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Cji dipak misra


'Cji dipak misra' - 53 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • NDTV से बोले जस्टिस कुरियन, 'स्‍वतंत्र रूप से फैसले नहीं ले रहे थे पूर्व चीफ जस्टिस'

    NDTV से बोले जस्टिस कुरियन, 'स्‍वतंत्र रूप से फैसले नहीं ले रहे थे पूर्व चीफ जस्टिस'

    हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए और जनवरी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले 4 जजों में शामिल जस्टिस कुरियन जोसेफ़ ने NDTV से कहा कि पूर्व चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा स्वतंत्र तौर पर फ़ैसले नहीं ले रहे थे बल्कि वो किसी बाहरी प्रभाव में फ़ैसले ले रहे थे.

  • जब CJI रंजन गोगोई ने कहा- पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा क्रिकेट बॉल से टेनिस खेलते हैं, जानें पूरा मामला

    जब CJI रंजन गोगोई ने कहा- पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा क्रिकेट बॉल से टेनिस खेलते हैं, जानें पूरा मामला

    मौजूदा चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया रंजन गोगोई ने कहा कि पिछले 6 साल में जस्टिस मिश्रा के साथ उनकी दोस्ती रही और कुछ मामलों में मतभेद भी रहे. तो वहीं जस्टिस मिश्रा ने कहा कि मतभेद तब मनभेद में बदलते हैं जब झगड़ा शोहरत का हो.

  • जस्टिस गोगोई ने की CJI दीपक मिश्रा की तारीफ, बोले - नागरिक स्वतंत्रता के मामले में उनका बहुत अधिक योगदान है

    जस्टिस गोगोई ने की CJI दीपक मिश्रा की तारीफ, बोले - नागरिक स्वतंत्रता के मामले में उनका बहुत अधिक योगदान है

    उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम अपने सांविधानिक आदर्शो पर सही मायने में कायम करने में विफल रहे, तो हम एक दूसरे को मारते रहेंगे और नफरत करते रहेंगे.’’

  • फेयरवेल भाषण में बोले CJI दीपक मिश्रा, 'जस्टिस विद इक्विटी' तभी सार्थक होगा जब हर व्यक्ति को न्याय मिलेगा

    फेयरवेल भाषण में बोले CJI दीपक मिश्रा, 'जस्टिस विद इक्विटी' तभी सार्थक होगा जब हर व्यक्ति को न्याय मिलेगा

    चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा (Justice Dipak Misra) मंगलवार को रिटायर हो रहे हैं. अपने फेयरवेल पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि मैं लोगों को इतिहास के तौर पर जज नहीं करता. उन्होंने कहा कि मैं यह भी नहीं कह सकता कि अपनी जुबान रोको, ताकि मैं बोल सकूं. मैं आपकी बात सुनूंगा और अपने तरीके से अपनी बात रखूंगा. मैं लोगों को इतिहास से नहीं उनकी गतिविधियों और सोच से जज करता हूं. उन्होंने कहा कि समता के साथ न्याय यानी 'जस्टिस विद इक्विटी' तब सार्थक होगा जब देश के सुदूर इलाके के हर व्यक्ति को न्याय मिलेगा.

  • क्या सबरीमाला मंदिर में सभी महिलाओं को मिलेगी एंट्री? सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ का फैसला आज, 10 बातें

    क्या सबरीमाला मंदिर में सभी महिलाओं को मिलेगी एंट्री? सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ का फैसला आज, 10 बातें

    केरल के सबरीमला मंदिर (Sabarimala Temple Case) में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश के मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ आज यानी शुक्रवार को फैसला सुनाएगी. फिलहाल 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट को केरल के सबरीमाला मंदिर में 10-50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर रोक को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाना है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने आठ दिनों तक सुनवाई करने के उपरांत 1 अगस्त को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

  • जब सुप्रीम कोर्ट में परंपराओं को दरकिनार कर हुई चीफ जस्टिस की नियुक्ति, ये हैं 2 मामले

    जब सुप्रीम कोर्ट में परंपराओं को दरकिनार कर हुई चीफ जस्टिस की नियुक्ति, ये हैं 2 मामले

    CJI पर राष्ट्रपति ही अंतिम निर्णय लेते हैं. वर्ष 1950 में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना के बाद से अब तक देश में इसी प्रक्रिया के तहत CJI की नियुक्ति होती रही है, लेकिन दो बार ऐसे मौके भी आए जब वरिष्ठता क्रम और परंपराओं को दरकिनार कर CJI की नियुक्ति की गई. दोनों ही बार इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं. 

  • जब जस्टिस दीपक मिश्रा ने की आधी रात को सुनवाई, ये हैं उनके 5 ऐतिहासिक फैसले

    जब जस्टिस दीपक मिश्रा ने की आधी रात को सुनवाई, ये हैं उनके 5 ऐतिहासिक फैसले

    चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा दो अक्टूबर को रिटायर होने जा रहे हैं. उन्होंने जस्टिस रंजन गोगोई का नाम अगले CJI के लिए केंद्र सरकार को भेजा है. जस्टिस दीपक मिश्रा ने 14 फरवरी 1977 को उड़ीसा हाई कोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस शुरू की थी. इसके बाद 1996 में उन्हें उड़ीसा हाई कोर्ट का एडिशनल जज बनाया गया और बाद में उनका ट्रांसफर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट  कर दिया गया. इसके बाद वे दिसंबर 2009 में पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने. 24 मई 2010 में दिल्ली हाई कोर्ट में बतौर चीफ जस्टिस उनका ट्रांसफर हुआ और 10 अक्टूबर 2011 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया. पिछले साल 28 अगस्त को उन्होंने बतौर चीफ जस्टिस कार्यभार ग्रहण किया. सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस दीपक मिश्रा ने कई ऐतिहासिक फैसले सुनाये. बहुचर्चित निर्भया कांड में दोषियों की सजा को बरकरार रखने का उनका फैसला लैंडमार्क माना गया. तो वहीं आतंकी याकूब मेमन की फांसी से ऐन पहले आधी रात को सुनवाई की और सजा बरकरार रखी. आइये आपको चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के ऐसे ही पांच ऐतिहासिक फैसलों के बारे में बताते हैं. 

  • CJI दीपक मिश्रा 2 अक्टूबर को होंगे रिटायर, सुप्रीम कोर्ट से इस महीने आ सकते हैं कई ऐतिहासिक फैसले

    CJI दीपक मिश्रा 2 अक्टूबर को होंगे रिटायर, सुप्रीम कोर्ट से इस महीने आ सकते हैं कई ऐतिहासिक फैसले

    इस महीने सुप्रीम कोर्ट से कई बड़े और ऐतिहासिक फैसले आएंगे. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा 2 अक्टूबर को रिटायर हो जाएंगे, लेकिन इससे पहले वह कई चर्चित मामलों की सुनवाई करेंगे. ऐसे में उनकी अगुवाई में बेंच ने कई अहम मुद्दों की सुनवाई की जिन पर फैसला सुरक्षित रखा गया. अब ये बड़े फैसले कभी भी एक के बाद एक आ सकते हैं. जिन चर्चित मामलों में सीजेआई दीपक मिश्रा फैसला सुना सकते हैं उनमें आधार, अयोध्या मामला, समलैंगिकता, सबरीमाला मंदिर मामला और नौकरी में आरक्षण सहित कई अहम मामले शामिल हैं. 

  • रंजन गोगोई होंगे भारत के अगले मुख्‍य न्‍यायाधीश, 3 अक्‍टूबर को संभालेंगे कार्यभार : सूत्र

    रंजन गोगोई होंगे भारत के अगले मुख्‍य न्‍यायाधीश, 3 अक्‍टूबर को संभालेंगे कार्यभार : सूत्र

    सुप्रीम कोर्ट में दूसरे सबसे वरिष्‍ठ जज जस्टिस रंजन गोगोई, 3 अक्‍टूबर को भारत के अगले मुख्‍य न्‍यायाधीश का पदभार ग्रहण करेंगे, सूत्रों ने NDTV को यह जानकारी दी है. सूत्रों ने बताया कि जजों की वरिष्‍ठता की परंपरा को कायम रखते हुए मुख्‍य न्‍यायाधीश दीपक मिश्रा जल्‍द ही अपने उत्तराधिकारी के रूप में जस्टिस गोगोई के नाम का प्रस्‍ताव करेंगे.

  • स्‍वतंत्रता दिवस समारोह पर CJI दीपक मिश्रा ने कहा, संस्‍थान की अालोचना करना और नष्‍ट करना आसान

    स्‍वतंत्रता दिवस समारोह पर CJI दीपक मिश्रा ने कहा,  संस्‍थान की अालोचना करना और नष्‍ट करना आसान

    सुप्रीम कोर्ट में स्वतंत्रता दिवस समारोह CJI दीपक मिश्रा ने कहा कि किसी भी संस्थान की आलोचना करना या नष्ट करने की कोशिश करना आसान है.

  • सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस के एम जोसेफ समेत तीन जज ने ली शपथ, अब हुए कुल 25 जज

    सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस के एम जोसेफ समेत तीन जज ने ली शपथ, अब हुए कुल 25 जज

    सुप्रीम कोर्ट में तीन जज जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस विनीत सरन और जस्टिस के एम जोसेफ ने शपथ ली. CJI दीपक मिश्रा ने तीनों जजों को शपथ दिलाई. इन तीन नियुक्तियों के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 25 हो गई है जबकि कोर्ट में 31 जजों के पद हैं.

  • मेरा समय, मेरी जिंदगी और मेरी निजता मेरे लिए सर्वोपरि है: CJI दीपक मिश्रा

    मेरा समय, मेरी जिंदगी और मेरी निजता मेरे लिए सर्वोपरि है: CJI दीपक मिश्रा

    न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि उनका हमेशा से मानना रहा है कि निजता एक संवैधानिक अवधारणा है. उन्होंने यहां एम सी सेतलवाड़ स्मृति व्याख्यान देते हुए कहा, ‘मेरा घर मेरे किले जैसा है , आप वहां मुझे कैसे परेशान कर सकते हैं ?

  • समलैंगिकता अपराध है या नहीं? केंद्र ने कहा- धारा 377 का मसला हम सुप्रीम कोर्ट के विवेक पर छोड़ते हैं

    समलैंगिकता अपराध है या नहीं? केंद्र ने कहा- धारा 377 का मसला हम सुप्रीम कोर्ट के विवेक पर छोड़ते हैं

    समलैंगिकता अपराध है या नहीं, इसे तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. मंगलवार से जारी सुनवाई में कई तरह की बातें आने के बाद बुधवा को केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ से कहा कि समलैंगिकता संबंधी धारा 377 की संवैधानिकता के मसले को हम कोर्ट के विवेक पर छोड़ते हैं. 

  • समलैंगिकता अपराध है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट में धारा 377 पर आज से सुनवाई, 10 बड़ी बातें

    समलैंगिकता अपराध है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट में धारा 377 पर आज से सुनवाई, 10 बड़ी बातें

    समलैंगिगता को अपराध मानने वाली IPC धारा 377 को अंसवैधानिक करार देने की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ आज मंगलवार यानी 10 जुलाई मंगलवार से सुनवाई शुरू करेगी. इससे पहले सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की चार हफ्ते के लिए सुनवाई टालने के आग्रह को ठुकरा दिया. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि सुनवाई टाली नहीं जाएगी. बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने 2009 में अपने एक फैसले में कहा था कि आपसी सहमति से समलैंगिकों के बीच बने यौन संबंध अपराध की श्रेणी में नहीं होंगे. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को दरकिनार करते हुए समलैंगिक यौन संबंधों को आईपीसी की धारा 377 के तहत ‘अवैध’ घोषित कर दिया था.

  • समलैंगिकता अपराध है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को करेगा सुनवाई, केंद्र की सुनवाई टालने संबंधी याचिका ठुकराई

    समलैंगिकता अपराध है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को करेगा सुनवाई, केंद्र की सुनवाई टालने संबंधी याचिका ठुकराई

    समलैंगिगता को अपराध मानने वाली IPC धारा 377 को अंसवैधानिक करार देने की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ 10 जुलाई यानी मंगलवार से सुनवाई शुरू करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की चार हफ्ते के लिए सुनवाई टालने के आग्रह को ठुकरा दिया.  चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि सुनवाई टाली नहीं जाएगी. बता दें कि केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि इस मामले में सरकार को हलफनामा दाखिल करना है जो इस केस में महत्वपूर्ण हो सकता है. इसलिए केस को चार हफ्ते के लिए टाला जाए. CJI ने केंद्र से कहा कि मंगलवार को कल याचिकाकर्ता बहस करेंगे. केंद्र उसके बाद कर सकता है.  

  • समलैंगिकता अपराध है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ 10 जुलाई से करेगी सुनवाई

    समलैंगिकता अपराध है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ 10 जुलाई से करेगी सुनवाई

    समलैंगिगता को अपराध मानने वाली आईपीसी की धारा 377 को अंसवैधानिक करार देने की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ 10 जुलाई से सुनवाई शुरू करेगी. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंग्टन आर नरीमन, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस इंदू मल्होत्रा की संविधान पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी. बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांग चुका है. 

  • सुप्रीम कोर्ट में मास्टर ऑफ रोस्टर के तहत केसों के आवंटन पर सवाल उठाने वाली याचिका पर फैसला आज

    सुप्रीम कोर्ट में मास्टर ऑफ रोस्टर के तहत केसों के आवंटन पर सवाल उठाने वाली याचिका पर फैसला आज

    चीफ जस्टिस के मास्टर ऑफ रोस्टर के तहत केसों के आवंटन पर सवाल उठाने वाली पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस ए के सीकरी और अशोक भूषण की बेंच शुक्रवार को फैसला सुनाएगी.

  • CJI दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका कांग्रेस ने वापस ली

    CJI दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका कांग्रेस ने वापस ली

    देश के प्रधान न्यायाधीश (CJI) दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज किए जाने के उपराष्ट्रपति के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका कांग्रेस ने मंगलवार को वापस ले ली. कांग्रेस के याचिकाकर्ता सांसदों ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट की पांच-सदस्यीय संविधान पीठ को सौंपे जाने पर सवाल उठाए.