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Indian Penal Code (IPC)


'Indian Penal Code (IPC)' - 6 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • सुप्रीम कोर्ट के ये हैं 5 जज, जिन्होंने समलैंगिकता के बाद अब व्यभिचार को किया अपराध से बाहर

    सुप्रीम कोर्ट के ये हैं 5 जज, जिन्होंने समलैंगिकता के बाद अब व्यभिचार को किया अपराध से बाहर

    158 साल पुराने कानून IPC 497 (व्यभिचार) की वैधता  (Adultery under Section 497) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपना फैसला सुना दिया. सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने व्यभिचार को आपराधिक कृत्य बताने वाले दंडात्मक प्रावधान को सर्वसम्मति से निरस्त किया. सुप्रीम कोर्ट ने 157 साल पुराने व्यभिचार को रद्द कर दिया और कहा कि किसी पुरुष द्वारा विवाहित महिला से यौन संबंध बनाना अपराध नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि व्यभिचार कानून असंवैधानिक है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि व्यभिचार कानून मनमाना और भेदभावपूर्ण है. यह लैंगिक समानता के खिलाफ है. मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा के संविधान पीठ ने यह फैसला सुनाया है. बता दें कि इस पीठ ने ही धारा 377 पर अपना अहम फैसला सुनाया था. इससे पहले इसी बेंच ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से अलग किया था. तो चलिए जानते हैं उन पांचों जजों के बारे में...

  • जानें क्‍या है IPC 497? सुप्रीम कोर्ट ने 158 साल पुराने व्यभिचार कानून को किया खत्‍म

    जानें क्‍या है IPC 497? सुप्रीम कोर्ट ने 158 साल पुराने व्यभिचार कानून को किया खत्‍म

    सुप्रीम कोर्ट ने व्यभिचार-रोधी कानून को रद्द कर दिया है और कहा है कि व्यभिचार अपराध नहीं है. कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि यह तलाक का आधार हो सकता है लेकिन यह कानून महिला के जीने के अधिकार पर असर डालता है.

  • समलैंगिकता अपराध नहीं, जानिए क्या थी LGBTQ समुदाय से जुड़ी धारा-377

    समलैंगिकता अपराध नहीं, जानिए क्या थी LGBTQ समुदाय से जुड़ी धारा-377

    आपको बता दें इस फैसले से पहले तक आईपीसी की धारा 377 के तहत समलैंगिकता अपराध थी. इसमें 10 साल या फिर जिंदगीभर जेल की सजा का भी प्रावधान था, वो भी गैर-जमानती.

  • नशे में एक्सीडेंट से होने वाली मौत पर 'गैर इरादतन हत्या' का मामला दर्ज करने की सिफारिश

    नशे में एक्सीडेंट से होने वाली मौत पर 'गैर इरादतन हत्या' का मामला दर्ज करने की सिफारिश

    सरकार सड़क हादसों में लगाम लगाने के लिए यातायात नियमों को और सख्त बनाने पर लगातार जोर दे रही है, बावजूद इसके सड़क हादसों में कोई कमी नहीं आ रही है. सरकार की अगली कोशिश शराब पीकर वाहन चलाने के दौरान होने वाली मौत के मामले को गैर इरादतन हत्या के तौर पर शामिल करने की है.

  • भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विस्तृत समीक्षा के पक्ष में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

    भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विस्तृत समीक्षा के पक्ष में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

    देशद्रोह संबंधी कानून को लेकर चल रही चर्चा के बीच राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय दंड संहिता को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुसार ढालने के लिए विस्तृत समीक्षा की जरूरत है और ‘प्राचीन’ पुलिस प्रणाली में बदलाव लाने की आवश्यकता है।

  • हिट एंड रन को लेकर सख्त कानून की तैयारी

    हिट एंड रन को लेकर सख्त कानून की तैयारी

    हिट एंड रन यानी टक्कर मार कर फरार होना। अगर सीसीटीवी कैमरे ना हों तो कई वारदातों की हकीकत शायद ही सामने आ पाए। ऐसे में पीड़ित को इंसाफ और मुजरिम को सज़ा की बात बेमानी है, लेकिन सरकार अब हिट एंड रन के ऐसे मामलों में सख़्त कानून लाने जा रही है।

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