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Book review kahin kuchh nahin


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  • किताब-विताब - कहीं कुछ नहीं : जीवन के राग और खटराग की कहानियां

    किताब-विताब - कहीं कुछ नहीं : जीवन के राग और खटराग की कहानियां

    क्या कहानियों को हमेशा बहुत सुगठित होना चाहिए- इस तरह कि कथा कभी भटकती न लगे और एक ही लय में बात पूरी हो जाए? ऐसे उस्ताद और माहिर क़िस्सागो होते हैं जो पाठकों को बिल्कुल वशीभूत कर अपने साथ लिए चलते हैं- अनुभव और रोमांच की अपनी रची हुई दुनिया की सैर कराते हैं. पाठक इन कहानियों के संसार से अभिभूत लौटता है.