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Ravish Kumar Blog


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  • क्या इस समय और समाज को एक नई भाषा की ज़रूरत नहीं...?

    क्या इस समय और समाज को एक नई भाषा की ज़रूरत नहीं...?

    हमारे आस-पास के लोग आर्थिक रूप से टूट चुके हैं. कोई पुराना राग-द्वेष हो तो उसे भी भूल जाइये. जब सबका ही चला गया हो तो किस बात का ग़म औऱ किस बात का रंज. किस बात का हिसाब या किस बात का फ़ैसला. माफी मांग लीजिए. माफी कर दीजिए. 

  • कोरोनावायरस से अपनी रक्षा खुद करें, देह से दूरी बनाए रखें

    कोरोनावायरस से अपनी रक्षा खुद करें, देह से दूरी बनाए रखें

    रविवार सुबह जो आंकड़े आए हैं उसके अनुसार विगत 24 घंटे में 8,380 नए मामले आए हैं. यह अब तक का रिकार्ड है. इसके पहले एक दिन में 8000 केस कभी नहीं आए. लगातार तीन दिनों से संख्या में तेज़ी से उछाल आई है. यही नहीं मरने वालों की संख्या भी 5000 पार कर चुकी है.

  • कोई सरेआम तो कोई गुमनाम मगर बोल रहा है, गुजरात बोल रहा है

    कोई सरेआम तो कोई गुमनाम मगर बोल रहा है, गुजरात बोल रहा है

    गुजरात हाईकोर्ट में कोविड-19 से जुड़ी याचिकों की सुनवाई करने वाली बेंच में बदलाव किया गया है. जस्टिस जे बी पारदीवाला और आई जे वोरा की बेंच ने गुजरात की जनता को आश्वस्त किया था कि अगर सरकार कोविड-19 की लड़ाई में लापरवाह है तो आम लोगों की ज़िंदगी का रखवाला अदालत है.

  • भारत में 22 करोड़ तो US मे 4 करोड़ बेरोज़गार, मीडिया में भारी छंटनी

    भारत में 22 करोड़ तो US मे 4 करोड़ बेरोज़गार, मीडिया में भारी छंटनी

    मीडिया में भी बड़ी संख्या में नौकरियां जा रही हैं. जो अखबार साधन संपन्न हैं, जिनसे पास अकूत संपत्ति हैं वे सबसे पहले नौकरियां कम करने लगें. सैंकड़ों की संख्या में पत्रकार निकाल दिए गए हैं.

  • मीम क्लास को तोहफा

    मीम क्लास को तोहफा

    यह तीसरा महीना है, जब तेलंगाना सरकार अपने कर्मचारियों का वेतन काटेगी. अखिल भारतीय सेवाओं, यानी IAS, IPS की सैलरी में 60 प्रतिशत की कटौती की गई है. राज्य सरकार के कर्मचारियों की सैलरी में 50 प्रतिशत की कटौती की गई है. पेंशनधारियों की पेंशन में 25 प्रतिशत की और निर्वाचित प्रतिनिधियों की सैलरी में 75 प्रतिशत.

  • क्या सरकार ने देह से दूरी के अनिवार्य सिद्धांत का त्याग कर सबको राम भरोसे छोड़ दिया है?

    क्या सरकार ने देह से दूरी के अनिवार्य सिद्धांत का त्याग कर सबको राम भरोसे छोड़ दिया है?

    रेलवे ने टिकट काउंटर खोल दिए हैं. राजधानी दिल्ली में टिकट काउंटर तक पहुंचने से पहले गेट पर पहले की तरह भीड़ देखी गई. काउंटर पर गोल निशान बने हैं लेकिन गेट के बाहर वही लोग एक दूसरे से सटे खड़े हैं. राशन की दुकान वाला अपनी दुकान के बाहर गोले बनाकर देह से दूरी को सुनिश्चित कर रहा है मगर रेलवे के काउंटर पर पहुंचने से पहले ही देह से दूरी की धज्जियां उड़ने लगीं.

  • आर्थिक मोर्चे पर बताइये, आपकी नौकरी और सैलरी के क्या हाल हैं?

    आर्थिक मोर्चे पर बताइये, आपकी नौकरी और सैलरी के क्या हाल हैं?

    धीरे-धीरे नौकरियां जाने की ख़बरें आने लगी हैं. ओला कंपनी ने 1400 कर्मचारियों को विदा कर दिया है. फूड प्लेटफार्म स्वीगी ने भी 1000 कर्मचारियों की छंटनी कर दी है. ज़ोमाटो ने भी 600 कर्मचारियों को हटा दिया है और सैलरी में 50 प्रतिशत की कटौती कर दी है. कर्नाटक के नंजनगुड की रीड एंट टेलर कंपनी ने 1400 कर्मचारियों को निकाल दिया है. उबर कंपनी ने दुनिया भर में एक चौथाई कर्मचारी निकाल दिए हैं.

  • 11 मई से क्यों बंद है कोविड-19 की प्रेस कॉन्फ्रेंस, 1 लाख संख्या पार हुई उस रोज़ भी नहीं हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस

    11 मई से क्यों बंद है कोविड-19 की प्रेस कॉन्फ्रेंस, 1 लाख संख्या पार हुई उस रोज़ भी नहीं हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस

    प्रेस कांफ्रेंस का स्वरूप भी बदल गया है. शुरू में स्वास्थ्य मंत्रालय में प्रेस कांफ्रेंस होती थी. तब दूरदर्शन, ऑल इंडिया रेडियो और ANI को ही इजाज़त थी. ANI से लाइव किया जाता था. उसके बाद प्रेस कांफ्रेंस नेशनल मीडिया सेन्टर में होने लगी.

  • कोरोना संकट से उबरने के लिए मिडिल क्लास को अमरीका और जर्मनी ने क्या दिया है

    कोरोना संकट से उबरने के लिए मिडिल क्लास को अमरीका और जर्मनी ने क्या दिया है

    विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में कोविड-19 के बाद आर्थिक पैकेज या सामाजिक सुरक्षा की मदद के 246 कार्यक्रम शुरू हुए हैं. दुनिया में जितने भी पैकेज दिए गए हैं उनसे से 30.7 प्रतिशत कैश ट्रांसफर वाली योजनाएं हैं. इनमें से 129 योजनाएं बिलकुल नई हैं और बाकी वो हैं जो पहले से चली आ रही हैं.

  • अपने मास्टर का हो चुका है मध्यम वर्ग, इसे पैकेज नहीं, थाली बजाने का टास्क चाहिए

    अपने मास्टर का हो चुका है मध्यम वर्ग, इसे पैकेज नहीं, थाली बजाने का टास्क चाहिए

    कोविड-19 ने भारत के मध्यम वर्ग का नया चेहरा पेश किया है. जिस चेहरे को बनाने में छह साल लगे हैं आज वो चेहरा दिख रहा है. आलोचक हैरान हैं कि नौकरी और सैलरी गंवा कर मध्यम वर्ग बोल क्यों नहीं रहा है? मज़दूरों की दुर्दशा पर मध्यम वर्ग चुप कैसे है?

  • COVID-19 में कोई लाभ नहीं HCQ से, कोरोना के साथ जीना सीखना होगा

    COVID-19 में कोई लाभ नहीं HCQ से, कोरोना के साथ जीना सीखना होगा

    अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अप्रैल के शुरू में कहा था कि यह दवा ठीक कर देगी. उस वक्त भी अमरीका के बड़े वैज्ञानिकों और डॉक्टरों ने सवाल उठाए थे. मगर इसी बहाने कुछ दिनों तक चर्चा चल पड़ी. कई देश इस दवा का आयात करने लगे जिनमें से अमरीका भी है. भारत ने निर्यात किया. इसे अपनी कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा. ट्रंप की मूर्खता का अंदाज़ा सभी को था लेकिन महामारी ऐसी है कि हर कोई कुछ दिनों तक भरोसा तो करना ही चाहता है.

  • 20 साल बाद क्यों याद किया Y2K को मोदी ने, 21वीं सदी का पहला ग्लोबल झूठ था Y2K

    20 साल बाद क्यों याद किया Y2K को मोदी ने, 21वीं सदी का पहला ग्लोबल झूठ था Y2K

    भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई के अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि इस सदी की शुरूआत में दुनिया में Y2K संकट आया था, तब भारत के इंजीनियरों ने उसे सुलझाया था. प्रधानमंत्री ने जाने-अनजाने में कोरोना संकट की वैश्विकता की तुलना Y2K जैसे एक बनावटी संकट से कर दी.

  • मज़दूर सोशल मीडिया पर नहीं है, वरना देखता, समाज कितना असंवेदनशील हो चुका है...

    मज़दूर सोशल मीडिया पर नहीं है, वरना देखता, समाज कितना असंवेदनशील हो चुका है...

    मज़दूरों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है. वे पैदल चल रहे हैं. उनके पांवों में छाले पड़ गए हैं. बहुत से मजदूर रेल की पटरियों के किनारे किनारे चल रहे हैं ताकि घर तक पहुंचने का कोई सीधा रास्ता मिल जाए.

  • पलायन पैदल चलने वाले मजदूरों ने नहीं, उन मज़दूरों से महानगरों ने किया है

    पलायन पैदल चलने वाले मजदूरों ने नहीं, उन मज़दूरों से महानगरों ने किया है

    यह लॉन्ग मार्च नहीं है. इसलिए राजनीतिक प्रतिरोध नहीं है. यह अल सुबह टहलने निकलने लोगों की टोली नहीं है. इसलिए शारीरिक अभ्यास एक्ट नहीं है. यह तीर्थ यात्रा नहीं है. इसलिए धार्मिक कार्यवाही नहीं है. मज़दूरों का पैदल चलना लोकतंत्र में उनके लिए बने अधिकारों से बेदखल कर दिए जाने की कार्यवाही है. पैदल चलते हुए वो सिस्टम का इतना ही प्रतिकार कर रहे हैं कि उन रास्तों पर पैदल चल रहे हैं जिन पर चलने की इजाज़त नहीं है.

  • नियमों का पालन करें, वरना फिर तालाबंदी के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा

    नियमों का पालन करें, वरना फिर तालाबंदी के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा

    यह संभव है कि आपको लगे कि अब कुछ नहीं होगा. कितना ये सब करें. जब भी ऐसा लगे तभी ये समझें कि यही सब करना ही है. याद दिलाते रहना है. थोड़ा थोड़ा करके नियमों को नहीं तोड़ना है.

  • पूर्ण विजय तो दूर, जीत आधी भी नहीं हुई और आसमान से कराई जा रही है पुष्प वर्षा

    पूर्ण विजय तो दूर, जीत आधी भी नहीं हुई और आसमान से कराई जा रही है पुष्प वर्षा

    कोविड-19 के कारण पिछले 24 घंटे में 83 लोगों की मौत हुई है. इससे पहले 24 घंटे में इतनी मौतें नहीं हुईं. संक्रमण से मरने वाले मरीज़ों की संख्या 1300 से अधिक हो चुकी है. क्या यह हर्ष और उल्लास का समय है कि हम आसमान से पुष्प वर्षा करें और वो भी सेना को आगे करके ताकि सेना के नाम पर सारे सवाल देशद्रोही बताए जाने लगें?

  • केरल में 92 दिनों में कोविड-19 के 495 मरीज़ ही जबकि गुजरात में 44 दिनों में ही संख्या 5000 पार

    केरल में 92 दिनों में कोविड-19 के 495 मरीज़ ही जबकि गुजरात में 44 दिनों में ही संख्या 5000 पार

    हिन्दू अख़बार ने राज्यों के आंकड़ों के लिए एक ग्राफ बनाया है. आपको प्रत्येक राज्य पर क्लिक करते ही पता चल जाता है कि राज्य में कोविड-19 का पहला केस किस तारीख को आया और उसके बाद अभी कितनी संख्या है. यानी कितने कम समय में किस राज्य में मरीज़ों की संख्या में तेज़ी आई है.

  • लालू प्रसाद ने कोसी के बाढ़ पीड़ितों के लिए मुफ्त ट्रेनें चलाईं, पीयूष गोयल ने किराया लेकर घर पहुंचाया

    लालू प्रसाद ने कोसी के बाढ़ पीड़ितों के लिए मुफ्त ट्रेनें चलाईं, पीयूष गोयल ने किराया लेकर घर पहुंचाया

    2008 में बिहार के कोसी में बाढ़ आई थी. उस समय रेल मंत्री लालू प्रसाद थे. उन्होंने कोसी के बाढ़ पीड़ितों के लिए छह ट्रेनें मुफ्त में चलवाई थीं. सहरसा-मधेपुरा, पूर्णिया-बमनखी, सहरसा-पटना के बीच चार ट्रेनें और समस्तीपुर से सहरसा के बीच दो ट्रेनें. बाढ़ ने सबको आर्थिक रूप से उजाड़ दिया था इसलिए लालू प्रसाद ने मुफ्त में ये ट्रेनें चलवाई थीं.

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