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'KeyCandidate' - 30 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • क्या BJP के तजिंदर पाल सिंह बग्गा AAP से छीन पाएंगे हरिनगर सीट?

    क्या BJP के तजिंदर पाल सिंह बग्गा AAP से छीन पाएंगे हरिनगर सीट?

    नानकपुरा, पराग विहार, मायापुरी आदि क्षेत्रों से मिलकर हरिनगर विधानसभा बनी है. 1993 से दिल्ली में यह विधानसभा सीट अस्तित्व में आई. पहली बार 1993 में हुए चुनाव में इस सीट पर भाजपा ने बाजी मारी. फिर लगातार 2008 तक जीतती रही. यहां से भाजपा के टिकट पर हरशरण सिंह बल्ली लगातार चार बार विधायक बने.

  • कौन हैं राघव चड्ढा, जो राजेंद्र नगर से लड़ रहे हैं चुनाव?

    कौन हैं राघव चड्ढा, जो राजेंद्र नगर से लड़ रहे हैं चुनाव?

    दिल्ली में विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Election 2020) के लिए 8 फरवरी को मतदान संपन्‍न हो चुका है. इस बार दिल्ली की राजेंद्र नगर सीट (Rajinder Nagar Vidhan Sabha Seat) पर आम आदमी पार्टी (AAP) ने राघव चड्ढा (Raghav Chadha) को अपना उम्मीदवार बनाया है. राघव चड्ढा पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं.

  • IRS की नौकरी छोड़ राजनीति में आए अरविंद केजरीवाल का सियासी सफर

    IRS की नौकरी छोड़ राजनीति में आए अरविंद केजरीवाल का सियासी सफर

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वाराणसी में चुनौती देने वाले अरविंद केजरीवाल फरवरी 2015 में रिकार्ड बहुमत से दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री बने. दिल्‍ली विधानसभा में 70 में से 67 सीटों पर आम आदमी पार्टी के उम्‍मीदवार जीतकर आए थे और इस जीत के मुखिया थे अरविंद केजरीवाल. देश की राजनीति में अरविंद केजरीवाल अण्‍णा आंदोलन की देन हैं.

  • कांग्रेस छोड़ थामा था BJP का हाथ, फिर घर वापसी - अरविंदर सिंह लवली का सियासी सफर

    कांग्रेस छोड़ थामा था BJP का हाथ, फिर घर वापसी - अरविंदर सिंह लवली का सियासी सफर

    अरविंदर सिंह लवली (Arvinder Singh lovely) एक युवा राजनेता हैं. शीला सरकार में वह वह तीन बार विधायक रहने के साथ-साथ मंत्री भी रह चुके हैं. इतना ही नहीं वह कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं. शीला दीक्षित की कैबिनेट में शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने पब्लिक स्कूलों में कमजोर वर्गों के बच्चों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण शुरू करने की पहल की थी.

  • क्या लोकसभा चुनाव हारने के बाद अब विधानसभा चुनाव जीत पाएंगे AAP के दिलीप पांडे?

    क्या लोकसभा चुनाव हारने के बाद अब विधानसभा चुनाव जीत पाएंगे AAP के दिलीप पांडे?

    दिलीप पांडे (Dilip Pandey) आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) से इस बार तिमारपुर विधानसभा सीट से विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly election 202) लड़ रहे हैं. उनका मुकाबला बीजेपी के उम्‍मीदवार सुरेंद्र सिंह बिट्टू और कांग्रेस की अमर लता सांगवान से है.

  • क्या AAP बचा पाएगी तिमारपुर का गढ़, BJP ने उतारा पूर्व कांग्रेस विधायक सुरेंद्र पाल सिंह को

    क्या AAP बचा पाएगी तिमारपुर का गढ़, BJP ने उतारा पूर्व कांग्रेस विधायक सुरेंद्र पाल सिंह को

    दिल्ली की तिमारपुर विधानसभा सीट की कहानी बड़ी दिलचस्प है. ये सीट आम आदमी पार्टी हमेशा जीतती रही लेकिन बार बार उम्मीदवार भी उसने बदले. इस बार पार्टी ने यहां से वरिष्ठ नेता दिलीप पांडेय को मैदान में उतारा है. बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य के नाम पर दिलीप पांडेय यहां से चुनाव लड़ रहे हैं. 39 वर्षीय दिलीप पांडेय उत्तर पूर्वी दिल्ली से लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त भी झेली थी.

  • क्या हैट्रिक लगाएंगे दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया...?

    क्या हैट्रिक लगाएंगे दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया...?

    बीजेपी प्रत्याशी रवि नेगी ने इससे पहले निगम पार्षद के 2017 में हुए चुनाव में भाग्य अजमाया था साथ ही उन्होंने पटपड़गंज विधान सभा क्षेत्र में पार्टी विस्तारक के पद पर भी काम किया है. रवि नेगी बीजेपी के विनोद नगर मंडल के पूर्व ज़िला उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं

  • कौन हैं AAP की आतिशी के खिलाफ कालकाजी से लड़ने वाली शिवानी चोपड़ा...?

    कौन हैं AAP की आतिशी के खिलाफ कालकाजी से लड़ने वाली शिवानी चोपड़ा...?

    कालकाजी विधानसभा सीट के अंतर्गत महारानी बाग, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, भारत नगर, ईस्ट ऑफ कैलाश, सुखदेव विहार, गोविंदपुरी इलाके शामिल हैं. यहां पंजाबी और सिख समुदाय के लोग का बहुमत होता है. इसके अलावा इलाके में 40 फीसदी से ज्यादा जेजे बस्ती और स्लम है. इस सीट में मशहूर कालकाजी मंदिर भी है. 

  • कौन हैं CM अरविंद केजरीवाल के खिलाफ BJP की ओर से लड़ रहे सुनील यादव?

    कौन हैं CM अरविंद केजरीवाल के खिलाफ BJP की ओर से लड़ रहे सुनील यादव?

    भारतीय जनता पार्टी (BJP) दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल के खिलाफ नई दिल्ली विधानसभा सीट से सुनील यादव को ही मैदान में उतारेंगे.

  • झारखंड : भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार संघर्ष करने वाले नेता सरयू राय

    झारखंड : भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार संघर्ष करने वाले नेता सरयू राय

    बिहार का पशुपालन घोटाला वह घोटाला है जिसने बिहार की राजनीति को नई दिशा दे दी. यह घोटाला जब हुआ तब बिहार और झारखंड संयुक्त प्रदेश थे. भारतीय राजनीति में सबसे अधिक चर्चित घोटालों में से एक पशुपालन घोटाले को उजागर करने वाले नेता का नाम है सरयू राय. बीजेपी के नेता सरयू राय झारखंड में कैबिनेट मंत्री हैं और इस बार पार्टी से टिकट नहीं दिए जाने पर बगावत कर रहे हैं. वे अपनी परंपरागत सीट जमशेदपुर पश्चिम के अलावा जमशेदपुर पूर्व से भी उम्मीदवार हैं जो कि मुख्यमंत्री रघुबर दास की सीट है.

  • सुदेश महतो को झारखंड आंदोलन ने बना दिया जन-जन का नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और खिलाड़ी भी

    सुदेश महतो को झारखंड आंदोलन ने बना दिया जन-जन का नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और खिलाड़ी भी

    झारखंड के राजनीतिक दल ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) के प्रमुख सुदेश महतो और उनकी पार्टी राज्य के मौजूदा विधानसभा चुनाव में बगैर बीजेपी के समर्थन के मैदान में उतरी है. इससे पहले सुदेश महतो को पहले निरंतर बीजेपी का समर्थन मिलता रहा और पिछले चुनाव में उन्होंने बीजेपी से गठबंधन किया था.

  • बाबूलाल मरांडी : सभी 81 सीटों पर अपना दम दिखा रहे हैं झारखंड के पहले मुख्यमंत्री

    बाबूलाल मरांडी : सभी 81 सीटों पर अपना दम दिखा रहे हैं झारखंड के पहले मुख्यमंत्री

    1999 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने शिबू सोरेने की पत्नी रूपी सोरेन को दुमका लोकसभा सीट से चुनाव में हराया था जिसके बाद उन्हें केंद्र के अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री बनाया गया था.  2000 में राज्य अलग होने के बाद 28 महीने तक बाबूलाव मरांडी राज्य के मुख्यमंत्री रहे. सहयोगी दलों के विरोध के बाद उन्हें अपने पद को छोड़ना पड़ा था.

  • हेमंत सोरेन: JMM के साथ-साथ महागठबंधन को भी है जीत दिलाने की है जिम्मेदारी

    हेमंत सोरेन:   JMM के साथ-साथ महागठबंधन को भी है जीत दिलाने की है जिम्मेदारी

    जुलाई 2013 में JMM ने  कांग्रेस और RJD के साथ मिलकर झारखंड में सरकार बनाई और हेमंत सोरेन झारखंड के मुख्यमंत्री बने. वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में JMM ने राज्य में अकेले चुनाव लड़ा और पार्टी को 19 सीटों पर जीत मिली थी.

  • रघुबर दास: झारखंड के पहले गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री क्या कर पाएंगे वापसी...?

    रघुबर दास:  झारखंड के पहले गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री क्या कर पाएंगे वापसी...?

    वर्ष 1995 में पहली बार रघुबर दास ने जमशेदपुर पूर्व सीट पर जीत दर्ज की थी, जिसके बाद से लगातार पांच चुनावों से वह इस सीट पर चुनाव जीतते रहे हैं. इस सीट पर रघुबर दास ने 2014 में कांग्रेस के प्रत्याशी को लगभग 70,000 मतों से हराया था, जबकि 2009 में उन्होंने JVM प्रत्याशी अभय सिंह को मात दी थी.

  • क्या लंदन से पढ़कर आई 27-वर्षीय नौक्षम चौधरी BJP को दिलवा पाएंगी मुस्लिम-बहुल इलाके में जीत

    क्या लंदन से पढ़कर आई 27-वर्षीय नौक्षम चौधरी BJP को दिलवा पाएंगी मुस्लिम-बहुल इलाके में जीत

    हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 (Haryana Assembly Elections 2019) में मेवात जिले (Mewat district) की पुन्हाना सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रत्याशी 27-वर्षीय नौक्षम चौधरी (Nauksham Chaudhary) की उपलब्धियां इस तरह की हैं, जैसी आमतौर पर इस इलाके में किसी प्रत्याशी की नहीं सुनी गईं.

  • छगन भुजबल : कभी राजनीति में शिवसेना से ली थी एंट्री, बाद में NCP का थामा दामन

    छगन भुजबल : कभी राजनीति में शिवसेना से ली थी एंट्री, बाद में NCP का थामा दामन

    छगन भुजबल का जन्म 15 अक्टूबर 1947 में हुआ था. भुजबल अन्य पिछले वर्ग के नेता कहलाते है. भुजबल ने 1960 के दशक में शिवसेना से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. राजनीति में प्रवेश करने से पहले छगन भुजबल बायकुला मार्केट में एक सब्जी विक्रेता थे.

  • अजीत पवार : 16 साल तक पुणे जिला सहकारी बैंक के रहे अध्यक्ष, राजनीति में आते ही जमाई धाक

    अजीत पवार : 16 साल तक पुणे जिला सहकारी बैंक के रहे अध्यक्ष, राजनीति में आते ही जमाई धाक

    इतना ही नहीं, अजीत पवार महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री भी रहे. उनके करीबी लोग उन्हें दादा के नाम से भी बुलाते हैं. अजीत पवार 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर स्थित देवलाली प्रवरा में जन्म लिया, जहां उनके दादा-दादी का निवास था. एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे अजीत हैं.

  • देवेंद्र फडणवीस : क्या फिर महाराष्ट्र की जनता का जीत पाएंगे विश्वास...?

    देवेंद्र फडणवीस : क्या फिर महाराष्ट्र की जनता का जीत पाएंगे विश्वास...?

    भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता फडणवीस ने 31 अक्टूबर 2014 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में मुख्यमंत्री पद का शपथग्रहण किया था. वह 44 वर्ष की अवस्था में राज्य के दूसरे सबसे छोटे मुख्यमंत्री बने थे. वह बौद्धिक कौशल और ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं. उन्हें 2002-03 में राष्ट्रमंडल संसदीय संघ द्वारा सर्वश्रेष्ठ संसदीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

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