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Ravish Kumar blog


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  • रबीन्द्रनाथ टैगोर का राष्ट्रवाद और आज का समय

    रबीन्द्रनाथ टैगोर का राष्ट्रवाद और आज का समय

    पूर्वी लद्दाख में जब चीन के भारतीय सीमा में घुसपैठ की खबर आई तब एक जन आक्रोश पैदा किया गया. टिक टॉक जैसे ऐप बैन कर. चीन की कंपनी को बंद कर चीन को सबक सीखाने का जश्न मना. फिर कहा गया कि चीन ने भारतीय सीमा में प्रवेश ही नहीं किया है.

  • कोरोना की तरह ही आंकड़ों की बाजीगरी में खोईं आर्थिक चिंताएं

    कोरोना की तरह ही आंकड़ों की बाजीगरी में खोईं आर्थिक चिंताएं

    अर्थ तंत्र ने मुक्त मन संसार को कुछ ज़्यादा ही अधिग्रहीत कर लिया था. शिक्षा, फ़ीस और परीक्षा जैसे सवाल उचित ही जर्जर होकर ख़त्म हो गए. इनका कुछ होता तो नहीं है, अनावश्यक एक की चिंता दूसरे तक फैल जाती है. रोज़गार कारोबार तो वैसे ही बनते-बिगड़ते रहे हैं. अब इन सबका कवरेज बंद होना चाहिए. पत्रकारिता को इन प्रश्नों से दूरी बनाने की ज़रूरी है.

  • कोरोना का कवरेज बंद कर देने से यह खत्म नहीं होगा

    कोरोना का कवरेज बंद कर देने से यह खत्म नहीं होगा

    चैनल न्यूज़ एशिया देख रहा था, अनसोहातो देखने लगा. काफ़ी देर तक दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में कोरोना को लेकर ख़बरें आती रहीं, जाती रहीं. भारत में तो कोई सोच भी नहीं सकता. कोरोना का मसला ही खत्म मान लिया गया है. WHO के चीफ़ ने कहा है कि कई वैक्सीन उम्मीदवार अपने परीक्षण के तीसरे चरण में हैं, लेकिन फ़िलहाल उम्मीद की कोई किरण दिखाई नहीं देती. शायद कोई भी हो न. उनका ज़ोर अभी भी उन्हीं बुनियादी बातों पर है. अस्पतालों को ठीक किया जाए. कोई संक्रमित हो तो उसका टेस्ट हो और उसके संपर्कों की जांच हो. फिर सबका इलाज हो. ये संक्रमण न हो इसके लिए देह से दूरी का पालन करते रहा जाए.

  • प्रिय नौजवानो परीक्षा दे दीजिए, फीस बढ़ गई तो दे दीजिए, जैसा आपने बोया था, काट लीजिए

    प्रिय नौजवानो परीक्षा दे दीजिए, फीस बढ़ गई तो दे दीजिए, जैसा आपने बोया था, काट लीजिए

    रोज़ाना मैसेज आते हैं कि सर, हमारी परीक्षा रद्द करवा दें, कोरोना का ख़तरा है. वे जानते हैं कि मैं शिक्षा मंत्री नहीं हूं, न ही यूजीसी हूं, फिर भी लिखते हैं. छात्र सुप्रीम कोर्ट भी गए थे कि परीक्षा न हो. 10 अगस्त तक सुनवाई टल गई. यूजीसी ने छह जुलाई को आदेश जारी किया है कि सितंबर के अंत तक अंतिम वर्ष की परीक्षा पूरी की जा सकती है. कोई छात्र बाढ़ में फंसा है, कोई होली में घर गया तो तालाबंदी के कारण घर ही रह गया. किताब कापी कहीं और छूट गई. इस बीच कइयों के घर आर्थिक तबाही आई होगी, तो दिल्ली या पढ़ने के शहर आकर किराया देने में ही पसीने छूटेंगे. लेकिन जब कोर्ट से राहत नहीं मिली तो मैं क्या कर सकता हूं. मैं समझ नहीं पाता कि क्या इन छात्रों को उम्मीद करना भी नहीं आता, सिर्फ मुझ लिख देना ही ध्येय है क्या. 

  • एक लाख पैकेट प्रसाद बंटेगा , शिलान्यास का एक अहम दस्तावेज़

    एक लाख पैकेट प्रसाद बंटेगा , शिलान्यास का एक अहम दस्तावेज़

    अयोध्या प्रशासन की यह विज्ञप्ति कम ऐतिहासिक नहीं है. एक साँस में पढ़ जाइये. पसीने छूट जाएँगे. किसी कंपनी के सी ई ओ तो अस्पताल में भर्ती हो जाएँ. निर्देशों की भरमार है.

  • बोली लगेगी 23 सरकारी कंपनियों की, निजीकरण का ज़बरदस्त स्वागत

    बोली लगेगी 23 सरकारी कंपनियों की, निजीकरण का ज़बरदस्त स्वागत

    सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में काम करने वालों के लिए यह ख़ुशख़बरी है. उनका प्रदर्शन बेहतर होगा और वे प्राइवेट हो सकेंगे. जिस तरह से रेलवे के निजीकरण की घोषणाओं का स्वागत हुआ है उससे सरकार का मनोबल बढ़ा होगा. आप रेलमंत्री का ट्विटर हैंडल देख लें. पहले निजीकरण का नाम नहीं ले पाते थे लेकिन अब धड़ाधड़ ले रहे हैं. जो बताता है कि सरकार ने अपने फ़ैसलों के प्रति सहमति प्राप्त की है. हाँ ज़रूर कुछ लोगों ने विरोध किया है मगर व्यापक स्तर पर देखें तो वह विरोध के लिए विरोध जैसा था. जो भी दो चार लोग विरोध करेंगे उनके व्हाट्स एप में मीम की सप्लाई बढ़ानी होगी ताकि वे मीम के नशे में खो जाएँ. नेहरू वाला मीम ज़रूर होना चाहिए.

  • मैं जागा क्यों रह गया?

    मैं जागा क्यों रह गया?

    कोई 12 साल पहले पहाड़गंज में चाकू की धार तेज़ करने वाले ने भी ऐसा ही कुछ कहा था. वो साइकिल पर ही बैठा रहता है. साइकिल को दीवार से सटा देता है ताकि अतिक्रमण न लगे और चाकू तेज़ करता है. उसने कहा था कि कभी एम्स नहीं देखा है. कनाट प्लेस किस तरह से बदला है वो नहीं देखा है.

  • अस्पताल में भर्ती, टेस्ट, एंबुलेंस की तीन देरियों से मर रहे थे लोग, केजरीवाल ने ठीक कर बचाई जान

    अस्पताल में भर्ती, टेस्ट, एंबुलेंस की तीन देरियों से मर रहे थे लोग, केजरीवाल ने ठीक कर बचाई जान

    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की इस बात को ध्यान से देखिए. यही कि टेस्ट होने में देरी से, एंबुलेंस आने में देरी से और अस्पताल में भर्ती की देरी से लोगों की मौत हो रही थी. उन्होंने खुद माना है. बता रहे है कि इसे ठीक करने के कारण जून के महीने में जहां हर दिन 100 लोग मर रहे थे अब 30-35 लोगों की मौत हो रही है. सिर्फ इन तीन चीज़ों को ठीक करने से अगर हर दिन 70 लोगों की जान बचाई जा सकती थी तो सोचिए जहां ये तीन चीज़ें ठीक नहीं होंगी वहां इंसान किस तरह से मर रहा होगा.

  • ब्लॉग: रवीश कुमार का यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम खुला खत

    ब्लॉग: रवीश कुमार का यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम खुला खत

    योगी जी हम बहुत परेशान हो गए हैं. पत्र लिख रहे हैं. और क्या. मैंने कई बार कहा है कि नौकरी सीरीज़ बंद कर दी है. उसके कारणों को विस्तार से कई बार लिख चुका हूं. फिर भी नहीं मानते हैं. इनकी अपेक्षाएं भी बहुत सीमित हैं.

  • सेना में इंजीनियरिंग के 9000 से अधिक पद समाप्त, युवाओं में उत्साह

    सेना में इंजीनियरिंग के 9000 से अधिक पद समाप्त, युवाओं में उत्साह

    पुरानी खबर है, बीते मई की, यह खबर हमें सरकारी नौकरियों को लेकर युवाओं के दृष्टिकोण में आ रहे बदलाव को समझने का मौका देती है. यह नजरिया बदलने का वक्त है. सरकार ही बदलने की तरफ धकेल रही है और उसे सफलता अभी मिल रही है. जिस तरह से रेलवे ने इस साल के लिए भर्तियां बंद कीं और कोई हलचल नहीं हुई. इससे विपक्ष को संकेत मिल जाना चाहिए. रोजगार राजनीतिक मुद्दा नहीं रहा. बिहार का चुनाव साबित कर देगा, जहां बेरोजगारी काफ़ी है मगर सफलता सत्ताधारी गठबंधन को ही मिलेगी. युवाओं का वोट पूरी तरह से उनके साथ है.

  • रेलवे ने भर्तियां बंद कीं, उदास न हों नौजवान, पॉजिटिव रहें, व्हाट्सऐप में रहें

    रेलवे ने भर्तियां बंद कीं, उदास न हों नौजवान, पॉजिटिव रहें, व्हाट्सऐप में रहें

    रेलवे ने पिछली भर्ती के लोगों को ही पूरी तरह ज्वाइन नहीं कराया है और अब नई भर्तियों पर रोक लगा दी गई है. यही नहीं आउटसोर्सिंग के कारण नौकरियां खत्म की गईं, अब उस आउटसोर्सिंग का स्टाफ़ भी कम किया जाएगा. पहले रेलवे रोजगार पैदा करती थी, अब बेरोजगार पैदा कर रही है.

  • रवीश कुमार का ब्लॉग : प्राइवेट स्कूल-कॉलेज और उनके शिक्षकों की समस्या

    रवीश कुमार का ब्लॉग : प्राइवेट स्कूल-कॉलेज और उनके शिक्षकों की समस्या

    प्राइवेट स्कूलों और कॉलेजों के शिक्षक परेशान हैं. उनकी सैलरी बंद हो गई. हमने तो अपनी बातों में स्कूलों को भी समझा है. हमेशा कहा है कि ऐसे वक्त में डेटा सही होना चाहिए. पता चलना चाहिए कि कितने मां बाप फीस नहीं दे पा रहे हैं. उसी अनुपात में सैलरी का वितरण हो सकता है.

  • पासवान कहते हैं 2.13 करोड़ प्रवासी मज़दूरों को अनाज दिया, BJP कहती है 8 करोड़

    पासवान कहते हैं 2.13 करोड़ प्रवासी मज़दूरों को अनाज दिया, BJP कहती है 8 करोड़

    16 मई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सभी राज्यों ने जो मोटा-मोटी आंकड़े दिए हैं उसके आधार पर हमें लगता है कि 8 करोड़ प्रवासी मज़दूर हैं जिन्हें मुफ्त में अनाज देने की योजना का लाभ पहुंचेगा. केंद्र सरकार इसका ख़र्च उठाएगा.

  • मिडिल क्लास: तुम मांगोगे किससे, मांगने वाले हाथों को तुमने ही तो कुचला है

    मिडिल क्लास: तुम मांगोगे किससे, मांगने वाले हाथों को तुमने ही तो कुचला है

    भारत में एडिटर्स गिल्ड, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को कम से कम सर्वे तो करना ही चाहिए कि कितने फ्री-लांस, पूर्णकालिक, रिटेनर, स्ट्रिंगर, अंशकालिक पत्रकारों की नौकरी गई है. सैलरी कटी है. उनकी क्या स्थिति है. इसमें टेक्निकल स्टाफ को भी शामिल किया जाना चाहिए. पत्रकारों के परिवार भी फीस और किराया नहीं दे पा रहे हैं.

  • हार्ली डेविडसन पर चीफ जस्टिस की फोटू और लेंबोर्गिनी चलाने की मेरी अधूरी ख्वाहिश

    हार्ली डेविडसन पर चीफ जस्टिस की फोटू और लेंबोर्गिनी चलाने की मेरी अधूरी ख्वाहिश

    ट्विटर पर इस तस्वीर को देखकर गर्व से सीना 56.2 इंच का हो गया. .2 इंच की बढ़ोतरियां बेपरवाह ख़ुशी देने वाली हैं वैसे ही जैसे इतनी सी तोंद कम हो जाने पर मिलती है. भाव बता रहा है कि हम सभी के भीतर नौजवानी कुलांचे मारती रहती है. बाइक के कद्रदान ही समझ पाएंगे हार्ली डेविडसन पर बैठने की खुशी. इस खुशी को प्राप्त करने के लिए जरूरी नहीं कि बाइक अपनी हो. यह खुशी दूसरे की बाइक पर बैठकर ही महसूस की जाती है. दोस्त की नई बाइक स्टार्ट करने को मिले तो समझिए कि दोस्ती गहरी है. बस ऐसा दोस्त भी हो जिसके पास डेविडसन, जावा और बुलेट हो. बाइक विहीन मित्रता अधूरी मित्रता होती है. 

  • सतर्क ही रहिए कोरोना से, 4 लाख से अधिक केस और 13000 से अधिक मारे गए

    सतर्क ही रहिए कोरोना से, 4 लाख से अधिक केस और 13000 से अधिक मारे गए

    आपके भीतर अब गिनती समाप्त हो चुकी है. आख़िर कोई कब तक गिनेगा. संख्या के प्रति संवेदनशीलता अब वैसी नहीं है जैसी शुरू के दिनों में थी. 100 केस आने पर रगों में सिहरन दौड़ जाती थी. अब सिहरन नहीं दौड़ती है लेकिन 100 क्या, 1000 से अभी अधिक एक दिन में 15000 से अधिक केस आने लगे हैं.  भारत में कोविड-19 से मरने वालों की संख्या 13, 425 हो गई है. दिल्ली में ही दो हज़ार से अधिक लोग मारे गए हैं.

  • काफ़ी अंतर है पुलवामा हमले और चीन से गुत्थमगुत्थी के बाद प्रधानमंत्री की भाषा में

    काफ़ी अंतर है पुलवामा हमले और चीन से गुत्थमगुत्थी के बाद प्रधानमंत्री की भाषा में

    चीन ने लद्दाख (Ladakh) में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर क़ब्ज़ा किया है या नहीं, क्या भारतीय सीमा क्षेत्र में क़ब्ज़ा कर लिया है, इन प्रश्नों का जवाब क्या प्रधानमंत्री (PM Narendra Modi) की पहली प्रतिक्रिया में मिलता है? पहले आप कल का बयान पढें और फिर पुलवामा हमले के बाद उनकी पहली प्रतिक्रिया को पढ़ें.

  • क्या समय रहते जागी है केंद्र सरकार या देर हो जाने के बाद ख़्याल आया है दिल्ली का

    क्या समय रहते जागी है केंद्र सरकार या देर हो जाने के बाद ख़्याल आया है दिल्ली का

    स्कोप दूसरी एजेंसियों के लिए भी नहीं बचा जब केजरीवाल ने कह दिया कि 31 जुलाई तक 1 लाख बिस्तरों की ज़रूरत पड़ेगी. हमसे जितना हो सकेगा, हम कर रहे हैं. अब सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद केंद्र के पास भी स्कोप नहीं बचा कि वो दिल्ली को केजरीवाल के भरोसे छोड़ दे. मैं नहीं कहता कि मेरी बात का असर है लेकिन लगातार देस की बात में कह रहा था कि अगर केजरीवाल का अनुमान सही है तो फिर इसमें केंद्र और उसके अस्पतालों की क्या भूमिका है?

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