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हिन्दी साहित्य


'हिन्दी साहित्य' - 32 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • 17 जनवरी का इतिहास: आज है जाने माने शायर, गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर का बर्थडे

    17 जनवरी का इतिहास: आज है जाने माने शायर, गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर का बर्थडे

    जाने माने शायर, गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर का आज जन्मदिन है. जावेद अख्तर को पद्म श्री, पद्म भूषण, साहित्य अकादमी पुरस्कार और पांच बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. वे दीवार, ज़ंजीर और शोले जैसी फिल्मों की पटकथा लिख चुके हैं. उन्होंने कई सारी हिंदी फिल्मों के लिए गीत लिखे. जावेद अख्तर राज्यसभा सदस्य भी रह चुके हैं.

  • हिन्दी में गुनना-बुनना मुमकिन नहीं रह गया, सो हश्र तो यही होना था...

    हिन्दी में गुनना-बुनना मुमकिन नहीं रह गया, सो हश्र तो यही होना था...

    पुरानी-नई किताबों की जिल्द की अलग-सी गंध आज भी पढ़ने का शौक ज़िन्दा रखे हुए है... सो, आप लोगों से अब सिर्फ यही कहना चाहता हूं, खुद भी कुछ न कुछ पढ़ने की आदत डालें, और अपने बच्चों को देखने दें कि आप क्या कर रहे हैं, ताकि वे भी वैसे ही बन सकें... और यकीन मानिए, अगर ऐसा हो पाया, तो हिन्दी की दशा सुधारने के लिए हर साल मनाए जाने वाले हिन्दी दिवस की ज़रूरत नहीं रहेगी...

  • हम सबको सींचने वाले नामवर अस्पताल में हैं

    हम सबको सींचने वाले नामवर अस्पताल में हैं

    नामवर सिंह अस्पताल में हैं. 92 बरस की उम्र में उन्हें सिर पर चोट लगी है. अगर प्रार्थना जैसी कोई चीज़ होती है तो हिंदी के संसार को उनके लिए प्रार्थना करनी चाहिए. हमारी पीढ़ी का दुर्भाग्य है कि हमने उन्हें उनके उत्तरार्द्ध में देखा- उस उम्र में जब उनकी तेजस्विता का सूर्य ढलान पर था.

  • आलोक वर्मा के घर किसकी सिफ़ारिश करने गए थे केंद्रीय सतर्कता आयुक्त चौधरी?

    आलोक वर्मा के घर किसकी सिफ़ारिश करने गए थे केंद्रीय सतर्कता आयुक्त चौधरी?

    हिन्दी अख़बारों के संपादकों ने अपने पाठकों की हत्या का प्लान बना लिया है. अख़बार कूड़े के ढेर में बदलते जा रहे हैं. हिन्दी के अख़बार अब ज़्यादातर प्रोपेगैंडा का ही सामान ढोते नज़र आते हैं. पिछले साढ़े चार साल में हिन्दी अख़बारों या चैनलों से कोई बड़ी ख़बर सामने नहीं आई. साहित्य की किताबों से चुराई गई बिडंबनाओं की भाषा और रूपकों के सहारे हिन्दी के पत्रकार पाठकों की निगाह से बच कर निकल जाते हैं. ख़बर नहीं है. केवल भाषा का खेल है.

  • Hindi Diwas 2018: समोसा, जलेबी और गुलाब जामुन नहीं हैं हिन्दी के शब्‍द, जानिए कहां से आए ये नाम

    Hindi Diwas 2018: समोसा, जलेबी और गुलाब जामुन नहीं हैं हिन्दी के शब्‍द, जानिए कहां से आए ये नाम

    हर साल हिन्दी दिवस (Hindi Diwas 2018) 14 सिंतबर को मनाया जाता है. 1918 में महात्मा गांधी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने को कहा था.

  • मध्‍य प्रदेश : बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का ये है हाल, छात्र ही जांचते मिले परीक्षा की कॉपियां

    मध्‍य प्रदेश : बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का ये है हाल, छात्र ही जांचते मिले परीक्षा की कॉपियां

    देश के विश्वविद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था लचर है, आधारभूत सुविधाएं नहीं हैं, छात्रों और शिक्षकों का अनुपात बेहद कम है लेकिन ये खबर हैरत से ज्यादा फिक्र जगाती है. आरोप है कि भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य के तीसरे वर्ष की कॉपी जांच के लिये सागर भेजी गई, जिसे वहां फर्स्ट ईयर के छात्र जांच रहे थे.

  • रिसर्च के लिए जुनून की ज़रूरत: प्रो. वहाजुद्दीन अल्वी साहब

    रिसर्च के लिए जुनून की ज़रूरत:  प्रो. वहाजुद्दीन अल्वी साहब

    ‘इक्कीसवीं सदी में हिंदी साहित्य के समक्ष चुनौतियां' विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय शोधार्थी संगोष्ठी का आयोजन हिंदी विभाग के अनुसंधान परिषद द्वारा जामिया मिल्लिया इस्लामिया में किया गया. कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और जाने–माने आलोचक प्रो. अनिल राय ने कहा कि शोधार्थियों को मौलिक व प्रामाणिक शोध कार्य की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए अच्छे अनुसंधान करने के लिए मौलिक कार्यों की ओर ध्यान देने की आवश्यक है. इस तरह के अनोखी पहल की शुरुवात करने व इस प्रकार के संगोष्ठियों की योजना बनाने के लिए विभागीय अध्यापकों तथा हिन्दी विभाग की अध्यक्ष प्रो. हेमलता महिश्वर जी की सराहना की.

  • जन्मदिन पर महादेवी का स्मरण : मोतियों की हाट और चिनगारियों का एक मेला

    जन्मदिन पर महादेवी का स्मरण : मोतियों की हाट और चिनगारियों का एक मेला

    कई अर्थों मे महादेवी वर्मा हिंदी की विलक्षण कवयित्री हैं. उनमें निराला की गीतिमयता मिलती है, प्रसाद की करुण दार्शनिकता और पंत की सुकुमारता- लेकिन इन सबके बावजूद वे अद्वितीय और अप्रतिम ढंग से महादेवी बनी रहती हैं. उनके गीतों से रोशनी फूटती है, संगीत झरता है.

  • नहीं रहे ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित मशहूर कवि केदारनाथ सिंह, साहित्य जगत में शोक की लहर

    नहीं रहे ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित मशहूर कवि केदारनाथ सिंह, साहित्य जगत में शोक की लहर

    हिन्दी की समकालीन कविता और आलोचना के सशक्त हस्ताक्षर और अज्ञेय द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक’ के प्रमुख कवि डॉ. केदारनाथ सिंह का आज यहां निधन हो गया. केदारनाथ सिंह 84 वर्ष के थे.  उनके परिवार में एक पुत्र और पांच पुत्रियां हैं. पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि डॉ. केदारनाथ सिंह को करीब डेढ़ माह पहले कोलकाता में निमोनिया हो गया था. इसके बाद से वह बीमार चल रहे थे. पेट के संक्रमण के चलते उनका आज रात करीब पौने नौ बजे एम्स में निधन हो गया.

  • साहित्य के क्षेत्र में देश का सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार लेखिका कृष्णा सोबती

    साहित्य के क्षेत्र में देश का सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार लेखिका कृष्णा सोबती

    साहित्य के क्षेत्र में दिया जाने देश का सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार वर्ष 2017 के लिए हिन्दी की लब्धप्रतिष्ठित लेखिका कृष्णा सोबती को प्रदान किया जायेगा.

  • बच्चों के लिए हिन्दी में लिखने को दूसरे दर्जे का काम समझा जाता है : स्वयं प्रकाश

    बच्चों के लिए हिन्दी में लिखने को दूसरे दर्जे का काम समझा जाता है : स्वयं प्रकाश

    बाल साहित्य के लिए इस बार साहित्य अकादमी का पुरस्कार पाने वाले वरिष्ठ कहानीकार स्वयं प्रकाश का कहना है कि हिन्दी में बच्चों के लिए लिखने को दूसरे दर्जे का काम समझा जाता है.

  • साहित्य से सामाजिक सौहार्द बढ़ाने वाले भारतीय मूल के ब्रिटिश हिंदी लेखक तेजेन्द्र शर्मा को अंतर्राष्ट्रीय सम्मान

    साहित्य से सामाजिक सौहार्द बढ़ाने वाले भारतीय मूल के ब्रिटिश हिंदी लेखक तेजेन्द्र शर्मा को अंतर्राष्ट्रीय सम्मान

    भारतीय मूल के ब्रिटिश हिन्दी लेखक तेजेन्द्र शर्मा को ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय द्वारा मेंबर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर के लिए चुना गया है. तेजेन्द्र ने लंदन से फोन पर बताया, इस पुरस्कार का श्रेय मेरे पिता नंद गोपाल मोहला और दिवंगत पत्नी इंदु को जाता है. उन्होंने कहा, ब्रिटेन की महारानी द्वारा किसी हिन्दी लेखक को उसके साहित्यिक अवदान के लिए सम्मानित किया जाना एक ऐतिहासिक घटना है. इससे हिन्दी को वैश्विक भाषा बनने में और बल मिलेगा.

  • हिन्दी के नामचीन कथाकार शानी को नहीं मिला मुकम्मल स्थान

    हिन्दी के नामचीन कथाकार शानी को नहीं मिला मुकम्मल स्थान

    शानी का जन्म 16 मई 1933 को छत्तीसगढ के जगदलपुर में हुआ था. वह साहित्य अकादमी की पत्रिका ‘समकालीन भारतीय साहित्य’ और ‘साक्षात्कार’ के संपादक रहे.

  • पी. जयरामन सहित 22 को दिया जाएगा साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार

    पी. जयरामन सहित 22 को दिया जाएगा साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार

    तमिल, हिन्दी और संस्कृत के विद्वान और लेखक पी. जयरामन सहित 22 भाषाओं के अनुवादकों को वर्ष 2016 का 'साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार' दिया जायेगा. अकादमी के सचिव के. श्रीनिवासन राव ने बताया कि अकादमी के अध्यक्ष प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी की अध्यक्षता में हुई कार्यकारी मंडल की बैठक में 22 भारतीय भाषाओं के अनुवादकों को वर्ष 2016 का 'साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार' दिया जायेगा.

  • जमाने में हम : दिल्ली का साहित्य जगत और निर्मला जैन के संघर्ष की कथा

    जमाने में हम : दिल्ली का साहित्य जगत और निर्मला जैन के संघर्ष की कथा

    दिल्ली का हिन्दी साहित्य जगत और राजधानी के विश्वविद्यालयों का हिन्दी शिक्षण जगत बीती सदी के उत्तरार्ध्द में कैसे बदलता गया, साहित्य जगत में किस तरह की राजनीति चलती रही और इसके समानांतर किस तरह रचनाकर्म, शोध जैसे कार्य होते रहे...यह सब गहराई से समझने के लिए निर्मला जैन की कृति 'जमाने में हम' बड़ी उपयोगी है. राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित यह कृति निर्मला जैन की आत्मकथा है.

  • उर्दू के अलावा हिन्दी, अरबी, फ्रेंच और इंग्लिश में भी किताब लिख चुके हैं निजाम सिद्दीकी

    उर्दू के अलावा हिन्दी, अरबी, फ्रेंच और इंग्लिश में भी किताब लिख चुके हैं निजाम सिद्दीकी

    उर्दू में लिखी अपनी किताब के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार पाने वाले इलाहाबाद के 69 वर्षीय निजाम सिद्दीकी साहित्य जगत के लिए एक जाना-माना नाम हैं. उनको इससे पहले 2013 में साहित्य अकादमी का 'ट्रांसलेशन अवॉर्ड' मिल चुका है. निजाम सिद्दीकी ने बताया कि वो उर्दू के अलावा हिन्दी, अरबी, फ्रेंच, इंग्लिश और फारसी में भी किताबें लिख चुके हैं.

  • हिन्दी में नासिरा शर्मा, उर्दू में निजाम सिद्दीकी और अंग्रेजी में जेरी पिंटो को साहित्य अकादमी पुरस्कार

    हिन्दी में नासिरा शर्मा, उर्दू में निजाम सिद्दीकी और अंग्रेजी में जेरी पिंटो को साहित्य अकादमी पुरस्कार

    इस वर्ष साहित्य अकादमी का प्रतिष्ठित पुरस्कार हिन्दी के लिए नासिरा शर्मा, उर्दू के लिए निज़ाम सिद्दीकी, अंग्रेजी के लिए जेरी पिंटो और संस्कृत के लिए सीतानाथ आचार्य शास्त्री सहित 24 भाषाओं के रचनाकारों को देने का ऐलान किया गया.

  • मेरे किरदार परजीवी की तरह मेरे ज़हन में रहते हैं: मनीषा कुलश्रेष्ठ

    मेरे किरदार परजीवी की तरह मेरे ज़हन में रहते हैं: मनीषा कुलश्रेष्ठ

    हिन्दी साहित्य जगत की जानी मानी लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ को लेखन के प्रति रुचि अपनी मां से विरासत में मिली. मनीषा का जन्म 26 अगस्त, 1967 को जोधपुर, राजस्थान में हुआ.शब्‍दों की इसी कलाकार से हमने की एक खास मुलाकात, पेश हैं कुछ अंश...

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