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Prime Time Intro


'Prime Time Intro' - 395 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • पहले दंगों से जूझे अब चुनौतियों से जूझ रहे हैं

    पहले दंगों से जूझे अब चुनौतियों से जूझ रहे हैं

    दिल्ली दंगों की बहसें बड़ी होने लगी हैं. इन बहसों के लिए खलनायक चुन लिए गए हैं ताकि आराम कुर्सी पर बैठे प्रवक्ताओं के भाषण में जोश आ सके. धीरे-धीरे अब चैनलों से मरने वालों की संख्या भी हटती जा रही है, लेकिन उनके पीछे परिवार वाले अलग-अलग चुनौतियों से जूझ रहे हैं.

  • दिल्ली चुनाव - बिरयानी का सियासी झूठ और रोज़गार का फ़रेब

    दिल्ली चुनाव - बिरयानी का सियासी झूठ और रोज़गार का फ़रेब

    दिल्ली के चुनावों में फिर से एक बार बिरयानी की देग चढ़ गई है. राजनीति ने एक चश्मा दिया है और चाहती है कि आप उस चश्मे से खाने पीने और पहनने ओढ़ने की चीज़ों को देखना शुरू कर दे. बहुत लोग देखने भी लगे होंगे. हम भाषणों के झोंक में भूल जाते हैं कि भारत में शाकाहारी भी हैं और मांसाहारी भी हैं. जो मांसाहारी हैं वो भी त्योहारों के समय शाकाहारी हो जाते हैं और कई घरों में शाकाहारी भी होते हैं और मांसाहारी भी. बिरयानी हर मज़हब के लोग खाते हैं मगर दिल्ली के चुनावों ने जो चश्मा दिया है वो चाहता है कि आप उस चश्मे से सिर्फ एक समुदाय को बिरयानी खाते हुए देखें.

  • शाहीन बाग़ जैसे प्रदर्शनों से कौन बोर हो गया है?

    शाहीन बाग़ जैसे प्रदर्शनों से कौन बोर हो गया है?

    ऐसा क्या फैसला है ये कि इसे समझाने के लिए बीजेपी को देश भर में 250 प्रेस कांफ्रेंस और 1000 सभाएं करनी पड़ रही हैं. इसमें स्थानीय और राष्ट्रीय नेता भी हैं और दरवाज़े दरवाज़े जाकर कानून को समझाने का कार्यक्रम भी है. जब इस कानून को 130 करोड़ भारतीयों का समर्थन हासिल है तो फिर बीजेपी को इतनी रैलियां क्यों करनी पड़ रही हैं. अब यह देखा जाना चाहिए कि 1000 सभाओं में से कितनी सभाएं असम और पूर्वोत्तर के राज्यों में होती हैं. जहां इस कानून के विरोध का स्वरूप ही कुछ अलग है.

  • आतंकवादियों से क्या नाता रहा डीएसपी देविंदर सिंह का?

    आतंकवादियों से क्या नाता रहा डीएसपी देविंदर सिंह का?

    मुझे हैरानी हो रही है कि डीएसपी दविंदर सिंह की आतंकवादियों के साथ गिरफ्तारी से लोग हैरान हैं. दरअसल हैरानी इसलिए कि बार-बार मना करने के बाद भी बहुत लोग आतंकवाद को मज़हब की निगाह से ही देखते हैं. आतंक को दूसरे सवालों और संबंधों के साथ नहीं देखते हैं?

  • नागरिकता देने में धार्मिक आधार पर भेदभाव क्यों?

    नागरिकता देने में धार्मिक आधार पर भेदभाव क्यों?

    राष्ट्रवाद की चादर में लपेटकर सांप्रदायिकता अमृत नहीं हो जाती है. उसी तरह जैसे ज़हर पर चांदी का वर्क चढ़ा कर आप बर्फी नहीं बना सकते हैं. हम चले थे ऐसी नागरिकता की ओर जो धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करती हो, लेकिन पहुंचने जा रहे हैं वहां जहां धर्म के आधार पर नागरिकता का फैसला होगा. नागरिकता को लेकर बहस करने वाले लोग पहले यही फैसला कर लें कि इस देश में किस-किस की नागरिकता अभी तय होनी है

  • इलेक्टोरल बॉन्ड क्या पारदर्शिता के खिलाफ नहीं?

    इलेक्टोरल बॉन्ड क्या पारदर्शिता के खिलाफ नहीं?

    सिर्फ सरकार को पता है कि कौन कंपनी किसे चंदा दे रही है. अगर सरकार ने दबाव डालकर विरोधी दल को चंदा रोक दिया तो? आखिर दान देने वाले की पहचान छिपाने के पीछे मकसद क्या है?

  • राज्यपाल ने संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन किया?

    राज्यपाल ने संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन किया?

    लोकतंत्र में जब संविधान की धज्जियां उड़ने लगें तो वह भी नरक ही होता है अगर नरक होता है तो. यह तो सुप्रीम कोर्ट को तय करना है कि महाराष्ट्र में संविधान की धज्जियां उड़ी की नहीं हैं. 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाते हैं. इसी दिन भारत का संविधान तैयार रूप में स्वीकृत हुआ था. इसी दिन सुप्रीम कोर्ट का महाराष्ट्र में फ्लोर टेस्ट के मामले में फैसला आएगा. 26 जनवरी 2016 को जब भारत संविधान के लागू होने के जश्न में डूबा था तब शाम सात बजकर 59 मिनट पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने के कैबिनेट की सिफारिश पर दस्तखत कर रहे थे

  • प्राइम टाइम इंट्रो: व्हाट्सएप कॉल में सेंध, पत्रकारों के फोन हुए हैक

    प्राइम टाइम इंट्रो: व्हाट्सएप कॉल में सेंध, पत्रकारों के फोन हुए हैक

    तो क्या व्हाट्सएप कॉल की जासूसी की जा सकती है? जिस व्हाट्सएप कॉल पर आम आदमी भी भरोसा करता है कि कोई सुन नहीं रहा होगा, उसे भी किसी सॉफ्टवेयर की मदद से हैक कर सुना जा सकता है. यह भरोसा टूटने पर आपको कैसा लगेगा?

  • प्राइम टाइम इंट्रो: गोपाल कांडा और भारतीय राजनीति की बेशर्मी

    प्राइम टाइम इंट्रो: गोपाल कांडा और भारतीय राजनीति की बेशर्मी

    हरियाणा के सिरसा से विधायक गोपाल कांडा की बात क्या सिर्फ इसलिए हो रही है कि कांडा ने बीजेपी को सपोर्ट देने की बात कही है? क्या हम इस सवाल का जवाब ठोस रूप से जानते हैं कि अगर कांग्रेस को ज़रूरत होती तो गोपाल कांडा का सपोर्ट लेने से इंकार कर देती?

  • प्राइम टाइम इंट्रो: महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव परिणाम का विश्लेषण

    प्राइम टाइम इंट्रो: महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव परिणाम का विश्लेषण

    महाराष्ट्र और हरियाणा में बीजेपी की सरकार बन रही है. देवेंद्र फडणवीस और मनोहर लाल खट्टर ही मुख्यमंत्री होंगे. प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दोनों के पिछले कार्यकाल की तारीफ की है और आगे के लिए बधाई दे दी है. इस चुनाव में जनता ने अपनी तरफ से विपक्ष को भी मज़बूत किया है.

  • भारतीय मूल के अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी समेत तीन को नोबेल पुरस्कार

    भारतीय मूल के अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी समेत तीन को नोबेल पुरस्कार

    आज का दिन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बुरी ख़बर लेकर आया है, मगर भारतीय मूल के अर्थशास्त्री के लिए बहुत ही अच्छी ख़बर लाया है. विश्व बैंक ने भारत की जीडीपी का अनुमान डेढ़ प्रतिशत घटा दिया है. 7.5 प्रतिशत से घटा कर 6 प्रतिशत कर दिया है. डेढ़ प्रतिशत की कमी बहुत होती है. दूसरी तरफ जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में एमए करने वाले अभिजीत विनायक बनर्जी को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिला है.

  • चीन में पत्रकारों को देना होगा चाटुकारिता का टेस्ट

    चीन में पत्रकारों को देना होगा चाटुकारिता का टेस्ट

    पत्रकारिता में चाटुकारिता करने वालों के लिए बुरी ख़बर है. अब तक चाटुकारिता को सबसे आसान बीट माना जाता था, लेकिन हर माल को सस्ता बनाकर बेचने वाले चीन ने चाटुकारिता को महंगा यानी मुश्किल बना दिया है. चीन में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा होने जा रही है, जिसमें राष्ट्रपित शी जिनपिंग के राजनीतिक विचारों और मार्क्सवाद से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे. जो इस परीक्षा में पास होगा उसी को प्रेस कार्ड मिलेगा.

  • झारखंड में पेड न्यूज का नया चेहरा

    झारखंड में पेड न्यूज का नया चेहरा

    पेड न्यूज़ का नया रूप आया है. आया है, तो क्या कमाल आया है. क्या आपने या किसी नॉन रेज़िडेंट इंडियन ने यह सुना है कि सरकार अपनी योजनाओं की तारीफ छपवाने के लिए टेंडर निकाले और पत्रकारों से कहे कि वे अर्जी दें कि कैसे तारीफ करेंगे? विदेशों में ऐसा होता है या नहीं, ये तो नान रेज़िडेंट इंडियन ही बता सकते हैं कि क्या वाशिंगटन पोस्ट, गार्डियन, न्यूयार्क टाइम्स अपने पत्रकारों से कहे कि वे सरकार का टेंडर लें, उसकी योजना की जमकर तारीफ करते हुए लेख लिखें और फिर उसे दफ्तर ले आएं ताकि फ्रंट पेज पर छाप सकें? इसलिए कहा कि ऐसा कमाल बहुत कम होता है. युगों-युगों में एक बार होता है जब चाटुकारिता आफिशियल हो जाती है. वैसे भी होती है लेकिन जब विज्ञापन निकले, तारीफ के पैसे मिलें, यह बताया जाए तो चाटुकारिता पारदर्शी हो जाती है.

  • पटना हाईकोर्ट में जज के फैसले से सनसनी क्यों?

    पटना हाईकोर्ट में जज के फैसले से सनसनी क्यों?

    पटना हाई कोर्ट में आज अप्रत्याशित हुआ. जस्टिस राकेश कुमार के फैसले को 24 घंटे के भीतर 11 जजों की बेंच ने निरस्त कर दिया. जस्टिस राकेश कुमार से इस वक्त सारा काम ले लिया गया है. वो किसी केस की सुनवाई नहीं कर रहे हैं. इस फैसले में ऐसा क्या था कि सुबह-सुबह 11 जजों की बैठक हुई और पूरे फैसले को निरस्त किया. जस्टिस राकेश कुमार पूर्व आईएएस अधिकारी केपी रमैय्या की अग्रिम ज़मानत के मामले में सुनवाई कर रहे थे. 23 मार्च 2018 को हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत की याचिका ठुकरा दी थी.

  • जम्मू कश्मीर को लेकर कोर्ट, सरकार और सियासत में घमासान

    जम्मू कश्मीर को लेकर कोर्ट, सरकार और सियासत में घमासान

    श्रीनगर में राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि छह महीने के भीतर कश्मीर में इतना विकास होगा कि उस पार का कश्मीर आहें भरेगा. 50 नए डिग्री कॉलेज खुलेंगे और 50,000 पद दो से तीन महीने में भरे जाएंगे. राज्यपाल मलिक ने बताया कि इंटरनेट की सेवा देर से बहाल होगी, क्योंकि उसका इस्तेमाल आतंक के लिए हो रहा है. मोबाइल फोन के बारे में स्थिति के हिसाब से फैसला लिया जाता रहेगा और लैंडलाइन सेवा हर जगह बहाल कर दी गई है.

  • क्या सरकार के दबाव में है भारतीय रिज़र्व बैंक?

    क्या सरकार के दबाव में है भारतीय रिज़र्व बैंक?

    भारतीय रिजर्व बैंक 1 लाख 76 हजार 51 करोड़ रुपये भारत सरकार को देगा. यह पैसा रिजर्व बैंक की आकस्मिक निधि और सरप्लस का है जिसे अंग्रेज़ी में कंटीजेंसी फंड कहते हैं. 1949 में भारतीय रिज़र्व बैंक अपने मौजूदा स्वरूप में आता है, और तब से लेकर आज तक उसके इतिहास में इतना पैसा कभी रिजर्व बैंक से भारत सरकार को नहीं गया है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : उद्योग जगत को मिल गई इनकम टैक्स से मुक्ति!

    प्राइम टाइम इंट्रो : उद्योग जगत को मिल गई इनकम टैक्स से मुक्ति!

    2014 के बाद शायद यह पहला बड़ा मौक़ा है जब उद्योगपतियों की सुगबुगाहट, खुली नाराज़गी और अर्थव्यवस्था के संकट के दबाव में वित्त मंत्री निमर्ला सीतारमण ने प्रेस कांफ्रेस में कई बड़े एलान किए. ये वो एलान थे जिनके बारे में सरकार के पीछे हटने की उम्मीद कम नज़र आ रही थी

  • भारत की अर्थव्यवस्था में मंदी जैसे हालात क्यों?

    भारत की अर्थव्यवस्था में मंदी जैसे हालात क्यों?

    न्यूज़ चैनल देखने से लगता है कि सारा देश कश्मीर, आबादी और आरक्षण को लेकर व्यस्त है. हो सकता है कि सारा देश व्यस्त हो भी, लेकिन डेढ़ लाख बैंकर इन विषयों को लेकर व्यस्त नहीं हैं. बल्कि इस शनिवार और रविवार तो उन्हें टीवी देखने का भी मौका नहीं मिला होगा कि कश्मीर पर नया बयान क्या आया है. उन्हें यह भी पता नहीं होगा कि चर्चा में दूसरे एंगल से प्रवेश पाने के लिए शिवराज सिंह चौहान और साध्वी प्रज्ञा ने जवाहर लाल नेहरू को अपराधी कहा है. नेहरू को कुछ भी बोलकर आप चैनलों के स्क्रीन पर टिकर से लेकर टिक टैक तक जगह पा सकते हैं. चूंकि नेता लोग नेहरू को अपराधी बताने में व्यस्त हैं, इसलिए डेढ़ लाख बैंकरों से कहा गया होगा कि कम से कम आप लोग अर्थव्यवस्था को लेकर कुछ व्यस्त रहें और आइडिया दें कि भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन का कैसे बनाया जा सकता है.

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