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1962 China war


'1962 China war' - 15 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • जानिए भारत को अपना चुके चीनी युद्धबंदी की कहानी, जो नहीं चाहता दोनों देशों के बीच युद्ध

    जानिए भारत को अपना चुके चीनी युद्धबंदी की कहानी, जो नहीं चाहता दोनों देशों के बीच युद्ध

     ये कहानी है एक ऐसे युद्ध बंदी की जो कि 1962 की जंग में गलती से भारत की सीमा में प्रवेश कर गया और फिर अगले सात सालों तक देश की अलग अलग जेलों में युद्ध बंदी की तरह रहा. आजाद हुआ तो उसने भारत को ही अपना घर बना लिया.

  • लद्दाख : चीनी सेना के साथ हुई हिंसक झड़प में कर्नल समेत 3 भारतीय जवानों ने गंवाई जान, दोनों पक्षों को हुआ नुकसान

    लद्दाख : चीनी सेना के साथ हुई हिंसक झड़प में कर्नल समेत 3 भारतीय जवानों ने गंवाई जान, दोनों पक्षों को हुआ नुकसान

    India China border row: लद्दाख में चीन की सेना के साथ हुई झड़प में भारतीय सेना का एक कर्नल और दो जवान शहीद हो गए हैं. लद्दाख इलाके में यह 1962 के बाद ऐसा पहला मौका है जब सैनिक शहीद हुए हैं.  सेना से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चीनी सेना को भी काफी नुकसान हुआ है.  बताया जा रहा है कि दोनों सेनाओं की ओर से रात में पीछे हटने की प्रक्रिया जारी थी लेकिन अब अचानक चीनी सैनिकों की ओर से हरकत की गई है जिसमें भारतीय सैनिक शहीद हो गए हैं. वहीं चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भारत अगर एकतरफा कदम उठाएगा तो इस तरह की दिक्कतें सामने आएंगी. चीन का आरोप है कि भारतीय सैनिक उसकी सेना में घुस आए थे. चीन की ओर से की गई इस हरकत के बाद अब विश्वास बहाली बड़ा मुद्दा हो गया है. वहीं दोनों सेनाओं की ओर से इस सीमा पर तोपें और अन्य साजो-सामान भी इकट्ठा कर रही है और सैनिकों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है. वहीं मिल रही है जानकारी के बाद इस घटना के बाद दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच उच्च स्तरीय बैठक जारी है.

  • सीमा पर 1962 जैसी हरकतें कर रहा चीन, गलवान नदी के पास लगाए टेंट, भारतीय सेना भी मुस्तैद

    सीमा पर 1962 जैसी हरकतें कर रहा चीन, गलवान नदी के पास लगाए टेंट, भारतीय सेना भी मुस्तैद

    पिछले कुछ दिनों से चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अपनी मौजूदगी को बढ़ा रहा है. नॉर्थ ब्लॉक तक पहुंचने वाली रिपोर्ट के अनुसार चीन के रवैये को देखते हुए भारत अपनी स्थिति को मजबूत कर रहा है.भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया,"चूंकि पिछले कुछ दिनों से चीन LAC पर अपने सैनिकों की संख्या को बढ़ा रहा है ऐसे में हम उस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं."

  • Birthday Special: चीन से हार के बाद जवाहरलाल नेहरू ने क्या कहा था?

    Birthday Special: चीन से हार के बाद जवाहरलाल नेहरू ने क्या कहा था?

    जब जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) ने बोलना शुरू किया तो करीब डेढ़ घंटे बोलते रहे. प्रेस कांफ्रेंस में चीनी प्रधानमंत्री के प्रति उन्होंने अपनी भड़ास जमकर निकाली'. हार पर नेहरू ने कहा, 'चीन एक सैनिक मानसिकता का राष्ट्र है जो हमेशा सैन्य साजो-सामान को मजबूत करने पर जोर देता है....यह उनके अतीत के गृहयुद्ध की ही एक निरंतरता है. इसलिये आमतौर पर वे मजबूत स्थिति में हैं'. नेहरू ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में विपक्षी नेताओ पर भी निशाना साधा और यहां तक कह डाला कि 'हमारे विपक्षी नेताओं की आदत है कि वे बिना किसी सिद्धांत के हर किसी से गठजोड़ कर लेते हैं. ऐसा भी हो सकता है कि वे चीनियों से गठजोड़ कर लें'.

  • VIDEO: रिलीज हुआ 'सूबेदार जोगिंदर सिंह' का टीजर, इस पंजाबी एक्टर ने निभाया रोल

    VIDEO: रिलीज हुआ 'सूबेदार जोगिंदर सिंह' का टीजर, इस पंजाबी एक्टर ने निभाया रोल

    फिल्म में मरणोपरांत सर्वोच्च सैनिक सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित सूबेदार जोगिंदर सिंह की शौर्य गाथा बड़े पर्दे पर दिखाई जाएगी.

  • चीनी मीडिया का बड़ा बयान : ... तो फिर भारत को 1962 से बड़ा नुकसान होगा

    चीनी मीडिया का बड़ा बयान :  ... तो फिर भारत को 1962 से बड़ा नुकसान होगा

    भारत और चीन के बीच डोका ला में जारी सीमा विवाद दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है. करीब एक महीने से जारी इस विवाद के चलते इस इलाके में दोनों और से सेना का जमावड़ा नॉन कॉम्बेटिव मोड में बढ़ता जा रहा है. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स  ने अपने संपादकीय में भारत को कड़ा सबक सिखाने की बात कही गई. 

  • यदि आज भारत और चीन के बीच युद्ध छिड़ जाए तो...!

    यदि आज भारत और चीन के बीच युद्ध छिड़ जाए तो...!

    चीन तो क्या, यह बात हर कोई जानता है कि अब लड़ाई किसी देश के बूते की बात नहीं है. हां, बस इसके नाम पर दबाव जरूर बनाया जा सकता है. सच्चाई यह है कि भारत, अमेरिका और जापान की दोस्ती चीन को रास नहीं आ रही है, लिहाजा वह दबाव बनाने के लिए यह सब कर रहा है.

  • रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने चीन को चेताया- '1962 और आज के हालात में फर्क है'...

    रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने चीन को चेताया- '1962 और आज के हालात में फर्क है'...

    चीन की ओर से 1962 के भारत-चीन युद्ध की याद दिलाने पर जेटली ने एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में कहा कि उस वक्त के हालात अलग थे, और आज के हालात अलग हैं.

  • 1962 में अधिग्रहीत जमीन के लिए अरुणाचल के लोगों को अब मिल सकता है मुआवजा

    1962 में अधिग्रहीत जमीन के लिए अरुणाचल के लोगों को अब मिल सकता है मुआवजा

    केंद्र तथा राज्य सरकारें मुआवजे के लिए काम कर रही हैं. मुआवजे की राशि 3,000 करोड़ तक हो सकती है.

  • 1962 की हार के लिए नेहरू सरकार की नीति जिम्मेदार : रिपोर्ट

    1962 की हार के लिए नेहरू सरकार की नीति जिम्मेदार : रिपोर्ट

    1962 में भारत और चीन के बीच हुई लड़ाई में भारत की हार की जांच करने वाली कमेटी ने जवाहर लाल नेहरू को जिम्मेदार ठहराया था। जवाहरलाल नेहरू उस वक्त भारत के प्रधानमंत्री थे। इस बात का खुलासा एक ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार नैविल मैक्सवेल ने किया है।

  • नेहरू ने दी थी यूएस को चीन के खिलाफ सैन्य अड्डे के इस्तेमाल की इजाज़त

    नेहरू ने दी थी यूएस को चीन के खिलाफ सैन्य अड्डे के इस्तेमाल की इजाज़त

    अमेरिकी एनएसए की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने वर्ष 1962 में चीन से हुए युद्ध में पराजय के बाद चीनी क्षेत्रों को निशाना बनाने के लिए अमेरिका को सीआईए के यू-2 जासूसी विमानों में ईंधन भरने के लिए अपने वायुसैनिक अड्डे के इस्तेमाल की अनुमति दी थी।

  • भारत-चीन युद्ध के 50 वर्ष बाद भारत सहयोगी है प्रतिद्वंद्वी नहीं : चीन

    भारत-चीन युद्ध के 50 वर्ष बाद भारत सहयोगी है प्रतिद्वंद्वी नहीं : चीन

    भारत को अपने प्रतिद्वंद्वी के स्थान पर सहयोगी बताते हुए चीन ने बुधवार को कहा कि वर्ष 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध के बाद दुनिया में काफी गंभीर बदलाव हुए हैं।

  • चीन से बचाव करने में भारत पूरी तरह सक्षम : एंटनी

    चीन से बचाव करने में भारत पूरी तरह सक्षम : एंटनी

    रक्षा मंत्री एके एंटनी ने गुरुवार को कहा कि भारत ने वर्ष 1962 में चीन के साथ हुए युद्ध के बाद से अब तक अपनी सैन्य शक्ति काफी मजबूत बना ली है और आज यह अपना बचाव करने में पूरी तरह सक्षम है।

  • दोहराया नहीं जा सकता 1962 का युद्ध : सेना प्रमुख

    दोहराया नहीं जा सकता 1962 का युद्ध : सेना प्रमुख

    सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह ने बुधवार को कहा कि चीन के साथ 1962 में हुआ युद्ध दोहराया नहीं जा सकता। इस युद्ध में भारत को पराजय का सामना करना पड़ा था।

  • भारत पर आक्रमण अमेरिकी, रूस को सबक सिखाना था : चीनी अखबार

    भारत पर आक्रमण अमेरिकी, रूस को सबक सिखाना था : चीनी अखबार

    सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के अखबार ने लिखा है कि वर्ष 1962 का युद्ध पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को एक झटका देकर अमेरिका और पूर्व सोवियत संघ के प्रभाव से जगाने के लिए था।

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