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Blog Of Ravish Kumar


'Blog of ravish kumar' - 211 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • आसमान छूने शहर आते हैं, लेकिन शहर के लोग आसमान नहीं देखते...

    आसमान छूने शहर आते हैं, लेकिन शहर के लोग आसमान नहीं देखते...

    दिल्ली की छतों का एक ही मतलब रहा है. जहां काले रंग की पानी की टंकी होती थी. जिसमें पानी मोटर से चढ़ता था.फिर उतरता था. लोग छत पर टंकी देखने जाते हैं. जब टंकी लीक करती है. क्या कभी पहले भी इस रात का आसमान इस तरह देखना होता था? हाउसिंग सोसायटी के लोग अपनी बालकनी से आती-जाती कारें देखा करते हैं. छत की सीलिंग देखते हैं. जहां छत है वहाँ डिश एंटेना लगा है. लोग घरों में बंद है. 

  • हार्ली डेविडसन पर चीफ जस्टिस की फोटू और लेंबोर्गिनी चलाने की मेरी अधूरी ख्वाहिश

    हार्ली डेविडसन पर चीफ जस्टिस की फोटू और लेंबोर्गिनी चलाने की मेरी अधूरी ख्वाहिश

    ट्विटर पर इस तस्वीर को देखकर गर्व से सीना 56.2 इंच का हो गया. .2 इंच की बढ़ोतरियां बेपरवाह ख़ुशी देने वाली हैं वैसे ही जैसे इतनी सी तोंद कम हो जाने पर मिलती है. भाव बता रहा है कि हम सभी के भीतर नौजवानी कुलांचे मारती रहती है. बाइक के कद्रदान ही समझ पाएंगे हार्ली डेविडसन पर बैठने की खुशी. इस खुशी को प्राप्त करने के लिए जरूरी नहीं कि बाइक अपनी हो. यह खुशी दूसरे की बाइक पर बैठकर ही महसूस की जाती है. दोस्त की नई बाइक स्टार्ट करने को मिले तो समझिए कि दोस्ती गहरी है. बस ऐसा दोस्त भी हो जिसके पास डेविडसन, जावा और बुलेट हो. बाइक विहीन मित्रता अधूरी मित्रता होती है. 

  • अपने मास्टर का हो चुका है मध्यम वर्ग, इसे पैकेज नहीं, थाली बजाने का टास्क चाहिए

    अपने मास्टर का हो चुका है मध्यम वर्ग, इसे पैकेज नहीं, थाली बजाने का टास्क चाहिए

    कोविड-19 ने भारत के मध्यम वर्ग का नया चेहरा पेश किया है. जिस चेहरे को बनाने में छह साल लगे हैं आज वो चेहरा दिख रहा है. आलोचक हैरान हैं कि नौकरी और सैलरी गंवा कर मध्यम वर्ग बोल क्यों नहीं रहा है? मज़दूरों की दुर्दशा पर मध्यम वर्ग चुप कैसे है?

  • क्या डर से ग़ैर हाज़िर हो रहे हैं बिहार में मेडिकल अफसर, इटली में 100 डॉक्टर और नर्स की मौत

    क्या डर से ग़ैर हाज़िर हो रहे हैं बिहार में मेडिकल अफसर, इटली में 100 डॉक्टर और नर्स की मौत

    बिहार के सरकारी डॉक्टरों का मनोबल बढ़ाने की ज़रूरत है. बहुत से डॉक्टर बिना अनुमति के ग़ैर हाज़िर हो जा रहे हैं. इस संकट में अगर 31 मार्च को 76 चिकित्सा पदाधिकारि और 2 अप्रैल को 60 चिकित्सा पदाधिकारी काम पर नहीं जाएंगे तो ठीक नहीं है. बिहार सरकार ने 76 ऐसे मेडिकल अफसर से तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है. इसके अलावा 122 मेडिकल अफसरों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई कर रही है.

  • कल जब एक कहानी चल कर आई, अपनी सुना कर मुझे अपना किरदार बना ले गई

    कल जब एक कहानी चल कर आई, अपनी सुना कर मुझे अपना किरदार बना ले गई

    कोई तीस साल पहले की बात है. अपने परिवार की ग़रीबी से तंग आकर एक नौजवान फ़ैसला करता है कि अमरीका जाएगा. उसके राज्य के बाकी लोगों की तरह वहां जाकर पैसे कमाएगा. वीज़ा के लिए मुंबई जाता है औऱ जब तक वीज़ा नहीं मिलता वो मुंबई में ही रहता है. पहले वह कनाडा पहुंचता है. फिर पैदल चल कर सीमा पार करता हुआ अमरीका आ जाता है.

  • कश्मीरी पंडितों का दर्द हमने कितना समझा?

    कश्मीरी पंडितों का दर्द हमने कितना समझा?

    अगर किसी की तमाम तक़लीफों में सबसे बड़ी यही तकलीफ हो कि किसी ने उनकी बात नहीं की तो उस चुप्पी पर बात होनी चाहिए. इंसाफ़ का इंतज़ार लंबा हो ही गया है और शायद आगे भी हो लेकिन चुप्पी उनके भीतर चुप रही है. वो हर दिन पहले से ज्यादा चुभने लगती है.

  • क्यों नहीं यूपी-बिहार में पाक, अफ़ग़ान और बांग्लादेश के हिन्दुओं को बसाया जाए?

    क्यों नहीं यूपी-बिहार में पाक, अफ़ग़ान और बांग्लादेश के हिन्दुओं को बसाया जाए?

    मैं एक बात का प्रस्ताव करना चाहता हूं. अगर असम में रह रहे हिन्दू बांग्लादेशी प्रवासियों से उनकी पहचान को ख़तरा है तो इन्हें यूपी और बिहार में बसा दिया जाए. दो मिनट में झगड़ा ख़त्म हो जाएगा. बिहार को पुराना बंगाल तो नहीं मिल सकता कुछ अच्छे बंगाली मिल जाएंगे. बिहार और यूपी की उदारता इसे ख़ुशी ख़ुशी स्वीकार भी कर लेगी.

  • क्या आज का भारत हाजी हबीब के लिए नागरिकता रजिस्टर का विरोध करेगा?

    क्या आज का भारत हाजी हबीब के लिए नागरिकता रजिस्टर का विरोध करेगा?

    असम की आबादी साढ़े तीन करोड़ ही है. नागरिकता रजिस्टर के नाम राज्य ने 1600 करोड़ फूंक दिए. राज्य के करीब 4 साल बर्बाद हुए. 2019 के अगस्त में जब अंतिम सूची आई तो मात्र 19 लाख लोग उसमें नहीं आ सके. इनमें से भी 14 लाख हिन्दू हैं. बाकी 5 लाख के भी कुछ रिश्तेदार भारतीय हैं और कुछ नहीं. इन सबको फॉरेन ट्रिब्यूनल में जाने का मौका मिलेगा. उसके बाद तय होगा कि आप भारत के नागरिक हैं या नहीं. वहां भी केस को पूरा होने में छह महीने से साल भर कर समय लग सकता है.

  • विशेष तौर पर सक्षम लोगों से समाज का सलूक कैसा

    विशेष तौर पर सक्षम लोगों से समाज का सलूक कैसा

    तीन दिसंबर को International Day of Persons with Disabilities के तौर पर मनाया जाता है. 1992 में संयुक्त राष्ट्र ने यह दिन इसलिए तय किया था ताकि इसके बहाने आम लोगों और सरकारों के बीच अलग से शारीरिक और मानसिक तौर पर सक्षमता को लेकर समझ बने और उनके हिसाब से अधिकारों की समझ समाज में बने. ताकि अगर जब हम देखें कि कोई इमारत, कोई सड़क या बाज़ार या दफ्तर इस लिहाज़ से न हो तो पहला सवाल ये दिमाग में आए कि इसका न होना, संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है. कुछ दिन पहले मैं कैलिफोर्निया गया था. वहां के मांटेरे में एक पब्लिक बस देखी. मैं हैरान हो गया पूरी प्रक्रिया को देखकर.

  • रवीश कुमार का ब्‍लॉग : आपके लिए भी दरवाज़े खुल सकते हैं, कोशिश तो कीजिए

    रवीश कुमार का ब्‍लॉग : आपके लिए भी दरवाज़े खुल सकते हैं, कोशिश तो कीजिए

    स्वाति जिस मशीन पर काम करती है उसका नाम है AOSLO Adaptive optics scanning laser ophthalmoscope. दुनिया भर में बहुत कम जगहों पर रिसर्च के लिए यह मशीन है. अधिक से अधिक दस जगहों पर होगी. आम तौर पर डॉक्टर आंखों के आले से यानी ophthalmoscope से कुछ हिस्से को नहीं देख पाते हैं.

  • ऐसी लाइब्रेरी और अध्ययन कक्ष आपने किसी हिन्दी प्रदेश में देखी है?

    ऐसी लाइब्रेरी और अध्ययन कक्ष आपने किसी हिन्दी प्रदेश में देखी है?

    हिन्दी प्रदेशों के युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है बस उनमें निखार न आए इसका इंतज़ाम सिस्टम और समाज ने कर रखा है. सैंकड़ों किलोमीटर तक लाइब्रेरी नज़र नहीं आएगी. इसे बीते ज़माने का बताया जाता है. मैं अमरीका के सैन फ़्रांसिस्को में हूं. यहां यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया, बर्कले की लाइब्रेरी की रीडिंग रूम की तस्वीर दिखाना चाहता हूं. 

  • कहां हैं नोटबंदी के दूरगामी परिणाम, तीन साल हो गए, आगामी कितने साल में आएगी दूरगामी

    कहां हैं नोटबंदी के दूरगामी परिणाम, तीन साल हो गए, आगामी कितने साल में आएगी दूरगामी

    8 नवंबर को एक और ख़बर आई है. रेटिंग एजेंसी मूडी ने भारत के कर्ज़ चुकाने की क्षमता को निगेटिव कर दिया है. इसका कहना है कि पांच तिमाही से आ रहे अर्थव्यवस्था में ढलान से कर्ज़ बढ़ता ही जाएगा. 2020 में बजट घाटा जीडीपी का 3.7 प्रतिशत हो जाएगा जो 3.3 प्रतिशत रखने के सरकार के लक्ष्य से बहुत ज़्यादा है. भारत की जीडीपी 6 साल में सबसे कम 5 प्रतिशत हो गई है.

  • खूब लड़ा ऑस्ट्रेलिया का मीडिया, खूब झुका भारत का मीडिया

    खूब लड़ा ऑस्ट्रेलिया का मीडिया, खूब झुका भारत का मीडिया

    आप जो अख़बार ख़रीदते हैं, या जो चैनल देखते हैं, क्या वह आज़ाद है? उसके आज़ाद होने का क्या मतलब है? सिर्फ छपना और बोलना आज़ादी नहीं होती. प्रेस की आज़ादी का मतलब है कि संपादक और रिपोर्टर ने किसी सूचना को हासिल करने के लिए मेहनत की हो, उन्हें छापने से पहले सब चेक किया हो और फिर बेखौफ होकर छापा और टीवी पर दिखाया हो. इस आज़ादी को ख़तरा सिर्फ डर से नहीं होता है. जब सरकारें सूचना के तमाम सोर्स पर पहरा बढ़ा देती हैं तब आपके पास सूचनाएं कम पहुंचने लगती हैं. सूचनाओं का कम पहुंचना सिर्फ प्रेस की आज़ादी पर हमला नहीं है, वो आपकी आज़ादी पर हमला है. क्या आप अपनी आज़ादी गंवाने के लिए तैयार हैं?

  • यूपी और एमपी के सिपाहियों में अनैतिकता के जाल से निकलने की छटपटाहट

    यूपी और एमपी के सिपाहियों में अनैतिकता के जाल से निकलने की छटपटाहट

    उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के सिपाही मुझे पत्र लिख रहे हैं. उन पत्रों को पढ़ने से पहले ही सिपाही बंधुओं की ज़िंदगी का अंदाज़ा है. अच्छी बात यह है कि उनके भीतर अपनी ज़िंदगी की हालत को लेकर चेतना जागृत हो रही है. यह सही है कि हमारी पुलिस व्यवस्था अमानवीय है और अपने कुकृत्यों के जरिए लोगों के जीवन में भयावह पीड़ा पैदा करती है. लेकिन यह भी सही है कि इसी पुलिस व्यवस्था में पुलिस के लोग भी अमानवीय जीवन झेल रहे हैं. उनकी अनैतिकता सिर्फ आम लोगों को पीड़ित नहीं कर रही है बल्कि वे खुद अपनी अनैतिकता के शिकार हैं. झूठ, भ्रष्टाचार और लालच ने उनकी ज़िंदगी में कोई सुख-शांति नहीं दी है.

  • कहां गए प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के 5 करोड़ लाभार्थी, आपको तीसरी किश्त मिली क्‍या?

    कहां गए प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के 5 करोड़ लाभार्थी, आपको तीसरी किश्त मिली क्‍या?

    उत्तराखंड के एक किसान का मैसेज आया है. उन्होंने लिखा है कि उन्हें किसान सम्मान योजना की दो किश्तें मिली हैं. एक दिसंबर में और दूसरी जुलाई में. लेकिन तीसरी किश्त के समय एक एसएमएस आता है कि आपका नाम आधार कार्ड से मैच नहीं कर रहा है. इस कारण आपको अयोग्य घोषित कर दिया गया है.

  • BSNL-BPCL के कर्मचारी न सरकार का विरोध करें और न मीडिया से अनुरोध, टीवी डिबेट में मस्त रहें

    BSNL-BPCL के कर्मचारी न सरकार का विरोध करें और न मीडिया से अनुरोध, टीवी डिबेट में मस्त रहें

    ख़बरों के ज़रिए पाठक और किसी संस्थान के साथ क्या खेल होता है, इसे समझने के लिए आपको पिछले कुछ महीनों में BSNL और MTNL पर छपी ख़बरों को पढ़ना चाहिए. किस तरह दोनों संस्थानों के कर्मचारी झांसे में आते हैं. कायदे से सरकार सीधे कह सकती थी कि हम इन दो कंपनियों को बंद कर रहे हैं लेकिन चुनाव के कारण प्रस्तावों के ज़रिए सपने दिखाने लगी.

  • हिन्दी प्रदेश के नौजवान अपने पिता से पूछे, हाल में कौन सी किताब पढ़ी है!

    हिन्दी प्रदेश के नौजवान अपने पिता से पूछे, हाल में कौन सी किताब पढ़ी है!

    ज़ाहिर है मीडिया के स्पेस में तरह-तरह के गांधी गढ़े जाएंगे. उनमें गांधी नहीं होंगे. उनके नाम पर बनने वाले कार्यक्रमों के विज्ञापनदाताओं के उत्पाद होंगे. गांधी की आदतों को खोज खोज कर साबुन तेल का विज्ञापन ठेला जाएगा. हम और आप इसे रोक तो सकते नहीं.

  • आर्टिकल 370 पर संसद में निराश किया कांग्रेस ने

    आर्टिकल 370 पर संसद में निराश किया कांग्रेस ने

    जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक लोकसभा में भी पास हो गया. राज्यसभा में सोमवार को पास हो गया था. गृह मंत्रालय का विधेयक था इसलिए दोनों ही दिन अमित शाह के रहे. प्रधानमंत्री दोनों दिन मौजूद रहे मगर वे सुनते ही रहे. खबर है कि वे देश को संबोधित करेंगे. अमित शाह ने पूरी तैयारी के साथ भाषण दिया. दोनों दिनों का भाषण एक जैसा ही था फिर भी विपक्ष उन्हें प्रभावशाली तरीके से घेर नहीं सका. शशि थरूर ने सरदार पटेल को लेकर अपनी बात रखी कि धारा 370 पर नेहरू और पटेल सबके दस्तखत थे. कांग्रेस भीतर से बंटती चली गई है. ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ज़रूर संवैधानिक प्रक्रियाओं का सवाल उठाया है लेकिन उन्होंने भी सरकार के विधेयक का समर्थन किया है.

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