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Ravish Kumar Show


'Ravish Kumar show' - 89 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • बिहार सरकार का यह काम तो वाक़ई शानदार है, वाक़ई

    बिहार सरकार का यह काम तो वाक़ई शानदार है, वाक़ई

    नई शिक्षा व्यवस्था के लिए नीतीश कुमार को नोबेल प्राइज़ मिलना चाहिए और सुशील मोदी को संयुक्त राष्ट्र का महासचिव बना देना चाहिए. कमाल का काम किया है दोनों ने. बल्कि दोनों को बिहार से पहले अमरीकी चुनाव में भी विजयी हो जाना चाहिए.

  • हाथरस: राज्य ही जब झूठ और फ़्राड करे तो उसे सज़ा क्यों नहीं

    हाथरस: राज्य ही जब झूठ और फ़्राड करे तो उसे सज़ा क्यों नहीं

    बलात्कार की तमाम घटनाओं के बीच फ़र्क़ यही था कि लोगों की चर्चाओं के बीच पीड़िता के शव को जला दिया गया. यह राज्य की तरफ़ से ऐसी नाफ़रमानी थी जो लोगों को धक से लग गई. राज्य और प्रशासन इस सवाल से भाग रहा है.

  • हाथरस - विपक्ष दिखाया नहीं जाता या दिखता नहीं है?

    हाथरस - विपक्ष दिखाया नहीं जाता या दिखता नहीं है?

    सरकार से सवाल करने में डर लगता है. तब बहाना बनाया जाता है कि विपक्ष कहाँ है. विपक्ष की खोज उनकी अपनी ज़रूरत के लिए होती है ताकि डिबेट के नाम पर इस घटना बनाम उस घटना का मैच शुरू हो सके.

  • क्या लोकतांत्रिक नेता और तानाशाह नेता दोस्त हो सकते हैं?

    क्या लोकतांत्रिक नेता और तानाशाह नेता दोस्त हो सकते हैं?

    भारत लोकतंत्र का चेहरा था. आज भारत की संस्थाएं चरमराती नज़र आ रही हैं. भारत में और न ही भारत के बाहर लोकतंत्र के सवालों को लेकर भारत के नेता बोलते नज़र आ रहे हैं.

  • PM मोदी को हर 2 साल पर सपने बेचने को नई जनता चाहिए, किसानों की बारी आई है

    PM मोदी को हर 2 साल पर सपने बेचने को नई जनता चाहिए, किसानों की बारी आई है

    एक और सपना अभी तक बेचा जा रहा है. 2022-23 में किसानों की आमदनी दुगनी होगी. लेकिन यही नहीं बताया जाता है कि अभी कितनी आमदनी है और 2022 में कितनी हो जाएगी. कई जानकारों ने लिखा है कि किसानों की सालाना औसत आमदनी का डेटा आना बंद हो गया है. हैं न कमाल. पर डेटा बीच-बीच में फाइलों से फिसल कर आ ही जाता है.

  • सिर्फ़ रेलवे परीक्षाओं की तारीख़ का एलान कर नौजवानों में फूट न डाले सरकार

    सिर्फ़ रेलवे परीक्षाओं की तारीख़ का एलान कर नौजवानों में फूट न डाले सरकार

    पिछले रविवार से ही छात्र ट्वीटर की टाइम लाइन पर ट्रेंड आंदोलन चला रहे हैं. 35 से 70 लाख ट्वीट करने के बाद भी पीयूष गोयल चुप रहे तब छात्रों ने 5 सितंबर को शाम 5 बजे थाली बजाने का आंदोलन शुरू किया.

  • क्या कड़े निर्णय के चक्कर में देश को गर्त में पहुंचा दिया PM मोदी ने?

    क्या कड़े निर्णय के चक्कर में देश को गर्त में पहुंचा दिया PM मोदी ने?

    नोटबंदी और तालाबंदी ये दो ऐसे निर्णय हैं जिन्हें कड़े निर्णय की श्रेणी में रखा गया. दोनों निर्णयों ने अर्थव्यवस्था को लंबे समय के लिए बर्बाद कर दिया. आर्थिक तबाही से त्रस्त लोग क्या यह सवाल पूछ पाएँगे कि जब आप तालाबंदी जैसे कड़े निर्णय लेने जा रहे थे तब आपकी मेज़ पर किस तरह के विकल्प और जानकारियाँ रखी गईं थीं.

  • पहली तिमाही की GDP -23.9%, मोदी जी आपका कोई विकल्प नहीं

    पहली तिमाही की GDP -23.9%, मोदी जी आपका कोई विकल्प नहीं

    सावधान हो जाएं. आर्थिक निर्णय सोच समझ कर लें. बल्कि अब यही ठीक रहेगा कि सुशांत सिंह राजपूत का ही कवरेज देखते रहिए. यह बर्बादी की ऐसी सतह है जहां से आप अब बेरोज़गारी के प्रश्नों पर विचार कर कुछ नहीं हासिल कर सकते.

  • अंबानी और अडानी, आओ मिलकर पढ़ते हैं साल भर यही कहानी, हम हिन्दुस्तानी

    अंबानी और अडानी, आओ मिलकर पढ़ते हैं साल भर यही कहानी, हम हिन्दुस्तानी

    भारत संचार निगम लिमिटेड वाले जानते होंगे कि एक समय कई हज़ार करोड़ का मुनाफ़ा कमाने वाली कंपनी कैसे ख़त्म की गई. उससे कहा गया कि आप 2G से 4G का मुक़ाबला करो. इस फ़ैसले से किसे लाभ हुआ BSNL के लोग जानते थे मगर हिन्दू मुसलमान की राजनीति ने कइयों के विवेक पर गोबर लीप दिया था.

  • मीडिया के समाप्त कर दिए जाने के बाद उसी से उम्मीद के पत्र

    मीडिया के समाप्त कर दिए जाने के बाद उसी से उम्मीद के पत्र

    ये पत्र सूखे पत्रों की तरह इस इनबॉक्स से उस इनबॉक्स तक उड़ रहे हैं. हवा पत्तों को इस किनारे लगा देती है तो उस किनारे. इन नौजवानों को समझना होगा कि उनके भीतर आर्थिक मुद्दों की चेतना समाप्त कर दी गई है. तभी तो वे नेताओं के काम आ रहे हैं.

  • रोज़ आ रहे हैं 60,000 से ज़्यादा COVID-19 केस, क्या वाकई भारत की कामयाबी बड़ी है...?

    रोज़ आ रहे हैं 60,000 से ज़्यादा COVID-19 केस, क्या वाकई भारत की कामयाबी बड़ी है...?

    8 अगस्त को प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक ट्विट किया है. प्रधानमंत्री का बयान है कि "आप ज़रा कल्पना कीजिए, अगर कोरोना जैसी महामारी 2014 से पहले आती तो क्या स्थिति होती? "

  • बोली लगेगी 23 सरकारी कंपनियों की, निजीकरण का ज़बरदस्त स्वागत

    बोली लगेगी 23 सरकारी कंपनियों की, निजीकरण का ज़बरदस्त स्वागत

    सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में काम करने वालों के लिए यह ख़ुशख़बरी है. उनका प्रदर्शन बेहतर होगा और वे प्राइवेट हो सकेंगे. जिस तरह से रेलवे के निजीकरण की घोषणाओं का स्वागत हुआ है उससे सरकार का मनोबल बढ़ा होगा. आप रेलमंत्री का ट्विटर हैंडल देख लें. पहले निजीकरण का नाम नहीं ले पाते थे लेकिन अब धड़ाधड़ ले रहे हैं. जो बताता है कि सरकार ने अपने फ़ैसलों के प्रति सहमति प्राप्त की है. हाँ ज़रूर कुछ लोगों ने विरोध किया है मगर व्यापक स्तर पर देखें तो वह विरोध के लिए विरोध जैसा था. जो भी दो चार लोग विरोध करेंगे उनके व्हाट्स एप में मीम की सप्लाई बढ़ानी होगी ताकि वे मीम के नशे में खो जाएँ. नेहरू वाला मीम ज़रूर होना चाहिए.

  • मैं जागा क्यों रह गया?

    मैं जागा क्यों रह गया?

    कोई 12 साल पहले पहाड़गंज में चाकू की धार तेज़ करने वाले ने भी ऐसा ही कुछ कहा था. वो साइकिल पर ही बैठा रहता है. साइकिल को दीवार से सटा देता है ताकि अतिक्रमण न लगे और चाकू तेज़ करता है. उसने कहा था कि कभी एम्स नहीं देखा है. कनाट प्लेस किस तरह से बदला है वो नहीं देखा है.

  • अस्पताल में भर्ती, टेस्ट, एंबुलेंस की तीन देरियों से मर रहे थे लोग, केजरीवाल ने ठीक कर बचाई जान

    अस्पताल में भर्ती, टेस्ट, एंबुलेंस की तीन देरियों से मर रहे थे लोग, केजरीवाल ने ठीक कर बचाई जान

    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की इस बात को ध्यान से देखिए. यही कि टेस्ट होने में देरी से, एंबुलेंस आने में देरी से और अस्पताल में भर्ती की देरी से लोगों की मौत हो रही थी. उन्होंने खुद माना है. बता रहे है कि इसे ठीक करने के कारण जून के महीने में जहां हर दिन 100 लोग मर रहे थे अब 30-35 लोगों की मौत हो रही है. सिर्फ इन तीन चीज़ों को ठीक करने से अगर हर दिन 70 लोगों की जान बचाई जा सकती थी तो सोचिए जहां ये तीन चीज़ें ठीक नहीं होंगी वहां इंसान किस तरह से मर रहा होगा.

  • ब्लॉग: रवीश कुमार का यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम खुला खत

    ब्लॉग: रवीश कुमार का यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम खुला खत

    योगी जी हम बहुत परेशान हो गए हैं. पत्र लिख रहे हैं. और क्या. मैंने कई बार कहा है कि नौकरी सीरीज़ बंद कर दी है. उसके कारणों को विस्तार से कई बार लिख चुका हूं. फिर भी नहीं मानते हैं. इनकी अपेक्षाएं भी बहुत सीमित हैं.

  • कोई सरेआम तो कोई गुमनाम मगर बोल रहा है, गुजरात बोल रहा है

    कोई सरेआम तो कोई गुमनाम मगर बोल रहा है, गुजरात बोल रहा है

    गुजरात हाईकोर्ट में कोविड-19 से जुड़ी याचिकों की सुनवाई करने वाली बेंच में बदलाव किया गया है. जस्टिस जे बी पारदीवाला और आई जे वोरा की बेंच ने गुजरात की जनता को आश्वस्त किया था कि अगर सरकार कोविड-19 की लड़ाई में लापरवाह है तो आम लोगों की ज़िंदगी का रखवाला अदालत है.

  • भारत में 22 करोड़ तो US मे 4 करोड़ बेरोज़गार, मीडिया में भारी छंटनी

    भारत में 22 करोड़ तो US मे 4 करोड़ बेरोज़गार, मीडिया में भारी छंटनी

    मीडिया में भी बड़ी संख्या में नौकरियां जा रही हैं. जो अखबार साधन संपन्न हैं, जिनसे पास अकूत संपत्ति हैं वे सबसे पहले नौकरियां कम करने लगें. सैंकड़ों की संख्या में पत्रकार निकाल दिए गए हैं.

  • आर्थिक मोर्चे पर बताइये, आपकी नौकरी और सैलरी के क्या हाल हैं?

    आर्थिक मोर्चे पर बताइये, आपकी नौकरी और सैलरी के क्या हाल हैं?

    धीरे-धीरे नौकरियां जाने की ख़बरें आने लगी हैं. ओला कंपनी ने 1400 कर्मचारियों को विदा कर दिया है. फूड प्लेटफार्म स्वीगी ने भी 1000 कर्मचारियों की छंटनी कर दी है. ज़ोमाटो ने भी 600 कर्मचारियों को हटा दिया है और सैलरी में 50 प्रतिशत की कटौती कर दी है. कर्नाटक के नंजनगुड की रीड एंट टेलर कंपनी ने 1400 कर्मचारियों को निकाल दिया है. उबर कंपनी ने दुनिया भर में एक चौथाई कर्मचारी निकाल दिए हैं.

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