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Farmers conditions


'Farmers conditions' - 13 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • मध्‍यप्रदेश : कर्जमाफी की घोषणा के बाद अब तक दो किसानों ने की खुदकुशी, यूरिया का भी है संकट

    मध्‍यप्रदेश : कर्जमाफी की घोषणा के बाद अब तक दो किसानों ने की खुदकुशी, यूरिया का भी है संकट

    मध्य प्रदेश में नई सरकार ने किसानों के कर्ज माफ करने की दिशा में कदम तो उठा लिए हैं लेकिन प्रदेश में किसानों की आत्महत्या का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है.

  • क्या सरकार को किसानों की वाकई फिक्र है?

    क्या सरकार को किसानों की वाकई फिक्र है?

    न्यूज चैनलों पर नेताओं के भाषणों का अतिक्रमण हो गया है. उनके भाषण झूठ से भरे होते हैं, उन्माद फैलाने वाले होते हैं, मुद्दों से भटकाने वाले होते हैं. इतिहास तो गलत होता ही है. दूसरी तरफ आम जनता अपनी-अपनी समस्याओं को लेकर लाचार खड़ी है कि कोई उसे आवाज़ दे दे. मध्य प्रदेश में सिपाही की परीक्षा देने वाले छात्र अब गिड़गिड़ाने की स्थिति में आ गए हैं. रो रहे हैं कि कोई उनकी बात सामने रख दे.

  • मध्‍य प्रदेश में मुआवजे का इंतजार करते उड़द के किसान

    मध्‍य प्रदेश में मुआवजे का इंतजार करते उड़द के किसान

    मध्यप्रदेश में किसानों के हिंसक आंदोलन के बावजूद उनकी मुश्किलें कम नहीं हुई हैं. कभी हज़ारों रुपये का प्रीमियम भरने के बावजूद 4-6 रुपये देकर मुआवज़े का मज़ाक बन रहा है तो कहीं करोड़ों रुपये का बीमा अटका हुआ है, सर्वे तक का काम शुरू नहीं हुआ है, बीमा मंजूर होने के बाद भी बीमा राशि किसानों के खाते में नहीं पहुंची है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : किसानों की समस्या का हल किसके पास?

    प्राइम टाइम इंट्रो : किसानों की समस्या का हल किसके पास?

    बुधवार को इंदौर, उज्जैन, देवास में कई जगहों पर हिंसा की घटना हुई हैं. कई जगहों पर कर्फ्यू लगा और मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई. इसलिए कई जगहों से तस्वीरें या वीडियो नहीं आ पा रहे हैं. कहीं बस जला दी गई है तो कहीं दुकानों को तोड़ा गया है.

  • बजट पर सबसे कम ध्यान रहा इस साल - भाग एक

    बजट पर सबसे कम ध्यान रहा इस साल - भाग एक

    आमतौर पर देश के सालाना बजट पर सोचने विचारने का काम डेढ़ दो महीने पहले से शुरू हो जाता था. लेकिन इस साल नोटबंदी ने देश को इस कदर उलझाए रखा कि यह काम रह ही गया. वैसे नवंबर के दूसरे हफ्ते में नोटबंदी करते समय सरकार के सामने इस साल का बजट ही रहा होगा. सबको पता है कि पिछले साल बजट बनाने में सरकार कितनी मुश्किल में पड़ गई थी.

  • 2014 में 2022 का ख़्वाब, डबल इनकम वाला किसान

    2014 में 2022 का ख़्वाब, डबल इनकम वाला किसान

    क्या किसानों की आमदनी वाक़ई दुगनी हो जाएगी? इस साल भले न हो मगर छह साल बाद 2022 में हो जाएगी? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी किसान रैलियों में इस बात पर खासे ज़ोर दे रहे हैं कि उनकी सरकार के प्रयासों से छह साल बाद किसानों की आमदनी डबल हो जाएगी।

  • अभी तक किसानों को क्या मिला?

    अभी तक किसानों को क्या मिला?

    आज़ादी से लेकर आजतक का वो आकलन कहां है, जो बता सके कि कितने किसान खेतिहर मजदूरी करते हैं। कई बार ऐसे किसानों के पास उनके अस्तित्व के दस्तावेज तक नहीं होते और यही वजह है कि सरकार की बढ़िया से बढ़िया स्कीम का फायदा उन तक नहीं पहुंच पाता है।

  • इस साल ठंड कम पड़ने से डरे हुए हैं कुरुक्षेत्र के किसान

    इस साल ठंड कम पड़ने से डरे हुए हैं कुरुक्षेत्र के किसान

    कुरक्षेत्र के किसान आजकल डरे हुए हैं। इस बार सर्दी के मौसम में अब तक तापमान औसत से दो डिग्री ज़्यादा रहा है। लिहाज़ा सर्दी की कई फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ती जा रही है।

  • स्‍कूल जाने को बस सफर तक के पैसे नहीं थे, मजबूर किसान की बेटी ने दे दी जान

    स्‍कूल जाने को बस सफर तक के पैसे नहीं थे, मजबूर किसान की बेटी ने दे दी जान

    लातूर में रहने वाली 11वीं कक्षा की छात्रा स्‍वाति पिताले एक हफ्ते तक स्‍कूल नहीं जा पाई, क्‍योंकि उसके डेली बस पास की मियाद खत्‍म हो गई थी और माता-पिता के पास उसे रिन्‍यू कराने के पैसे नहीं थे।

  • बुंदेलखंड डायरी पार्ट 3 : डाकू ददुआ के इलाके में बुंदेलखंड पैकेज की एक खोज

    बुंदेलखंड डायरी पार्ट 3 : डाकू ददुआ के इलाके में बुंदेलखंड पैकेज की एक खोज

    आठ साल पहले जिस कोल्हुवा के जंगल में ददुआ को एसटीएफ ने मार गिराया था उसी जंगल में बुंदेलखंड पैकेज को हम खोजने निकले। बुंदेलखंड के किसानों को आत्महत्या और सूखे से बचाने के लिए केंद्र सरकार 7266 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 13 जिलों को दिया।

  • राहुल तो कुर्ते की बांहें मरोड़े बिना ही भाषण देने लगे हैं, कुछ हुआ है क्या?

    राहुल तो कुर्ते की बांहें मरोड़े बिना ही भाषण देने लगे हैं, कुछ हुआ है क्या?

    उन 56 दिनों में राहुल बदल गए या रामलीला मैदान से लेकर लोकसभा के बीच 24 घंटों में ज़्यादा बदले हैं। अगर राहुल गांधी का इसी तरह बदलना जारी रहा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विपक्ष के खेमे से कमज़ोर वक्ता की कमी नहीं खलेगी।

  • सुशील महापात्रा : तिल-तिल मरता किसान

    सुशील महापात्रा : तिल-तिल मरता किसान

    राजनेताओं की लड़ाई में किसान का जो असली मुद्दा है, वह छुप जाता है। किसानों की बाइट कम और राजनेताओं की ज्यादा दिखाई जाती है। टीवी चैनलों पर किसानों के मुद्दे पर जब बहस होती है, तो खिड़की में किसान नहीं, राजनेता नज़र आते हैं।

  • महाराष्ट्र : फसल बरबाद होने से दुखी किसान ने जला ली अपनी ही चिता

    महाराष्ट्र : फसल बरबाद होने से दुखी किसान ने जला ली अपनी ही चिता

    लगातार मौसम की मार झेल रहे महाराष्ट्र के किसान बुरे हाल में हैं। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो विदर्भ और मराठवाड़ा के इलाके में रोजाना औसतन एक किसान खुदकुशी कर रहा है।

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