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'Book review' - 70 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • अपाहिज सोच को झटका देने वाली कहानियां - तुम्हारी लंगी

    अपाहिज सोच को झटका देने वाली कहानियां - तुम्हारी लंगी

    अपने पहले कहानी संग्रह ‘तुम्हारी लंगी’ में लेखिका अपने इस यथार्थ से बहुत सहजता से आंख मिलाती है. संग्रह की पहली ही कहानी में उनकी नायिका कहती है- ‘महिला दुहरी विकलांग है’- और अचानक हमारे सामने यह समझने का अवसर छोड़ देती है कि विकलांगता को हम किसी नियति या प्रकृति प्रदत्त चीज़ की तरह नहीं, एक सामाजिक निर्मिति की तरह देखना सीखें.

  • सब कुछ नष्ट करने पर तुली सभ्यता की ज़रूरी कहानी - 'बंदूक़ द्वीप'

    सब कुछ नष्ट करने पर तुली सभ्यता की ज़रूरी कहानी - 'बंदूक़ द्वीप'

    अमिताभ घोष के लेखन में जितनी विश्वजनीन अपील होती है, उतना ही गहरा स्थानिकता का बोध होता है - और यह स्थानिकता इतिहास और भूगोल से इस तरह अनुस्युत रहती है कि अमिताभ घोष का लेखन साहित्य की सीमा (अगर ऐसी कोई सीमा होती हो तो) को फलांगता हुआ लगभग समाज-वैज्ञानिक शोध और अध्ययन की परिधि में चला जाता है.

  • 'कान्वर्सेशन विद माई लव' एक किताब जो देगी एकदम नया अनुभव...

    'कान्वर्सेशन विद माई लव' एक किताब जो देगी एकदम नया अनुभव...

    Book Review: हम बात कर रह हैं लेखक राजीव कपूर की नई किताब 'कान्वर्सेशन विद माई लव' के बारे में. यह एक लव स्टोरी है. 'कान्वर्सेशन विद माई लव' की अनोखी और मजेदार बात यह है कि यह किताब गद्य और पद्य दोनों का मले है. यह किताब अंग्रेजी में है और इसका किंडल संस्करण अमेज़न पर मौजूद है. चलिए जानते हैं इसके बारे में - 

  • किताब समीक्षा : स्मृतियों की जुगाली से बनी प्राथमिक कविता

    किताब समीक्षा : स्मृतियों की जुगाली से बनी प्राथमिक कविता

    झारखंड में तीन साल की बच्ची से हुए रेप की चीख आप इस संग्रह में सुन सकते हैं. मॉब लिंचिंग पर कई कविताएं हैं. सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर दुख भरी कविता है- आत्महत्या के पहले की सिहरन को महसूस करने की कोशिश करती हुई. होली-दशहरा भी इन कविताओं में आते हैं. लेकिन फिर दुहराना होगा कि ये बिल्कुल प्राथमिक अभिव्यक्तियां हैं जो किसी भी कवि हदय इंसान में संभव हैं. बहुत गहरी तकलीफ़ों को तत्काल बयान नहीं करना चाहिए. उन्हें उलट कर, पलट कर, कुछ

  • Book Review: सादतपुर के हरिपाल त्यागी

    Book Review: सादतपुर के हरिपाल त्यागी

    Book Review: बड़ी मुखानी, हल्द्वानी, नैनीताल उत्तराखंड से निकलती आधारशिला पत्रिका अपने को साहित्य, कला, संस्कृति की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका कहती है. अपने दो सौवें अंक को विश्वश्रमिक दिवस 2019 को कला परिदृश्य से अनंत यात्रा पर निकल जानेवाले कलाकार हरिपाल त्यागी पर केंद्रित किया.

  • Book Review: सादतपुर के हरिपाल त्यागी

    Book Review: सादतपुर के हरिपाल त्यागी

    Book Review: बड़ी मुखानी, हल्द्वानी, नैनीताल उत्तराखंड से निकलती आधारशिला पत्रिका अपने को साहित्य, कला, संस्कृति की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका कहती है. अपने दो सौवें अंक को विश्वश्रमिक दिवस 2019 को कला परिदृश्य से अनंत यात्रा पर निकल जानेवाले कलाकार हरिपाल त्यागी पर केंद्रित किया.

  • Lamhi Book Review: रेणु के पाठ की तैयारी

    Lamhi Book Review: रेणु के पाठ की तैयारी

    Lamhi Book Review: संपादकीय के अलावा इस अंक में कुल अड़तीस आलेख हैं. निर्मल वर्मा, सुरेंद्र चौधरी और नित्यानंद तिवारी के प्रसिद्ध लेख तो इस अंक में शामिल हैं ही, साथ ही नलिन विलोचन शर्मा का वह कालजयी लेख भी है, जिसमें मैला आंचल के प्रकाशन के तुरंत बाद उन्होंने रेणु के बारे में कहा था कि मैला आंचल की भाषा से हिंदी समृद्ध हुई है.

  • अपनी अलग कथा-प्रविधि गढ़ता एक लेखक

    अपनी अलग कथा-प्रविधि गढ़ता एक लेखक

    वह कहानी जिसकी चर्चा के बिना यह टिप्पणी अधूरी रहेगी. दरअसल यह कहानी जितनी लेखक के लिए चुनौती भरी है उतनी ही आलोचक के लिए भी. ‘एक राजा था जो सीताफल से डरता था’ नाम की यह कहानी हालांकि संग्रह के प्रकाशन से पहले भी चर्चित हो चुकी है. यह पूरी तरह फंतासी से पैदा हुई कथा है- इसमें कुछ लोककथा का रंग शामिल है, लेकिन यह लोककथा नहीं है.

  • किताब की बात: क्या बिहार में मरते रहेंगे बच्चे, बिकती रहेंगी बेटियां?

    किताब की बात: क्या बिहार में मरते रहेंगे बच्चे, बिकती रहेंगी बेटियां?

    बीते साल बिहार में नीतीश कुमार ने खादी के एक मॉल का उद्घाटन किया. इसमें शक नहीं कि खादी बिकनी चाहिए. लेकिन क्या गांधी ने खादी की कल्पना एक ऐसे कपड़े के रूप में की थी जो मॉल में बिके? गांधी की खादी बिक्री के लिए नहीं, बुनकरी के लिए थी, गरीबों के लिए थी. बताने की ज़रूरत नहीं कि गांधी की खादी का यह बाज़ारीकरण दरअसल उस नई सत्ता संस्कृति का द्योतक है जिसके तहत सारा विकास एक ख़ास वर्ग को संबोधित होता है और उसे बाज़ार की कसौटी पर खरा उतरना होता है.

  • Shakuntala Devi Review: 'विद्या कसम' विद्या बालन की शानदार एक्टिंग है 'शकुंतला देवी'

    Shakuntala Devi Review: 'विद्या कसम' विद्या बालन की शानदार एक्टिंग है 'शकुंतला देवी'

    Shakuntala Devi Review: विद्या बालन ने शकुंतला देवी के किरदार को स्क्रीन पर बहुत ही खूबी के साथ जिया है और हर बारीकी को पकड़ने की पूरी कोशिश की है...

  • विद्या बालन ने खोला राज, इंटरव्यू में बताया किस वजह से की 'शकुंतला देवी'

    विद्या बालन ने खोला राज, इंटरव्यू में बताया किस वजह से की 'शकुंतला देवी'

    फिल्म के ट्रेलर में ही विद्या बालन (Vidya Balan) ने दिखा दिया है कि वह कमाल की एक्टर हैं और मुश्किल से मुश्किल रोल को भी चुटकी बजाते ही कर लेती हैं.

  • पुस्तक समीक्षाः जीवन के साथ विसंगतियों से रू-ब-रू कराती हैं ‘पिघली हुई लड़की’ की कहानियां

    पुस्तक समीक्षाः जीवन के साथ विसंगतियों से रू-ब-रू कराती हैं ‘पिघली हुई लड़की’ की कहानियां

    पिघली हुई लड़की कहानी समाज में आए दिन होने वाले एसिड अटैक के मद्देनज़र लिखी गई है. आकांक्षा ने दो किशोरियों के माध्यम से अपनी कहानी कही है.

  • Book Review: डर को हराने का तरीका है एम्ब्रेस योर फीयर

    Book Review: डर को हराने का तरीका है एम्ब्रेस योर फीयर

    'डर के आगे जीत है' यह बात आपने खूब सुनी होगी. लेकिन अपने डर को कैसे हराना है इसे बहुत कम ही लोग बाया करते हैं. हाल ही में सारा खान की लिख किताब एम्ब्रेस योर फीयर का विमोचन किया गया.

  • निर्मल वर्मा की जिंदगी और लेखनी में झांकने की खिड़की है 'संसार में निर्मल वर्मा'

    निर्मल वर्मा की जिंदगी और लेखनी में झांकने की खिड़की है 'संसार में निर्मल वर्मा'

    'ससार में निर्मल वर्मा' में करण थापर से बातचीत के दौरान निर्मल वर्मा अपने जीवन से जुड़ी कई अहम जानकारी देते हैं. जैसे उन्होंने 11 साल की उम्र में पहली कहानी लिखी थी...

  • पुस्तक समीक्षाः तीखे और कसैले हैं 'कबीरा बैठा डिबेट में' के व्यंग्य

    पुस्तक समीक्षाः तीखे और कसैले हैं 'कबीरा बैठा डिबेट में' के व्यंग्य

    Book Review: 'कबीरा बैठा डिबेट में' (Kabira Baitha Debate Mein) किताब के लेखक पीयूष खुद मीडिया से जुड़े हैं. ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के हर चेहरे को उन्होंने बखूबी व्यंग्यों में पेश किया है. कई व्यंग्यों में कबीरदास को टीवी डिबेट का भाग बनाया गया है. और इसके साथ ही साथ कई मीडिया और समाज की विसंगतियों को कहीं तीखे, तो कहीं कसैले तड़के लगाए गए हैं. 

  • किताब-विताब : लोक और भाषा के रस में पगा उपन्यास

    किताब-विताब : लोक और भाषा के रस में पगा उपन्यास

    एक रंगकर्मी और रंग निर्देशक के रूप में हृषीकेश सुलभ की पहचान इतनी प्रबल रही है कि इस बात की ओर कम ही ध्यान जाता है कि वे बहुत समर्थ कथाकार भी रहे हैं. उनका नया‌ उपन्यास 'अग्निलीक' हमें मजबूर करता है कि हम उन्हें समकालीन उपन्यासकारों की भी प्रथम पंक्ति में रखें.

  • 'महाबली': इति‍हास का वो 'क‍िस्सा', जो असगर वजाहत की कल्पना के हि‍स्से आया...

    'महाबली': इति‍हास का वो 'क‍िस्सा', जो असगर वजाहत की कल्पना के हि‍स्से आया...

    Book Review: कोई भी नाटक देखने या पढ़ने से पहले हम सभी को उसका एक छोटा सा 'ट्रेलर' चाहि‍ए होता है. तो चलिए हम द‍िखाते हैं आपको असगर वजाहत के नए नाटक महाबली का ये 'ट्रेलर'... तो अपनी कल्पना शक्ति की पेटी बांध लीजि‍ए और सुन‍िए- 

  • पुस्तक समीक्षा : RSS के बारे में उठे सवालों के जवाब देती है 'द RSS रोडमैप्स फॉर द ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी'

    पुस्तक समीक्षा : RSS के बारे में उठे सवालों के जवाब देती है 'द RSS रोडमैप्स फॉर द ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी'

    यह पहली बार है, जब RSS के एक वरिष्ठ प्रचारक ने एक पुस्तक के माध्यम से संघ के अंदरूनी क्रियाकलाप, उसकी विचारधारा, भारत के प्रति उसकी दृष्टि तथा विभिन्न विषयों पर सोच को सामने रखने का प्रयास किया है. लंबे समय से संघ के छात्र संगठन ABVP में संगठन महासचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे सुनील आम्बेकर की पुस्तक – 'द RSS रोडमैप्स फॉर द ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी' - उन तमाम विषयों पर संघ की राय स्पष्ट करने का प्रयास करती है, जिन्हें लेकर RSS को कठघरे में खड़ा किया जाता रहा है.

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