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Gdp growth


'Gdp growth' - 147 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर जुलाई में सुस्त पड़कर 2.1 प्रतिशत पर पहुंची

    बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर जुलाई में सुस्त पड़कर 2.1 प्रतिशत पर पहुंची

    आठ बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर जुलाई में घटकर 2.1 प्रतिशत पर आ गई है. सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है. जुलाई, 2018 में बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रही थी.

  • डिजिटल अर्थव्यवस्था का अराजक विस्तार और आर्थिक मंदी

    डिजिटल अर्थव्यवस्था का अराजक विस्तार और आर्थिक मंदी

    कई साल पहले दिल्ली में अनेक शॉपिंग मॉल तो बन गए, पर उनमें दुकानदारों और ग्राहकों की भारी कमी थी. मॉल के बिल्डरों की शक्तिशाली लॉबी ने राजनेताओं और जजों के बच्चों को अपना पार्टनर बना लिया. उसके बाद अदालती फैसले के नाम पर दिल्ली में सीलिंग का सिलसिला शुरू हो गया. तीर निशाने पर लगा और मॉल्स में दुकानदार और ग्राहक दोनों आ गए. अब वक्त बदल गया है. देश के असंगठित क्षेत्र और छोटे उद्योगों के सामने डिजिटल कंपनियों की पावरफुल लॉबी है.

  • स्वरा भास्कर ने किया इस्तीफे का ऐलान, लिखा- यह रायता मेरे बस का नहीं है...

    स्वरा भास्कर ने किया इस्तीफे का ऐलान, लिखा- यह रायता मेरे बस का नहीं है...

    स्वरा भास्कर (Swara Bhasker) ने अपनी दमदार एक्टिंग से फिल्म इंडस्ट्री में खूब पहचान बनाई है. फिल्मों के अलावा स्वरा भास्कर (Swara Bhasker) अपने ट्वीट्स के लिए भी खूब जानी जाती हैं. लेकिन हाल ही में उन्होंने अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया है. इस बात की जानकारी उन्होंने खुद ट्वीट करके दी है.

  • क्या मीडिया 5 प्रतिशत जीडीपी की सच्चाई छिपा रहा है?

    क्या मीडिया 5 प्रतिशत जीडीपी की सच्चाई छिपा रहा है?

    सड़क पर बेरोज़गारों की फौज पुकार रही है कि काम नहीं है, दुकानदारों की फौज कह रही है कि मांग रही है और उद्योग जगत की फौज पुकार रही है कि न पूंजी है, न मांग है और न काम है. नेशनल स्टैस्टिकल ऑफिस के आंकड़ों ने बता दिया कि स्थिति बेहद ख़राब है. छह साल में भारत की जीडीपी इतना नीचे नहीं आई थी. तिमाही के हिसाब से 25 तिमाही में यह सबसे ख़राब रिपोर्ट है.

  • आर्थिक मोर्चे पर लगातार लुढ़कती सरकार को क्यों चाहिए कश्मीर कश्मीर

    आर्थिक मोर्चे पर लगातार लुढ़कती सरकार को क्यों चाहिए कश्मीर कश्मीर

    यह ज़रूरत है कि मोदी सरकार राजनीतिक रूप से भयंकर सफल सरकार है इसलिए भी आप इस सरकार को हर वक्त राजनीति करते देखेंगे. यह कहते भी सुनेंगे कि वह राजनीति नहीं करती है. कश्मीर उसके लिए ढाल बन गया है. इस तरह के विश्लेषण लिखते लिखते साढ़े पांच साल गुज़र गए.

  • GDP दर पहली तिमाही में 5.8 फीसदी से घटकर 5 फीसदी पर पहुंची, 6 वर्षों में सबसे निचला स्‍तर

    GDP दर पहली तिमाही में 5.8 फीसदी से घटकर 5 फीसदी पर पहुंची, 6 वर्षों में सबसे निचला स्‍तर

    देश की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में धीमी पड़कर 5 प्रतिशत रही. एक साल पहले इसी तिमाही में वृद्धि दर आठ प्रतिशत थी. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जीडीपी दर पहली तिमाही में 5.8 फीसदी से घटकर 5 फीसदी पर पहुंच गई. जो 6 साल में इसका सबसे निचला स्‍तर है. 

  • नरेंद्र मोदी सरकार को RBI से मिलेगा 1.76 लाख करोड़ रुपये का पेआउट : 10 खास बातें

    नरेंद्र मोदी सरकार को RBI से मिलेगा 1.76 लाख करोड़ रुपये का पेआउट : 10 खास बातें

    भारतीय रिज़र्व बैंक, यानी रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने पूर्व अध्यक्ष बिमल जालान की अध्यक्षता वाली एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को मानते हुए सोमवार को अपने सरप्लस तथा रिज़र्व भंडार में से 1.76 लाख करोड़ रुपये केंद्र सरकार को दिए जाने को मंज़ूरी दे दी. इस रिकॉर्ड ट्रांसफर, जिसमें वर्ष 2018-19 के लिए 1.23 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस शामिल है, से सरकार की वित्तीय स्थिति ऐसे समय में मज़बूत हो पाएगी, जब वह लगभग पांच साल में सबसे कम आर्थिक वृद्धि का सामना कर रही है और लगभग हर क्षेत्र में लाखों नौकरियां खत्म हो जाने की आशंका सिर पर झूल रही है. इसके अलावा, इस भुगतान की मदद से सरकार वित्तीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 3.3 फीसदी तक सीमित रखने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को भी पूरा कर पाएगी. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस भुगतान से सरकार को कर राजस्व में कमी से निपटने में भी मदद मिलेगी, और वह अपने बढ़े खर्चों के लिए भी राशि जुटा पाएगी.

  • मौजूदा आर्थिक मंदी 'अभूतपूर्व स्थिति', 70 साल में कभी ऐसा नहीं हुआ : नीति आयोग उपाध्यक्ष

    मौजूदा आर्थिक मंदी 'अभूतपूर्व स्थिति', 70 साल में कभी ऐसा नहीं हुआ : नीति आयोग उपाध्यक्ष

    देश के शीर्ष अर्थशास्त्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब देश की अर्थव्यवस्था पिछले पांच साल के दौरान वृद्धि की सबसे खराब गति को निहार रही है. राजीव कुमार ने कहा, "सरकार बिल्कुल समझती है कि समस्या वित्तीय क्षेत्र में है... तरलता (लिक्विडिटी) इस वक्त दिवालियापन में तब्दील हो रही है... इसलिए आपको इसे रोकना ही होगा..."

  • ऑटोमोबाइल सेक्‍टर में संकट गहराया, 10 लाख नौकरियों पर मंडराया खतरा

    ऑटोमोबाइल सेक्‍टर में संकट गहराया, 10 लाख नौकरियों पर मंडराया खतरा

    ऑटो सेक्टर अपने सबसे मुश्किल दौर से गुज़र रहा है. हर तरह की गाड़ियों की बिक्री घटी है. लगातार आठवें महीने गाड़ियों की बिक्री गिरी है. अब पहली बार सियाम- यानी सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटमोबाइल मैन्युफ़ैक्चरर्स ने आधिकारिक तौर पर माना है कि करीब साढ़े तीन लाख अस्थायी और कैजुअल नौकरियां जा चुकी हैं. यही नहीं, दस लाख लोगों की नौकरी ख़तरे में है.

  • अर्थव्यवस्था की रफ़्तार में आई गिरावट से निपटने के लिए उद्योगों ने मांगा एक लाख करोड़ का पैकेज

    अर्थव्यवस्था की रफ़्तार में आई गिरावट से निपटने के लिए उद्योगों ने मांगा एक लाख करोड़ का पैकेज

    अर्थव्यवस्था की रफ़्तार में आई गिरावट देखते हुए उद्योग संघ एसोचैम ने स्टिमुलस पैकेज की मांग की है. उधर पीएम की आर्थिक सलाहकार काउंसिल के अध्यक्ष बिबेक देबराय ने सरकार के सामने इकोनॉमिक रिवाइवल के लिए एक नया रोडमैप पेश किया है.

  • बेरोज़गारी के मुद्दे का हल कब तक निकलेगा?

    बेरोज़गारी के मुद्दे का हल कब तक निकलेगा?

    बरोज़गारी का सवाल अजीब होता है. न चुनाव में होता है और न चुनाव के बाद होता है. सरकारी सेक्टर की नौकरियों की परीक्षाओं का हाल विकराल है. मध्यप्रेश, बिहार, यूपी से रोज़ किसी न किसी परीक्षा के नौजवानों के मेसेज आते रहते हैं. इनकी संख्या लाखों में है फिर भी सरकारों को फर्क नहीं पड़ता. किसी परीक्षा में इंतज़ार की अवधि सात महीने है तो किसी परीक्षा में 3 साल.

  • आर्थिक वृद्धि में नरमी, NBFC संकट से फंसे कर्ज के मामले में जोखिम: मूडीज

    आर्थिक वृद्धि में नरमी, NBFC संकट से फंसे कर्ज के मामले में जोखिम: मूडीज

    बैंकिग क्षेत्र फंसे कर्ज की समस्या से धीरे-धीरे बाहर आ रहा है लेकिन आर्थिक वृद्धि में नरमी तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) में संकट जारी रहने से उनकी संपत्ति (ऋण खातों) की गुणवत्ता के समक्ष नई चुनौतियां उत्पन्न होने के जोखिम हैं.

  • पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद ने कहा, GDP पर अरविंद सुब्रमण्यन के आरोपों का बिंदुवार जवाब देंगे

    पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद  ने कहा, GDP पर अरविंद सुब्रमण्यन के आरोपों का बिंदुवार जवाब देंगे

    पीएम नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन (Arvind Subramanian) के आरोपों को बुधवार को खारिज कर दिया.

  • GDP के आकड़ों पर पूर्व आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन के लेख के बाद सरकार की तरफ से आया यह Reaction

    GDP के आकड़ों पर पूर्व आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन के लेख के बाद सरकार की तरफ से आया यह Reaction

    सरकार ने मंगलवार को पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन (Arvind Subramanian) के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि जीडीपी (GDP) के आंकड़े बढ़ा-चढ़ा कर पेश किए गए थे. सरकार की तरफ से बयान जारी कर कहा गया कि देश के सकल आर्थिक वृद्धि दर अनुमान की गणना में उचित तरीके अपनाए गए. सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि देश के आर्थिक विकास का अनुमान 'स्वीकृत प्रक्रियाओं, कार्यप्रणाली और उपलब्ध आंकड़ों' पर आधारित है.

  • क्या भारत की जीडीपी 4.5 प्रतिशत रही है, भारत ने ढाई प्रतिशत बढ़ा-चढ़ा कर बताया है?

    क्या भारत की जीडीपी 4.5 प्रतिशत रही है, भारत ने ढाई प्रतिशत बढ़ा-चढ़ा कर बताया है?

    भारत सरकार के पूर्व आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने जीडीपी के हिसाब-किताब के नए पैमाने पर सवाल उठा दिया है. उनका कहना है कि 2011-12 से 2016-17 के बीच भारत की जीडीपी को काफी बढ़ा चढ़ा कर दिखाया गया है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस दौरान जीडीपी की दर 7 प्रतिशत के आस-पास रही है लेकिन अरविंद सुब्रमण्यन का कहना है कि वास्तविक जीडीपी हर साल 4.5 प्रतिशत के आस-पास रही है.

  • वृद्धि दर के 2011-17 के आंकड़े 2.5 % बढ़ा-चढ़ाकर आंके गए : पूर्व आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन

    वृद्धि दर के 2011-17 के आंकड़े 2.5 % बढ़ा-चढ़ाकर आंके गए : पूर्व आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन

    पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने कहा है कि आर्थिक वृद्धि (जीडीपी वृद्धित) की गणना के लिए अपनाए गए नए पैमानों के चलते 2011-12 और 2016-17 के बीच आर्थिक वृद्धि दर औसतन 2.5% ऊंची हो गयी गयी.

  • इस साल दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा भारत : रिपोर्ट

    इस साल दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा भारत : रिपोर्ट

    भारत इस साल ब्रिटेन को पछाड़ते हुए दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. आईएचएस मार्किट की सोमवार को जारी रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है.

  • सांख्यिकी सचिव ने माना कि जीडीपी में गिरावट चिंताजनक

    सांख्यिकी सचिव ने माना कि जीडीपी में गिरावट चिंताजनक

    प्रधानमंत्री जब अपनी पहली कैबिनेट बैठक कर रहे थे, तभी सांख्यिकी मंत्रालय ने बताया कि विकास दर गिर गई है.आंकड़ों के मुताबिक ये पांच साल की सबसे कम विकास दर है.