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Manish kumar News in Hindi


'Manish kumar' - 409 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • आखिर अगड़ी जातियों में इतना उबाल क्यों हैं?

    आखिर अगड़ी जातियों में इतना उबाल क्यों हैं?

    आज भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक दिल्ली में हो रही है. सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि आखिर पार्टी एससी-एसटी एक्ट के मुद्दे पर देशभर में अगड़ी जातियों में असंतोष के माहौल का क्या निदान ढूंढती है. किसी भी भाजपा नेता को इस बात में कोई गलतफहमी नहीं है कि 90 के दशक से अब तक हिंदी पट्टी के राज्यों में मंडल की शक्तियों और दलों से मुक़ाबला करने में भाजपा का अगर किसी वर्ग ने जमकर साथ दिया है तो वे हैं अगड़ी जातियां और इनके समूह.

  • मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांडः मीडिया रिपोर्टिंग रोके जाने पर जानिए क्या बोले पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश

    मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांडः मीडिया रिपोर्टिंग रोके जाने पर जानिए क्या बोले पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश

    मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड से जुड़ी रिपोर्टिंग पर कोर्ट की ओर से रोक लगाए जाने का मुद्दा चर्चा में रहा है. इस मुद्दे पर अब जाकर पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मुकेश आर शाह ने बयान दिया है.

  • राजद ने भाजपा नेताओं से पूछा-अटलजी की याद में मुंडन कब कराएंगे ?

    राजद ने भाजपा नेताओं से पूछा-अटलजी की याद में मुंडन कब कराएंगे ?

    अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद उनकी अस्थियों की बीजेपी की ओर से देश भर में  यात्रा निकाले जाने पर विपक्ष निशाना साध रहा है. राष्ट्रीय जनता दल(राजद) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने भाजपा नेताओं से पूछा है कि अटल जी की अस्थि प्रवाह के बाद अब दस कर्म तथा मुंडन संस्कार कब कराएंगे ?

  • हरिवंश जी राजनीति में आपका इस तरह बढ़ना हम पत्रकारों को अच्छा नहीं लगता..

    हरिवंश जी राजनीति में आपका इस तरह बढ़ना हम पत्रकारों को अच्छा नहीं लगता..

    इस शीर्षक को देखकर आप सब लोग चकित हो रहे होंगे, लेकिन मुझे ये स्वीकार करने में कोई हिचक नहीं कि पहले हरिवंश जी का राजनीति में जाना, राज्यसभा सदस्य बनना और राज्यसभा का उप सभापति वह भी पहले टर्म में ही बन जाना, मुझे बहुत ख़ुशी नहीं हो रही.

  • नीतीश कुमार आखिरकार देर से आए लेकिन दुरुस्त आए..

    नीतीश कुमार आखिरकार देर से आए लेकिन दुरुस्त आए..

    इंसान कभी-कभी खामोश रहके अपने समर्थकों और विरोधियों दोनों को परेशान करता है. लेकिन जब वो इस मौन व्रत को खत्म करता है तब उसके वाक्य और प्रतिक्रिया की सबको बेताबी से इंतज़ार रहता है. मुजफ्फरपुर प्रकरण पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की हालत कुछ वैसे ही खामोश इंसान की थी.

  • मुजफ्फरपुर बालिका गृहकांड: क्‍या ब्रजेश ठाकुर ने मीडिया जगत को किया शर्मशार

    मुजफ्फरपुर बालिका गृहकांड: क्‍या ब्रजेश ठाकुर ने मीडिया जगत को किया शर्मशार

    ब्रजेश ठाकुर ने जो कुछ भी किया उससे बाद हर कोई पूछ रहा है कि क्‍या मीडिया के लोग इस जघन्य कांड के लिए बच्चियों या उनके परिवारवालों या देश के लोगों से माफ़ी मांगेंगी. क्‍योंकि इस कांड का आरोपी ब्रजेश ठाकुर एक अख़बार का मालिक और संपादक है.

  • बिहार सरकार का एक साल पूरा होने पर सत्ता पक्ष सुस्त और विपक्ष सोया क्यों रह गया

    बिहार सरकार का एक साल पूरा होने पर सत्ता पक्ष सुस्त और विपक्ष सोया क्यों रह गया

    शनिवार को बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार के एक साल पूरे हो गए. अपनी सरकार का सालाना लेखा जोखा देने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोई आयोजन नहीं किया और न विपक्ष ने उनके इस कार्यकाल के बारे में कोई आरोप पत्र जारी किया या संवाददाता सम्मेलन ही किया. इसके बाद एक से एक राजनीतिक क़यास लगाए जा रहे हैं.

  • यह जिद नीतीश कुमार को क्यों पड़ सकती है भारी?

    यह जिद नीतीश कुमार को क्यों पड़ सकती है भारी?

    पिछले दो दिनों से संसद से बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में एक ही मुद्दे पर हंगामा हो रहा है, वह है राज्य के मुजफ्फरपुर में एक बालिका गृह से सम्बंधित स्कैंडल का. खुद पुलिस और समाज कल्याण विभाग द्वारा अब तक 42 बालिकाओं की मेडिकल रिपोर्ट में 29 बालिकाओं के साथ यौन शोषण की जब से पुष्टि हुई है तब से पूरे देश में इस घटना की चर्चा तेज़ हुई है.

  • नीतीश कुमार के एक महीने के अल्टीमेटम के क्या हैं मायने?

    नीतीश कुमार के एक महीने के अल्टीमेटम के क्या हैं मायने?

    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की सता में सहयोगी भारतीय जनता पार्टी से उम्मीद जताई है कि 15 अगस्त तक उन्हें ये बता दिया जाएगा कि आखिर उनके पास जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के लिए अगले साल लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी उतारने के लिए कितनी सीटों का ऑफ़र है. नीतीश ने सोमवार को जब से ये बात बोली है तब से इसका अर्थ और विश्लेषण सब लोग अपनी तरह से कर रहे हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि नीतीश कुमार सीटों के मुद्दे पर बहुत ज्यादा इंतजार नहीं करना चाहते. उन्होंने भले ही भाजपा के कर्ता धर्ता अमित शाह को इंतजार के समय के बारे में नहीं बताया हो, लेकिन मीडिया के माध्यम से और सुशील मोदी की उपस्थिति में समय का खुलासा कर दिया है.

  • बिहार में सरकार गठन के बाद नीतीश कुमार-अमित शाह की पहली मुलाक़ात, साथ किया ब्रेकफास्‍ट, सीट बंटवारे पर बातचीत के आसार

    बिहार में सरकार गठन के बाद नीतीश कुमार-अमित शाह की पहली मुलाक़ात, साथ किया ब्रेकफास्‍ट, सीट बंटवारे पर बातचीत के आसार

    बीजेपी-जेडीयू सरकार बनने के बाद अमित शाह की नीतीश से ये पहली मुलाक़ात है. माना जा रहा है कि इस मुलाकात में 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे पर बात होगी.

  • कैटरीना कैफ को 'शीला की जवानी' पर डांस का चढ़ा ऐसा शौक, गुरु रंधावा और मनीष पॉल ने मान ली हार- देखें Video

    कैटरीना कैफ को 'शीला की जवानी' पर डांस का चढ़ा ऐसा शौक, गुरु रंधावा और मनीष पॉल ने मान ली हार- देखें Video

    'शीला की जवानी' कैटरीना कैफ का 'तीस मार खां' फिल्म का सुपरहिट सॉन्ग है, और यह गाना काफी हिट हुआ था. हालांकि अक्षय कुमार और कैटरीना कैफ की ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर पस्त हो गई थी लेकिन यह गाना आज भी दम रखता है.

  • कुशवाहा के ‘इफ्तार’ में नहीं दिखे NDA के अधिकांश नेता, BJP नेता ने दी यह ‘खास सलाह’

    कुशवाहा के ‘इफ्तार’ में नहीं दिखे NDA के अधिकांश नेता, BJP नेता ने दी यह ‘खास सलाह’

    रविवार को हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इफ़्तार के किए निकले ज़रूर, लेकिन वो अपने पार्टी के नेता ग़ुलाम गोस के घर पर गये. ये अभी साफ़ नहीं कि उन्हें उपेन्द्र कुशवाहा ने निमंत्रण दिया था या नहीं. 

  • शव को कंधे पर लेकर अस्पताल में भटकता रहा बेटा, भूख के चलते हुई थी मां की मौत

    शव को कंधे पर लेकर अस्पताल में भटकता रहा बेटा, भूख के चलते हुई थी मां की मौत

    भूख से महिला की मौत के बाद प्रखंड में संचालित मुख्यमंत्री दाल भात योजना पर भी सवाल उठने लगे हैं. मृतका के पुत्र के अनुसार, मीना विगत 10 दिनों से कुछ नहीं खाई थी जिसके कारण गंभीर बीमारियों के चपेट में आने से उसकी मौत हो गई.

  • IPL 2018 Final, CSK vs SRH: 'कुछ ऐसे' महेंद्र सिंह धोनी रहे हैं भुवनेश्वर कुमार पर हावी, काम करेगी SRH की 'सबसे बड़ी पावर'?

    IPL 2018 Final, CSK vs SRH: 'कुछ ऐसे' महेंद्र सिंह धोनी रहे हैं भुवनेश्वर कुमार पर हावी, काम करेगी SRH की 'सबसे बड़ी पावर'?

    इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल)-11 का महामुकाबला कुछ ही देर बाद शुरू होने को है. कई टक्करों की चर्चा जोरों पर है. मुकाबला शुरू होने से पहले ही राशिद खान बनाम चेन्नई सुपर किंग्स कहा जा रहा है. लेकिन यहां टक्कर और भी हैं, जो बहुत ही रोचक हैं. इनमें से एक टक्कर है चेन्नई के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और एसआरएच के सीमर भुवनेश्वर कुमार के बीच. और इस सबके बीच हैदराबाद की सबसे बड़ी पावर की भी परीक्षा होने जा रही है.

  • बिहार में रिश्‍वत लेने के आरोप में गिरफ़्तार दारोग़ा हुआ थाने से फ़रार

    बिहार में रिश्‍वत लेने के आरोप में गिरफ़्तार दारोग़ा हुआ थाने से फ़रार

    अपराधियों की कोर्ट और थाने से फ़रारी की ख़बर तो आम बात है लेकिन अगर दारोग़ा फ़रार हो जाये तो उसे आप क्या कहेंगे. लेकिन बिहार के गया जिले में एक ऐसी ही घटना हुई है जहां चाकंद थाने के गिरफ़्तार थाना प्रभारी पवन कुमार पुलिस गिरफ़्त से फ़रार हो गए.

  • क्या बिहार में भड़की हिंसा नीतीश कुमार की 'सुशासन बाबू' वाली छवि पर लगा रही है दाग?

    क्या बिहार में भड़की हिंसा नीतीश कुमार की 'सुशासन बाबू' वाली छवि पर लगा रही है दाग?

    बिहार से इन दिनों अच्छी ख़बर नहीं आती. एक बार फिर राज्य नेगेटिव ख़बरों के कारण अब ज़्यादा सुर्ख़ियां बटोरता है.

  • ईवीएम पर बहस पार्ट-2: बैलेट के बाद EVM से बिहार के लोगों ने ली राहत की सांस!

    ईवीएम पर बहस पार्ट-2: बैलेट के बाद EVM से बिहार के लोगों ने ली राहत की सांस!

    साल 2000 तक बिहार में हर चुनाव बैलेट पेपर से हुए, लेकिन हर चुनाव में जीत का मुख्य आधार सामाजिक समीकरण ही रहे. हालांकि, यह भी सच है कि उम्मीदवार अपनी जीत के लिए बैलेट पेपर को लूटने के प्रयास करते रहे. हालात ऐसे थे कि अगर पार्टी सता में होती तो प्रशासन का साथ मिलता, लेकिन विपक्ष में रहने पर गोलीबारी, चुनाव में अथाह खर्चे आदि करना एक नियमित अनिवार्य प्रक्रिया थी, जिसे नजर अंदाज करना चुनाव से पहले घुटने टेकने के समान था. इसलिए मतदान के दिन हिंसा, गोली चलना, बम विस्फोट एक आम बात थी. शायद ही कोई एक ऐसा चुनाव हो जब लोकतंत्र के नाम पर बूथ लूटने में बीस लोगों से कम जाने गयी हो. 

  • ईवीएम पर बहस समय की बर्बादी क्यों है?

    ईवीएम पर बहस समय की बर्बादी क्यों है?

    इन दिनों पूरे देश में एक बार फिर से EVM पर बहस शुरू हो गई है. खासकर कांग्रेस महाधिवेशन के बाद जिसमें फिर से बैलेट पेपर के माध्यम से चुनाव कराने की मांग की गई है. कई क्षेत्रिय दलों ने यह मांग पहले से कर रखी है. लेकिन अगर आप मुझसे पूछेंगे तो मेरे हिसाब से ये बहस बेमानी है. क्योंकि बिहार, जहां बैलेट और बुलेट का संघर्ष जगव्यापी रहा है, वहां ईवीएम से गरीब और वंचित समाज के लोग ज्यादा निर्भिक होकर मतदान करते हैं. बिहार हो या उतर प्रदेश या कोई अन्य राज्य, अभी चुनाव में जीत-हार आपके सामाजिक समीकरण , चुनाव अभियान के नेतृत्व और आपके संगठन की शक्ति तय करते हैं. लेकिन पिछले क़रीब तीन दशक के बिहार चुनाव परिणामों पर नजर दौड़ाएंगे तो यह दूध का दूध और पानी का पानी साबित हो जाएगा. 

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