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Kadambini sharma


'Kadambini sharma' - 64 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • शिनजियांग डायरी 3 : चीन के इस इलाके के हालात की सच्चाई के कई पक्ष

    शिनजियांग डायरी 3 : चीन के इस इलाके के हालात की सच्चाई के कई पक्ष

    शिनजियांग डायरी का ये आखिरी हिस्सा चीन से लौटने के करीब महीने भर बाद लिख रही हूं. इसलिए नहीं कि वक्त नहीं मिला या इच्छा नहीं हुई, बल्कि इसलिए कि इस बीच इस पर मेरी बनाई डॉक्युमेंट्री 'चीन का चाबुक' ऑन एयर हो गई और मैं देखना चाहती थी कि इस पर प्रतिक्रिया क्या होती है. क्योंकि सीधे तौर पर भारत से जुड़ा मुद्दा नहीं है तो यह भी लगा कि पता नहीं लोग देखें ना देखें. लेकिन यूट्यूब पर सवा लाख से भी ज्यादा लोगों ने देखा और अधिकतर ने सराहा. कुछ ने कुछ सवाल भी पूछे.

  • शिनजियांग डायरी 2: उइघर मुस्लिम कितने मुक्त

    शिनजियांग डायरी 2: उइघर मुस्लिम कितने मुक्त

    इससे उन्हें डीरैडिकलाज़ करने में आसानी होती है और वो कोई ना कोई काम सीख कर सरकार की दी आर्थिक मदद के ज़रिए एक सामान्य चीनी नागरिक के तौर पर जीवनयापन कर सकते हैं. सुनने में बुरा नहीं लगता, जब तक कि आप जाकर खुद इन सेंटरों में रह रहे लोगों से बात नहीं करते. बात करने के बाद अधिकारियों की बात सिर्फ दलील लगने लगती है. कम से कम मुझे यही लगा.

  • शिनजियांग डायरी 1 : उइघर मुस्लिम कितने मुक्त

    शिनजियांग डायरी 1 : उइघर मुस्लिम कितने मुक्त

    मैं 16 अगस्त की शाम चीन के उइघर मुस्लिमों के सबसे बड़ी आबादी वाले प्रदेश उइघर ऑटोनोमस प्रोवंस की राजधानी उरमुची शहर पहुंची. यह खुद चीन की सरकार के आमंत्रण पर था. मकसद था पश्चिमी मीडिया में उइघरों के बारे में चीन की दमनकारी नीतियों की 'सच्चाई' दिखाना. मैं भी लगातार इस तरह की खबरें देख-सुन और पढ़ रही थी. मन में कई सवाल थे और खुद पड़ताल करने की इच्छा.

  • चीन डायरी: उरुमुची के इंटरनेशनल इस्लामिक इंस्टिट्यूट में छात्रों को मिलती है इमाम की ट्रेनिंग

    चीन डायरी: उरुमुची के इंटरनेशनल इस्लामिक इंस्टिट्यूट में छात्रों को मिलती है इमाम की ट्रेनिंग

    चीन सरकार के बुलावे पर मैं इस समय उरुमुची में हूं. आज उरुमुची के इंटरनेशनल इस्लामिक इंस्टिट्यूट जाने का मौक़ा मिला. वहां, पर छात्रों को इमाम के काम के लिए ट्रेनिंग दी जाती है. छात्रों को मासिक भत्ता भी मिलता है. क़ुरान की पढाई में भी छात्र यहां महारत हासिल करते हैं.

  • विदेश मंत्री बनने के बाद एस जयशंकर का आया बड़ा बयान, बोले- पड़ोसियों के लिये दिल बड़ा रखना होगा

    विदेश मंत्री बनने के बाद एस जयशंकर का आया बड़ा बयान, बोले- पड़ोसियों के लिये दिल बड़ा रखना होगा

    CII और थिंक टैंक अनंत एस्पेन सेंटर (Ananta Aspen Centre) के कार्यक्रम में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि पहले भारतीयों के मन में दूतावासों की ये छवि थी कि जिनकी बड़ी जगहों पर पहचान होती है उन्हीं का काम होता है और वहां काम कराना मुश्किल है.

  • विदेश मंत्री के लिए सोशल मीडिया ज़रूरी

    विदेश मंत्री के लिए सोशल मीडिया ज़रूरी

    विदेश सचिव एस जयशंकर ने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की शुरू की हुई परंपरा को बरक़रार रखा है. सुषमा स्वराज विदेशों में मुश्किलों में फंसे भारतीयों की मदद ट्विटर के ज़रिए करती रहीं और इस वजह से काफी लोकप्रिय भी हुईं.

  • चुनाव आयोग पर क्यों उठ रहे हैं सवाल

    चुनाव आयोग पर क्यों उठ रहे हैं सवाल

    मामला बिगड़ता गया क्योंकि आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में पीएम मोदी पर जो सवाल उठे उसमें चुनाव आयोग क्लीन चिट देता गया. इस पर चुनाव आयोग के अंदर का मतभेद खुल कर सामने आ गया, जब चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को लिखी चिट्ठी में उनकी अलग राय को रिकॉर्ड नहीं करने की बात सामने आई. उसके बाद लाख सफाई भी काम ना आई.

  • आतंकवाद से परेशान पड़ोसियों ने पाकिस्‍तान पर बढ़ाया दबाव...

    आतंकवाद से परेशान पड़ोसियों ने पाकिस्‍तान पर बढ़ाया दबाव...

    अफगानिस्तान लंबे समय से आतंक से ग्रसित रहा है और वहां हमले करने वाले कई आतंकी संगठन पाकिस्तान में सुरक्षित बैठे हैं. अब अफगानिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से गुहार लगाई है कि पाकिस्तान सरकार बिना अफगानिस्तान को शामिल किए तालिबान प्रतिनिधियों से उच्च स्तरीय बैठक कर रही है.

  • काश ये इंसानियत और जगहों पर भी दिखती

    काश ये इंसानियत और जगहों पर भी दिखती

    वो दुनिया के अलग-अलग अलग हिस्सों से आए, कोई इंग्लैंड, कोई अमेरिका, कोई ऑस्ट्रेलिया कोई डेनमार्क, कोई फिलीपींस. मदद की पेशकश हर जगह से. थाइलैंड के चिरांग राई में दो हफ्ते से गुफा में फंसे जूनियर फुटबॉल टीम के 13 सदस्यों के लिए.

  • ज़िम्मेदारी सभी की है, सभी को बनना होगा 'फैक्ट चेकर'

    ज़िम्मेदारी सभी की है, सभी को बनना होगा 'फैक्ट चेकर'

    एक साल के भीतर भारत के नौ राज्यों में व्हॉट्सऐप (WhatsApp) पर बच्चा चोरी की अफवाहों के कारण 27 मासूम लोगों को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला. फेक न्यूज़ का यह सबसे वीभत्स रूप है, लेकिन इसके और भी चेहरे हैं, और हर तरफ नज़र आ रहे हैं. फेक न्यूज़ या फिर झूठी ख़बर कभी जाने-पहचाने चेहरों के ज़रिये आप तक पहुंचती है, कभी सोशल मीडिया पर छिपे हुए लोगों की फैलाई हुई होती हैं. कई बार अपने विचारों के कारण लोग फेक न्यूज़ पर भरोसा करते हैं या फिर जिनके ज़रिये उन तक वह झूठी ख़बर पहुंची है, उन पर भरोसे के कारण ख़बर पर भी भरोसा हो जाता है. लेकिन फेक न्यूज़ का हर अवतार घातक है, किसी न किसी तरह. लोगों को मार डालना एक उदाहरण है. हमने फेक न्यूज़ के कारण दंगे, तनाव भी भड़कते देखे हैं, समुदायों में वैमनस्य पनपना देख रहे हैं. लेकिन तब क्या होता है, जब कोई नेता, वह नेता, जिस पर इस बात की ज़िम्मदारी है कि वह तथ्यों को लेकर झूठ नहीं बोलेगा, लोगों को बहकाएगा नहीं, झूठ बोलता है...? पत्रकार के तौर पर हमारी ज़िम्मेदारी हर ख़बर को देख-परखकर ही उसे दर्शकों या पाठकों तक पहुंचाने की होती है, लेकिन जब फेक न्यूज़ वायरल बुखार की तरह फैल जाए, तब क्या...?

  • एक जैसे है रंगभेद और जातिवाद...

    एक जैसे है रंगभेद और जातिवाद...

    मेरी आंखें बार-बार भर आ रही थीं. उन पुरानी तस्वीरों, अखबार की कतरनों को देख-पढ़ कर सिहर जा रही थी. ये अमेरिकी इतिहास का सबसे डरावना और शर्मनाक पन्ना है. अमेरिका के अलबामा राज्य के मौंटगोमरी शहर में 26 अप्रैल, 2018 को खोला गया लेगेसी म्यूज़ियम ठीक उस जगह पर बना है जहां एक गोदाम में अफ्रीकी-अमेरिकी गुलामों को रखा जाता था.

  • डोकलाम पर शायद आखिरी पन्ना लिखा नहीं गया...

    डोकलाम पर शायद आखिरी पन्ना लिखा नहीं गया...

    डोकलाम में भारतीय और चीनी सेना आमने सामने थी. पीछे से हर कूटनीतिक कोशिश की जा रही थी इस बेहद तनावपूर्ण स्थिति को सुलझाने की. ये स्थिति दो महीनों से भी ज्यादा तक बनी रही. आखिर अचानक 28 अगस्त 2017 को दोनों देशों की सेनाएं पीछे हट गईं. कहा गया कि मामला सुलझा लिया गया है. लेकिन तब से लेकर अब तक बयानों का जो सिलसिला है उससे तो यही लगता है कि स्थिति साफ होने की बजाय उतनी ही धुंधली है जितनी पहले दिन थी.

  • क्या हम संविधानवाद से समझौता कर रहे हैं?

    क्या हम संविधानवाद से समझौता कर रहे हैं?

    आखिरी बार आपने भारत के संविधान की प्रस्तावना कब पढ़ी थी, सिविल सेवा की परीक्षा देते समय पढ़ी थी या फिर अपनी नागरिकता को समझने के लिए भी पढ़ते रहे हैं.

  • सिर्फ अहमदाबाद ही क्यों?

    सिर्फ अहमदाबाद ही क्यों?

    हम में से जो भी कभी अहमदाबाद नहीं भी गए हैं वो भी थोड़ा थोड़ा उस शहर को जानने लगे हैं. ये कमाल है प्रधानमंत्री मोदी का. असल में विश्व के बड़े नेताओं को प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के अहमदाबाद ले जाने की शुरुआत जब से की है, तब से ये होने लगा है.

  • कादम्बिनी शर्मा का ब्लॉग : क्या चीन और भारत के बीच तनाव कम होगा...

    कादम्बिनी शर्मा का ब्लॉग :  क्या चीन और भारत के बीच तनाव कम होगा...

    डोकलाम इलाके में भारत और चीन की सेना को आमने-सामने खड़े एक महीना होने को आया. दोनों में से कोई भी सेना पीछे हटने की जल्दी में नहीं. जिस इलाके को चीन प्राचीन काल से अपना बताकर सड़क बनाने की बात कर रहा है और भारत को पीछे हटने को कह रहा है, भारत लगातार उसे भूटान का क्षेत्र बताते हुए चीन को पीछे हटने को कह रहा है. भूटान की जमीन पर भारत का यह रुख इसलिए है क्योंकि भूटान से उसका रणनीतिक समझौता है जिसके तहत सैन्य मदद उसे मिलती है.

  • आईएसआईएस के कब्ज़े से निकला मोसुल, भारत में 39 परिवारों की नज़रें दरवाज़ों पर

    आईएसआईएस के कब्ज़े से निकला मोसुल, भारत में 39 परिवारों की नज़रें दरवाज़ों पर

    मोसुल की जीत बड़ी भी है और प्रतीकात्मक तौर पर इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) को धक्का देने वाली भी, क्योंकि मोसुल की सबसे बड़ी मस्जिद में ही अबू बकर अल बगदादी ने ख़िलाफ़त (Caliphate) स्थापित करने का ऐलान किया था.

  • मोदी सरकार के 3 साल - अंतरराष्ट्रीय मंच पर अधिक मुखर हुआ भारत

    मोदी सरकार के 3 साल - अंतरराष्ट्रीय मंच पर अधिक मुखर हुआ भारत

    पड़ोसियों से रिश्ते बेहतर करने पर मोदी सरकार की विदेश नीति का बड़ा जोर रहा है. रिश्ते सुधारने की लाख कोशिशों के बावजूद चीन और पाकिस्तान भारत के लिए बड़ा सिरदर्द बने हुए हैं. लेकिन जहां तक अफगानिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल का सवाल है, हालात अलग हैं.

  • नरेंद्र मोदी सरकार के तीन साल - भारत-पाक संबंधों में बरकरार है तनाव...

    नरेंद्र मोदी सरकार के तीन साल - भारत-पाक संबंधों में बरकरार है तनाव...

    पाकिस्तान से अगर बात भी की जाए, तो किससे - नवाज़ शरीफ से, या पाक सेना से...? पाकिस्तान में भी अगले साल चुनाव होने हैं, तो क्या पाकिस्तान का कोई भी नेता बात करने को तैयार होगा...? और बात करने के लिए भारत सरकार को अपने कड़े रुख से कितना पीछे हटना होगा...?