लिए इतना काफी से ज्यादा है. 

  • यह क्या... और बढ़ गया भ्रष्टाचार...?

    यह क्या... और बढ़ गया भ्रष्टाचार...?

    सनसनीखेज़ ख़बर है कि इस साल देश में भ्रष्टाचार और बढ़ गया. पिछले साल तक 100 में 45 भारतीय नागरिकों को घूस देकर अपना काम करवाना पड़ता था. इस साल 56 फीसदी नागरिकों को घूस देनी पड़ी. यह बात विश्वप्रसिद्ध संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (TI) और लोकल सर्किल्स के सर्वेक्षण से निकलकर आई है. TI पूरी दुनिया में भ्रष्टाचार की नापतोल का काम करती है. कुछ महीनों बाद TI भ्रष्टाचार के मामले में वैश्विक सूचकांक जारी करेगी, जिससे पता चलेगा कि भ्रष्टाचार के मामले में दूसरे देशों की तुलना में हमारी और कितनी दुर्गति हो रही है. बहरहाल इस सर्वेक्षण से यह ज़ाहिर है कि भ्रष्टाचार के आने वाले वैश्विक सूचकांक में अपने देश की हालत और खराब निकलकर आने का अंदेशा बढ़ गया है.

  • शिक्षा के मकसद पर प्रधानमंत्री का भाषण

    शिक्षा के मकसद पर प्रधानमंत्री का भाषण

    शनिवार को विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में शिक्षा के पारंपरिक लक्ष्य को दोहराया गया. एक ऐसे लक्ष्य को दोहराया गया, जिसे हासिल करने का तरीका सदियों से तलाशा जा रहा है. लक्ष्य यह कि शिक्षा ऐसी हो जो हमें मनुष्य बना सके, जिससे जीवन का निर्माण हो, मानवता का प्रसार हो और चरित्र का गठन हो. प्रधानमंत्री ने ये लक्ष्य विवेकानंद के हवाले से कहे. इस दोहराव में बस वह बात फिर रह गई कि ये लक्ष्य हासिल करने का तरीका क्या हो? प्रधानमंत्री के इस भाषण से उस तरीके के बारे में कोई विशिष्ट सुझाव तो नहीं दिखा, फिर भी उन्होंने निरंतर नवोन्मेष की जरूरत बताई. हालांकि अपनी तरफ से उन्होंने नवोन्मेष को देश दुनिया में संतुलित विकास से जोड़ा. खैर, कुछ भी हो, शिक्षा और ज्ञान की मौजूदा शक्लोसूरत की आलोचना के बहाने से ही सही, कम से कम शिक्षा और ज्ञान के बारे में कुछ सुनने को तो मिला.

  • सोने की दोगुनी खरीद का माजरा क्या है...?

    सोने की दोगुनी खरीद का माजरा क्या है...?

    इस हफ्ते सूचना मिली कि देश में सोना खूब खरीदा जा रहा है, और बिक्री इतनी बढ़ गई है कि पिछले महीने दोगुने से भी ज़्यादा सोना विदेश से भारत में आया. यह सामान्य घटना नहीं है, लेकिन मीडिया में इस ख़बर का विश्लेषण ज्य़ादा नहीं दिखा. क्या इस घटना का आगा-पीछा नहीं देखा जाना चाहिए...?

  • असहमति को 'सेफ्टी वॉल्व' कहे जाने के मायने...

    असहमति को 'सेफ्टी वॉल्व' कहे जाने के मायने...

    पुलिस ने जिन विद्वानों को दबिश डालकर पकड़ लिया था, उन्हें वापस उनके घर छोड़कर आना पड़ा. लेखकों, कवियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर यह रोक सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हो पाई. गौरतलब है कि भारतीय न्याय व्यवस्था की एक-एक बात संजोकर रखी जाती है. अदालतों के आदेशों को इतिहास की अलमारी में संगवाकर रखा जाता है. सुप्रीम कोर्ट ने इन विद्वानों की गिरफ्तारी पर रोक लगाकर उसे नज़रबंदी में तब्दील करने का जो अंतरिम आदेश दिया, वह भी इतिहास में सुरक्षित रखा जाएगा. यह आदेश जिनके खिलाफ है, वे कह सकते हैं कि यह आदेश अंतिम निर्णय नहीं है, लेकिन इस मामले में सुनवाई के दौरान अदालत ने एक दार्शनिक वाक्य भी बोला है - असहमति लोकतंत्र का 'सेफ्टी वॉल्व' है... यह सार्थक वाक्य इतिहास में ज़रूर जाएगा. इतना ही नहीं, अदालत ने अपराधशास्त्रियों और न्यायशास्त्रियों को सोच-विचार का एक विषय भी दे दिया है.

  • दो बार चुनाव होने से किसे नफा, किसे नुकसान...

    दो बार चुनाव होने से किसे नफा, किसे नुकसान...

    देश में विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ करवाने की बात फिर उठवाई जा रही है. फिलहाल सारी नहीं, तो कुछ विधानसभाओं और लोकसभा चुनाव साथ-साथ करवाने की सुगबुगाहट तो है ही. इस काम में कई किंतु-परंतु लगे हैं. इस समय कानूनन एक साथ चुनाव संभव नहीं है, कुछ ही घंटे पहले चुनाव आयोग यह बता चुका है.

  • अब किसान के उत्पाद की कीमत घटाने की कवायद...?

    अब किसान के उत्पाद की कीमत घटाने की कवायद...?

    रिज़र्व बैंक ने कर्ज़ को महंगा करने का फैसला किया. खास बात यह कि यह काम दो महीने में दूसरी बार किया गया. इसका मुख्य कारण यह समझाया गया है कि महंगाई बढ़ रही है. लिहाज़ा महंगाई को काबू में रखने के लिए बाज़ार में पैसे की मात्रा कम करने की ज़रूरत है.