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'Blog' - 593 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • मायावती-जोगी ने दिलचस्प बनाया चुनाव...

    मायावती-जोगी ने दिलचस्प बनाया चुनाव...

    छत्तीसगढ़ में एक चरण के चुनाव के बाद बसपा नेता मायावती ने यह साफ किया है कि उनकी पार्टी चुनाव के बाद बीजेपी और कांग्रेस से समान दूरी बनाकर रखेगी. हालांकि उनके ही सहयोगी अजीत जोगी ने एक दिन पहले यह पूछे जाने पर कि क्या जरूरत पड़ी जो बीजेपी को अपना सर्मथन दे सकते हैं. इस पर उन्होंने कहा था कि राजनीति में कुछ भी संभव है मगर बाद में वे अपने बयान से पलट गए. जाहिर है मायावती चुनाव परिणाम से पहले अपने पत्ते नहीं खोलना चाहती है. जाहिर है इन चुनावों का 2019 के लोकसभा चुनाव पर भी काफी असर पड़ने वाला है. सभी पार्टियों को पता है कि अभी तक छत्तीसगढ में बीजेपी और कांग्रेस के बीच जीत का अंतर एक फीसदी से भी कम होता है. ऐसे में यहां एक-एक वोट कीमती होता है.

  • बिहार में कुशवाहा फैक्टर...

    बिहार में कुशवाहा फैक्टर...

    बिहार में एनडीए में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है...लोकसभा चुनाव के लिए हुए सीट बंटवारे में केवल दो सीटें मिलने से उपेंद्र कुशवाहा नाराज चल रहे हैं...कहा जा रहा है कि वे दिल्ली आ कर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिलने की कोशिश करेगें... उधर जेडीयू की तरफ से ताजा बयान यह है कि किसी के भी गठबंधन में आने या जाने से कोई भी फर्क नहीं पड़ता है, यानि जेडीयू ने यह तय कर लिया है कि मौजूदा एनडीए गठबंधन में कुशवाहा के लिए कोई जगह नहीं है...इसके पीछे का कारण समझना जरूरी है. आखिर नीतीश कुमार को उपेंद्र कुशवाहा क्यों पसंद नहीं हैं...वजह साफ है दोनों की राजनीति का आधार एक ही वोट बैंक है...

  • क्या रमन सिंह चौथी बार मुख्यमंत्री बन पाएंगे?

    क्या रमन सिंह चौथी बार मुख्यमंत्री बन पाएंगे?

    छत्तीसगढ़ के चुनावों में चार-चार मोर्चा है. एक मोर्चा है रमन सिंह का जो 15 साल से मुख्यमंत्री हैं, चौथी बार बनना चाहते हैं. कांग्रेस पार्टी ने अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है. अजित जोगी की जनता कांग्रेस और मायावती की बसपा का तीसरा मोर्चा है. चौथा मोर्चा है समाजवादी पार्टी और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी.

  • कॉलेजों में शिक्षक नहीं हैं तो छत्तीसगढ़ के छात्र कॉलेज जाना ही बंद कर दें...?

    कॉलेजों में शिक्षक नहीं हैं तो छत्तीसगढ़ के छात्र कॉलेज जाना ही बंद कर दें...?

    घोषणापत्र देखकर भले जनता वोट न करती हो मगर चुनावों के समय इसे ठीक से देखा जाना चाहिए. दो चार बड़ी हेडलाइन खोजकर हम लोग भी घोषणापत्र को किनारे लगा देते हैं. राजनीतिक दल कुछ तो समय लगाते होंगे, बात-विचार करते होंगे कि क्या इसमें रखा जा रहा है और क्या इससे निकाला जा रहा है, इसी को समझकर चुनावी चर्चाओं में घोषणापत्र को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.

  • भारत के पास एशियाई देशों से सुनहरे संबंधों का सुनहरा मौका...  

    भारत के पास एशियाई देशों से सुनहरे संबंधों का सुनहरा मौका...  

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सिंगापुर में आयोजित 23वें आसियान शिखर सम्मेलन में जाना पहले की तुलना में अब इस मायने में ज़्यादा महत्व रखता है कि भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन के साम्राज्यवादी मंसूबे कुछ अधिक तेज़ी से फैलते दिखाई दे रहे हैं. इस लिहाज़ से इसी सम्मेलन के दौरान क्वाड समूह के तीन अन्य देशों के साथ उनकी बातचीत अहम मायने रखती है. ये तीन अन्य देश जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया हैं, जिनका प्रशांत महासागर से सीधा संबंध है.

  • राजस्थान...गहलोत या पायलट

    राजस्थान...गहलोत या पायलट

    राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति की बिसात बिछ चुकी है. इसके साथ ही हमेशा की तरह नेताओं में भी इस पार्टी से उस पार्टी में जाने के लिए भगदड़ मची हुई है...नेताओं को मौसम वैज्ञानिक भी कहा जाता है खासकर चुनाव के संर्दभ में उन्हें चुनाव के ठीक पहले अंदाजा हो जाता है कि ऊंट किस करवट बैठेगा. इसके बाद वह उन पार्टियों के तरफ रुख करते हैं, जिसके बारे में उन्हें लगता है कि इस पार्टी की सरकार बनने वाली है...कुछ ऐसा ही राजस्थान कांग्रेस में हो रहा है...

  • वसुंधरा जी आपने वाक़ई 44 लाख नौकरियां दी हैं?

    वसुंधरा जी आपने वाक़ई 44 लाख नौकरियां दी हैं?

    राजस्थान बीजेपी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया है कि भाजपा ने 15 लाख नौकरियां देने का वादा किया था. 44 लाख से अधिक लोगों को नौकरियां दी हैं. 9 नवंबर का ट्वीट है. राजस्थान बीजेपी का ट्वीट है तो यह राजस्थान के बारे में ही दावा होगा. मैंने एक दिन नहीं, कई हफ़्ते प्राइम टाइम में नौकरी सीरीज़ की है. हमने देखा है और दिखाया है कि कैसे पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार, यूपी और राजस्थान में नौजवानों को विज्ञापन देकर उलझाया जाता है. हमारे नौजवानों ने बहुत विरोध किया. प्रदर्शन किया. अपनी जवानियां बर्बाद होती देखी मगर किसी ने उनका साथ नहीं दिया. मुझे यक़ीन नहीं होता कि राजस्थान में 44 लाख नौकरियां दी गई हैं.

  • वसुंधरा जी आपने वाक़ई 44 लाख नौकरियां दी हैं?

    वसुंधरा जी आपने वाक़ई 44 लाख नौकरियां दी हैं?

    राजस्थान बीजेपी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया है कि भाजपा ने 15 लाख नौकरियां देने का वादा किया था. 44 लाख से अधिक लोगों को नौकरियां दी हैं. 9 नवंबर का ट्वीट है. राजस्थान बीजेपी का ट्वीट है तो यह राजस्थान के बारे में ही दावा होगा. मैंने एक दिन नहीं, कई हफ़्ते प्राइम टाइम में नौकरी सीरीज़ की है. हमने देखा है और दिखाया है कि कैसे पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार, यूपी और राजस्थान में नौजवानों को विज्ञापन देकर उलझाया जाता है. हमारे नौजवानों ने बहुत विरोध किया. प्रदर्शन किया. अपनी जवानियां बर्बाद होती देखी मगर किसी ने उनका साथ नहीं दिया. मुझे यक़ीन नहीं होता कि राजस्थान में 44 लाख नौकरियां दी गई हैं.

  • छठ पर विशेष : येल यूनिवर्सिटी के म्यूज़ियम में कैसे पहुंची बिहार से सूर्य की कलाकृति 

    छठ पर विशेष : येल यूनिवर्सिटी के म्यूज़ियम में कैसे पहुंची बिहार से सूर्य की कलाकृति 

    क्या छठ  (Chhath Puja) का संबंध बौद्ध परंपराओं से रहा होगा? जिस तरह से छठ में पुजारी की भूमिका नगण्य है, उससे यह मुमकिन लगता है. क्या छठ बौद्ध परंपरा है जिसे बाद में सबने अपनाया. मेरी यह टिप्पणी बिना इतिहास के संदर्भों से मिलान किए हुए है, इसलिए कुछ भी आधिकारिक नज़रिए से नहीं कह रहा.

  • रौशनी के अंधेरे में अल्पमत-अल्पसंख्यक सा अकेला खड़ा रहा सुप्रीम कोर्ट

    रौशनी के अंधेरे में अल्पमत-अल्पसंख्यक सा अकेला खड़ा रहा सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट का आदेश व्यावहारिक नहीं था. सरकार अगर आदेशों को लागू न करे तो सुप्रीम कोर्ट का हर आदेश ग़ैर व्यावहारिक हो सकता है. एक दिन ये नेता यह भी कह देंगे कि सुप्रीम कोर्ट का होना ही व्यावहारिक नहीं है. हमें जनादेश मिला है, फैसला भी हमीं करेंगे. पटाखे न छोड़ने का आदेश 23 अक्तूबर को आया था मगर भीड़ की हिंसा पर काबू पाने का आदेश तो जुलाई में आया था. कोर्ट ने ज़िला स्तर पर पुलिस को क्या करना है, इसका पूरा खाका बना दिया था. फिर भी दशहरे के बाद बिहार के सीतामढ़ी में क्या हुआ.

  • नीतीशजी अब कार्रवाई में चूके तो आपका ‘इक़बाल‘ नहीं रह जाएगा

    नीतीशजी अब कार्रवाई में चूके तो आपका ‘इक़बाल‘ नहीं रह जाएगा

    बिहार के मुख्यमंत्री के पास दो पूंजी हैं एक सुशासन और दूसरा उनकी व्यक्तिगत ईमानदार नेता की छवि जो भ्रष्टाचार और गलत कमाई से कोसों दूर रहता है. लेकिन सुशासन बाबू नीतीश कुमार को शुक्रवार को उनके ही दो पुलिस कर्मियों ने वह भी उनके नाक तले राजधानी पटना में चुनौती दी, जब एक महिला पुलिसकर्मी की डेंगू से हुई मौत के बहाने जमकर हंगामा किया गया.

  • ठीकरा फुड़वाने के लिए रिजर्व बैंक अपना सिर तैयार रखे...

    ठीकरा फुड़वाने के लिए रिजर्व बैंक अपना सिर तैयार रखे...

    देश की माली हालत को लेकर रहस्य पैदा हो गया है. रिज़र्व बैंक और सरकार के बीच कुछ चल पड़ने की खबरें हैं. क्या चल रहा है? ये अभी नहीं पता. उजागर न किए जाने का कारण यह है कि आम तौर पर रिजर्व बैंक और सरकार के बीच कुछ भी चलने की बातें तब तक नहीं की जातीं जब तक सरकार कोई फैसला न ले ले. लेकिन हैरत की बात ये है कि सरकार ने आश्चर्यजनक रूप से रिजर्व बैंक के बारे में एक बयान जारी किया है. कुछ गड़गड़ होने का शक पैदा होने के लिए इतना काफी से ज्यादा है. 

  • संवैधानिक संस्थाओं की साख बची रहने दें जेटली जी 

    संवैधानिक संस्थाओं की साख बची रहने दें जेटली जी 

    यह 2015 का साल था जब वित्त मंत्री अरुण जेटली राज्यसभा की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहे थे. उनका कहना था कि जनता की चुनी हुई लोकसभा के पारित विधेयकों पर राज्यसभा को सवाल उठाने का हक़ नहीं है. तब लोकसभा के स्पीकर रहे सोमनाथ चटर्जी ने भी इसकी आलोचना की थी और कांग्रेस सांसद मधुसूदन मिस्त्री ने जेटली के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश किया था. दिलचस्प यह है कि अरुण जेटली तब यह बात कह रहे थे जब वे ख़ुद लोकसभा चुनाव हारकर राज्यसभा की मार्फ़त संसद में आए और मंत्री बने.

  • सीबीआई के बाद अब आरबीआई की बारी?

    सीबीआई के बाद अब आरबीआई की बारी?

    क्या सीबीआई के बाद अब सरकार ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई के कामकाज में भी दखल की तैयारी कर ली है? क्या आरबीआई की आजादी खतरे में है? ये सवाल इसलिए क्योंकि आरबीआई के कामकाज में दखल के आरोपों के बाद सरकार को अब सफाई देने के लिए सामने आना पड़ा है. खबरें ये भी है कि सरकार ने इतिहास में पहली बार आरबीआई कानून की धारा सात के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कमजोर बैंकों के लिए नकदी मुहैया कराने, छोटे और मध्यम उद्योग को कर्ज देने और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए नकदी जैसे मुद्दों पर आरबीआई को कहा है.

  • चुनावों पर नक्सली साया...

    चुनावों पर नक्सली साया...

    एक कैमरामैन मारा गया....दो जवान भी...न्यूजरूम में खबर गूंजी ही थी की टीवी स्क्रीन पर फ्लैश होने लगा......छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नीलवाया में नक्सली हमले में तीन लोग मारे गए... न्यूजरूम में आवाजें कुछ ऊंची हो रही थी...जिसको जो भी  जानकारी मिल रही थी दे रहा था...वो दूरदर्शन से था...नाम अच्युतानंद साहू था...वह ओडिशा से था... अरे, उसके आखरी फेसबुक पोस्ट को देखो...कुछ समय पहले ही शादी हुई थी...खबरों की दुनिया में रहने से लगातार अच्छी बुरी खबर आती रहती है, लेकिन दुख को अपनाने की शायद एक आदत सी हो जाती है..

  • जब येल यूनिवर्सिटी की क्लास में बैठे रवीश कुमार...

    जब येल यूनिवर्सिटी की क्लास में बैठे रवीश कुमार...

    मैंने हार्वर्ड में भी एक क्लास किया था. तीन घंटे की क्लास थी, मगर एक घंटे से कम बैठा. प्रोफेसर ने झट से अनुमति दे दी थी. उस क्लास में पहली बार देखा कि कई देशों से आए छात्रों की क्लास कैसी होती है. वैसे येल के ही GENDER AND SEXUALITY STUDIES की प्रोफेसर इंदरपाल ग्रेवाल ने भी न्योता दिया कि आप मेरी भी क्लास में आ जाइए, लेकिन तब समय कम था. प्रोफेसर ग्रेवाल नारीवादी मसलों पर दुनिया की जानी-मानी प्रोफेसर हैं. फेमिनिस्ट हैं. मेरी बदकिस्मती.

  • कोलंबिया जर्नलिज्म स्कूल का एक सफर

    कोलंबिया जर्नलिज्म स्कूल का एक सफर

    1912 में जब हम अपनी आज़ादी की लड़ाई की रूपरेखा बना रहे थे तब यहां न्यूयार्क में जोसेफ़ पुलित्ज़र कोलंबिया स्कूल ऑफ़ जर्नलिज़्म की स्थापना कर रहे थे. सुखद संयोग है कि 1913 में गणेश शंकर विद्यार्थी कानपुर में प्रताप की स्थापना कर रहे थे. तो ज़्यादा दुखी न हों, लेकिन यह संस्थान पत्रकारिता की पढ़ाई के लिए दुनिया भर में जाना जाता है.

  • रोशनी प्रधानमंत्री से आ रही है, इसलिए पुलिस आईबी को पीट रही है

    रोशनी प्रधानमंत्री से आ रही है, इसलिए पुलिस आईबी को पीट रही है

    “रोशनी नहीं है, अंधेरा दिख रहा है”- प्रधानमंत्री मोदी... “रोशनी आपसे आ रही है प्रधानमंत्री जी”- आनंद महिंद्रा... महान भारत की बर्बादी के दौर में उस खूबसूरत मंच पर हुआ यह संवाद शेक्सपियर के संवादों से भी क्लासिक है.

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