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Kadambini Sharma


'Kadambini sharma' - 72 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • भारत-अमेरिका साथ, चीन को संदेश

    भारत-अमेरिका साथ, चीन को संदेश

    भारत और अमेरिका के बीच 2 प्लस 2 बैठक खत्म हुई. बैठक का महत्व इतना कि महामारी के वक्त और अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से महज़ एक हफ्ता पहले अमेरिका के विदेश और रक्षा मंत्री दोनों भारत आए और आमने सामने अपने समकक्षों के साथ बैठक की - एक तथ्य जो विदेश मंत्री एस जयशंकर से प्रेस के सामने भी नोट किया.

  • अमेरिकी चुनाव में ईरान, रूस चीन की दखलंदाज़ी?

    अमेरिकी चुनाव में ईरान, रूस चीन की दखलंदाज़ी?

    नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ ने एक प्रेस कॉन्फेरेंस कर कहा कि ईरान और रूस ने वोटर रजिस्ट्रेशन की जानकारी हासिल कर ली है और ईरान धुर दक्षिणपंथी गुट प्राउड बॉय्ज़ बन के वोटरों को धमकाने वाले ईमेल भेज रहा है. इस प्रेस कॉन्फेरेंस में एफबीआई के डायरेक्टर क्रिस रे भी मौजूकि जो द थे

  • अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में सबसे ज़्यादा भरोसा पेपर ट्रेल पर

    अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में सबसे ज़्यादा भरोसा पेपर ट्रेल पर

    ये सवाल भारत में ही नहीं, 2016 से अमेरिका में भी पूछे जा रहे हैं. जब से ये आरोप लगे कि पिछले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूस ने दखलअंदाज़ी की, तब से अमेरिका में नागरिकों के वोट को सुरक्षित रखने के लिए कई कदम उठाए गए हैं.

  • अमेरिकी उपराष्ट्रपति पद भी बेहद अहम

    अमेरिकी उपराष्ट्रपति पद भी बेहद अहम

    इस बार के अमेरिकी चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडन के साथ उपराष्ट्रपति पद के लिए मैदान में उतरीं भारतीय मूल की कमला हैरिस को लेकर भारत में काफी उत्सुकता है. लेकिन उनके इस चुनाव में उतरने की क्या है अहमियत? वो क्या कर पाएंगी एक उपराष्ट्रपति के तौर पर अगर वो चुनी जाती हैं? क्या ज़िम्मेदारियां या ताकत होगी उनके पास?

  • अमेरिकी प्रेसिडेंशियल डिबेट क्यों हैं खास..

    अमेरिकी प्रेसिडेंशियल डिबेट क्यों हैं खास..

    इस डिबेट की परंपरा 1976 में ही शुरू हुई. हमने 29 सितंबर 2020 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रतिद्वंदी जो बाइडेन के बीच पहला डिबेट देखा. इसके पहले ही अमेरिका के कई राज्यों में हिंसा हुई है. जानकारों के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों ने, उनके ट्वीट्स ने लोगों को बांटने का काम ज्यादा किया है और लोगों ने पहले ही तय कर रखा है कि वो अपना वोट रिपब्लिकन्स को देंगे या डेमोक्रैट्स को.

  • LAC पर चीन की धोखेबाजी और झूठ पर झूठ...

    LAC पर चीन की धोखेबाजी और झूठ पर झूठ...

    जब पूरी दुनिया कोविड से निबट रही है तब चीन भारत की ज़मीन हड़पने की कोशिश में है. मई के बाद एक बार फिर 29-30 अगस्त की रात चीनी सेना ने भारत के इलाके में घुसपैठ कर कब्जा़ करने की कोशिश की लेकिन सतर्क भारतीय सेना ने इसे बेकार कर दिया. अपनी पोज़िशन मज़बूत कर ली.

  • भारत को पड़ोसियों की शंकाएं और नाराजगी दूर करना जरूरी

    भारत को पड़ोसियों की शंकाएं और नाराजगी दूर करना जरूरी

    भारत के विदेश सचिव कोविड के इस दौर में भी विदेश यात्रा पर निकले हैं. और उनकी यात्रा का मुकाम है पड़ोसी बांग्लादेश. असल में पिछले एक हफ्ते में अचानक पड़ोस के मामले में कूटनीति में तेज़ी आ गई है. क्योंकि विदेश सचिव बांग्लादेश दौरे पर हैं तो पहले उसी की बात करते हैं. ये अचानक दौरा इसलिए हुआ क्योंकि अब चीनी निवेश की लंबी बांहें बांग्लादेश पहुंच चुकी हैं. वहां के मीडिया ने रिपोर्ट किया है कि तीस्ता नदी के पानी के मैनेजमेंट के लिए चीन उसे एक बिलियन डॉलर या सात हज़ार करोड़ की मदद दे सकता है. तीस्ता नदी के पानी को आपस में बांटने को लेकर भारत और बांग्लादेश पिछले आठ साल से बात कर रहे हैं पर बात बनी नहीं है.

  • भारत को कठघरे में खड़ा करने में नाकामयाब चीन सबक ले

    भारत को कठघरे में खड़ा करने में नाकामयाब चीन सबक ले

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन के कहने पर कश्मीर पर बुलाई गई क्लोज्ड डोर बैठक बेनतीजा रही. बेनतीजा इसलिए कि अधिकतर देशों ने ये साफ कर दिया कि वे कश्मीर के मामले को अंतरराष्ट्रीय नहीं द्विपक्षीय मुद्दा समझते हैं. तो कश्मीर का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की पाकिस्तान और चीन की एक और कोशिश नाकाम हो गई. भारत ने इस बैठक पर तीखी प्रतिक्रिया जताई है.

  • शिनजियांग डायरी 3 : चीन के इस इलाके के हालात की सच्चाई के कई पक्ष

    शिनजियांग डायरी 3 : चीन के इस इलाके के हालात की सच्चाई के कई पक्ष

    शिनजियांग डायरी का ये आखिरी हिस्सा चीन से लौटने के करीब महीने भर बाद लिख रही हूं. इसलिए नहीं कि वक्त नहीं मिला या इच्छा नहीं हुई, बल्कि इसलिए कि इस बीच इस पर मेरी बनाई डॉक्युमेंट्री 'चीन का चाबुक' ऑन एयर हो गई और मैं देखना चाहती थी कि इस पर प्रतिक्रिया क्या होती है. क्योंकि सीधे तौर पर भारत से जुड़ा मुद्दा नहीं है तो यह भी लगा कि पता नहीं लोग देखें ना देखें. लेकिन यूट्यूब पर सवा लाख से भी ज्यादा लोगों ने देखा और अधिकतर ने सराहा. कुछ ने कुछ सवाल भी पूछे.

  • शिनजियांग डायरी 2: उइघर मुस्लिम कितने मुक्त

    शिनजियांग डायरी 2: उइघर मुस्लिम कितने मुक्त

    इससे उन्हें डीरैडिकलाज़ करने में आसानी होती है और वो कोई ना कोई काम सीख कर सरकार की दी आर्थिक मदद के ज़रिए एक सामान्य चीनी नागरिक के तौर पर जीवनयापन कर सकते हैं. सुनने में बुरा नहीं लगता, जब तक कि आप जाकर खुद इन सेंटरों में रह रहे लोगों से बात नहीं करते. बात करने के बाद अधिकारियों की बात सिर्फ दलील लगने लगती है. कम से कम मुझे यही लगा.

  • शिनजियांग डायरी 1 : उइघर मुस्लिम कितने मुक्त

    शिनजियांग डायरी 1 : उइघर मुस्लिम कितने मुक्त

    मैं 16 अगस्त की शाम चीन के उइघर मुस्लिमों के सबसे बड़ी आबादी वाले प्रदेश उइघर ऑटोनोमस प्रोवंस की राजधानी उरमुची शहर पहुंची. यह खुद चीन की सरकार के आमंत्रण पर था. मकसद था पश्चिमी मीडिया में उइघरों के बारे में चीन की दमनकारी नीतियों की 'सच्चाई' दिखाना. मैं भी लगातार इस तरह की खबरें देख-सुन और पढ़ रही थी. मन में कई सवाल थे और खुद पड़ताल करने की इच्छा.

  • चीन डायरी: उरुमुची के इंटरनेशनल इस्लामिक इंस्टिट्यूट में छात्रों को मिलती है इमाम की ट्रेनिंग

    चीन डायरी: उरुमुची के इंटरनेशनल इस्लामिक इंस्टिट्यूट में छात्रों को मिलती है इमाम की ट्रेनिंग

    चीन सरकार के बुलावे पर मैं इस समय उरुमुची में हूं. आज उरुमुची के इंटरनेशनल इस्लामिक इंस्टिट्यूट जाने का मौक़ा मिला. वहां, पर छात्रों को इमाम के काम के लिए ट्रेनिंग दी जाती है. छात्रों को मासिक भत्ता भी मिलता है. क़ुरान की पढाई में भी छात्र यहां महारत हासिल करते हैं.

  • विदेश मंत्री बनने के बाद एस जयशंकर का आया बड़ा बयान, बोले- पड़ोसियों के लिये दिल बड़ा रखना होगा

    विदेश मंत्री बनने के बाद एस जयशंकर का आया बड़ा बयान, बोले- पड़ोसियों के लिये दिल बड़ा रखना होगा

    CII और थिंक टैंक अनंत एस्पेन सेंटर (Ananta Aspen Centre) के कार्यक्रम में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि पहले भारतीयों के मन में दूतावासों की ये छवि थी कि जिनकी बड़ी जगहों पर पहचान होती है उन्हीं का काम होता है और वहां काम कराना मुश्किल है.

  • विदेश मंत्री के लिए सोशल मीडिया ज़रूरी

    विदेश मंत्री के लिए सोशल मीडिया ज़रूरी

    विदेश सचिव एस जयशंकर ने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की शुरू की हुई परंपरा को बरक़रार रखा है. सुषमा स्वराज विदेशों में मुश्किलों में फंसे भारतीयों की मदद ट्विटर के ज़रिए करती रहीं और इस वजह से काफी लोकप्रिय भी हुईं.

  • चुनाव आयोग पर क्यों उठ रहे हैं सवाल

    चुनाव आयोग पर क्यों उठ रहे हैं सवाल

    मामला बिगड़ता गया क्योंकि आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में पीएम मोदी पर जो सवाल उठे उसमें चुनाव आयोग क्लीन चिट देता गया. इस पर चुनाव आयोग के अंदर का मतभेद खुल कर सामने आ गया, जब चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को लिखी चिट्ठी में उनकी अलग राय को रिकॉर्ड नहीं करने की बात सामने आई. उसके बाद लाख सफाई भी काम ना आई.

  • आतंकवाद से परेशान पड़ोसियों ने पाकिस्‍तान पर बढ़ाया दबाव...

    आतंकवाद से परेशान पड़ोसियों ने पाकिस्‍तान पर बढ़ाया दबाव...

    अफगानिस्तान लंबे समय से आतंक से ग्रसित रहा है और वहां हमले करने वाले कई आतंकी संगठन पाकिस्तान में सुरक्षित बैठे हैं. अब अफगानिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से गुहार लगाई है कि पाकिस्तान सरकार बिना अफगानिस्तान को शामिल किए तालिबान प्रतिनिधियों से उच्च स्तरीय बैठक कर रही है.

  • काश ये इंसानियत और जगहों पर भी दिखती

    काश ये इंसानियत और जगहों पर भी दिखती

    वो दुनिया के अलग-अलग अलग हिस्सों से आए, कोई इंग्लैंड, कोई अमेरिका, कोई ऑस्ट्रेलिया कोई डेनमार्क, कोई फिलीपींस. मदद की पेशकश हर जगह से. थाइलैंड के चिरांग राई में दो हफ्ते से गुफा में फंसे जूनियर फुटबॉल टीम के 13 सदस्यों के लिए.

  • ज़िम्मेदारी सभी की है, सभी को बनना होगा 'फैक्ट चेकर'

    ज़िम्मेदारी सभी की है, सभी को बनना होगा 'फैक्ट चेकर'

    एक साल के भीतर भारत के नौ राज्यों में व्हॉट्सऐप (WhatsApp) पर बच्चा चोरी की अफवाहों के कारण 27 मासूम लोगों को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला. फेक न्यूज़ का यह सबसे वीभत्स रूप है, लेकिन इसके और भी चेहरे हैं, और हर तरफ नज़र आ रहे हैं. फेक न्यूज़ या फिर झूठी ख़बर कभी जाने-पहचाने चेहरों के ज़रिये आप तक पहुंचती है, कभी सोशल मीडिया पर छिपे हुए लोगों की फैलाई हुई होती हैं. कई बार अपने विचारों के कारण लोग फेक न्यूज़ पर भरोसा करते हैं या फिर जिनके ज़रिये उन तक वह झूठी ख़बर पहुंची है, उन पर भरोसे के कारण ख़बर पर भी भरोसा हो जाता है. लेकिन फेक न्यूज़ का हर अवतार घातक है, किसी न किसी तरह. लोगों को मार डालना एक उदाहरण है. हमने फेक न्यूज़ के कारण दंगे, तनाव भी भड़कते देखे हैं, समुदायों में वैमनस्य पनपना देख रहे हैं. लेकिन तब क्या होता है, जब कोई नेता, वह नेता, जिस पर इस बात की ज़िम्मदारी है कि वह तथ्यों को लेकर झूठ नहीं बोलेगा, लोगों को बहकाएगा नहीं, झूठ बोलता है...? पत्रकार के तौर पर हमारी ज़िम्मेदारी हर ख़बर को देख-परखकर ही उसे दर्शकों या पाठकों तक पहुंचाने की होती है, लेकिन जब फेक न्यूज़ वायरल बुखार की तरह फैल जाए, तब क्या...?

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