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  • क्यों भीड़ के आगे बेबस है प्रशासन?

    क्यों भीड़ के आगे बेबस है प्रशासन?

    उत्तर प्रदेश में 28 साल के सुजीत कुमार को लोगों ने चोर समझ कर मारा पीटा और जला दिया. सुजीत कुमार अपने ससुराल जा रहे थे. कुत्तों ने उनका पीछा किया तो वे एक घर में छिप गए. लोगों ने उन्हें चोर समझ लिया और पेट्रोल डालकर जलाने की कोशिश की.

  • क्या धोनी धीमे हो गए हैं?

    क्या धोनी धीमे हो गए हैं?

    न्यूजीलैंड के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में महेंद्र सिंह धोनी जिस तरह रन आउट हुए, उसका रिप्ले फिर से देखिए. देखिए कि गुप्तिल ने कहां जाकर गेंद पकड़ी और कैसे उसे थ्रो किया. दरअसल यह गुप्तिल की किस्मत रही कि उनका थ्रो सीधे स्टंप में लगा और धोनी रन आउट हो गए. खुद गुप्तिल ने ही अगले दिन यह बात भी मानी. धोनी की जगह कोई और खिलाड़ी होता तो भी वह इस थ्रो पर रन आउट हो गया होता. धोनी दरअसल एक रन को दो रन में बदल रहे थे. यह काम वे पहले भी करते रहे हैं. जो महान खिलाड़ी उन पर धीमे होने का इल्ज़ाम लगा रहे हैं, वे शायद अपने पूरे करिअर में उतने तेज़ नहीं रहे जितने धोनी उस दिन थे.

  • कर्नाटक में चल रहे 'नाटक' के सूत्रधार दिल्ली में, वही तय कर रहे अगला सीन

    कर्नाटक में चल रहे 'नाटक' के सूत्रधार दिल्ली में, वही तय कर रहे अगला सीन

    कर्नाटक का नाटक रचा जा रहा है दिल्ली में. वहां की विधानसभा में जो कुछ भी हो रहा है, या कहें कर्नाटक के नेता जो कुछ भी कर रहे हैं, वह उनसे करवाया जा रहा है जिसमें महामहिम राज्यपाल भी शामिल हैं. ये सभी उस नाटक के पात्र हैं जिसकी पटकथा दिल्ली में लिखी जा रही है. इसमें जेडीएस-कांग्रेस सरकार की तरफ से विधानसभा अध्यक्ष, या कहें वहां के स्पीकर अहम पात्र हैं, तो केन्द्र सरकार की तरफ से हैं राज्यपाल बजू भाई वाला. यह वही शख्स हैं जिन्होंने एक वक्त में विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए अपनी सीट छोड़ दी थी. अब यहां सब अपने-अपने आकाओं के हितों की रक्षा करते नजर आ रहे हैं. किसी को संविधान की रक्षा करने की फिक्र नहीं है.

  • अरविंद अब भी अड़े हैं कि जीडीपी 2.5 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है

    अरविंद अब भी अड़े हैं कि जीडीपी 2.5 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है

    आपको याद होगा कि मोदी सरकार के पूर्व आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने कहा था कि 2011 से लेकर 2016 के बीच जीडीपी का डाटा सही नहीं है. जो बताया गया है वो 2.5 प्रतिशत अधिक है. उनके दावे के आधार पर कई प्रश्न उठे थे जिसका जवाब अरविंद ने दिया है. बताया है कि 2011 से 2016 के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को कई गंभीर झटके लगे हैं. निर्यात ध्वस्त हो गया, बैंक घाटे में आ गए,

  • विश्‍वास मत की प्रक्रिया पूरी करने की मियाद क्‍या हो?

    विश्‍वास मत की प्रक्रिया पूरी करने की मियाद क्‍या हो?

    कर्नाटक विधानसभा में विश्वास मत पेश तो हो गया है. अब इस बात पर बहस हो रही है कि स्पीकर एक ही दिन में विश्वास मत की प्रक्रिया पूरी करें. कर्नाटक के राज्यपाल ने भी कहा है कि विश्वास मत एक दिन में पूरा हो. क्या संविधान में ऐसी कोई प्रक्रिया है कि राज्यपाल स्पीकर से कहें कि वे किसी प्रक्रिया को कब पूरी करें.

  • कुलभूषण जाधव को हम कैसे बचाएंगे?

    कुलभूषण जाधव को हम कैसे बचाएंगे?

    हेग के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय से आए फ़ैसले के बाद भारत में जीत और जश्न का जो माहौल है, उसमें यह बात जैसे छुपी रह जा रही है कि कुलभूषण जाधव की बस फांसी टली है, उन पर संकट नहीं टला है. क्योंकि हेग से आए फ़ैसले ने बेशक भारत के बहुत सारे आरोपों को सही पाया है लेकिन बहुत सारी दूसरी मांगें ठुकरा भी दी हैं. भारत की मांग थी कि कुलभूषण जाधव को भारत भेजा जाए और उन पर कोर्ट मार्शल के तहत सुनाए गए फ़ैसले को अवैध करार दिया जाए.

  • कुलभूषण जाधव पर भारत के पक्ष में आया इंटरनेशनल कोर्ट का फ़ैसला

    कुलभूषण जाधव पर भारत के पक्ष में आया इंटरनेशनल कोर्ट का फ़ैसला

    भारत ने कोर्ट से मांग की थी कि पाकिस्तान की मिलिट्री कोर्ट के फैसले को रद्द किया जाए. पाकिस्तान को आदेश दिया जाए कि वह मिलिट्री कोर्ट के फैसले को रद्द करे और जाधव को सुरक्षित भारत भेजे. कोर्ट ने इसे नहीं माना. लेकिन कई बिन्दुओं पर कोर्ट ने पाकिस्तान के रवैयों और दलीलों को ठुकराया है. कोर्ट ने कहा कि पाकिस्तान का यह आरोप कि भारत ने इस मामले को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में लाकर प्रक्रियाओं का दुरुपयोग किया है.

  • नीरज शेखर का इस्तीफा, राजनीति में एक नए ट्रेंड की शुरुआत

    नीरज शेखर का इस्तीफा, राजनीति में एक नए ट्रेंड की शुरुआत

    संसद के गलियारे में इस बात को लेकर काफी चर्चा हो रही थी कि आखिर समाजवादी पार्टी के सांसद नीरज शेखर ने अपना इस्तीफा क्यों दिया और इसके पीछे कारण क्या हो सकते हैं..संसद के संसदीय कक्ष में इस बात पर सांसद गहन चर्चा में दिखे. कुछ ने कहा कि यह कैसे संभव हो सकता है, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के सांसद बेटे के आगे ऐसी क्या मजबूरी थी कि उन्होंने एक धुरी की राजनीति करते हुए एकदम से दूसरी धुरी की राजनीति का दामन थाम लिया. खुद नीरज शेखर भी अपने पुराने दोस्तों के सामने थोड़े झेंपे से नजर आ रहे थे..कई लोगों ने उनको कहते सुना कि मैं आपको अलग से बताऊंगा कि मैंने यह फैसला क्यों लिया.

  • क्या सरकारी कर्मचारियों की संख्या कम करना शानदार उपलब्धि है?

    क्या सरकारी कर्मचारियों की संख्या कम करना शानदार उपलब्धि है?

    एक विकल्प है कि BSNL और MTNL को 4 जी स्पेक्ट्रम दे दिया जाए. लेकिन इससे भी ये कंपनियां पटरी पर नहीं आएंगी. BSNL ने आखिरी बार 2008 में मुनाफा कमाया था. उसके बाद से यह कंपनी 82,000 करोड़ का घाटा झेल चुकी है. दिसंबर 2018 तक यह आंकड़ा 90,000 करोड़ के पार जा सकता है. इसके कर्मचारियों पर राजस्व का 66 प्रतिशत खर्च होने लगा है जो 2006 में 21 फीसदी था और 2008 में 27 फीसदी था.

  • सोशल मीडिया के अभियान जमीन पर कहां?

    सोशल मीडिया के अभियान जमीन पर कहां?

    सेल्फी से क्या किसी योजना को बढ़ावा मिलता है, उसकी सफलता सुनिश्चित होती है, क्या सेल्फी से प्रेरणा मिलती है, अगर इसका जवाब हां में होता तो आज हमारे देश में प्रेरणा की बाढ़ आ चुकी होती. हर लम्हा सोशल मीडिया पर अनगिनत तादाद में सेल्फी अपलोड होती रहती है. गुरु पूर्णिमा के दिन भारत के मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने एक वीडियो मेसेज जारी किया है और सेल्फी विद गुरु करने की बात की है.

  • सबकुछ काफी ठीक है बस अर्थव्यवस्था में नौकरी, सैलरी और सरकार के पास पैसे नहीं हैं...

    सबकुछ काफी ठीक है बस अर्थव्यवस्था में नौकरी, सैलरी और सरकार के पास पैसे नहीं हैं...

    जून में निर्यात का आंकड़ा 41 महीनों में सबसे कम रहा है. आयात भी 9 प्रतिशत कम हो गया है जो कि 34 महीने में सबसे कम है. सरकार मानती है कि दुनिया भर में व्यापारिक टकरावों के कारण ऐसा हुआ है. सरकार ने 2018-19 और 2019-20 के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों पर सरचार्ज लगाकर 17000 करोड़ वसूले हैं.

  • हमारे समाज में बच्चियां कितनी सुरक्षित?

    हमारे समाज में बच्चियां कितनी सुरक्षित?

    इन सब व्यवस्थाओं के बाद भी 24,212 मामलों में से मात्र 911 मामलों में ही फैसला आ सका है. यह रिकॉर्ड बेहद साधारण है. ख़राब भी कहा जा सकता है. 11,981 बलात्कार के मामलों में जांच ही चल रही है. 4871 मामलों में पुलिस अदालत को रिपोर्ट सौंप सकी है. 6449 मामलों में ट्रायल शुरू हो सकी है. 911 मामलों में सज़ा हुई है. 

  • ट्रिनिटी: "मैं महाकाल हूँ, मैं ही ईश्वर हूँ", परमाणु परीक्षण पर याद आए गीता के श्लोक

    ट्रिनिटी:

    विनोबा भावे ने कहा है विज्ञान जब राजनीति के साथ मिलती है तो विनाश का जन्म होता है. सभी शीर्ष वैज्ञानिक चाहते थे कि परमाणु बमों की जानकारी सोवियत रूस (जो उस समय मित्र राष्ट्रों के साथ था) भी दी जानी चाहिए. अमेरिका ने ऐसा नहीं किया. इसी दौरान रुजबेल्ट की मौत हो चुकी थी. ट्रूमैन अमेरिका के नए राष्ट्रपति बने. उनका मानना था कि जर्मनी ने सही तो जापान पर बम गिराकर युद्ध समाप्त किया जाए. अब परीक्षण की बारी आई, 16 जुलाई, 1945, समय  सुबह 5:29... प्लूटोनियम वाले 'the Gadget' (जो आगे फैटमैन बना) को एक टावर पर रखा गया.

  • रवीश कुमार का ब्लॉग : लोगों की आंखें अंधी, कान बहरे, मुंह से ज़ुबान ग़ायब है, चीन में सच बताने के लिए कोई बचा नहीं

    रवीश कुमार का ब्लॉग : लोगों की आंखें अंधी, कान बहरे, मुंह से ज़ुबान ग़ायब है, चीन में सच बताने के लिए कोई बचा नहीं

    ''उन्मुक्त आवाज़ की जगह सिमट गई है. आप स्वतंत्र पत्रकार हैं, कहना ख़तरनाक हो गया है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शासन में ऐसे पत्रकार ग़ायब हो गए हैं. सरकार ने दर्जनों पत्रकारों को प्रताड़ित किया है और जेल में बंद कर दिया है. समाचार संस्थाओं ने गहराई से की जाने वाली रिपोर्टिंग बंद कर दी है. चीन में शी जिनपिंग के साथ मज़बूत नेता का उफान फिर से आया है. इसका नतीजा यह हुआ है कि चीन के प्रेस में आलोचनात्मक रिपोर्टिंग बंद हो गई है. यह संपूर्ण सेंसरशिप का दौर है. हमारे जैसे पत्रकार करीब करीब विलुप्त हो गए हैं'. 43 साल की पत्रकार ज़ांग वेनमिन का यह बयान न्यूयार्क टाइम्स में छपा है.

  • राजद का भविष्य और बिहार की राजनीति की दिशा क्यों और कैसे तय करेंगे नीतीश कुमार...

    राजद का भविष्य और बिहार की राजनीति की दिशा क्यों और कैसे तय करेंगे नीतीश कुमार...

    लोकसभा चुनाव के बाद बिहार की राजनीति को लेकर जो भी क़यास लगाए जा रहे हैं उसके केंद्र में एक ही बात की प्रमुखता होती है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अगला कदम क्या होगा और राजद टूटेगी या अब एक बार फिर नीतीश कुमार की शरण में जाएगी.

  • भीड़तंत्र के बेकाबू होने की ज़िम्मेदारी किसकी?

    भीड़तंत्र के बेकाबू होने की ज़िम्मेदारी किसकी?

    क्या भारतीय लोकतंत्र में भीड़तंत्र बेकाबू हो गया है? ये सवाल इसलिए क्योंकि भीड़तंत्र के गुस्से की बलि चढ़ने वालों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है. सरकारें कड़ा संदेश देने में कतरा रही हैं और इससे कानून तोड़ने वालों के हौसले और बुलंद हो रहे हैं. सरकारी तंत्र कभी लाचार तो कभी लापरवाह नज़र आता है.

  • सरकारी कंप्यूटर सिस्टम और सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर गृह मंत्रालय के नए प्रतिबन्ध

    सरकारी कंप्यूटर सिस्टम और सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर गृह मंत्रालय के नए प्रतिबन्ध

    इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार सरकारी अधिकारियों के लिए यह पहली ऐसी गाइडलाइन है, पर यह तथ्यात्मक तौर पर सही नहीं है. आम बजट के पहले के.एन. गोविन्दाचार्य, रामबहादुर राय, पी.वी. राजगोपाल और बासवराज पाटिल ने अमित शाह को प्रतिवेदन देकर दिल्ली हाईकोर्ट के 2014 के आदेश के तहत बनी सरकारी नीतियों के क्रियान्वयन कराने की मांग की थी.

  • राम का नाम आराधना के लिए या हत्या के लिए?

    राम का नाम आराधना के लिए या हत्या के लिए?

    इस सवाल पर लौट आइये इससे पहले कि हम जवाब देने के बजाए नज़रें चुराने लगें. राम का नाम साधना और अराधना के लिए है या इसके नाम पर हत्या करने के लिए है. अभी भले लगता हो कि हमारी ड्राइंग रूम से दूर शायद दिल्ली से बहुत दूर कुछ लोगों का यह काम है और भारत जैसे देश में अपवाद हैं तो आप गलती कर रहे हैं. इनके पीछे की सियासी खुराक कहां से आ रही है, आप इतने भी भोले नहीं है कि सब बताना ही पड़े.