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Ravish Kumar


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  • क्या सरकार ने देह से दूरी के अनिवार्य सिद्धांत का त्याग कर सबको राम भरोसे छोड़ दिया है?

    क्या सरकार ने देह से दूरी के अनिवार्य सिद्धांत का त्याग कर सबको राम भरोसे छोड़ दिया है?

    रेलवे ने टिकट काउंटर खोल दिए हैं. राजधानी दिल्ली में टिकट काउंटर तक पहुंचने से पहले गेट पर पहले की तरह भीड़ देखी गई. काउंटर पर गोल निशान बने हैं लेकिन गेट के बाहर वही लोग एक दूसरे से सटे खड़े हैं. राशन की दुकान वाला अपनी दुकान के बाहर गोले बनाकर देह से दूरी को सुनिश्चित कर रहा है मगर रेलवे के काउंटर पर पहुंचने से पहले ही देह से दूरी की धज्जियां उड़ने लगीं.

  • आर्थिक मोर्चे पर बताइये, आपकी नौकरी और सैलरी के क्या हाल हैं?

    आर्थिक मोर्चे पर बताइये, आपकी नौकरी और सैलरी के क्या हाल हैं?

    धीरे-धीरे नौकरियां जाने की ख़बरें आने लगी हैं. ओला कंपनी ने 1400 कर्मचारियों को विदा कर दिया है. फूड प्लेटफार्म स्वीगी ने भी 1000 कर्मचारियों की छंटनी कर दी है. ज़ोमाटो ने भी 600 कर्मचारियों को हटा दिया है और सैलरी में 50 प्रतिशत की कटौती कर दी है. कर्नाटक के नंजनगुड की रीड एंट टेलर कंपनी ने 1400 कर्मचारियों को निकाल दिया है. उबर कंपनी ने दुनिया भर में एक चौथाई कर्मचारी निकाल दिए हैं.

  • 11 मई से क्यों बंद है कोविड-19 की प्रेस कॉन्फ्रेंस, 1 लाख संख्या पार हुई उस रोज़ भी नहीं हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस

    11 मई से क्यों बंद है कोविड-19 की प्रेस कॉन्फ्रेंस, 1 लाख संख्या पार हुई उस रोज़ भी नहीं हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस

    प्रेस कांफ्रेंस का स्वरूप भी बदल गया है. शुरू में स्वास्थ्य मंत्रालय में प्रेस कांफ्रेंस होती थी. तब दूरदर्शन, ऑल इंडिया रेडियो और ANI को ही इजाज़त थी. ANI से लाइव किया जाता था. उसके बाद प्रेस कांफ्रेंस नेशनल मीडिया सेन्टर में होने लगी.

  • कोरोना संकट से उबरने के लिए मिडिल क्लास को अमरीका और जर्मनी ने क्या दिया है

    कोरोना संकट से उबरने के लिए मिडिल क्लास को अमरीका और जर्मनी ने क्या दिया है

    विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में कोविड-19 के बाद आर्थिक पैकेज या सामाजिक सुरक्षा की मदद के 246 कार्यक्रम शुरू हुए हैं. दुनिया में जितने भी पैकेज दिए गए हैं उनसे से 30.7 प्रतिशत कैश ट्रांसफर वाली योजनाएं हैं. इनमें से 129 योजनाएं बिलकुल नई हैं और बाकी वो हैं जो पहले से चली आ रही हैं.

  • अपने मास्टर का हो चुका है मध्यम वर्ग, इसे पैकेज नहीं, थाली बजाने का टास्क चाहिए

    अपने मास्टर का हो चुका है मध्यम वर्ग, इसे पैकेज नहीं, थाली बजाने का टास्क चाहिए

    कोविड-19 ने भारत के मध्यम वर्ग का नया चेहरा पेश किया है. जिस चेहरे को बनाने में छह साल लगे हैं आज वो चेहरा दिख रहा है. आलोचक हैरान हैं कि नौकरी और सैलरी गंवा कर मध्यम वर्ग बोल क्यों नहीं रहा है? मज़दूरों की दुर्दशा पर मध्यम वर्ग चुप कैसे है?

  • COVID-19 में कोई लाभ नहीं HCQ से, कोरोना के साथ जीना सीखना होगा

    COVID-19 में कोई लाभ नहीं HCQ से, कोरोना के साथ जीना सीखना होगा

    अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अप्रैल के शुरू में कहा था कि यह दवा ठीक कर देगी. उस वक्त भी अमरीका के बड़े वैज्ञानिकों और डॉक्टरों ने सवाल उठाए थे. मगर इसी बहाने कुछ दिनों तक चर्चा चल पड़ी. कई देश इस दवा का आयात करने लगे जिनमें से अमरीका भी है. भारत ने निर्यात किया. इसे अपनी कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा. ट्रंप की मूर्खता का अंदाज़ा सभी को था लेकिन महामारी ऐसी है कि हर कोई कुछ दिनों तक भरोसा तो करना ही चाहता है.

  • 20 साल बाद क्यों याद किया Y2K को मोदी ने, 21वीं सदी का पहला ग्लोबल झूठ था Y2K

    20 साल बाद क्यों याद किया Y2K को मोदी ने, 21वीं सदी का पहला ग्लोबल झूठ था Y2K

    भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई के अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि इस सदी की शुरूआत में दुनिया में Y2K संकट आया था, तब भारत के इंजीनियरों ने उसे सुलझाया था. प्रधानमंत्री ने जाने-अनजाने में कोरोना संकट की वैश्विकता की तुलना Y2K जैसे एक बनावटी संकट से कर दी.

  • मज़दूर सोशल मीडिया पर नहीं है, वरना देखता, समाज कितना असंवेदनशील हो चुका है...

    मज़दूर सोशल मीडिया पर नहीं है, वरना देखता, समाज कितना असंवेदनशील हो चुका है...

    मज़दूरों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है. वे पैदल चल रहे हैं. उनके पांवों में छाले पड़ गए हैं. बहुत से मजदूर रेल की पटरियों के किनारे किनारे चल रहे हैं ताकि घर तक पहुंचने का कोई सीधा रास्ता मिल जाए.

  • कोरोनावायरस से जंग : बिना लॉकडाउन लड़ रहा है स्वीडन का मॉडल

    कोरोनावायरस से जंग : बिना लॉकडाउन लड़ रहा है स्वीडन का मॉडल

    स्वीडन में केसों की संख्या कम नहीं है, फिर भी उसने ऐसा क्या किया कि उसके कदमों को मॉडल कहा जाए. पहले लगा था कि स्वीडन का तरीका फेल हो गया. बुजुर्गों को बचाने में फेल रहा. लेकिन स्वीडन के एपिडिमियोलजिस्ट का कहना है कि उनका अप्रोच दूरगामी है. यह अप्रोच मानकर चलता है कि अगर कोविड-19 निकट भविष्य में नहीं खत्म हुआ, तो तालाबंदी ठीक नहीं होगी.

  • लॉकडाउन के बगैर भी लड़ी जा सकती है कोविड से जंग, दक्षिण कोरिया का '3T' मॉडल हुआ कामयाब

    लॉकडाउन के बगैर भी लड़ी जा सकती है कोविड से जंग, दक्षिण कोरिया का '3T' मॉडल हुआ कामयाब

    एक ओर जहां अमेरिका, चीन, इटली और भारत जैसे देश कोरोना वायरस से जूझते नजर आ रहे हैं. वहीं ताइवान के बाद दक्षिण कोरिया एक ऐसा देश बन गया है जिसने बिना वैक्सीन, एंटी बॉडी और बड़े पैमाने पर लॉकडाउन के बिना ही इस बीमारी से उबरने लगा है. दक्षिण कोरिया में कई तरह की गाइडलाइन के साथ ही दफ्तर, म्यूजियम खुलने लगे हैं. सड़कों पर वैसी भीड़ तो नजर नहीं आ रही है लेकिन अब पहले जैसा सन्नाटा भी नहीं दिख रहा है. मई में ही स्कूल भी खोलने की तैयारी चल रही है. दक्षिण कोरिया में कोरोना वायरस के लगभग 10 हजार केस हुए हैं जिसमें 9 हजार से ज्यादा लोग ठीक हो चुके हैं. मई के शुरुआती दिनों में सिर्फ 30 केस आए हैं. दरअसल कोरोना से लड़ने के लिए दक्षिण कोरिया ने 3 टी (3T) मॉडल का इस्तेमाल किया है. इसका मतलब है, ट्रेस, टेस्ट और ट्रीट. इस मॉडल की चर्चा NDTV के रवीश कुमार ने अपने शो Prime Time में की है.

  • पलायन पैदल चलने वाले मजदूरों ने नहीं, उन मज़दूरों से महानगरों ने किया है

    पलायन पैदल चलने वाले मजदूरों ने नहीं, उन मज़दूरों से महानगरों ने किया है

    यह लॉन्ग मार्च नहीं है. इसलिए राजनीतिक प्रतिरोध नहीं है. यह अल सुबह टहलने निकलने लोगों की टोली नहीं है. इसलिए शारीरिक अभ्यास एक्ट नहीं है. यह तीर्थ यात्रा नहीं है. इसलिए धार्मिक कार्यवाही नहीं है. मज़दूरों का पैदल चलना लोकतंत्र में उनके लिए बने अधिकारों से बेदखल कर दिए जाने की कार्यवाही है. पैदल चलते हुए वो सिस्टम का इतना ही प्रतिकार कर रहे हैं कि उन रास्तों पर पैदल चल रहे हैं जिन पर चलने की इजाज़त नहीं है.

  • नियमों का पालन करें, वरना फिर तालाबंदी के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा

    नियमों का पालन करें, वरना फिर तालाबंदी के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा

    यह संभव है कि आपको लगे कि अब कुछ नहीं होगा. कितना ये सब करें. जब भी ऐसा लगे तभी ये समझें कि यही सब करना ही है. याद दिलाते रहना है. थोड़ा थोड़ा करके नियमों को नहीं तोड़ना है.

  • पूर्ण विजय तो दूर, जीत आधी भी नहीं हुई और आसमान से कराई जा रही है पुष्प वर्षा

    पूर्ण विजय तो दूर, जीत आधी भी नहीं हुई और आसमान से कराई जा रही है पुष्प वर्षा

    कोविड-19 के कारण पिछले 24 घंटे में 83 लोगों की मौत हुई है. इससे पहले 24 घंटे में इतनी मौतें नहीं हुईं. संक्रमण से मरने वाले मरीज़ों की संख्या 1300 से अधिक हो चुकी है. क्या यह हर्ष और उल्लास का समय है कि हम आसमान से पुष्प वर्षा करें और वो भी सेना को आगे करके ताकि सेना के नाम पर सारे सवाल देशद्रोही बताए जाने लगें?

  • केरल में 92 दिनों में कोविड-19 के 495 मरीज़ ही जबकि गुजरात में 44 दिनों में ही संख्या 5000 पार

    केरल में 92 दिनों में कोविड-19 के 495 मरीज़ ही जबकि गुजरात में 44 दिनों में ही संख्या 5000 पार

    हिन्दू अख़बार ने राज्यों के आंकड़ों के लिए एक ग्राफ बनाया है. आपको प्रत्येक राज्य पर क्लिक करते ही पता चल जाता है कि राज्य में कोविड-19 का पहला केस किस तारीख को आया और उसके बाद अभी कितनी संख्या है. यानी कितने कम समय में किस राज्य में मरीज़ों की संख्या में तेज़ी आई है.

  • लालू प्रसाद ने कोसी के बाढ़ पीड़ितों के लिए मुफ्त ट्रेनें चलाईं, पीयूष गोयल ने किराया लेकर घर पहुंचाया

    लालू प्रसाद ने कोसी के बाढ़ पीड़ितों के लिए मुफ्त ट्रेनें चलाईं, पीयूष गोयल ने किराया लेकर घर पहुंचाया

    2008 में बिहार के कोसी में बाढ़ आई थी. उस समय रेल मंत्री लालू प्रसाद थे. उन्होंने कोसी के बाढ़ पीड़ितों के लिए छह ट्रेनें मुफ्त में चलवाई थीं. सहरसा-मधेपुरा, पूर्णिया-बमनखी, सहरसा-पटना के बीच चार ट्रेनें और समस्तीपुर से सहरसा के बीच दो ट्रेनें. बाढ़ ने सबको आर्थिक रूप से उजाड़ दिया था इसलिए लालू प्रसाद ने मुफ्त में ये ट्रेनें चलवाई थीं.

  • लेंस बदल देने से चांद नहीं बदल जाता, WHO ने 30 जनवरी को जारी की थी सबसे बड़ी चेतावनी

    लेंस बदल देने से चांद नहीं बदल जाता, WHO ने 30 जनवरी को जारी की थी सबसे बड़ी चेतावनी

    पैनडेमिक. यह एक ऐसा शब्द है जिससे कोविड-19 के प्रसार को बयां किया जाने लगा है. हिन्दी में इसे वैश्विक महामारी कहते हैं. इस शब्द की खासियत यह रही है कि यह सबसे बड़ी चेतावनी की निशानी बन गया. हम सभी के दिमाग़ में यह बात बैठ गई कि विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO ने 11 मार्च को पैनडेमिक की घोषणा की और यही सबसे बड़ा अलर्ट था, अलार्म था. चेतावनी की सबसे बड़ी घंटी थी. वैश्विक महामारी के ख़िलाफ़ युद्ध का बिगुल था. यह सही नहीं है.

  • दोस्तों, हारना नहीं है...

    दोस्तों, हारना नहीं है...

    भरोसा रखिए जब आपने एक बार शून्य से शुरू कर यहाँ तक लाया है तो एक और बार शून्य से शुरू कर आप कहीं पहुँच जाएँगे. बस यूँ समझिए कि आप लूडो खेल रहे थे. 99 पर साँप ने काट लिया है लेकिन आप गेम से बाहर नहीं हुए हैं. क्या पता कब सीढ़ी मिल जाए. हंसा कीजिए. थोड़े दिन झटके लगेंगे. उदासी रहेगी लेकिन अब ये आ गया है तो देख लिया जाएगा यह सोच कर रोज़ जागा कीजिए.

  • कोरोना के मामले में तीन राज्यों को अकेले टक्कर दे रहा अहमदाबाद, देशभर में सबसे अधिक मृत्यु दर

    कोरोना के मामले में तीन राज्यों को अकेले टक्कर दे रहा अहमदाबाद, देशभर में सबसे अधिक मृत्यु दर

    अहमदाबाद में कोविड-19 से मरने वालों की दर राष्ट्रीय औसत और कई बड़े शहरों के औसत से अधिक है. यह मृत्यु दर 4.71 प्रतिशत है. दिल्ली में 2,919 मरीज़ों पर 50 लोगों की मौत हुई थी. मुंबई में 5407 मरीज़ों पर 205 मरीज़ों की मौत हुई थी तो अहमदाबाद में मृत्यु दर मुंबई और दिल्ली से भी अधिक है.

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