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Akhilesh sharma blog News in Hindi


'Akhilesh sharma blog' - 211 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • क्या गोरक्षा का मुद्दा हथियाने की फ़िराक़ में है कांग्रेस? 

    क्या गोरक्षा का मुद्दा हथियाने की फ़िराक़ में है कांग्रेस? 

    देश की राजनीति की धारा बदलती हुई दिख रही है. अब तक बीजेपी कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाती आई है. छद्म धर्मनिरपेक्षता के नाम पर बीजेपी दूसरे विपक्षी दलों पर हमला करती आई है. इफ्तार पार्टियां सियासत का बड़ा हिस्सा बन गईं थीं और बीजेपी का आरोप था कि मुसलमानों को खुश करने के लिए इन पार्टियों ने हिंदुओं के हितों को चोट पहुंचाई. बीजेपी खुद को हिंदू हितों के सबसे बड़े रक्षक के तौर पर पेश करने लगी और हिंदू ह्रदय सम्राट के तौर पर नरेंद्र मोदी ने अपने बूते बीजेपी को 282 सीटें दिलवा दीं. अब कांग्रेस भी इसी बदली धारा का हिस्सा बनती दिखना चाह रही है. बात सिर्फ राहुल गांधी के मंदिरों के दौरों तक सीमित नहीं रह गई है. एक तरफ राहुल गांधी कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस बीजेपी के हिंदुत्व का एक बड़ा मुद्दा गोरक्षा हथियाने की फिराक में है. मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने एक ट्वीट में कहा प्रदेश की हर पंचायत में गौशाला बनाएंगे. ये घोषणा नहीं वचन है.

  • पेट्रोल-डीज़ल के बढ़ते दाम- क्यों ज़ख्मों पर नमक छिड़क रही है सरकार?  

    पेट्रोल-डीज़ल के बढ़ते दाम- क्यों ज़ख्मों पर नमक छिड़क रही है सरकार?  

    पेट्रोल डीजल की कीमतें नई ऊंचाई पर और डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर. 8.2 फीसदी की जीडीपी के बीच आम लोगों से जुड़ी अर्थव्यवस्था की ये खबरें सरकार के सामने चुनौती पेश कर रही हैं, लेकिन पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में लगी आग के बीच सरकार ने जले पर नमक छिड़कते हुए कीमतें घटाने से इनकार कर दिया है. आला सरकारी सूत्रों ने एनडीटीवी से कहा कि मौजूदा समय में कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों को देखते हुए कीमतें कुछ और समय तक बढ़ी रह सकती हैं, लेकिन सरकार उन्हें कम करने के लिए एक्साइज़ ड्यूटी में अब कोई कटौती नहीं करेगी. 

  • चुनाव आते ही जातिगत राजनीति हावी, अब सवर्ण मोदी सरकार से नाराज

    चुनाव आते ही जातिगत राजनीति हावी, अब सवर्ण मोदी सरकार से नाराज

    इस साल दिसंबर में होने वाले हिन्दी पट्टी के तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले जातिगत राजनीति सिर चढ़ कर बोलने लगी है. बात हो रही है मध्य प्रदेश के अलग-अलग शहरों में सवर्णों के उस आंदोलन की जिसके विरोध के चलते कई मंत्रियों, सांसदों की घेरेबंदी हो रही है और उन्हें आंदोलनकारियों से बचाने के लिए पीछे के दरवाजों से निकाला जा रहा है. कल देर रात सीधी में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की एक सभा में उन पर चप्पलें भी फेंक दी गईं. दरअसल, पूरा मामला अनुसूचित जाति तथा जनजाति अत्याचार निवारण कानून को लेकर शुरू हुआ है. सवर्ण संगठनों का आरोप है कि एससी/एसटी वर्ग को खुश करने के चक्कर में केंद्र सरकार ने सवर्णों को इस कानून की ज्यादतियों का शिकार बनने का रास्ता खोल दिया है. बीजेपी के लिए सिरदर्द इसलिए बढ़ रहा है कि यह विरोध सिर्फ मध्य प्रदेश तक ही सीमित नहीं है. कई दूसरे राज्यों में भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बदलने के लिए एससी/एसटी एक्ट में संशोधन का विरोध शुरू हो चुका है. इस मुद्दे पर 6 सितंबर को बंद का आव्हान भी किया गया है. इस जटिल सामाजिक मुद्दे के कई पहलू हैं. उन्हें एक-एक कर समझने की कोशिश करते हैं.

  • भारत के अंगने में चीन का क्या काम?

    भारत के अंगने में चीन का क्या काम?

    भारत की सियासत में चीन का क्या काम? लेकिन गाहे-बगाहे हर बात में चीन का जिक्र कुछ वैसे ही हो रहा है जैसे अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में रूस का हुआ था. वैसे बात अभी वहां तक नहीं पहुंची है और न ही किसी ने वैसे आरोप लगाए हैं लेकिन हर बात में चीन का जिक्र कई सवाल खड़े जरूर कर रहा है.

  • केरल के लिए सात सौ करोड़ के जुमले का सच

    केरल के लिए सात सौ करोड़ के जुमले का सच

    फ़र्जी खबरों पर खूब बहस होती है. ये ख़बरें कहां से आती हैं, कौन लाता है, कौन फैलाता है, इस पर खूब बात होती है. लेकिन इस तरह की गलत खबरें जब सरकारों को लेकर हों और उनका पर्दाफाश होने में कई-कई दिन लग जाएंतो मंसूबों पर शक होना तो लाजिमी है. मैं बात कर रहा हूं केरल बाढ़ पर विदेशी मदद को लेकर आई ख़बर की.

  • सतपाल मलिक को जम्मू-कश्मीर की कमान सौंपने के क्या हैं मायने...

    सतपाल मलिक को जम्मू-कश्मीर की कमान सौंपने के क्या हैं मायने...

    जम्मू-कश्मीर में पहली बार किसी राजनीतिक व्यक्ति को राज्यपाल बनाकर केंद्र सरकार ने राज्य की जनता से सीधा रिश्ता बनाने का ठोस और महत्वपूर्ण संकेत दिया है. सतपाल मलिक को जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल ऐसे वक्त बनाया गया है जब राज्य में राज्यपाल शासन लगा है.

  • क्या बीजेपी वाकई ढलान पर है?

    क्या बीजेपी वाकई ढलान पर है?

    लोकसभा चुनाव अगर समय पर होते हैं तो सिर्फ आठ महीने ही बचे हैं. जहां जाइए अब लोग पूछते हुए मिल जाएंगे कि 2019 में क्या होगा? पान की दुकानों पर, चाय के ठेलों पर, भीड़ में, बाज़ार में, राजनीतिक चर्चाओं का दौर है. क्या मोदी वापसी करेंगे? या राहुल की किस्मत बुलंद होगी?

  • क्‍या नए दौर में सुधरेंगे भारत-पाक रिश्‍ते?

    क्‍या नए दौर में सुधरेंगे भारत-पाक रिश्‍ते?

    इमरान खान के पाकिस्तान की कमान संभालने के बाद भारत पाकिस्तान रिश्तों को लेकर पहल ही ग़लत अंदाज़ में शुरू हुई. दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इमरान खान को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई देने का एक पत्र लिखा. लेकिन इसे लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया.

  • दिलचस्प मुकाम पर पहुंची एक देश एक चुनाव की बहस

    दिलचस्प मुकाम पर पहुंची एक देश एक चुनाव की बहस

    एक देश एक चुनाव की बहस एक दिलचस्प मुकाम पर पहुंच गई है. बीजेपी की ओर से यह संकेत मिलते ही कि अगले साल लोक सभा चुनावों के साथ ग्यारह राज्यों के चुनाव भी कराए जा सकते हैं, राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. इस बात पर भी बहस हो रही है कि आखिर यह मुमकिन कैसे होगा?

  • एनआरसी, बात निकली तो बहुत आगे जाती दिखने लगी...

    एनआरसी, बात निकली तो बहुत आगे जाती दिखने लगी...

    असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर से शुरू हुई बात अब बहुत आगे निकलती दिख रही है. बीजेपी के नेताओं के बयानों से साफ़ है कि पार्टी इसे सिर्फ असम तक ही सीमित रखना नहीं चाहती.

  • हरि बनाम हरि में हारे को हरिनाम

    हरि बनाम हरि में हारे को हरिनाम

    कांग्रेस उन पार्टियों का समर्थन हासिल नहीं कर सकी जो उससे और बीजेपी से समान दूरी रखना चाहते हैं. पहले कोशिश थी कि एनसीपी की वंदना चव्हाण को मुकाबले में उतारा जाए. लेकिन जब शरद पवार को बीजू जनता दल के नेता और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के समर्थन का भरोसा नहीं मिला तो उन्होंने चव्हाण के नाम पर ना कर दी.

  • राज्यसभा उपसभापति पद के लिए उम्मीदवारी पर विपक्षी एकता की निकली हवा

    राज्यसभा उपसभापति पद के लिए उम्मीदवारी पर विपक्षी एकता की निकली हवा

    राज्यसभा में विपक्षी एकता तारतार हो गई. उप सभापति पद के लिए संयुक्त विपक्ष का उम्मीदवार खड़ा करने की रणनीति औंधे मुंह गिर गई. एक दिन पहले ही लोक लेखा समिति में दिखी विपक्षी एकता चौबीस घंटे भी नहीं टिकी और एनडीए के उम्मीदवार हरिबंश को चित करने के मंसूबे धराशाई हो गए.

  • अब पिछड़ों पर बीजेपी का बड़ा दांव

    अब पिछड़ों पर बीजेपी का बड़ा दांव

    पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के संविधान संशोधन बिल को संसद ने मंजूरी दे दी है. महत्वपूर्ण बात है कि इस बिल के विरोध में एक भी वोट नहीं डाला गया. यानी सारी पार्टियां पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के पक्ष में एक राय रहीं. अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद पांच सदस्यीय आयोग को संवैधानिक दर्जा मिल जाएगा.

  • जजों की नियुक्ति पर टकराव थमेगा या बढ़ेगा?

    जजों की नियुक्ति पर टकराव थमेगा या बढ़ेगा?

    क्या जज ही जजों की नियुक्ति करते रहेंगे? क्या न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह ठीक कदम है? ये सवाल एक बार फिर इसलिए सामने आए हैं क्योंकि इस हफ्ते जजों की नियुक्ति को लेकर कई मुद्दे सामने आए हैं.

  • नेता भड़काऊ बयान देने से बाज क्यों नहीं आ रहे?

    नेता भड़काऊ बयान देने से बाज क्यों नहीं आ रहे?

    एक तरफ मॉब लिचिंग और विचारधारा के आधार पर हत्याओं की घटनाएं बढ़ रही हैं तो वहीं दूसरी तरफ नफरत फैलाने वाले बयान भी लगातार बढ़ रहे हैं. ये बयान सांसदों-विधायकों और प्रवक्ताओं की ओर से दिए जाते हैं. राजनीतिक पार्टियां इनसे किनारा कर लेती हैं मगर समाज को बांटने वाले और हिंसा के लिए उकसाने वाले ये बयान अपना असर छोड़ जाते हैं.

  • पासवान के तीखे तेवर बीजेपी के लिए परेशानी का सबब

    पासवान के तीखे तेवर बीजेपी के लिए परेशानी का सबब

    पहले टीडीपी अलग हुई, फिर शिवसेना ने अविश्वास प्रस्ताव पर साथ छोड़ा, जेडीयू ने सीटों के बंटवारे पर आंखें दिखाईं और अब बीजेपी का एक और सहयोगी दल सरकार के फैसले के खिलाफ खुलकर सामने आ गया है.

  • लटका कांग्रेस का मिशन राहुल

    लटका कांग्रेस का मिशन राहुल

    कांग्रेस का मिशन राहुल शुरू होने से पहले ही लटक गया. राहुल को पीएम उम्मीदवार बनाने के कांग्रेस कार्यसमिति के फैसले की स्याही सूखी भी नहीं थी कि उनके करीबी नेताओं ने फैसले की इबारत ही पलट दी. उनका कहना है कि कांग्रेस पीएम के लिए किसी का भी समर्थन कर सकती है बशर्ते वह बीजेपी और आरएसएस का न हो.

  • मॉब लिंचिंग पर केंद्र सरकार बना सकती है मॉडल कानून

    मॉब लिंचिंग पर केंद्र सरकार बना सकती है मॉडल कानून

    देश भर में मॉब लिचिंग की लगातार बढ़ रही घटनाओं के बाद दोषियों को सजा दिलाने में तेज़ी और कड़े से कड़ा दंड दिलाने के लिए कानूनों में बदलाव पर केंद्र सरकार गंभीरता से विचार कर रही है.

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