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Assembly polls 2013


'Assembly polls 2013' - 273 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • राजस्थान: देश के पहले और इकलौते 'गाय मंत्री' भी नहीं बचा पाए अपनी सीट, जानें- क्या रही हार की वजह

    राजस्थान: देश के पहले और इकलौते 'गाय मंत्री' भी नहीं बचा पाए अपनी सीट, जानें- क्या रही हार की वजह

    सिरोही सीट से चुनावी मैदान में उतरे देवासी को निर्दलीय उम्मीदवार ने करीब 10 हजार वोटों से हरा दिया. बतौर गाय मंत्री देवासी का कार्यकाल काफी विवादों में रहा है. उनके कार्यकाल में भूख और बीमारी की वजह से सैंकड़ों गायों की मौत हुई थी. हमेशा पारंपरिक वेशभूषा में नजर आने वाले देवासी लाल पगड़ी और सफेद धोती पहनते हैं. देवासी नेता होने के साथ-साथ अध्यात्म से भी जुड़े हुए हैं. देवासी ने साल 2008 में सिरोही विधानसभा से चुनाव लड़ा था और साल 2013 में भी इसी सीट से जीते थे. लेकिन इस बार निर्दलीय उम्मीदवार संयम लोढ़ा ने उन्हें दस हजार वोट से हरा दिया. देवासी को 71019 वोट मिले, जबकि लोढ़ा को 81272 वोट हासिल किए.

  • मिजोरम विधानसभा चुनाव परिणाम : एमएनएफ ने एक दशक बाद की सत्ता में वापसी

    मिजोरम विधानसभा चुनाव परिणाम : एमएनएफ ने एक दशक बाद की सत्ता में वापसी

    मिजोरम की 40 सदस्यीय विधानसभा में 26 सीटें जीतकर मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) ने मंगलवार को एक दशक बाद यहां सत्ता में वापसी की है. इसके साथ ही कांग्रेस पूर्वोत्तर में अपना अंतिम गढ़ भी हार गई. साल 2013 विधानसभा चुनाव में एमएनएफ को केवल पांच सीटें प्राप्त हुई थीं, जबकि कांग्रेस ने यहां 34 सीटों पर जीत दर्ज कराई थी.

  • विधानसभा चुनाव परिणाम 2018 : इस प्रत्याशी ने सिर्फ तीन वोटों से हासिल कर ली जीत

    विधानसभा चुनाव परिणाम 2018 : इस प्रत्याशी ने सिर्फ तीन वोटों से हासिल कर ली जीत

    पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में शाम तक घोषित नतीजों में सबसे छोटी जीत हासिल करने वाले उम्मीदवार मिजो नेशनल फ्रंट के ललछनदामा राल्ते हैं. मिजोरम (Mizoram Elections) में राल्ते ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के आरएल पियनमाविया को तीन वोटों से पराजित किया.

  • Final Election Results 2018: छत्तीसगढ़ में BJP सन्न, हार के इन 5 कारणों को भांपने में हुई भूल

    Final Election Results 2018: छत्तीसगढ़ में BJP सन्न, हार के इन 5 कारणों को भांपने में हुई भूल

    Final Election Results 2018: छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए जारी मतगणना में बस्तर संभाग की 12 में से 10 सीटों पर कांग्रेस जीत दर्ज कर रही है. इससे पहले साल 2013 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को यहां आठ सीटें मिली थीं. इसके अलावा एक सीट पर भाजपा और एक सीट पर भाकपा को बढ़त है.

  • मिजोरम: पांच बार CM रहे कांग्रेस के ललथनहवला को दोनों सीटों पर मुंह की खानी पड़ी, MNF बनाने जा रही है सरकार

    मिजोरम: पांच बार CM रहे कांग्रेस के ललथनहवला को दोनों सीटों पर मुंह की खानी पड़ी,  MNF बनाने जा रही है सरकार

    इस बार ललथनहवला सेरछिप और चम्फाई साउथ सीट से चुनाव के मैदान में थे, लेकिन उन्हें दोनों ही सीटों पर हार का सामना करना पड़ा. सेरछिप में लालदूहोमा ने उन्हें हराया है, वहीं चम्फाई साउथ सीट पर उन्हें एमएनएफ के टी जे लालनंतलुआंग ने 856 वोटों से मात दी है. परिणामों के रुझानों के मुताबिक राज्य में मिजो नेशनल फ्रंट (एनएनएफ) सरकार बनाने जा रही है. रुझानों के मुताबिक 40 सीटों में से 28 सीटों पर एमएनएफ आगे चल रही है. वहीं कांग्रेस मात्र पांच सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. भाजपा की बात करें तो वह केवल एक सीट पर आगे है. मिजोरम में रुझानों के मुताबिक कांग्रेस को 29 सीटों का नुकसान हुआ है.

  • मध्यप्रदेश में तीन फीसदी बढ़ा हुआ मतदान ऐसे डालेगा परिणामों पर असर

    मध्यप्रदेश में तीन फीसदी बढ़ा हुआ मतदान ऐसे डालेगा परिणामों पर असर

    मध्यप्रदेश में इस बार 75.05 मतदान हुआ, 2013 में 72.13 मतदान हुआ था. इस बार तीन फीसदी बढ़े मतदान को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के अपने-अपने दावे हैं. आंकड़ों के हिसाब से बीजेपी फिर दावा कर रही है. पार्टी को लगता है कि यह एंटीइंकंबेंसी का प्रभाव नहीं है. कांग्रेस को लग रहा है कि अधिक मतदान का फायदा उसे ही होगा.

  • शिवराज सिंह सरकार का यह कद्दावर मंत्री 1985 से है अजेय, इस बार सवा लाख वोट से जीत का लक्ष्‍य...

    शिवराज सिंह सरकार का यह कद्दावर मंत्री 1985 से है अजेय, इस बार सवा लाख वोट से जीत का लक्ष्‍य...

    ब्राह्मण और कुर्मी (पटेल) बहुल रहली सीट को भार्गव ने बीजेपी के लिए अभेद गढ़ बना दिया है. उनकी लोकप्रियता निर्विवाद है. कांग्रेस ने उन्‍हें हराने के लिए सारे जतन किए लेकिन हर बार निराशा हाथ लगी. पूरे क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों को लेकर भार्गव इस कदर निश्चिंत थे कि वर्ष 2013 में नामांकन दाखिल करने के बाद वे प्रचार के लिए बाहर ही नहीं निकले थे.

  • क्या मध्य प्रदेश में खत्म होगा कांग्रेस का वनवास या बीजेपी फिर मारेगी बाजी, मिजोरम में किसे मिलेगी सत्ता,10 बड़ी बातें

    क्या मध्य प्रदेश में खत्म होगा कांग्रेस का वनवास या बीजेपी फिर मारेगी बाजी, मिजोरम में किसे मिलेगी सत्ता,10 बड़ी बातें

    मध्यप्रदेश और मिजोरम में बुधवार को हुए विधानसभा चुनाव में 75 प्रतिशत से ज्यादा मतदाताओं ने अपने मतों का प्रयोग किया, जहां दोनों राज्यों की सरकारों ने क्रमश: चौथे और तीसरे कार्यकाल के लिए जोर लगाया है. चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा कि मध्यप्रदेश के 230 में से 227 विधानसभा क्षेत्रों में सुबह 8 से शाम 6 बजे तक करीब 75 प्रतिशत मतदान हुआ. यहां वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में 72.13 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था. राज्य के बाकी बचे तीन नक्सल प्रभावित विधानसभा क्षेत्रों में सुबह 7 बजे से दोपहर तीन बजे तक वोट डाले गए. इनमें बैहर में 78 फीसदी, लांजी में 79.07 फीसदी और पारसवाड़ा में 80.06 फीसदी मतदान हुआ.

  • मध्य प्रदेश चुनाव: जानें, पांच साल में किस पार्टी के विधायकों की बढ़ी कितनी सपंत्ति?

    मध्य प्रदेश चुनाव: जानें, पांच साल में किस पार्टी के विधायकों की बढ़ी कितनी सपंत्ति?

    एडीआर की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक साल 2013 में भाजपा के इन 107 विधायकों की औसतन संपत्ति 4,60,45,135 रुपए की थी, जो कि बढ़कर अब 8,50,19,640 हो गई हैं. वहीं कांग्रेस की बात करें तो इसके 53 विधायकों की पांच साल पहले औसत संपत्ति 6,59,01,990 रुपए थे, जो कि अब बढ़कर 9,82,58,294 रुपए की हो गई है. बसपा के चार विधायकों की संपत्ति पांच साल पहले 3,22,82,334 रुपए थी, जो अब बढ़कर 7,74,71,988 रुपए हो गई है.

  • मध्य प्रदेश चुनाव: बसपा से हाथ न मिला 2013 की गलती कांग्रेस ने फिर दोहराई? ऐसे समझें आंकड़ों का खेल

    मध्य प्रदेश चुनाव: बसपा से हाथ न मिला 2013 की गलती कांग्रेस ने फिर दोहराई? ऐसे समझें आंकड़ों का खेल

    कांग्रेस राज्य में पिछले तीन बार से सत्ता में काबिज भाजपा का किला ध्वस्त करने की कोशिश में लगी हैं, वहीं शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर बहुमत पाने के लिए जोर-शोर से लगे हुए हैं. कांग्रेस का कहना कि राज्य में सत्ता विरोधी लहर है, क्योंकि शिवराज सरकार नई नौकरियां पैदा करने, किसानों की स्थिति में सुधार करने और बेहतर कानून व्यवस्था बनाने में नाकाम रही है. वहीं भाजपा का दावा है कि वह दोबारा बहुमत हासिल करेगी. इन विधानसभा चुनाव को लोकसभा चुनाव के सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा है. इनसे पार्टियों की ताकत का अंदाजा लग जाएगा.

  • खत्म होगा MP में कांग्रेस का वनवास? ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया कैसे 2013 से अलग है 2018 की राह

    खत्म होगा MP में कांग्रेस का वनवास? ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया कैसे 2013 से अलग है 2018 की राह

    उनसे यह पूछे जाने पर कि कांग्रेस ने साल 2013 में शिवराज सिंह चौहान सरकार को हराने का मौका क्यों खो दिया था और इस बार इतना अलग क्या है. इस पर सिंधिया ने कहा, 'पार्टी में इस समय पूरी एकता है. सभी स्तर के नेताओं और लोगों को पता है यह एक 'करो या मरो' की स्थिति है.'

  • सचिन पायलट का असली इम्तिहान शुरू, याद रखना होगा मोहम्मद अजहरुद्दीन का हश्र

    सचिन पायलट का असली इम्तिहान शुरू, याद रखना होगा मोहम्मद अजहरुद्दीन का हश्र

    राजस्थान विधानसभा चुनाव में टोंक सीट इस समय पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है. कांग्रेस ने इस सीट पर 20 साल बाद किसी हिंदू प्रत्याशी को उतारा है तो वहीं बीजेपी ने रणनीति बदलते हुए यूनूस खान को पायलट के सामने उतारा है.  बीजेपी ने सोमवार को जारी प्रत्याशियों की अपनी अंतिम सूची में यूनुस खान का नाम टोंक सीट से शामिल किया. पार्टी ने इससे पहले यहां से मौजूदा विधायक अजित सिंह मेहता को उम्मीदवार बनाने की घोषणा की थी.

  • राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018: जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह ने थामा कांग्रेस का हाथ, राहुल गांधी के घर पर ली सदस्यता

    राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018: जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह ने थामा कांग्रेस का हाथ, राहुल गांधी के घर पर ली सदस्यता

    राजस्थान विधानसभा चुनाव(Rajasthan Assembly election 2018) की सरगर्मियों के बीच बीजेपी छोड़ने वाले मानवेंद्र सिंह (Manvendra Singh) कांग्रेस में शामिल हो गये हैं. दिल्ली में राहुल गांधी के घर पर उन्हें कांग्रेस की सदस्यता दिलाई गई.. बीजेपी और वसुंधरा राजे से नाराज़गी के बाद 22 सितंबर को मानवेंद्र सिंह ने बीजेपी छोड़ी थी. पिछले लोकसभा चुनाव में अपने पिता जसवंत सिंह को टिकट न मिलने से मानवेंद्र पार्टी से खफ़ा थे. राजस्थान में विधानसभा चुनाव से ऐन पहले बीजेपी के लिए ये बड़ा झटका है. क्योंकि राजपूत वोट पर मानवेंद्र और उनके पिता जसवंत सिंह की अच्छी पकड़ मानी जाती है. 2013 में बीजेपी की टिकट पर मानवेंद्र विधायक बने थे. गौरतलब है कि मानवेंद्र सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह के बेटे हैं.

  • छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव : क्या बस्तर में इस बार बदलेगा बीजेपी का भाग्य

    छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव : क्या बस्तर में इस बार बदलेगा बीजेपी का भाग्य

    देश में सबसे अधिक नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र विधानसभा चुनाव परिणाम के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. इस क्षेत्र में भाजपा अपना भाग्य बदलने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही है क्योंकि 2013 में कांग्रेस ने यहां बेहतर प्रदर्शन किया था.

  • राजस्थान में बीजेपी को सता रहा एससी वोट खिसकने का डर, पार्टी ने उठाया ये कदम

    राजस्थान में बीजेपी को सता रहा एससी वोट खिसकने का डर, पार्टी ने उठाया ये कदम

    राजस्थान में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे चुनावी सरगर्मियां भी बढ़ रही हैं. सत्तारूढ़ बीजेपी को चुनावी साल में अपने एससी वोटों की फिक्र सता रही है. 2013 में बीजेपी ने राजस्थान की लगभग सारी आरक्षित सीटें जीत ली थीं. साथ ही राज्य में बड़ी तादाद में एससी वोट हासिल किए, लेकिन पिछले पांच साल में इन समुदायों में राज्य और केंद्र दोनों के ख़िलाफ़ गुस्सा बढ़ा है.

  • 2013 में हुए विधानसभा चुनाव की तुलना मध्य प्रदेश में इस बार मतदाताओं की संख्या में 8 फीसदी का इजाफा

    2013 में हुए विधानसभा चुनाव की तुलना मध्य प्रदेश में इस बार मतदाताओं की संख्या में 8 फीसदी का इजाफा

    नेपानगर में 104 साल की सबसे वयोवृद्ध मतदाता महोबाई के साथ मध्य प्रदेश में चुनाव आयोग ने पुनरीक्षण के बाद मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया है. मध्य प्रदेश में 2013 में हुए विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार मतदाताओं की संख्या में आठ फीसदी का इजाफा हुआ है.

  • जी. परमेश्वर- 2013 में कर्नाटक के CM बनने से चूके, अब डिप्टी सीएम की रेस में सबसे आगे, जानिये 10 अहम तथ्य

    जी. परमेश्वर- 2013 में कर्नाटक के CM बनने से चूके, अब डिप्टी सीएम की रेस में सबसे आगे, जानिये 10 अहम तथ्य

    कर्नाटक में बगैर फ्लोर टेस्ट बीएस येदियुरप्पा के इस्तीफा देने के बाद अब कांग्रेस और जेडीएस के सरकार गठन का रास्ता साफ हो चुका है. मुख्यमंत्री पद के लिए जेडीएस नेता एचडी कुमारस्‍वामी का नाम तय है.अब उप मुख्‍यमंत्री यानी डिप्टी सीएम पद को लेकर कयास लगना शुरू हो गया है. कहा जा रहा है कि उप मुख्यमंत्री कांग्रेस का होगा और पार्टी इसके लिए किसी दलित चेहरे का नाम आगे कर सकती है. कांग्रेस की लिस्ट में जो नाम सबसे ऊपर है वो है 'जी परमेश्वर' का. कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जी परमेश्वर सन 1989 से 1992 तक वे कर्नाटक कांग्रेस के ज्वाइंट सेक्रेटरी रहे.सन 1992 से 1997 तक वे प्रदेश कांग्रेस के महासचिव पद रहे. वर्ष 1997 में उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया और वर्ष 1999 तक इस पद पर काबिज रहे. साल 2010 में उन्हें कर्नाटक कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया. इसके अलावा 2010 से 2017 तक वे पार्टी की प्रदेश इकाई की प्रचार समिति के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. परमेश्वर वर्ष 2013 में CM पद के प्रबल दावेदार थे, लेकिन हारने की वजह से उनका हाथ खाली रहा. जुलाई 2014 में परमेश्वर विधान परिषद के लिए एमएलसी चुने गए और 30 अक्टूबर 2015 को उन्हें कर्नाटक का गृह मंत्री नियुक्त कर दिया गया और 2017 तक वह इस पद पर काबिज रहे. अब उनका डिप्टी सीएम बनना लगभग तय माना जा रहा है.आपको आपको बताते हैं जी परमेश्वर से जुड़े 10 अहम तथ्य : 

  • कर्नाटक : जी परमेश्वर को राजीव गांधी की प्रेरणा ले आई राजनीति में, अब बन सकते हैं डिप्टी सीएम

    कर्नाटक : जी परमेश्वर को राजीव गांधी की प्रेरणा ले आई राजनीति में, अब बन सकते हैं डिप्टी सीएम

    कर्नाटक में कांग्रेस और जनता दल-सेक्युलर (जेडीएस) का सरकार के गठन का रास्ता साफ हो चुका है. जेडीएस के एचडी कुमारस्‍वामी सोमवार को मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लेंगे. उप मुख्‍यमंत्री कांग्रेस से हो सकता है. और इस पद के लिए सबसे ऊपर जी परमेश्वर का नाम है. परमेश्वर कांग्रेस का दलित चेहरा माने जाते हैं.