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Civil servants


'Civil servants' - 5 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • Book Review: एक आईएएस अधिकारी के 38 साल के अनुभवों का दस्तावेज है अनिल स्वरूप की 'नॉट जस्ट ए सिविल सर्वेंट'

    Book Review: एक आईएएस अधिकारी के 38 साल के अनुभवों का दस्तावेज है अनिल स्वरूप की 'नॉट जस्ट ए सिविल सर्वेंट'

    पूर्व आईएएस अनिल स्वरूप (Anil Swarup) ने अपनी किताब  'नॉट जस्ट ए सिविल सर्वेंट' (Not Just A Civil Servant Book) में 38 साल लंबी प्रशासनिक सेवा के दौरान हुए अनुभवों को व्यक्त किया है. सत्ता और तंत्र को बेहद करीब से देखने वाले अनिल स्वरूप ने इस किताब में अपने अनुभव को शेयर करने के साथ ही कई खुलासे भी किए हैं. इस किताब के तीसरे अध्याय में उन्होंने लिखा है- ''वह अयोध्या में मंदिर चाहते थे और शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण आम सहमति की दिशा में काम कर रहे थे. वह पूरी तरह से आक्रामक तेवर के खिलाफ थे जो धार्मिक संगठनों की पहचान थी. उस समय भारत में मोबाइल फोन नहीं हुआ करते थे. दूरदर्शन के अलावा कोई दूसरा न्यूज चैनल नहीं था. टेलीप्रिंटर और लैंडलाइन फोन ही कम्युनिकेशन का साधन थे. लाइव टेलीकास्ट का साधन होने के कारण जमीनी हकीकत का अंदाजा लगाना मुश्किल था. कल्याण सिंह को अयोध्या से रुक-रुक कर जानकारियां मिल रही थी.

  • पीएम मोदी ने नौकरशाहों से कहा, तकनीक का सर्वश्रेष्ठ उपयोग करें

    पीएम मोदी ने नौकरशाहों से कहा, तकनीक का सर्वश्रेष्ठ उपयोग करें

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लोकसेवकों से कहा कि वे सरकारी नीतियों के क्रियान्वयन में नवोन्मेष और तकनीक का सर्वश्रेष्ठ उपयोग करें. उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्र के विकास के लिये जनभागीदारी वाला लोकत्रंत अनिवार्य है.

  • छत्तीसगढ़ में दो ‘अनुपयोगी’ आईपीएस अधिकारी बर्खास्त किए गए

    छत्तीसगढ़ में दो ‘अनुपयोगी’ आईपीएस अधिकारी बर्खास्त किए गए

    केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि भारतीय पुलिस सेवा के 2000 बैच के अधिकारी ए एम जूरी और 2002 के अधिकारी केसी अग्रवाल को छत्तीसगढ़ सरकार की अनुशंसा के बाद सेवा से बर्खास्त किया गया क्योंकि इन दोनों को ‘अनुपयोगी’ पाया गया.

  • नौकरशाही के नए अवतार का इंतजार

    नौकरशाही के नए अवतार का इंतजार

    योगी अदित्यनाथ ने अपने अभी तक के बढ़ाए गए कदमों से यह तो सिद्ध करने में सफलता हासिल कर ली है कि 'मेरा अपना कोई स्वार्थ नहीं है'. यह जनविश्वास के लिए बहुत जरूरी था. उन्होंने नौकरशाहों को यह संदेश स्पष्ट रूप से दे दिया है कि काम किए बिना गुजारा नहीं है, और सही तरीके से काम करना पड़ेगा. इसी के साथ जुड़ी हुई बात है- टारगेट फिक्स करना. यानी कि अब 'देखा जाएगा और देखते हैं' के स्थान पर 'होगा' की कार्यसंस्कृति को अपनाने के बहुत स्पष्ट निर्देश दे दिए गए हैं.

  • भ्रष्टाचार रोधक कानून में में होगा संशोधन, अधिकारियों को फैसले लेने में मिलेगी मदद : अरुण जेटली

    भ्रष्टाचार रोधक कानून में में होगा संशोधन, अधिकारियों को फैसले लेने में मिलेगी मदद : अरुण जेटली

    भ्रष्टाचार रोधक कानून में संशोधन की वकालत करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को कहा कि भ्रष्ट फैसलों तथा गलती के बीच भेद करने के लिए कानून में यह बदलाव जरूरी है. इससे उन अधिकारियों को मदद मिलेगी जो व्यावसायिक फैसले लेते हैं.