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Dipak misra


'Dipak misra' - 84 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • अलका लांबा का अरविंद केजरीवाल पर निशाना: ACB मिलने पर शीला दीक्षित पर कार्रवाई करते या गठबंधन बचाते?

    अलका लांबा का अरविंद केजरीवाल पर निशाना: ACB मिलने पर शीला दीक्षित पर कार्रवाई करते या गठबंधन बचाते?

    आम आदमी पार्टी से विधायक अलका लांबा ने एक बार फिर से पार्टी लाइन से हटकर बातें की हैं. दिल्ली सरकार बनाम एलजी मामले में में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अलका लांबा ने ट्वीट के जरिए एक बार फिर से अपनी ही पार्टी पर सवाल उठाए हैं.

  • Delhi Govt vs LG: SC के फैसले पर बोले CM केजरीवाल- जो सरकार अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग नहीं कर सकती वो चलेगी कैसे

    Delhi Govt vs LG: SC के फैसले पर बोले CM केजरीवाल- जो सरकार अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग नहीं कर सकती वो चलेगी कैसे

    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है. यह दिल्ली के लोगों के साथ अन्याय है. कोर्ट का सम्मान करते हैं, लेकिन फैसला अन्यायपूर्ण है.

  • NDTV से बोले जस्टिस कुरियन, 'स्‍वतंत्र रूप से फैसले नहीं ले रहे थे पूर्व चीफ जस्टिस'

    NDTV से बोले जस्टिस कुरियन, 'स्‍वतंत्र रूप से फैसले नहीं ले रहे थे पूर्व चीफ जस्टिस'

    हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए और जनवरी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले 4 जजों में शामिल जस्टिस कुरियन जोसेफ़ ने NDTV से कहा कि पूर्व चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा स्वतंत्र तौर पर फ़ैसले नहीं ले रहे थे बल्कि वो किसी बाहरी प्रभाव में फ़ैसले ले रहे थे.

  • जब CJI रंजन गोगोई ने कहा- पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा क्रिकेट बॉल से टेनिस खेलते हैं, जानें पूरा मामला

    जब CJI रंजन गोगोई ने कहा- पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा क्रिकेट बॉल से टेनिस खेलते हैं, जानें पूरा मामला

    मौजूदा चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया रंजन गोगोई ने कहा कि पिछले 6 साल में जस्टिस मिश्रा के साथ उनकी दोस्ती रही और कुछ मामलों में मतभेद भी रहे. तो वहीं जस्टिस मिश्रा ने कहा कि मतभेद तब मनभेद में बदलते हैं जब झगड़ा शोहरत का हो.

  • जस्टिस गोगोई ने की CJI दीपक मिश्रा की तारीफ, बोले - नागरिक स्वतंत्रता के मामले में उनका बहुत अधिक योगदान है

    जस्टिस गोगोई ने की CJI दीपक मिश्रा की तारीफ, बोले - नागरिक स्वतंत्रता के मामले में उनका बहुत अधिक योगदान है

    उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम अपने सांविधानिक आदर्शो पर सही मायने में कायम करने में विफल रहे, तो हम एक दूसरे को मारते रहेंगे और नफरत करते रहेंगे.’’

  • फेयरवेल भाषण में बोले CJI दीपक मिश्रा, 'जस्टिस विद इक्विटी' तभी सार्थक होगा जब हर व्यक्ति को न्याय मिलेगा

    फेयरवेल भाषण में बोले CJI दीपक मिश्रा, 'जस्टिस विद इक्विटी' तभी सार्थक होगा जब हर व्यक्ति को न्याय मिलेगा

    चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा (Justice Dipak Misra) मंगलवार को रिटायर हो रहे हैं. अपने फेयरवेल पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि मैं लोगों को इतिहास के तौर पर जज नहीं करता. उन्होंने कहा कि मैं यह भी नहीं कह सकता कि अपनी जुबान रोको, ताकि मैं बोल सकूं. मैं आपकी बात सुनूंगा और अपने तरीके से अपनी बात रखूंगा. मैं लोगों को इतिहास से नहीं उनकी गतिविधियों और सोच से जज करता हूं. उन्होंने कहा कि समता के साथ न्याय यानी 'जस्टिस विद इक्विटी' तब सार्थक होगा जब देश के सुदूर इलाके के हर व्यक्ति को न्याय मिलेगा.

  • क्या सबरीमाला मंदिर में सभी महिलाओं को मिलेगी एंट्री? सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ का फैसला आज, 10 बातें

    क्या सबरीमाला मंदिर में सभी महिलाओं को मिलेगी एंट्री? सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ का फैसला आज, 10 बातें

    केरल के सबरीमला मंदिर (Sabarimala Temple Case) में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश के मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ आज यानी शुक्रवार को फैसला सुनाएगी. फिलहाल 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट को केरल के सबरीमाला मंदिर में 10-50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर रोक को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाना है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने आठ दिनों तक सुनवाई करने के उपरांत 1 अगस्त को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

  • सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला- मस्जिद में नमाज का मामला बड़ी बेंच को नहीं, अयोध्या जमीन विवाद से अलग है यह मामला

    सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला- मस्जिद में नमाज का मामला बड़ी बेंच को नहीं, अयोध्या जमीन विवाद से अलग है यह मामला

    राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद विवाद से जुड़े एक अहम मामले मस्जिद में नमाज इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है, पर सुप्रीम कोर्ट का आज अहम फैसला आ गया. आज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 1994 के संविघान पीठ के फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत नहीं है और यह मामला अब बडी़ बेंच में नहीं भेजा जाएगा. बता दें कि पिछले फैसले में कहा गया था कि मस्जिद में नमाज इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि मस्जिद में नमाज का मामला अयोध्या जमीन विवाद मामले से पूरी तरह अलग है.  दरअसल, 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने इस पर फैसला सुरक्षित रखा कि संविधान पीठ के 1994 के फैसले पर फिर विचार करने की जरूरत है या नहीं. सुप्रीम कोर्ट टाइटल सूट से पहले अब वो इस पहलू पर सुनवाई कर रहा था कि मस्जिद में नमाज पढना इस्लाम का अभिन्न हिस्सा है या नहीं. कोर्ट ने ये कहा था पहले ये तय होगा कि संविधान पीठ के 1994 के उस फैसले पर फिर से विचार करने की जरूरत है या नहीं कि मस्जिद में नमाज पढना इस्लाम का इंट्रीगल पार्ट नहीं है. इसके बाद ही टाइटल सूट पर विचार होगा.

  • आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अगर अब भी हैं कन्फ्यूज, तो यहां जानें अपने सवालों के जवाब

    आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अगर अब भी हैं कन्फ्यूज, तो यहां जानें अपने सवालों के जवाब

    आधार की संवैधानिकता पर काफी समय से चल रही बहस पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने विराम लगा दिया और कुछ बदलावों के साथ कोर्ट ने आधार की संवैधानिकता को वैध ठहराया. आधार मामले पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों संविधान पीठ ने केन्द्र की महत्वाकांक्षी योजना आधार को संवैधानिक रूप से वैध करार दिया लेकिन उसने बैंक खाते, मोबाइल फोन और स्कूल दाखिले में आधार अनिवार्य करने सहित कुछ प्रावधानों को रद्द कर दिया. चीफ दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में आधार को आयकर रिटर्न भरने और पैन कार्ड बनाने के लिए अनिवार्य बताया. हालांकि अब आधार कार्ड को बैंक खाते से लिंक करना जरूरी नहीं है और मोबाइल फोन का कनेक्शन देने के लिए टेलीकॉम कंपनियां आपसे आधार नहीं मांग सकती हैं. सुप्रीम कोर्ट का फैसला तो आ गया, मगर अब भी आम लोग इस कनफ्यूजन में है कि कहां पर आधार देना होगा और कहां पर नहीं. अगर आप भी इसी उहापोह में है या आपके मन में आधार के इस्तेमाल को लेकर कई तरह के सवाल आ रहे हैं, तो आपके हर सवाल का जवबा इसी स्टोरी में हैं...

  • सुप्रीम कोर्ट ने आधार को संवैधानिक रूप से वैध बताया, मगर कुछ प्रावधानों को किया रद्द, जानें फैसले की अहम बातें

    सुप्रीम कोर्ट ने आधार को संवैधानिक रूप से वैध बताया, मगर कुछ प्रावधानों को किया रद्द, जानें फैसले की अहम बातें

    सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपने फैसले में केन्द्र की महत्वाकांक्षी योजना आधार को संवैधानिक रूप से वैध करार दिया लेकिन उसने बैंक खाते, मोबाइल फोन और स्कूल दाखिले में आधार अनिवार्य करने सहित कुछ प्रावधानों को रद्द कर दिया. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में आधार को आयकर रिटर्न भरने और पैन कार्ड बनाने के लिए अनिवार्य बताया. हालांकि अब आधार कार्ड को बैंक खाते से लिंक करना जरूरी नहीं है और मोबाइल फोन का कनेक्शन देने के लिए टेलीकॉम कंपनियां आपसे आधार नहीं मांग सकती हैं.

  • जानें कौन हैं सुप्रीम कोर्ट के वे 5 जज, जिन्होंने आधार की संवैधानिकता पर दिया बड़ा फैसला

    जानें कौन हैं सुप्रीम कोर्ट के वे 5 जज, जिन्होंने आधार की संवैधानिकता पर दिया बड़ा फैसला

    आधार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपने फैसले में केन्द्र की महत्वाकांक्षी योजना आधार को संवैधानिक रूप से वैध करार दिया. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा कि आधार का लक्ष्य कल्याणकारी योजनाओं को समाज के वंचित तबके तक पहुंचाना है और वह ना सिर्फ व्यक्तिगत बल्कि समुदाय के दृष्टिकोण से भी लोगों के सम्मान का ख्याल रखती है. शीर्ष अदालत ने कहा कि आधार जनहित में बड़ा काम कर रहा है और आधार का मतलब है अनोखा और सर्वश्रेष्ठ होने के मुकाबले अनोखा होना बेहतर है. संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा कि आधार को अब बैंक खाते से लिंक करने की जरूरत नहीं होगा. साथ ही कोर्ट ने कहा कि स्कूलों में भी अब आधार की अनिवार्यता नहीं होगी. 

  • आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अब स्कूल-सिम और बैंक के लिए आधार जरूरी नहीं, जानें कहां जरूरी और कहां गैर जरूरी होगा आधार

    आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अब स्कूल-सिम और बैंक के लिए आधार जरूरी नहीं, जानें कहां जरूरी और कहां गैर जरूरी होगा आधार

    आधार की अनिवार्यता (Aadhaar verdict) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने (Supreme Court) अहम फैसला सुना दिया. सुप्रीम कोर्ट ने आधार की संवैधानिक वैधता को कुछ बदलावों के साथ बरकरार रखा. आधार की संवैधानिकता (Aadhaar constitutional validity) को चुनौती देने वाली कुछ याचिकाओं पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया और कहा कि आधार को अब से बैंक खातों से लिंक करना अनिवार्य नहीं होगा. साथ ही कोर्ट ने कहा मोबाइल कंपनियां भी अब आधार नहीं मांग सकती हैं. सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत का फैसला पढ़ते हुए यह माना कि आधार आम आदमी की पहचान है.  प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 38 दिनों तक चली लंबी सुनवाई के बाद 10 मई को मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. मामले में उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के एस पुत्तास्वामी की याचिका सहित कुल 31 याचिकाएं दायर की गयी थीं.

  • Aadhaar Case: आधार की संवैधानिकता बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- बैंक खाते से आधार को लिंक करने का फैसला रद्द

    Aadhaar Case: आधार की संवैधानिकता बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- बैंक खाते से आधार को लिंक करने का फैसला रद्द

    आधार की अनिवार्यता (Aadhaar verdict) को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  ने अपना अहम फैसला सुनाया.  केंद्र के महत्वपूर्ण आधार कार्यक्रम और इससे जुड़े 2016 के कानून की संवैधानिक वैधता (Aadhaar constitutional validity) को चुनौती देने वाली कुछ याचिकाओं पर आज यानी बुधवार को सुप्रीम कोर्ट अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाने से पहले बहुमत का फैसला पढ़ते हुए यह माना कि आधार आम आदमी की पहचान है. सुप्रीम कोर्ट ने कुछ बदलावों के साथ आधार की संवैधानिकता को बरकरार रखा है.

  • राजनीति का अपराधीकरण पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- संसद को इस कैंसर का उपचार करना चाहिए

    राजनीति का अपराधीकरण पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- संसद को इस कैंसर का उपचार करना चाहिए

    राजनीति में अपराधीकरण को लेकर को लेकर पांच जजों का संविधान पीठ ने कहा कि करप्शन एक नाउन है. चीफ जस्टिस ने कहा कि करप्शन राष्ट्रीय आर्थिक आतंक बन गया है.

  • जब सुप्रीम कोर्ट में परंपराओं को दरकिनार कर हुई चीफ जस्टिस की नियुक्ति, ये हैं 2 मामले

    जब सुप्रीम कोर्ट में परंपराओं को दरकिनार कर हुई चीफ जस्टिस की नियुक्ति, ये हैं 2 मामले

    CJI पर राष्ट्रपति ही अंतिम निर्णय लेते हैं. वर्ष 1950 में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना के बाद से अब तक देश में इसी प्रक्रिया के तहत CJI की नियुक्ति होती रही है, लेकिन दो बार ऐसे मौके भी आए जब वरिष्ठता क्रम और परंपराओं को दरकिनार कर CJI की नियुक्ति की गई. दोनों ही बार इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं. 

  • जब जस्टिस दीपक मिश्रा ने की आधी रात को सुनवाई, ये हैं उनके 5 ऐतिहासिक फैसले

    जब जस्टिस दीपक मिश्रा ने की आधी रात को सुनवाई, ये हैं उनके 5 ऐतिहासिक फैसले

    चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा दो अक्टूबर को रिटायर होने जा रहे हैं. उन्होंने जस्टिस रंजन गोगोई का नाम अगले CJI के लिए केंद्र सरकार को भेजा है. जस्टिस दीपक मिश्रा ने 14 फरवरी 1977 को उड़ीसा हाई कोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस शुरू की थी. इसके बाद 1996 में उन्हें उड़ीसा हाई कोर्ट का एडिशनल जज बनाया गया और बाद में उनका ट्रांसफर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट  कर दिया गया. इसके बाद वे दिसंबर 2009 में पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने. 24 मई 2010 में दिल्ली हाई कोर्ट में बतौर चीफ जस्टिस उनका ट्रांसफर हुआ और 10 अक्टूबर 2011 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया. पिछले साल 28 अगस्त को उन्होंने बतौर चीफ जस्टिस कार्यभार ग्रहण किया. सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस दीपक मिश्रा ने कई ऐतिहासिक फैसले सुनाये. बहुचर्चित निर्भया कांड में दोषियों की सजा को बरकरार रखने का उनका फैसला लैंडमार्क माना गया. तो वहीं आतंकी याकूब मेमन की फांसी से ऐन पहले आधी रात को सुनवाई की और सजा बरकरार रखी. आइये आपको चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के ऐसे ही पांच ऐतिहासिक फैसलों के बारे में बताते हैं. 

  • CJI दीपक मिश्रा 2 अक्टूबर को होंगे रिटायर, सुप्रीम कोर्ट से इस महीने आ सकते हैं कई ऐतिहासिक फैसले

    CJI दीपक मिश्रा 2 अक्टूबर को होंगे रिटायर, सुप्रीम कोर्ट से इस महीने आ सकते हैं कई ऐतिहासिक फैसले

    इस महीने सुप्रीम कोर्ट से कई बड़े और ऐतिहासिक फैसले आएंगे. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा 2 अक्टूबर को रिटायर हो जाएंगे, लेकिन इससे पहले वह कई चर्चित मामलों की सुनवाई करेंगे. ऐसे में उनकी अगुवाई में बेंच ने कई अहम मुद्दों की सुनवाई की जिन पर फैसला सुरक्षित रखा गया. अब ये बड़े फैसले कभी भी एक के बाद एक आ सकते हैं. जिन चर्चित मामलों में सीजेआई दीपक मिश्रा फैसला सुना सकते हैं उनमें आधार, अयोध्या मामला, समलैंगिकता, सबरीमाला मंदिर मामला और नौकरी में आरक्षण सहित कई अहम मामले शामिल हैं. 

  • रंजन गोगोई होंगे भारत के अगले मुख्‍य न्‍यायाधीश, 3 अक्‍टूबर को संभालेंगे कार्यभार : सूत्र

    रंजन गोगोई होंगे भारत के अगले मुख्‍य न्‍यायाधीश, 3 अक्‍टूबर को संभालेंगे कार्यभार : सूत्र

    सुप्रीम कोर्ट में दूसरे सबसे वरिष्‍ठ जज जस्टिस रंजन गोगोई, 3 अक्‍टूबर को भारत के अगले मुख्‍य न्‍यायाधीश का पदभार ग्रहण करेंगे, सूत्रों ने NDTV को यह जानकारी दी है. सूत्रों ने बताया कि जजों की वरिष्‍ठता की परंपरा को कायम रखते हुए मुख्‍य न्‍यायाधीश दीपक मिश्रा जल्‍द ही अपने उत्तराधिकारी के रूप में जस्टिस गोगोई के नाम का प्रस्‍ताव करेंगे.