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Dr vijay agrawal


'Dr vijay agrawal' - 98 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • खुलनी ही चाहिए समाज की खिड़कियां...

    खुलनी ही चाहिए समाज की खिड़कियां...

    लोकसभा चुनाव से करीब 10 महीने पहले ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने यह धमाकेदार घोषणा कर देश की सियासत को गर्मा दिया है कि वह हर जिले में दारुल कजा (शरिया अदालत) खोलेगी.

  • आखिर दिल्ली सरकार की समस्या है क्या...?

    आखिर दिल्ली सरकार की समस्या है क्या...?

    दिल्ली सरकार के साथ पिछले दिनों जो कुछ हुआ, या इसे यूं भी कह लें कि उसने जो कुछ किया, उससे कई महत्वपूर्ण सवाल मन में उठते हैं. पहला सवाल तो यही कि देश की राजधानी की सरकार लगभग 10 दिन तक हड़ताल पर रही. सरकार के खिलाफ हड़तालों की बात तो आम थी, लेकिन यह एकदम से खास हो गई. और वह हड़ताल भी किसके विरूद्ध - अपने ही उपराज्यपाल के विरुद्ध, और वह भी उन्हीं के दफ्तर में घुसकर.

  • इतिहास को बनाते और बनते हुए देखने का सुख

    इतिहास को बनाते और बनते हुए देखने का सुख

    और इसी कारण 12 जून, 2018 का दिन दुनिया के इतिहास में तब तक के लिए दर्ज हो गया, जब तक दुनिया मौजूद रहेगी. इसी के साथ समय की पीठ पर इन दो नेताओं के नाम के अक्षर भी हमेशा-हमेशा के लिए अंकित हो गए.

  • ‘102 नॉट आउट’ : आनंदवाद से सुखवाद की ओर छलांग…

    ‘102 नॉट आउट’ : आनंदवाद से सुखवाद की ओर छलांग…

    अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर स्टारर फिल्म '102 नॉट आउट' का इतनी तेज़ी से हो रहा प्रभाव मार्क्सवादियों की कलाविषयक इस धारणा को बखूबी पुष्ट कर रहा है कि कलाएं समाज का आईना ही नहीं, समाज को बदलने और गढ़ने वाली छेनी-हथौड़ी भी होती हैं.

  • राजनीति की नई चिढ़ाती-बरगलाती भाषा...

    राजनीति की नई चिढ़ाती-बरगलाती भाषा...

    कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार के दौरान जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि चुनाव बाद कांग्रेस PPP पार्टी बन जाएगी, तो मुझे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप की तर्ज पर लगा कि वह विपक्षियों के बीच गठबंधन की बात कर रहे हैं. लेकिन बाद में उन्होंने खुद इसका अर्थ बताया कि कांग्रेस 'पंजाब, पुदुच्चेरी और परिवार' की पार्टी रह जाएगी. दो दिन के बाद राहुल गांधी ने जेडीएस का नया अर्थ दिया - जनता दल संघ परिवार. निःसंदेह, जनता को इससे मजा आ रहा है.

  • वर्तमान समय की खौफनाक अनजानी गुलामी

    वर्तमान समय की खौफनाक अनजानी गुलामी

    तकनीकी अनुसंधानों के द्वारा आदमी पर नियंत्रण रखकर उसे इतना निरीह और गुलामों से भी बदतर गुलाम बना दिया जायेगा, इसकी शायद कल्पना भी नहीं की गई थी.

  • आंदोलनों का चिंतित करने वाला स्वरूप

    आंदोलनों का चिंतित करने वाला स्वरूप

    एक सभ्य समाज में संदिग्धता के लिए कोई जगह नहीं होती. फिर भी यदि कोई व्यक्ति विशेष संदिग्ध हो जाये, तो चलेगा. यदि कोई संस्था संदिग्ध हो जाये, तो एक बार वह भी ढक जायेगा. लेकिन यदि कोई जनान्दोलन, और वह भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में, संदिग्ध हो जाये, तो इसे चलाते रहना व्यवस्था के भविष्य के लिए बेहद खतरनाक हो जाता है.

  • ‘शीतयुद्ध‘ के नये संस्करण का आगाज

    ‘शीतयुद्ध‘ के नये संस्करण का आगाज

    अमेरिका ने सन् 2016 में 'अमेरीका फर्स्ट' का नारा देने वाले ट्रम्प को अपना राष्ट्रपति चुनकर दुनिया को साफ-साफ बता दिया था कि ''विश्व का नेतृत्व करने में अब उसकी कोई रुचि नहीं रह गई है.''

  • शिक्षा का डिमोनेटाइजेशन होगा यह

    शिक्षा का डिमोनेटाइजेशन होगा यह

    इसका एक प्रत्यक्ष प्रमाण उस समय मिला था, जब अजीत जोगी नवनिर्मित प्रदेश छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने थे. उन्होंने इंजीनियरिंग और मेडिकल में जाने के लिए प्रवेश परीक्षाओं की व्यवस्था को हटा दिया था. ऐसा करते ही करोड़ों कमाने वाले कोचिंग संस्थानों के हाथ के तोते उड़ गए थे.

  • भय की ठंड से कुड़कुडाती भाषा

    भय की ठंड से कुड़कुडाती भाषा

    मैं धर्मसंकट में हूं, जबर्दस्त धर्मसंकट में. मेरे शब्द मुझसे रुठ गए हैं. सदियों-सदियों से इनका प्रयोग कर-करके मेरे पूर्वजों ने इनके अर्थों में विस्तार किया है. उन्होंने इन्हें जीवन दिया है. मैं अब उनका हत्यारा बन रहा हूं.

  • खेलों के ज़रिये जुड़ते दो 'दुश्मन' देश

    खेलों के ज़रिये जुड़ते दो 'दुश्मन' देश

    इतिहास का एक गंभीर विद्यार्थी होने के नाते अब मेरा इस तथ्य पर पूरा यकीन हो गया है कि समय की गति का स्वरूप सचमुच वृत्ताकार होता है, भले ही उसकी रेखाएं कुछ-कुछ तिरछी क्यों न हों. इसे ही सामान्य भाषा में कहा जाता है कि 'इतिहास स्वयं को दोहराता है...' हम अधिक लंबे दौर में न जाकर इतिहास के इस विलक्षण स्वरूप को पिछले तीन दशकों में ही चिह्नित कर सकते हैं.

  • दरकती दुनिया को बचाने की कवायद

    दरकती दुनिया को बचाने की कवायद

    पिछले एक पखवाड़े के अंदर वर्तमान विश्व के स्वरूप को व्यक्त करने वाले इन तीन महत्वपूर्ण शब्दों पर गौर कीजिये. दिल्ली में आयोजित रायसीना संवाद में दुनियाभर के करीब 100 देशों से आये प्रतिनिधियों ने जिस मुख्य विषय पर परस्पर संवाद किया था, वह था ''विश्व में आ रहे 'विघटनकारी बदलावों' का प्रबंधन कैसे किया जाये.''

  • देश में दलित नेतृत्व की विडम्बना और दिशा

    देश में दलित नेतृत्व की विडम्बना और दिशा

    भूकम्प और ज्वालामुखियों ने कई सुन्दर और उपयोगी भू-आकृतियों को जन्म दिया है. लेकिन ऐसा होता बहुत कम है. देखा यह गया है कि आकृतियां बन तो जाती हैं, लेकिन बनी रह नहीं पातीं.

  • इतिहास के पंजों में फंसी कलाओं की गर्दन

    इतिहास के पंजों में फंसी कलाओं की गर्दन

    'पद्मावती' फिल्म के बारे में अब केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने एक नया फैसला लिया है. बोर्ड ने इतिहासकारों की एक छः सदस्यीय समिति गठित की है, जो इस फिल्म के ऐतिहासिक तथ्यों की सत्यता का परीक्षण करेगी. समिति का गठन इसलिए किया गया है, क्योंकि फिल्मकार ने इसमें अंशतः ऐतिहासिक तथ्यों के होने की बात कही है.

  • रूस की क्रांति : एक छोटी-सी ज़िन्दगी की लंबी कहानी

    रूस की क्रांति : एक छोटी-सी ज़िन्दगी की लंबी कहानी

    आजकल तो लोग ही आराम से 82-83 साल तक जी लेते हैं, सो, ऐसे में यदि किसी दर्शन से जन्मी राजनैतिक व्यवस्था की उम्र भी लगभग इतनी ही हो, तो अफसोस की बात तो है ही... और सोचने की बात भी... 100 साल पहले 7 नवंबर को लेनिन के नेतृत्व में जो ऐतिहासिक और चामत्कारिक घटना रूस में घटी, उसने पूरी दुनिया को जोश से भर दिया था.

  • पद्मावती विवाद : कल्पना के घोड़े पर सवार शख्स की उसी घोड़े के खिलाफ जंग

    पद्मावती विवाद : कल्पना के घोड़े पर सवार शख्स की उसी घोड़े के खिलाफ जंग

    'पद्मावती' फिल्म को लेकर फिलहाल जिस तरह का शोर-शराबा और चीख-चिल्लाहट मची हुई है, उस दौर में इस तरह की बातें करना अनर्गल प्रलाप से अधिक कुछ नहीं है, फिर भी मन है कि मानता नहीं. साफ-साफ दिखाई दे रहा है कि जान-बूझकर इतिहास और तर्क की अनदेखी की जा रही है.

  • हिमाचल और गुजरात में किस करवट बैठेगा चुनावी ऊंट?

    हिमाचल और गुजरात में किस करवट बैठेगा चुनावी ऊंट?

    प्रश्‍न यह उठता है कि क्या हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस बनी रहेगी और गुजरात में बीजेपी बेदखल हो जाएगी? फिलहाल इन दोनों प्रश्‍नों के जो उत्तर नजर आ रहे हैं, वह यह कि दोनों में से किसी के होने की संभावना नहीं है. 68 सीटों वाली हिमाचल की विधानसभा में कांग्रेस ने 2012 में 36 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी. बीजेपी इससे 10 कम रही थी. कांग्रेस ने अपने 83 वर्षीय जिस नेता को अपने भावी मुख्यमंत्री के रूप में प्रस्तुत किया है, वे इस बीच लगातार भ्रष्टाचार के मामलों में चर्चा में रहे हैं.

  • आखिर किसके लिए है यह ग्लोबलाइजेशन?

    आखिर किसके लिए है यह ग्लोबलाइजेशन?

    फिलहाल जीडीपी, जीएसटी, तेजोमहल, पगलाया विकास, गुजरात चुनाव, गौरव यात्रा, बाबाओं के रोमांस आदि-आदि का शोर इतना अधिक है कि इस कोलाहल में भला भूखेपेट वाले मुंह से निकली आह और कराह की धीमी और करुण आवाज कहां सुनाई पड़ेगी.

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