NDTV Khabar

Manas mishra


'Manas mishra' - 449 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • CWC Meeting : अगर राहुल गांधी आज देते हैं अध्यक्ष पद से इस्तीफा तो कौन संभालेगा कांग्रेस की बागडोर

    CWC Meeting : अगर राहुल गांधी आज देते हैं अध्यक्ष पद से इस्तीफा तो कौन संभालेगा कांग्रेस की बागडोर

    CWC Meeting : सवाल इस बात का है इन सबके बीच अगर राहुल गांधी अगर कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देते हैं तो पार्टी की बागडोर कौन संभालेगा. सोनिया गांधी अपनी उम्र और सेहत के चलते दोबारा कमान शायद ही संभालें. प्रियंका गांधी वाड्रा इस चुनाव में बुरी तरह से फ्लॉप साबित हुई हैं और उनको अध्यक्ष बनाना अच्छा संदेश नहीं जाएगा.

  • मजबूत महागठबंधन और गोरखपुर-फूलपुर के नतीजों से परेशान थी BJP,तब अमित शाह ने निकाला पुराना फॉर्मूला

    मजबूत महागठबंधन और गोरखपुर-फूलपुर के नतीजों से परेशान थी BJP,तब अमित शाह ने निकाला पुराना फॉर्मूला

    लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन को आपेक्षित सफलता नहीं मिली है. इन दलों की 80 सीटों पर जातिगत गोलबंदी की कोशिश सफल नहीं हो सकी. जातियों में बंटी इन दोनों पार्टियों का हर समीकरण धरातल पर नाकाम साबित हुआ. इस तरह सपा-बसपा गठबन्धन के जातीय समीकरण के मिथक ध्वस्त हो गए. दोनों दल राज्य में हो रहे परिवर्तन को समझने में नाकाम रहे. वे लोगों तक अपनी बात को जनता तक पहुंचाने में कामयाब नहीं हो सके. दलित, पिछड़ा और मुस्लिम वोटों की फिराक में हुए इस गठबन्धन के सारे गणित ध्वस्त हो गए. गठबन्धन में कांग्रेस को शामिल न करना भी कुछ हदतक नुकसानदायक गया है. कांग्रेस के उतारे प्रत्याशी किसी-किसी सीट पर सपा बसपा पर भारी पड़ते दिखे. वह इनके लिए सचमुच वोटकटवा साबित हुए हैं. लेकिन बीजेपी के लिए उत्तर प्रदेश में लड़ाई बिलकुल आसान नहीं थी. गोरखपुर-फूलपुर और कैराना में हुए उपचुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में बीजेपी के पक्ष में माहौल बिलकुल नहीं था.

  • उत्तर प्रदेश : मछलीशहर में बीएसपी से मात्र 181 वोटों से जीती BJP, पढ़ें ऐसी ही सीटें जहां कुछ भी हो सकता था

    उत्तर प्रदेश : मछलीशहर में बीएसपी से मात्र 181 वोटों से जीती BJP, पढ़ें ऐसी ही सीटें जहां कुछ भी हो सकता था

    उत्तर प्रदेश में बीजेपी तमाम कयासों और गढ़बंधन के चक्रव्यूह के बाद भी 62 सीटें  जीतने में कामयाब रही जबकि राजनीतिक पंडित 40 से ऊपर नहीं दे रहे थे.  इन 61 सीटों में तकरीबन 16 ऐसी सीटे हैं जो 50 हज़ार से काम की हार जीत वाली रहीं. जबकि 2 ऐसी है जो 50 हज़ार से ज़्यादा लेकिन 60 हज़ार कम की हार जीत वाली रहीं.  कहने का मतलब ये कि यहां कांटे की लड़ाई रही इस लड़ाई में भाजपा का पलड़ा ज़्यादा भारी रहा और नतीजों में बीजेपी 62, अपना दल 2, बसपा 10, सपा को 5 सीटें मिलीं. आपको बता दें कि अपना दल ने बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ी हैं.

  • Election Results 2019 : संबित पात्रा ने वेश-भूषा बदली, गाना गया, कई घरों में खाना भी खाया, फिर भी हार गए, जानें क्यों

    Election Results 2019 : संबित पात्रा ने वेश-भूषा बदली, गाना गया, कई घरों में खाना भी खाया, फिर भी हार गए, जानें क्यों

    राष्ट्रीय मीडिया में अगर इस बार ओडिशा के किसी लोकसभा उम्मीदवार का सबसे ज्यादा चर्चा हुई हो तो वो थे बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा. संबित न्यूज चैनलों में बीजेपी की ओर से बहस करते हैं. पुरी लोकसभा क्षेत्र से संबित पात्रा बीजेपी के उम्मीदवार थे लेकिन संबित पात्रा यह लड़ाई जीतते-जीतते हार गए. संबित पात्रा को पुरी से तीन बार सांसद रहे पिनाकी मिश्र ने 11714 वोट से हराया है. पुरी में लड़ाई बहुत नजदकी रही है. साबित पात्रा कभी आगे निकल जाते तो कभी पिनाकी मिश्रा. आखिरकार पिनाकी को जीत नसीब हुई. पिनाकी चौथी बार संसद पहुंचेंगे.

  • Lok Sabha Election 2019 : क्या अमेठी में राहुल गांधी की हार रायबरेली में हुई इंदिरा गांधी की हार की तरह है?

    Lok Sabha Election 2019 : क्या अमेठी में राहुल गांधी की हार रायबरेली में हुई इंदिरा गांधी की हार की तरह है?

    लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के अमेठी में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के हार गए हैं. चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को 362248 और बीजेपी प्रत्याशी 410326 वोट मिले हैं. यानी दोनों के बीच 48 हजार के वोटों का अंतर है.  हालांकि नतीजे घोषित होने से पहले ही राहुल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हार स्वीकर कर ली थी.

  • Lok Sabha Election 2019 : कांग्रेस की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन, कहां बड़ी गलती कर बैठे राहुल गांधी, 5 कारण

    Lok Sabha Election 2019 : कांग्रेस की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन, कहां बड़ी गलती कर बैठे राहुल गांधी, 5 कारण

    पश्चिम बंगाल  की कुल 42 लोकसभा सीटों पर राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है. शुरुआती रुझान में तृणमूल कांग्रेस जहां 24 सीटों पर आगे है, वहीं भाजपा ने राज्य में पहली बार शानदार प्रदर्शन करते हुए 17 लोकसभा सीटों पर बढ़त बना ली है. पूरे देश में बीजेपी की लगभग 300 के आसपास आती दिखाई दे रही है.

  • Exit Poll Results 2019 : राहुल गांधी का केरल के वायनाड से '1 तीर से 130 निशाने' वाले दांव का कितना हुआ असर

    Exit Poll Results 2019  : राहुल गांधी का केरल के वायनाड से '1 तीर से 130 निशाने' वाले दांव का कितना हुआ असर

    कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का दक्षिण भारत के राज्य  केरल के वायनाड  से लड़ने का फैसला का कितना असर रहा है यह तो 23 मई को आने वाले नतीजे बताएंगे लेकिन एग्जिट पोल के नतीजे बता रहे हैं कि कांग्रेस को फायदा होता दिखाई दे रहा है. हालांकि यह असर केरल और तमिलनाडु तक ही सीमित है. एनडीटीवी पोल ऑफ पोल्स के मुताबिक आंध्र प्रदेश की 25 सीटों में टीडीपी को 10, वाईएसआर कांग्रेस को 15, कांग्रेस और बीजेपी को कोई भी सीट मिलती नहीं दिखाई दे रही है.

  • Exit Poll Results 2019 : रवीश कुमार के प्राइम टाइम में बोले योगेंद्र यादव- 23 मई को हैरान होने के लिए तैयार रहिए

    Exit Poll Results 2019 : रवीश कुमार के प्राइम टाइम में बोले योगेंद्र यादव- 23 मई को हैरान होने के लिए तैयार रहिए

    लोकसभा चुनाव 2019 में लगभग सभी एग्जिट पोल एनडीए की सरकार बनने का दावा कर रहे हैं. एनडीटीवी के पोल ऑफ एग्जिट पोल्स में भी बीजेपी की सरकार बनने के संकेत मिल रहे हैं. लेकिन इसी मुद्दे पर रवीश कुमार के प्राइम टाइम में सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व में चुनाव विशेषज्ञ योगेंद्र यादव ने भी दावा किया है कि इस बार नतीजों में हमें हैरान होने के लिए तैयार रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश के एग्जिट पोल से कोई बड़ी हैरानी नहीं है क्योंकि वहां पहले से ही संकेत मिल रही थे कि वाईएसआर कांग्रेस वहां टीडीपी से अच्छा प्रदर्शन  कर रही है.

  • 23 मई को नतीजा : मायावती के प्रधानमंत्री बनने की कितनी संभावनाएं?

    23 मई को नतीजा : मायावती के प्रधानमंत्री बनने की कितनी संभावनाएं?

    लोकसभा चुनाव (Election 2019)  बीएसपी सुप्रीमो मायावती  सोमवार को दिल्ली में सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकाक करेंगी. मायावती पहले भी  कह चुकी हैं कि अगर उनको प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला तो वह उत्तर प्रदेश की अंबेडकरनगर सीट से चुनाव लड़ेंगी.

  • लोकसभा चुनाव का 5वां चरण : 7 राज्य की इन 51 सीटों पर होगा मतदान, बीजेपी के लिए सबसे अहम

    लोकसभा चुनाव का 5वां चरण : 7 राज्य की इन 51 सीटों पर होगा मतदान, बीजेपी के लिए सबसे अहम

    लोकसभा चुनाव के 5वें चरण  में 6 मई को 7 राज्यों की 51 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. इनमें उत्तर प्रदेश की 14, मध्य प्रदेश की 7, बिहार की 5, राजस्थान की 13, झारखंड की 4, जम्मू-कश्मीर की 2, बंगाल की 7 सीटों पर मतदान होगा. यह चरण भी बीजेपी के लिए काफी अहम है क्योंकि इसमें ज्यादातर सीटें बीजेपी के खाते में हैं और सरकार बनाने के लिए इन सीटों को बचाए रखना पार्टी के लिए जरूरी होगा. इनमें उत्तर प्रदेश  की रायबरेली और अमेठी छोड़कर सभी सीटें बीजेपी के पास हैं.

  • लोकसभा चुनाव 2019 : क्या कांग्रेस सहित विपक्ष की यह एक बड़ी रणनीतिक चूक है?

    लोकसभा चुनाव 2019 : क्या कांग्रेस सहित विपक्ष की यह एक बड़ी रणनीतिक चूक है?

    6 मई यानी सोमवार को पांचवे चरण का मतदान होना है. इस पूरे चुनाव में विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती कि वह कैसे बीजेपी के खिलाफ पड़ने वाले वोटों को बिखरने से रोके. चुनाव की घोषणा से पहले कांग्रेस ने विपक्षी एकता की बड़ी कोशिश कीं और सभी दलों को यूपीए में लाने की कोशिश भी की. लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा और आरएलडी मिलकर अलग चुनाव लड़ रहे हैं तो पश्चिम बंगाल में भी टीएमसी नेता ममता बनर्जी ने भी कांग्रेस को भाव नहीं दिया. वहीं आंध्र प्रदेश में टीडीपी ने भी कांग्रेस की बात नहीं  मानी. हालांकि बिहार में कांग्रेस आरजेडी ने कई छोटे दलों के साथ गठबंधन किया है. लेकिन बीजेपी+जेडीयू+एलजेपी का वोट बैंक इस महागठबंधन पर भारी पड़ रहा है. बात करें उन सीटों की जहां अगर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल साथ मिलकर लड़ते तो बीजेपी के लिए बड़ी मुश्किल हो जाती.

  • वाराणसी में तेज बहादुर का पर्चा भले ही हो गया हो खारिज, लेकिन PM मोदी की राह नहीं है आसान

    वाराणसी में तेज बहादुर का पर्चा भले ही हो गया हो खारिज, लेकिन PM मोदी की राह नहीं है आसान

    बीएसएफ के बर्खास्त सिपाही और गठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार बने तेज बहादुर फौजी का वाराणसी (Varanasi) से नामांकन रद्द होने के बाद भले ही लोगों को लग रहा हो कि अब पीएम मोदी (PM Modi) के सामने चुनौती ख़त्म हो गई है लेकिन ऐसा वास्तव में नहीं है. इस बार 2014 जैसे हालात नहीं है. 2014 से अब बिलकुल अलग हालात हैं. पिछले चुनाव में जब पीएम मोदी यहां आए तो लोगों को उनसे उम्मीदें थीं लेकिन अब पांच साल बाद कुछ ऐसे भी लोगों का सामना करना पड़ेगा जो उनके कामकाज से खुश नहीं है. काशी के लोगों को उनसे बड़ी उम्मीदें थीं. पीएम मोदी ने भी उनके इन सपनो को बहुत बड़ा किया था.

  • लोकसभा चुनाव 2019 : क्या एक बार फिर कहेंगे एक-दूसरे को 'नमस्ते'?

    लोकसभा चुनाव 2019 :  क्या एक बार फिर कहेंगे एक-दूसरे को 'नमस्ते'?

    ऐसा लग रहा है कि जिस अनुच्छेद 370 को लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह चुनावी रैलियों में बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं उसको एनडीए के सहयोगी जेडीयू खास तवज्जो देने के मूड में नहीं है. एनडीटीवी से बातचीत में जब जेडीयू के महासचिव केसी त्यागी से प्रधानमंत्री मोदी की रैली में वंदे मातरम के नारे के दौरान नीतीश कुमार की ओर से कोई भी प्रतिक्रिया न देने पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी वंदे मातरम का विरोध नहीं करती है लेकिन यह किसी के भी ऊपर थोपा नहीं जाना चाहिए. इसके बाद जब अनुच्छेद 370 पर उनसे सवाल पूछा गया तो त्यागी का कहना था कि जनता पार्टी में भी आर्टिकल 370 था जिसमें भारतीय जनता पार्टी और भारतीय जनसंघ उसका हिस्सा थी. आप 1977 का जनता पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र निकालिए जिसमें अटल जी भी थे, आडवाणी जी भी थे, नाना जी देशमुख भी थे. उस घोषणापत्र में लिखा है हम आर्टिकल 370 के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे.

  • वो 8 बातें जिनकी वजह से मायावती और कांग्रेस के बीच शुरू हो सकती है तगड़ी जंग, किस ओर जाएंगे दलित

    वो 8 बातें जिनकी वजह से मायावती और कांग्रेस के बीच शुरू हो सकती है तगड़ी जंग, किस ओर जाएंगे दलित

    ऐसा लग रहा है कि देश में दलित वोटों को लेकर कांग्रेस और बीएसपी के बीच बड़ी जंग होने वाली है जो इस लोकसभा चुनाव से शुरू होगी और उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा तक चरम पर पहुंच जाएगी. इंदिरा गांधी के समय कभी दलित, सवर्णों में ब्राह्णण कांग्रेस का कोर वोट बैंक हुआ करते थे. लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में क्षत्रपों के बजाए अपने दम पर खड़े होने की कोशिश कर रही है यही वजह है कि लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने भले ही प्रियंका गांधी को महासचिव बनाकर पूर्वांचल की जिम्मेदारी दी है लेकिन एक कार्यकर्ता से बातचीत में उन्होंने जब पूछा कि चुनाव की तैयारी कैसे चल रही है तो कार्यकर्ता का जवाब था कि सब ठीक है, तो प्रियंका ने दोबारा कहा, 'इस चुनाव की नहीं, 2022 की.' उनका इशारा साफ था कि वह उत्तर प्रदेश में दूर की रणनीति बनाकर आई हैं. और हो सकता है कि कांग्रेस विधानसभा का चुनाव प्रियंका के ही चेहरे पर लड़े. महागठबंधन में जगह न मिलने के बाद कांग्रेस ने भी सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर दिया. बीते दो-तीन महीने में कई ऐसी बातें रही हैं जो बीएसपी सुप्रीमो मायावती और कांग्रेस के बीच सीधे टकराव की वजह बन सकती हैं.

  • Indian General Election, 2019 : राजस्थान में चौथे चरण का मतदान कांग्रेस के लिए भी बड़ा सिरदर्द

    Indian General Election, 2019 :  राजस्थान में चौथे चरण का मतदान कांग्रेस के लिए भी बड़ा सिरदर्द

    राजस्थान की 25 में से 13 सीटों पर लोकसभा चुनाव (Indian General Election, 2019) के चौथे चरण के लिए आज मतदान हो रहा है. ये सीटें बीजेपी के लिए चुनौती हैं तो कांग्रेस के लिए भी किसी सिरदर्द से कम नही हैं. साल 2004 से यह एक ट्रेंड चला जा आर रहा है कि जिसने भी  विधानसभा का चुनाव जीता है उसको लोकसभा चुनाव में सफलता मिली है. बीते साल दिसंबर में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस राज्य में सरकार जरूर बनाने में कामयाब रही है, लेकिन बीजेपी ने पूरे राज्य में कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी है. वह भी सत्ता विरोधी लहर का सामना करते हुए.  दोनों ही पार्टियों के वोट शेयर में भी ज्यादा अंतर नहीं है.

  • Election 2019 Phase 4: अब शुरू होगा असली मुकाबला, तय हो जाएगा किसकी बनेगी केंद्र में सरकार

    Election 2019 Phase 4: अब शुरू होगा असली मुकाबला, तय हो जाएगा किसकी बनेगी केंद्र में सरकार

    लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में आगामी 29 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिये प्रचार कार्य शनिवार शाम छह बजे थम गया गया है. इस चरण में 9 राज्यों की 71 सीटों के लिए मतदान होगा. लेकिन यह चरण काफी कुछ साफ कर देगा कि केंद्र में किसकी सरकार आने जा रही है. बात करें उत्तर प्रदेश की  तो  29 अप्रैल को प्रदेश की 13 लोकसभा सीटों के लिये मतदान होगा . मतदान सुबह सात बजे शुरू होकर शाम छह बजे तक होगा. इस चरण में शाहजहांपुर, खीरी, हरदोई, मिश्रिख, उन्नाव, फर्रुखाबाद, इटावा, कन्नौज, कानपुर, अकबरपुर, जालौन, झांसी और हमीरपुर के लिये मतदान होगा.

  • वाराणसी : बीएसपी सुप्रीमो मायावती की वजह से सारा प्लान हो गया फेल

    वाराणसी : बीएसपी सुप्रीमो मायावती की वजह से सारा प्लान हो गया फेल

    प्रियंका गांधी के वाराणसी से प्रधानमंत्री के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ने के पीछे कई तर्क दिए जा रहे हैं.पहले यह कहा गया कि राहुल गांधी ने यह कह कर मना कर दिया कि बड़े नेताओं के खिलाफ गांधी परिवार के ना लड़ने की परंपरा नेहरू जी ने डाली थी और उसी का पालन किया जाना चाहिए. मगर क्या यही एक वजह है प्रियंका के वाराणसी से ना लड़ने की? तो ऐसा नहीं है, सूत्रों की मानें तो बीएसपी प्रमुख मायावती का प्रियंका की वाराणसी से उम्मीदवारी पर राजी ना होना है, कांग्रेस के रणनीतिकार लगातार मायावती के सलाहकारों से संपर्क में थे कि प्रियंका गांधी के वाराणसी में चुनाव लड़ने की हालत में उन्हें प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ विपक्ष का संयुक्त उम्मीदवार घोषित किया जाए. इस बारे में समाजवादी से बात भी हो गई थी और अखिलेश यादव ने अपनी मूक सहमति भी दे दी थी. मगर इतना जरूर इशारा किया था कि यह सब मायावती जी के हां करने के बाद ही संभव हो सकता है.

  • पीएम मोदी के इस दांव के दम पर बीजेपी ने 2014 में जीत ली थीं 31 सीटें, विपक्ष के पास नहीं है अभी तक इसकी काट

    पीएम मोदी के इस दांव के दम पर बीजेपी ने 2014 में जीत ली थीं 31 सीटें, विपक्ष के पास नहीं है अभी तक इसकी काट

    2019 की लोकसभा के चुनाव में अब सबकी निगाहें उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और इससे सटे बिहार की सीटों पर टिकी हैं. पूर्वांचल के छह मंडल देवी पाटन, गोरखपुर, मिर्ज़ापुर, आजमगढ़, वाराणसी और इलाहाबाद में कुल 26  संसदीय सीटे हैं.  इन मंडलों का केन्द्र बिंदु पीएम मोदी की संसदीय वाराणसी है क्योंकि इन इलाकों के व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, जैसी बुनियादी चीजें यही शहर पूरी करता है. इसलिये यहां से जो बयार बहती है वही पूर्वांचल और पास के बिहार में भी बहने लगती है.