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'Book review' - 46 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • Book Review: समकालीन कथा परिदृश्‍य में 'लमही'

    Book Review: समकालीन कथा परिदृश्‍य में 'लमही'

    लमही इससे पहले भी अन्‍य कतिपय विशेषांकों के अलावा समकालीन उपन्‍यास-परिदृश्‍य पर औपन्‍यासिक शीर्षक से दो विशेषांक प्रकाशित कर चुकी है.

  • अख़्तरी: बेगम अख़्तर के मुरीदों के लिए अनिवार्य किताब

    अख़्तरी: बेगम अख़्तर के मुरीदों के लिए अनिवार्य किताब

    Book Review: अख़्तरी ग़ज़ल गायिकी की पहचान बेगम अख़्तर पर केन्द्रित किताब है. इससे पहले हिन्दी में बेगम अख़्तर पर बुरी किताबें भी न के बराबर थीं अच्छी किताब तो एक भी नहीं थी.

  • Bharat Box office Collection: एडवांस बुकिंग में दिखा भारत का जलवा, पहले दिन बाहुबली और एंडगेम का टूटेगा रिकॉर्ड ?

    Bharat Box office Collection: एडवांस बुकिंग में दिखा भारत का जलवा, पहले दिन बाहुबली और एंडगेम का टूटेगा रिकॉर्ड ?

    Bharat Box office Collection: सलमान खान (Salman Khan) की 'भारत' (Bharat) ईद के दिन यानी की बुधवार को रिलीज हो रही है. बॉक्स ऑफिस पर इसका असर देखने को मिलेगा क्योंकि ज्यादातर जगहों पर बुधवार और गुरुवार को छुट्टी का दिन रहेगा. वहीं शुक्रवार के बाद शनिवार और रविवार को फिर से छुट्टी मिल जाने से, फिल्म म को कमाई करने का अच्छा अवसर मिल जाएगा.

  • नेहरू के होने का मतलब

    नेहरू के होने का मतलब

    तथाकथित राष्ट्रवादियों ने नेहरू और गांधी को लगभग खलनायकों में बदलने की कोशिश की है. इनके ख़िलाफ़ दुष्प्रचार की जैसे कोई सीमा ही नहीं रही.

  • Book Review: एक आईएएस अधिकारी के 38 साल के अनुभवों का दस्तावेज है अनिल स्वरूप की 'नॉट जस्ट ए सिविल सर्वेंट'

    Book Review: एक आईएएस अधिकारी के 38 साल के अनुभवों का दस्तावेज है अनिल स्वरूप की 'नॉट जस्ट ए सिविल सर्वेंट'

    पूर्व आईएएस अनिल स्वरूप (Anil Swarup) ने अपनी किताब  'नॉट जस्ट ए सिविल सर्वेंट' (Not Just A Civil Servant Book) में 38 साल लंबी प्रशासनिक सेवा के दौरान हुए अनुभवों को व्यक्त किया है. सत्ता और तंत्र को बेहद करीब से देखने वाले अनिल स्वरूप ने इस किताब में अपने अनुभव को शेयर करने के साथ ही कई खुलासे भी किए हैं. इस किताब के तीसरे अध्याय में उन्होंने लिखा है- ''वह अयोध्या में मंदिर चाहते थे और शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण आम सहमति की दिशा में काम कर रहे थे. वह पूरी तरह से आक्रामक तेवर के खिलाफ थे जो धार्मिक संगठनों की पहचान थी. उस समय भारत में मोबाइल फोन नहीं हुआ करते थे. दूरदर्शन के अलावा कोई दूसरा न्यूज चैनल नहीं था. टेलीप्रिंटर और लैंडलाइन फोन ही कम्युनिकेशन का साधन थे. लाइव टेलीकास्ट का साधन होने के कारण जमीनी हकीकत का अंदाजा लगाना मुश्किल था. कल्याण सिंह को अयोध्या से रुक-रुक कर जानकारियां मिल रही थी.

  • सफल होने और सफल बने रहने का मंत्र बताती है 'बोल बच्चन', पढ़ें सक्सेस और बॉलीवुड का मज़ेदार तड़का

    सफल होने और सफल बने रहने का मंत्र बताती है 'बोल बच्चन', पढ़ें सक्सेस और बॉलीवुड का मज़ेदार तड़का

    लाइफ में सफल होने का मंत्र आपको हर कोई बताएगा, लेकिन मज़ेदार तरीके से सक्सेस को समझना हो तो राइटर रूपेश दूबे की किताब 'बोल बच्चन' को पढ़िए. ये किताब आपको सफलता के ऐसे 18 सूत्र बताएगी, जो आपने सुने तो कई बार होंगे लेकिन समझ अब आएंगे.

  • पुस्तक समीक्षा : हवा के ताजे झोंके की तरह है 'भीगी रेत'

    पुस्तक समीक्षा : हवा के ताजे झोंके की तरह है 'भीगी रेत'

    देश के मौजूदा सियासी माहौल में ये पंक्तियां कितनी मौजू हैं. लेखक और समाजसेवी रवि शर्मा का हालिया काव्य संग्रह 'भीगी रेत' ताजा हवा के झोंके की तरह है.

  • Book Review: नायक से ज्यादा ‘खलनायक’ की अहमियत, बॉलीवुड के 101 विलेन की असली कहानी

    Book Review: नायक से ज्यादा ‘खलनायक’ की अहमियत, बॉलीवुड के 101 विलेन की असली कहानी

    यह खलनायक की अपनी दमदार भूमिका का कमाल था, जिसका श्रेय कम ही मिल पाता था. क्योंकि फिल्में अक्सर हीरो-हीरोइन की मानी जाती थी और अवार्ड शो में बेस्ट एक्टर, एक्ट्रेस व फिल्म को ही पुरस्कार मिलता था. लंबे समय से फिल्मों में खलनायक की अहमियत को दर्जा नहीं मिला. हालांकि बाद में बदलते समय के साथ कई परिवर्तन देखने को मिले और आज हीरो ही विलेन की भूमिका निभाते हुए नज़र आने लगे हैं.

  • समाज की कड़वी सच्चाई से रूबरू कराती 'अधूरी दास्तां'

    समाज की कड़वी सच्चाई से रूबरू कराती 'अधूरी दास्तां'

    'अधूरी दास्तां' एक प्रेम कहानी है, जिसे विवेक और साक्षी के बीच बुना गया है. एक ही दफ्तर में काम करने वाले विवेक और साक्षी को प्यार हो जाता है. दोनों तमाम ख़्वाब बुनते हैं, लेकिन उनके ख़्वाब को समाज की नजर लग जाती है.

  • शादी के बाद पैदा हुए परस्पर विश्वास और प्रेम की कहानी का लेखा जोखा है ‘सिडक्शन बाय ट्रूथ’

    शादी के बाद पैदा हुए परस्पर विश्वास और प्रेम की कहानी का लेखा जोखा है ‘सिडक्शन बाय ट्रूथ’

    कहानी के अनुसार शिव एक जाना-माना बुद्धिजीवी होता है. शिव को इस बात का पता है कि इंसान को अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए शादी ही पर्याप्त नहीं है. यही वजह है कि वह मन की जगह तर्क का सहारा लेता है. वह अपनी शादीशुदा जिंदगी के दौरान खुद को व्यभिचार के रास्ते की तरफ अग्रसर करता है. इस दौरान वह दो उद्देश्य तय करता है एक तो यह कि वह शादी के पीछे के मकदस को समझेगा और दूसरा यह कि अपनी इच्छाओं को दोबारा तलाशेगा. ठीक उसी तरह जिस तरह उसकी पत्नी ने किया था. इन दोनों ही उद्देश्य को पूरा करने के लिए उसने यह फैसला किया था कि वह अब से सिर्फ शादी-शुदा महिलाओं के साथ ही संबंध बनाएगा.

  • Lakshminama Book Review: धर्म, व्यापार और राजनीति का अर्थशास्त्र

    Lakshminama Book Review: धर्म, व्यापार और राजनीति का अर्थशास्त्र

    ये बयान तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर पुस्तक लक्ष्मीनामा में तमाम कहानियों के साथ पेश किया गया है जो किताब के दो पेज पढ़ने वाले को आगे के पृष्ठ पढ़ने के लिए खुद मजबूर करता है. सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि इन तीनों विषयों पर अलग-अलग किताबें तो अनेक लिखी गई हैं लेकिन तीनों के अंतर्संबंधों को उजागर करती हुई शायद हिंदी की यह पहली पुस्तक है.

  • क्या लाल बहादुर शास्त्री की मौत के पीछे CIA का हाथ था?

    क्या लाल बहादुर शास्त्री की मौत के पीछे CIA का हाथ था?

    वरिष्ठ पत्रकार और ब्लॉगर विष्णु शर्मा ने अपनी हालिया किताब में  शास्त्री जी की मौत के पीछे सीआईए कनेक्शन पर चर्चा की है.

  • अनुपम खेर की मम्मी ने किया 'The Accidental Prime Minister' का रिव्यू, मनमोहन पर बोलीं- शरीफ था वो बेचारा...Video

    अनुपम खेर की मम्मी ने किया 'The Accidental Prime Minister' का रिव्यू, मनमोहन पर बोलीं- शरीफ था वो बेचारा...Video

    'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर (The Accidental Prime Minister)' देखने के बाद अनुपम खेर की मम्मी दुलारी खेर उन्हें 100 में से 100 नंबर देती हैं. उन्हें अपने बेटे की एक्टिंग बहुत पसंद आती है.

  • 'विश्वासम' की एडवांस बुकिंग के लिए मच गया गदर, दीवार और गेट फांदकर पहुंचे फैन्स- देखें Video

    'विश्वासम' की एडवांस बुकिंग के लिए मच गया गदर, दीवार और गेट फांदकर पहुंचे फैन्स- देखें Video

    Ajith Kumar Viswasam: तमिल सुपरस्टार अजित कुमार (Ajith Kumar) को सिंगर एस.पी. बालासुब्रमण्यम ने तमिल फिल्में में इंट्रोड्यूस करवाया था. अजित 50 फिल्मों में काम कर चुके हैं. अजित ने 1993 में 'अमरावती' फिल्म में पहली बार लीड रोल किया था.

  • 2.0 Movie: रजनीकांत-अक्षय कुमार का बॉक्स ऑफिस पर तहलका, 'Robot 2.0' ने किया ये करिश्मा

    2.0 Movie: रजनीकांत-अक्षय कुमार का बॉक्स ऑफिस पर तहलका, 'Robot 2.0' ने किया ये करिश्मा

    2.0 : रजनीकांत और अक्षय कुमार की '2.0' तमिल, तेलुगु और हिंदी में रिलीज हो गई है. फिल्म को लायका प्रोडक्शंस ने प्रोड्यूस किया है और हिंदी वर्जन को धर्मा प्रोडक्शन डिस्ट्रीब्यूट कर रहा है. '2.0' को एस. शंकर ने डायरेक्ट किया है.

  • Book Review: पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की वजहों और उनके व्यक्तित्व को खंगालती 'Illiberal India'

    Book Review: पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की वजहों और उनके व्यक्तित्व को खंगालती 'Illiberal India'

    यूं तो गौरी लंकेश और चिदानंद राजघाटा शादी के कुछ सालों बाद ही अलग हो गए थे, लेकिन वे हमेशा अच्छे दोस्त रहे. तलाक के करीब 4 साल बाद चिदानंद राजघाटा अमेरिका बस गए, लेकिन गौरी से बातचीत जारी रही. वह लिखते, 'मैंने कई वर्षों तक फेसबुक पर गौरी के फ्रेंड रिक्वेस्ट को इग्नोर किया,क्योंकि वह बहुत जल्द गुस्सा हो जाती थी. मुझे इससे डर लगता था

  • तैमूर के बाद करीना कपूर ने यूं देसी खाने से कम किया वजन, हेल्थ एक्सपर्ट ने खोले राज़

    तैमूर के बाद करीना कपूर ने यूं देसी खाने से कम किया वजन, हेल्थ एक्सपर्ट ने खोले राज़

    ऋजुता दिवेकर न्यूट्रिशन एंड एक्सरसाइज एक्सपर्ट हैं, जिन्होंने ना सिर्फ करीना कपूर को एक बार फिर ज़ीरो फिगर लौटाया बल्कि वो आम महिलाओं को भी एक हेल्दी बॉडी बनाने के सीक्रेट्स बताती रहती हैं.

  • Book Review: राष्ट्रवादी पत्रकारिता के शिखर पुरुष थे अटल बिहारी वाजपेयी

    Book Review: राष्ट्रवादी पत्रकारिता के शिखर पुरुष थे अटल बिहारी वाजपेयी

    पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एक राजनीतिज्ञ, कवि और पत्रकार थे. अटल जी राजनेता और कवि दोनों के रूप में आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं. लेकिन अटल जी राजनेता और कवि के साथ-साथ राष्ट्रवादी पत्रकारिता के शिखर पुरुष भी थे. राजनेता बनने से पहले अटल जी एक पत्रकार थे. उन्होंने राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने और पत्रकारों की आवाज बुलंद करने में अपना खास योगदान दिया था. अटल जी के जीवन पर कई किताबें लिखी गई हैं. लेकिन आज हम एक ऐसी किताब कि बात कर रहें हैं, जिसमें उनके पत्रकारीय जीवन पर प्रकाश डाला गया है. डॉ. सौरभ मालवीय की किताब ‘राष्ट्रवादी पत्रकारिता के शिखर पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी’ में अटल जी के पत्रकारीय जीवन के बारें में बखूबी लिखा गया है.