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Bhima Koregaon Violence Case


'Bhima Koregaon violence case' - 10 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • भीमा कोरेगांव हिंसा मामला: नवलखा और तेलतुंबडे को सरेंडर के लिए समय देने की याचिका पर फैसला सुरक्षित

    भीमा कोरेगांव हिंसा मामला:  नवलखा और तेलतुंबडे को सरेंडर के लिए समय देने की याचिका पर फैसला सुरक्षित

    भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में  आरोपी गौतम नवलखा और आनंद तेलतुंबडे की सरेंडर करने के लिए और समय देने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है. दोनों ने याचिका दाखिल करके कोरोना वायरस के चलते सरेंडर के लिए और वक्त मांगा था. दोनों की ओर से कहा गया कि दोनों एक्टिविस्ट 65 वर्ष से अधिक उम्र के हैं, दिल की बीमारी है. कोरोना वायरस के इस समय के दौरान जेल जाना "वस्तुतः मौत की सजा" है.

  • भीमा-कोरेगांव मामले की जांच पर महाराष्ट्र में खींचतान जारी, अब शरद पवार की NCP ने लिया यह फैसला

    भीमा-कोरेगांव मामले की जांच पर महाराष्ट्र में खींचतान जारी, अब शरद पवार की NCP ने लिया यह फैसला

    महाराष्ट्र में भीमा-कोरेगांव मामले की एनआईए से जांच को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के हरी झंडी देने से नाराज राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) ने अब महाराष्ट्र सरकार की ओर से मामले की एसआईटी जांच कराने का फैसला ले लिया है. यानी कि केंद्र की ओर से भीमा कोरेगांव हिंसा (Bhima-Koregaon Violence) की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) करेगी और राज्य सरकार एसआईटी जांच कराएगी. शरद पवार की मौजूदगी में सोमवार को हुई एनसीपी के नेताओं की बैठक में एसआईटी जांच कराने का फैसला लिया गया.

  • NIA को सौंपी गई भीमा-कोरेगांव हिंसा की जांच, महाराष्ट्र के गृहमंत्री ने केंद्र सरकार के फैसले की निंदा की, कहा...

    NIA को सौंपी गई भीमा-कोरेगांव हिंसा की जांच, महाराष्ट्र के गृहमंत्री ने केंद्र सरकार के फैसले की निंदा की, कहा...

    भीमा-कोरेगांव केस (Bhima Koregaon Case) को आज अचानक केंद्र सरकार ने एनआईए (NIA) को सौंप दिया. एक दिन पहले ही महाराष्ट्र सरकार ने साल 2018 में हुए भीमा-कोरेगांव हिंसा (Bhima Koregaon Violence) की समीक्षा का फैसला लिया था. केंद्र के इस फैसले की महाराष्ट्र सरकार ने निंदा की.

  • भीमा कोरेगांव हिंसा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने आनंद तेलतुंबडे के खिलाफ FIR रद्द करने से किया इनकार

    भीमा कोरेगांव हिंसा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने आनंद तेलतुंबडे के खिलाफ FIR रद्द करने से किया इनकार

    कोर्ट ने आनंद (Anand Teltumbde)  की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि वह चार हफ्ते में जमानत याचिका दाखिल करें. बता दें कि आनंद (Anand Teltumbde)  ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 24 दिसंबर के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया गया था. याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि तेलतुंबडे के खिलाफ अभियोग चलाने लायक सामग्री है.

  • महाराष्ट्र के दक्षिणपंथी नेता संभाजी भिड़े पर से दंगे के मामले वापस लिये गए, RTI में खुलासा

    महाराष्ट्र के दक्षिणपंथी नेता संभाजी भिड़े पर से दंगे के मामले वापस लिये गए, RTI में खुलासा

    महाराष्ट्र सरकार ने राइट विंग लीडर और कोरेगांव भीमा हिंसा मामले में मुख्य संदिग्ध संभाजी भिड़े के खिलाफ कम से कम दंगे के 6 मामलों को वापस ले लिया है. यह खुलासा एक RTI में हुआ है. भिड़े की अगुवाई वाले शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान संगठन के सैकड़ों कार्यकर्ताओं को दंगे के मामले में क्लीन चिट मिल गई है. जबकि दर्जनों मामलों में दंगे की धाराओं को हटा दिया गया है. इन मामलों में बीजेपी और शिवसेना के नेता व समर्थक शामिल रहे हैं. 

  • Bhima-Koregaon Case : सुप्रीम कोर्ट ने कहा - मामले की SIT जांच नहीं होगी, नज़रबंदी चार हफ्ते तक बनी रहेगी

    Bhima-Koregaon Case : सुप्रीम कोर्ट ने कहा - मामले की SIT जांच नहीं होगी, नज़रबंदी चार हफ्ते तक बनी रहेगी

    भीमा- कोरेगांव हिंसा के सिलसिले में नक्सल से जुड़े होने के आरोप में पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने फैसला दिया कि हैदराबाद में वामपंथी कार्यकर्ता और कवि वरवर राव, मुंबई में कार्यकर्ता वरनन गोन्जाल्विस और अरुण फरेरा, छत्तीसगढ़ में ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज और दिल्ली में रहने वाले गौतम नवलखा को जमानत नहीं दी जाएगी   और अगले चार हफ्ते तक उन्हें घर में नजर बंद रखा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि इस  मामले की SIT से जांच नहीं कराई जाएगी. बता दें कि गत 29 अगस्त को इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दखल देते हुए उन्हें उनके घरों में ही हाउस अरेस्ट रखने के आदेश जारी किए थे. तभी से वे अपने घरों में नजरबंद हैं. याचिका रोमिला थापर, देवकी जैन, प्रभात पटनायक, सतीश देशपांडे और माया दारूवाला की ओर से दाखिल की गई है. इसमें सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में SIT जांच और पांचों को जमानत की मांग की गई है. 20 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था और महाराष्ट्र पुलिस की केस डायरी भी ले ली थी.

  • भीमा कोरेगांव मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश: जारी रहेगी वाम विचारकों की नजरबंदी, अब 17 सितंबर को अगली सुनवाई

    भीमा कोरेगांव मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश: जारी रहेगी वाम विचारकों की नजरबंदी, अब 17 सितंबर को अगली सुनवाई

    सुप्रीम कोर्ट ने भीमा-कोरेगांव हिंसा के सिलसिले में नज़रबंद रखे गए पांच वाम विचारकों की नज़रबंदी की अवधि 17 सितंबर तक के लिए बढ़ा दी है. बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कोरेगांव-भीमा गांव में हिंसा की घटना के सिलसिले में पांच कार्यकर्ताओं को घरों में ही नजरबंद रखने की अवधि 12 सितंबर तक के लिये बढ़ाई थी. 

  • जानें, क्यों विवादास्पद है UAPA कानून, जिसके तहत गिरफ्तार हुए वाम विचारक

    जानें, क्यों विवादास्पद है UAPA कानून, जिसके तहत गिरफ्तार हुए वाम विचारक

    अलग-अलग शहरों में पांच सामाजिक कार्यकर्ताओं को उनके घरों में मंगलवार शाम को तलाशी लिए जाने के बाद गिरफ्तार किए जाने की चौतरफा आलोचना हो रही है, और आरोप लगाया जा रहा है कि उन्हें पकड़ने के लिए एक ऐसे आतंकवाद-रोधी कानून का सहारा लिया गया है, जिसमें गिरफ्तारी के लिए किसी वारंट की ज़रूरत नहीं होती. कवि तथा माओवादी विचारक वरवर राव, वकील सुधा भारद्वाज तथा कार्यकर्ताओं अरुण फरेरा, गौतम नवलखा व वरनॉन गोन्सालवेज़ को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (Unlawful Activities Prevention Act - UAPA) के तहत गिरफ्तार किया है.

  • सुप्रीम कोर्ट का आदेश, सभी गिरफ्तार वाम विचारक 6 सितंबर तक अपने घर में ही नजरबंद रहेंगे, 10 बातें

    सुप्रीम कोर्ट का आदेश, सभी गिरफ्तार वाम विचारक 6 सितंबर तक अपने घर में ही नजरबंद रहेंगे, 10 बातें

    सुप्रीम कोर्ट ने भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले के सिलसिले में गिरफ्तार 5 मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को 6 सितंबर तक घर में नजरबंद रखने का आज आदेश दिया. मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि असहमति लोकतंत्र का 'सेफ्टी वाल्व' है. शीर्ष अदालत के इस आदेश के बाद इन पांचों मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को जेल नहीं भेजा जाएगा, परंतु वे पुलिस की निगरानी में घरों में ही बंद रहेंगे. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने भीमा-कोरेगांव घटना के करीब 9 महीने बाद इन व्यक्तियों को गिरफ्तार करने पर महाराष्ट्र पुलिस से सवाल भी किए.

  • कौन हैं भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ्तार किए गए लोग?

    कौन हैं भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ्तार किए गए लोग?

    गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं में रांची से फादर स्टेन स्वामी, हैदराबाद से वामपंथी विचारक और कवि वरवरा राव, फरीदाबाद से सुधा भारद्धाज और दिल्ली से सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलाख सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है. 

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