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Bpsc vacancy


'Bpsc vacancy' - 20 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • नौकरियों से परेशान युवा अब मुझे मैसेज भेजना बंद कर दें, प्रधानमंत्री को भेजें

    नौकरियों से परेशान युवा अब मुझे मैसेज भेजना बंद कर दें, प्रधानमंत्री को भेजें

    EPFO ने फिर से नौकरियों को लेकर डेटा जारी किया है. सितंबर 2017 से जुलाई 2018 के बीच नौकरियों के डेटा को EPFO ने कई बार समीक्षा की है. इस बार इनका कहना है कि 11 महीने में 62 लाख लोग पे-रोल से जुड़े हैं. इनमें से 15 लाख वो हैं जिन्होंने EPFO को छोड़ा और फिर कुछ समय के बाद अपना खाता खुलवा लिया. यह दो स्थिति में होता है. या तो आप कोई नई संस्था से जुड़ते हैं या बिजनेस करने लगते हैं जिसे छोड़ कर वापस फिर से नौकरी में आ जाते हैं.

  • सरकारी नौकरियों में ज्वाइनिंग में देरी क्यों?

    सरकारी नौकरियों में ज्वाइनिंग में देरी क्यों?

    मुझे पता है कि आज भी नेताओं ने बड़े-बड़े बयान दिए हैं. बहस के गरमा गरम मुद्दे दिए हैं. लेकिन मैं आज आपको सुमित के बारे में बताना चाहता हूं. इसलिए बता रहा हूं ताकि आप यह समझ सकें कि इस मुद्दे को क्यों देश की प्राथमिकता सूची में पहले नंबर पर लाना ज़रूरी है. सुमित उस भारत के नौजवानों का प्रतिनिधित्व करता है जिसकी संख्या करोड़ों में है. जिन्हें सियासत और सिस्टम सिर्फ उल्लू बनाती है. जिनके लिए पॉलिटिक्स में आए दिन भावुक मुद्दों को गढ़ा जाता है, ताकि ऐसे नौजवानों को बहकाया जा सके. क्योंकि सबको पता है कि जिस दिन सुमित जैसे नौजवानों को इन भावुक मुद्दों का खेल समझ आ गया उस दिन सियासी नेताओं का खेल खत्म हो जाएगा. मगर चिंता मत कीजिए. इस लड़ाई में हमेशा सियासी नेता ही जीतेंगे. उन्हें आप बदल सकते हैं, हरा नहीं सकते हैं. इसलिए सुमित जैसे नौजवानों को हार जाना पड़ता है.

  • सरकारी नौकरियों की भर्ती में सालों क्यों लगते हैं?

    सरकारी नौकरियों की भर्ती में सालों क्यों लगते हैं?

    हर दिन सोचता हूं कि अब नौकरी सीरीज़ बंद कर दें. क्योंकि देश भर में चयन आयोग किसी गिरोह की तरह काम कर रहे हैं. उन्होंने नौजवानों को इस कदर लूटा है कि आफ चाह कर भी सबकी कहानी नहीं दिखा सकते हैं. नौजवानों से फॉर्म भरने कई करोड़ लिए जाते हैं, मगर परीक्षा का पता ही नहीं चलता है. देश में कोई भी खबर होती है, ये नौजवान दिन रात अपनी नौकरी को लेकर ही मैसेज करते रहते हैं. मेरी नौकरी, मेरी परीक्षा का कब दिखाएंगे. परीक्षा देकर नौजवान एक साल से लेकर तीन साल तक इंतज़ार कर रहे हैं तो कई बार फॉर्म भरने के बाद चार तक परीक्षा का पता ही नहीं चलता है. यह सीरीज़ इसलिए बंद करना ज़रूरी है क्योंकि समस्या विकराल हो चुकी है. जब भी बंद करने की सोचता हूं किसी नौजवान की कहानी सुनकर कांप जाता हूं. तब लगता है कि आज एक और बार के लिए दिखा देते हैं और फिर सीरीज़ बंद नहीं कर पाता. 

  • CBSE के अलावा SSC, MPPCS, UPPCS, BPSC, HSSC, RRB भी ज़रूरी मुद्दे हैं...

    CBSE के अलावा SSC, MPPCS, UPPCS, BPSC, HSSC, RRB भी ज़रूरी मुद्दे हैं...

    कर्मचारी चयन आयोग में सब कुछ ठीक नहीं है. छात्र जब मांग कर रहे हैं तो उनकी बात को सुना जाना चाहिए. एसएससी की परीक्षा देने वाले छात्रों की संख्या करोड़ में तो होगी ही. इनका कोई नेता नहीं है. संगठन भी नहीं है. न ही विश्वविद्यालयों में चुनाव जीतने वाली एनएसयूआई या एबीवीपी इनके मुद्दों का प्रतिनिधित्व करती है. फिर भी ये हर बार हज़ारों की संख्या में दिल्ली आकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

  • नौकरी देने से क्यों बचती है सरकार?

    नौकरी देने से क्यों बचती है सरकार?

    नौकरी सीरीज़ का 24वां अंक आप देख रहे हैं. झारखंड, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र के छात्र लगातर हमें भांति-भांति की परीक्षाओं में होने वाली देरी और धांधली के बारे में लिख रहे हैं. हमने कई बार कहा है कि हमारे पास संसाधनों की कमी है. बहुत सी परीक्षाओं को हम कवर भी नहीं कर पाए हैं, लेकिन कोशिश है कि सबका ज़िक्र हो जाए और नौकरी सीरीज़ एक ऐसा डेटा बैंक बन जाए जिसे देखते ही आपको भारत में नौकरियां देने वाले आयोगों की रिपोर्ट मिल जाए.

  • नौकरी सीरीज का 22वां अंक : सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की सुस्ती टूटी?

    नौकरी सीरीज का 22वां अंक : सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की सुस्ती टूटी?

    नौकरी सीरीज़ का 22वां अंक आप देखने जा रहे हैं. सिस्टम के भीतर सड़न और मौसम नहीं बदलता है. सरकार बदलती है जो बादलों की तरह उड़ती हुई आती है और धूप छांव खेलती हुई चली जाती है. जिस सिस्टम के कमरों में बैठने के लिए नेता सारा ज़ोर लगा देते हैं वही अब पूछते हैं कि नौजवान सरकार की नौकरी के भरोसे क्यों बैठे हैं. सरकार यह नहीं कहती है कि हमारा भरोसा मत रखो, हम नौकरी नहीं देंगे, उल्टा भरोसा रखने वाले से ही पूछती है कि ये तो बताओ की तुम हम पर भरोसा क्यों करते हो. नौजवानों ने कभी पूछा नहीं कि तुम भी तो बताओ कि सरकार में जाने के लिए फिर क्यों दिन रात मरते हो. सवालों के दौर में इस राजनीति के पास कोई आइडिया नहीं बचा है. वह लगातार थीम की तलाश में है जिसपर बहस हो सके.

  • नौकरियों पर सीरीज़ (एपिसोड 11) : नतीजों के लिए लंबा इंतज़ार क्यों?

    नौकरियों पर सीरीज़ (एपिसोड 11) : नतीजों के लिए लंबा इंतज़ार क्यों?

    नौकरी सीरीज़ का हमारा ग्यारहवां एपिसोड जारी है. स्टाफ सलेक्शन कमीशन ने कहा है कि करीब 15 हज़ार नौजवानों को 28 फरवरी तक केंद्र के अलग-अलग विभागों में ज्वाइनिंग हो जाएगी. ये वे नौजवान हैं जिन्होंने स्टाफ सलेक्शन कमीशन 2015 बैच की परीक्षा अंतिम रूप से पास कर ली है. इनका रिज़ल्ट अगस्त 2017 में ही आ गया है फिर भी अभी तक ज्वाइनिंग नहीं हुई है.

  • सरकारी नौकरियां आख़िर हैं कहां - भाग 10 

    सरकारी नौकरियां आख़िर हैं कहां - भाग 10 

    नौकरियों पर हमारी सीरीज़ जारी है. इसे संक्षिप्त रूप में आज 10वां एपिसोड गिन सकते हैं. स्टाफ सलेक्शन कमीशन ने हमारी सीरीज़ के दौरान तीसरी बार पत्र जारी किया है. इस पत्र से अपनी ज्वाइनिंग का इंतज़ार कर रहे हैं भारत के प्यारे नौजवान बहुत खुश हैं. वो देख रहे हैं कि अगर हिन्दू मुस्लिम टॉपिक छोड़कर रोज़गार के सवाल पर आया जाए तो मुद्दों का असर होता है.

  • सरकारी नौकरियां आख़िर हैं कहां - भाग 9

    सरकारी नौकरियां आख़िर हैं कहां - भाग 9

    नौकरियों पर हमारी सीरीज़ का यह 9वां एपिसोड है. इन नौजवानों की ज़िंदगी में पढ़ने के अलावा कोई और वक्त नहीं होता है. सुबह उठना और शाम तक कोचिंग में रहना और फिर तैयारी में लग जाना. इसके बीच जैसे ही ख़बर आई कि सरकार 5 साल से खाली पड़े पदों को ख़त्म कर देगी, नौजवानों में बेचैनी बढ़ गई है. आप कोचिंग में एडमिशन ले चुके होते हैं, इस उम्मीद में कि इस साल भर्ती निकलेगी और यह ख़बर आ जाए कि 5 लाख पद समाप्त होंगे, तो दिल पर क्या बीतेगी. अगर इसी फॉर्मूले पर राज्य सरकारें चल पड़ी तो भारत के नौजवानों के लिए सरकारी नौकरियों के रास्ते पहले से कहीं ज़्यादा संकरे हो जाएंगे. 

  • सरकारी नौकरियां आख़िर हैं कहां - भाग 8

    सरकारी नौकरियां आख़िर हैं कहां - भाग 8

    जब भारत जैसे विशाल देश में एक फिल्म पर तीन महीने तक सुबह शाम टीवी पर चर्चा हो सकती है और नागरिकों से लेकर जानकारों तक ने इस बहस में हिस्सा लिया है तो उम्मीद है कि उनमें नौकरियों पर हमारी सीरीज़ का 8वां एपिसोड देखने की दिलचस्पी बची होगी. अलग-अलग राज्यों में परीक्षाओं से जुड़े छात्र उदासी के शिकार हो रहे हैं.

  • राज्य चयन आयोग यूपीएससी से क्यों नहीं सीखते?

    राज्य चयन आयोग यूपीएससी से क्यों नहीं सीखते?

    क्या कोई है जो बिहार के छपरा के जयप्रकाश नारायण यूनिवर्सिटी में फंसे हज़ारों छात्रों को बाहर निकाल सकता है. ये छात्र वैसे ही फंसे हैं जैसे पिछले साल मुंबई के कमला मिल्स में लगी आग में लोग फंस गए थे और एक सुदर्शन शिंदे नाम के जांबाज़ सिपाही ने 8 लोगों को अपने कंधे पर लादकर बाहर निकाला था. छपरा की जेपी यूनिवर्सिटी के छात्रों को सिपाही सुदर्शन शिंदे की ज़रूरत है जो वहां कई साल से फंसे छात्रों को बाहर निकाल सके. ये छात्र कई साल से वहां बीए में एडमिशन लेकर फंसे हैं. नौकरी पर चल रही सीरीज़ का आज छठा एपिसोड है. हमने यूनिवर्सिटी पर 27 दिनों तक लगातार एपिसोड किया था, किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा. तब छात्रों को भी फर्क नहीं पड़ा. अब बेरोज़गारी का सवाल उठा रहा हूं तो छात्रों को यूनिवर्सिटी की हालत याद आ रही है.

  • राज्य चयन आयोगों का नौजवानों से खिलवाड़ क्यों?

    राज्य चयन आयोगों का नौजवानों से खिलवाड़ क्यों?

    भारत के बेरोज़गारों के लिए एक अलग से न्यूज़ चैनल होना चाहिए. उनकी समस्याएं बहुत हैं और जटिल भी हैं. कोई ठोस संख्या तो नहीं है मगर कोई बहाली निकलती है तो दस से बीस लाख छात्र फार्म भरने लगते हैं. इस अंदाज़ से आप देखेंगे तो पाएंगे कि देश भर में करोड़ों की संख्या में छात्र भांति भांति की सरकारी नौकरियों की तैयारी में पसीना बहा रहे हैं. फिर भी इनकी सुनवाई क्यों नहीं है.

  • सरकारी नौकरियां कहां गईं : पार्ट-3

    सरकारी नौकरियां कहां गईं : पार्ट-3

    राज्यों के चयन आयोगों पर बात करना अर्जेंट हो गया है. नौजवान फार्म भर कर परीक्षा का इंतज़ार कर रहे हैं और जो परीक्षा दे चुके हैं वो रिज़ल्ट का इंतज़ार कर रहे हैं और जिनका रिज़ल्ट आ चुका है वो ज्वाइनिंग लेटर का इंतज़ार कर रहे हैं.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : चयन के बावजूद नौकरी का लंबा इंतज़ार क्यों?

    प्राइम टाइम इंट्रो : चयन के बावजूद नौकरी का लंबा इंतज़ार क्यों?

    हर राज्य में कर्मचारियों और अधिकारियों की भर्ती के लिए चयन आयोग है जिनका काम है भर्ती निकालना, परीक्षा का आयोजन करना और फिर रिज़ल्ट प्रकाशित करना. क्या आप जानते हैं कि ये चयन आयोग किस तरह काम करते हैं, इनकी काम करने की क्षमता और कुशलता कैसी है.

  • बिहार लोक सेवा आयोग ने निकाली बंपर भर्तियां, जल्द करें आवेदन

    बिहार लोक सेवा आयोग ने निकाली बंपर भर्तियां, जल्द करें आवेदन

    सभी पदों के लिए आवेदन ऑफलाइन के माध्यम से करना होगा. आवेदन की आखिरी तरीख छह दिसंबर है. हर तरह के आरक्षण का लाभ केवल बिहार के मूल निवासियों को ही मिलेगा.

  • बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन में Lecturer के पद पर नौकरी का मौका, वेतन 34800 रुपये

    बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन में Lecturer के पद पर नौकरी का मौका, वेतन 34800 रुपये

    बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (BPSC) ने विभिन्न विषयों में Lecturer के पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. इच्छुक उम्मीदवार इस पद के लिए योग्यतानुसार आवेदन कर सकते हैं.

  • बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन ने निकाली लेक्चरर की वेकेन्सी, 24 अक्टूबर तक करें आवेदन

    बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन ने निकाली लेक्चरर की वेकेन्सी, 24 अक्टूबर तक करें आवेदन

    बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (BPSC) ने अलग-अलग विषयों में  लेक्चरर के पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है. इन पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार 24 अक्टूबर तक अपना आवेदन जमा करवा सकते हैं. आवेदन करने से पहले बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर जारी नोटिफिकेशन को अच्छी तरह से पढ़ लें. जिससे आपको हर छोटी से छोटी जानकारी प्राप्त हो जाएगी.

  • बिहार लोक सेवा आयोग में इन पदों पर निकली वैकेंसी, ऑनलाइन करें आवेदन

    बिहार लोक सेवा आयोग में इन पदों पर निकली वैकेंसी, ऑनलाइन करें आवेदन

    बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर प्रारंभिक प्रतियोगी परीक्षा के लिए आवेदन आमंत्रित किया है.