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हिंदी साहित्य


'हिंदी साहित्य' - 42 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • Munshi Premchand: खुद भी पढ़‍िए और अपने बच्‍चों को भी पढ़ाएं मुंशी प्रेमचंद की ये 5 कहानियां

    Munshi Premchand: खुद भी पढ़‍िए और अपने बच्‍चों को भी पढ़ाएं मुंशी प्रेमचंद की ये 5 कहानियां

    हिंदी साहित्य को नई उचाइयों तक पहुंचाने वाले मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि 8 अक्टूबर को मनाई जाती है. साहित्य में प्रेमचंद के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है. प्रेमचंद को उपन्यास के सम्राट माने जाते हैं. प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था. प्रेमचंद की कई कहानियां ग्रामीण भारत पर हैं. उन्होंने अपनी कहानियों के माध्यम से किसानों की हालत का वर्णन किया.

  • हिन्दी में गुनना-बुनना मुमकिन नहीं रह गया, सो हश्र तो यही होना था...

    हिन्दी में गुनना-बुनना मुमकिन नहीं रह गया, सो हश्र तो यही होना था...

    पुरानी-नई किताबों की जिल्द की अलग-सी गंध आज भी पढ़ने का शौक ज़िन्दा रखे हुए है... सो, आप लोगों से अब सिर्फ यही कहना चाहता हूं, खुद भी कुछ न कुछ पढ़ने की आदत डालें, और अपने बच्चों को देखने दें कि आप क्या कर रहे हैं, ताकि वे भी वैसे ही बन सकें... और यकीन मानिए, अगर ऐसा हो पाया, तो हिन्दी की दशा सुधारने के लिए हर साल मनाए जाने वाले हिन्दी दिवस की ज़रूरत नहीं रहेगी...

  • पुस्तक समीक्षाः दलित विमर्श को आगे बढ़ाता संवाद है 'ओमप्रकाश वाल्मीकि का अंतिम संवाद'

    पुस्तक समीक्षाः दलित विमर्श को आगे बढ़ाता संवाद है 'ओमप्रकाश वाल्मीकि का अंतिम संवाद'

    पुस्तक समीक्षाः किताब में समाज, जाति और धर्म से जुड़े अनेक प्रासंगिक सवाल हैं जिनका वाल्मीकि ने तार्किक एवं बेबाक जवाब दिया है. दसअसल, यह किताब मात्र संवाद भर नहीं, साहित्य में दलित विमर्श और समाज में दलितोत्थान के प्रयासों का एक पारदर्शी चेहरा है, जिसमें उनकी कमियां एवं अच्छाइयां सब स्पष्ट हो गई हैं.

  • गोसाई दत्त यूं बने सुमित्रानंदन पंत, जानिए उनके बारे में सब कुछ

    गोसाई दत्त यूं बने सुमित्रानंदन पंत, जानिए उनके बारे में सब कुछ

    सुमित्रानंदन पंत की आज जयंती (Sumitranandan Pant Jayant) है. हिंदी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक सुमित्रानंदन पंत (Sumitranandan Pant) का जन्म 20 मई, 1900 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के कौसानी गांव में हुआ था. उनका नाम गुसाईं दत्त था. वह गंगादत्त पंत की आठवीं संतान थे. उन्होंने अपना नाम बदलकर सुमित्रानंदन पंत रख लिया था. झरना, बर्फ, पुष्प, लता, भ्रमर-गुंजन, उषा-किरण, शीतल पवन, तारों की चुनरी ओढ़े गगन से उतरती संध्या ये सब तो सहज रूप से काव्य का उपादान बने. निसर्ग के उपादानों का प्रतीक व बिम्ब के रूप में प्रयोग उनके काव्य की विशेषता रही. उनका व्यक्तित्व भी आकर्षण का केंद्र बिंदु था. 

  • संघर्ष और सफलता के प्रतीक हैं प्रदीप द्विवेदी, कुछ ऐसी है UPSC में कामयाबी का परचम लहराने की कहानी

    संघर्ष और सफलता के प्रतीक हैं प्रदीप द्विवेदी, कुछ ऐसी है UPSC में कामयाबी का परचम लहराने की कहानी

    इस बार सिविल सर्विसेज परीक्षा के आए नतीजों में 74वें रैंक पर आए प्रदीप कुमार द्विवेदी कई मायनों में ख़ास है. पेशे से इलेक्ट्रिकिल इंजीनियर हैं, परीक्षा का माध्यम अंग्रेजी और वैकल्पिक विषय  के तौर पर इन्होंने हिंदी साहित्य को चुना. प्रदीप ने पिछली बार 491वां स्थान हासिल किया था. बुंदेलखंड के सबसे पिछड़े इलाकों में शुमार बारीगढ़ से शुरु इस सफर में प्रदीप ने हर मुकाम पर कामयाबी हासिल की है जिसके पीछे उनकी लगन और लक्ष्य भेदने की स्पष्ट रणनीति रही है. उनका मानना है कि तैयारी का पहला कदम सिलेबस और परीक्षा के पैटर्न देखने का होना चाहिए.

  • नामवर सिंह : मरेंगे हम किताबों पर, वरक होगा कफ़न अपना...

    नामवर सिंह : मरेंगे हम किताबों पर, वरक होगा कफ़न अपना...

    बनारस की 'ऊसर भूमि' जीयनपुर से निकल नामवर सिंह (Namwar Singh) ने बीएचयू, सागर और जेएनयू में हिंदी साहित्य की जो पौध रोपी, उनमें से तमाम अब ख़ुद बरगद बन गए हैं. 93 साल...एक सदी में सिर्फ 7 बरस कम. पिछले दो ढाई महीनों को छोड़कर नामवर सिंह लगातार सक्रिय रहे और हिंदी की थाती संजोते-संवारते रहे. आखिरी घड़ी तक लगे रहे.

  • श्रद्धांजलिः साहित्यकार नामवर सिंह के निधन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री सहित किन हस्तियों ने क्या कहा?

    श्रद्धांजलिः साहित्यकार नामवर सिंह के निधन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री सहित किन हस्तियों ने क्या कहा?

    प्रसिद्ध साहित्यकार नामवर सिंह के निधन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री सहित तमाम राजनीतिक, सामाजिक और साहित्यिक हस्तियों ने श्रद्धांजलि दी है. सभी ने हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में उनके महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया.

  • कृष्णा सोबती बहुत याद आएगा आपका जादुई व्यक्तित्व और बेबाकपन

    कृष्णा सोबती बहुत याद आएगा आपका जादुई व्यक्तित्व और बेबाकपन

    हिंदी साहित्य (Hindi Literature) में कृष्णा सोबती (Krishna Sobti) एक अलग ही मुकाम रखती थीं और उनका व्यक्तित्व उनकी किताबों जितना ही अनोखा था. 1980 में कृष्णा सोबती को उनकी किताब 'जिंदगीनामा' के लिए साहित्य अकादेमी (Sahitya Akademi Award) से नवाजा गया था तो 2017 में हिंदी साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें ज्ञानपीठ (Jnanpith) पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

  • हम सबको सींचने वाले नामवर अस्पताल में हैं

    हम सबको सींचने वाले नामवर अस्पताल में हैं

    नामवर सिंह अस्पताल में हैं. 92 बरस की उम्र में उन्हें सिर पर चोट लगी है. अगर प्रार्थना जैसी कोई चीज़ होती है तो हिंदी के संसार को उनके लिए प्रार्थना करनी चाहिए. हमारी पीढ़ी का दुर्भाग्य है कि हमने उन्हें उनके उत्तरार्द्ध में देखा- उस उम्र में जब उनकी तेजस्विता का सूर्य ढलान पर था.

  • Hindi Diwas 2018: समोसा, जलेबी और गुलाब जामुन नहीं हैं हिन्दी के शब्‍द, जानिए कहां से आए ये नाम

    Hindi Diwas 2018: समोसा, जलेबी और गुलाब जामुन नहीं हैं हिन्दी के शब्‍द, जानिए कहां से आए ये नाम

    हर साल हिन्दी दिवस (Hindi Diwas 2018) 14 सिंतबर को मनाया जाता है. 1918 में महात्मा गांधी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने को कहा था.

  • साहित्य अकादमी को हिंदी प्रकाशन के लिए मिला FICCI पुरस्कार

    साहित्य अकादमी को हिंदी प्रकाशन के लिए मिला FICCI पुरस्कार

    फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) ने साहित्य अकादमी को अपना 'बुक ऑफ द ईयर' प्रकाशन पुरस्कार प्रदान किया है. यह पुरस्कार साहित्य अकादमी के शीर्षक 'नागफनी वन का इतिहास' के लिए दिया गया है.

  • उपन्यासकार सुरेंद्र मोहन पाठक से NDTV की खास मुलाकात

    उपन्यासकार सुरेंद्र मोहन पाठक से NDTV की खास मुलाकात

    उपन्यासकार सुरेंद्र मोहन पाठक कहते हैं कि जब हिंदी के पाठक थे, अस्सी और नब्बे का दशक था, पल्प फिक्शन का बाजार था, हिंदी साहित्य जिसे गंभीर साहित्य कहते हैं उसके प्रकाशकों ने या पल्प के प्रकाशकों ने उनलोगो ने कोई ऐसी कोशिश नहीं कि हिंदी साहित्य का बाजार बने.

  • रिसर्च के लिए जुनून की ज़रूरत: प्रो. वहाजुद्दीन अल्वी साहब

    रिसर्च के लिए जुनून की ज़रूरत:  प्रो. वहाजुद्दीन अल्वी साहब

    ‘इक्कीसवीं सदी में हिंदी साहित्य के समक्ष चुनौतियां' विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय शोधार्थी संगोष्ठी का आयोजन हिंदी विभाग के अनुसंधान परिषद द्वारा जामिया मिल्लिया इस्लामिया में किया गया. कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और जाने–माने आलोचक प्रो. अनिल राय ने कहा कि शोधार्थियों को मौलिक व प्रामाणिक शोध कार्य की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए अच्छे अनुसंधान करने के लिए मौलिक कार्यों की ओर ध्यान देने की आवश्यक है. इस तरह के अनोखी पहल की शुरुवात करने व इस प्रकार के संगोष्ठियों की योजना बनाने के लिए विभागीय अध्यापकों तथा हिन्दी विभाग की अध्यक्ष प्रो. हेमलता महिश्वर जी की सराहना की.

  • Mahadevi Varma Google Doodle: हिंदी कवयित्री महादेवी वर्मा के 5 शानदार Quotes, गूगल ने डूडल बनाकर दिया सम्मान

    Mahadevi Varma Google Doodle: हिंदी कवयित्री महादेवी वर्मा के 5 शानदार Quotes, गूगल ने डूडल बनाकर दिया सम्मान

    महादेवी वर्मा को उनकी साहित्य यात्रा के लिए 1956 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था जबकि 1982 में उन्हें साहित्य के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी नवाजा गया था.

  • Mahadevi Varma का Google Doodle: कुछ इस अंदाज़ में याद की गईं 'आधुनिक मीरा'

    Mahadevi Varma का Google Doodle: कुछ इस अंदाज़ में याद की गईं 'आधुनिक मीरा'

    महान कवयित्री महादेवी वर्मा को कौन नहीं जानता। गूगल ने आज अपने डूडल को हिंदी साहित्य की स्तंभ माने जाने वाली कवयित्री महादेवी वर्मा को समर्पित किया है।

  • कला का अपराजित संसार  

    कला का अपराजित संसार  

    अपराजिता शर्मा हिंदी की लेखक या कवयित्री हो सकती थीं, लेकिन वे चित्रकार या कलाकार हैं. उनके मित्र उनसे पूछते भी हैं कि कुछ गंभीर साहित्य क्यों नहीं लिखती, चित्र-वित्र क्यों बनाती हो. यह दरअसल अपराजिता का नहीं, उस संसार का संकट है जो शब्दों को विचार और संवेदना की इकलौती पूंजी मानता है. बहरहाल, अपराजिता शर्मा के नाम पर पहली बार ध्यान तब गया जब उन्होंने हिंदी के लिए इमोजी की तर्ज पर हिमोजी बनाई. हालांकि तब मुझे यह ख़याल आया कि संकेत चिह्नों को भाषा की ज़रूरत क्यों हो. लेकिन धीरे-धीरे हिमोजी के संसार को ख़ुद अपराजिता पीछे छो़ड़ती दिखीं. उन्होंने वाणी प्रकाशन से प्रकाशित नीलिमा चौहान की किताब 'पतनशील पत्नियों के नोट्स' के लिए बड़ी मेहनत से इलस्ट्रेशन बनाए.

  • जन्मदिन पर महादेवी का स्मरण : मोतियों की हाट और चिनगारियों का एक मेला

    जन्मदिन पर महादेवी का स्मरण : मोतियों की हाट और चिनगारियों का एक मेला

    कई अर्थों मे महादेवी वर्मा हिंदी की विलक्षण कवयित्री हैं. उनमें निराला की गीतिमयता मिलती है, प्रसाद की करुण दार्शनिकता और पंत की सुकुमारता- लेकिन इन सबके बावजूद वे अद्वितीय और अप्रतिम ढंग से महादेवी बनी रहती हैं. उनके गीतों से रोशनी फूटती है, संगीत झरता है.

  • किताब-विताब : 'जग दर्शन का मेला', एक छूटती हुई विधा की ज़रूरी याद

    किताब-विताब : 'जग दर्शन का मेला', एक छूटती हुई विधा की ज़रूरी याद

    शिवरतन थानवी की यह किताब 'जग दर्शन का मेला' अलग-अलग छिटपुट समयों में लिखी गई उनकी डायरियों और टिप्पणियों से बनती हैं. इन टिप्पणियों के बीच हमें राजस्थान की शैक्षिक पहल के सूत्र भी मिलते हैं और उसके सामाजिक पर्यावरण के भी. शिवरतन थानवी बीच-बीच में साहित्यिक कृतियों पर भी टिप्पणी करते चलते हैं, व्यक्तित्वों पर भी और आयोजनों पर भी.