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Manoranjan bharati blog


'Manoranjan bharati blog' - 113 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • ब्लॉग: प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शादी में आए 'नाराज फूफा' क्यों बने रहे पीएम मोदी?

    ब्लॉग: प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शादी में आए 'नाराज फूफा' क्यों बने रहे पीएम मोदी?

    जब से यह खबर आई कि प्रधानमंत्री बीजेपी दफ्तर आ रहे हैं, जहां वे बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे, तो लगा कि सब कुछ सामान्य है. वे आएंगे 40 मिनट तक बोलेंगे, कांग्रेस को भला-बुरा कहेंगे..कुछ अपनी बात कहेंगे, अपने कार्यकर्ताओं का धन्यवाद करेंगे, और बात खत्म हो जाएगी. मगर जब यह खबर आई कि वे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे तो फिर न्यूज रूम में आपाधापी मच गई. एक अजीब तरह की उत्तेजना और जोश दिखाई देने लगा. सभी तैयारी करने लगे और कहने लगे कि चलो जिस दिन का पिछले पांच साल से इंतजार कर रहे थे वो आखिर आ ही गया...

  • लोकसभा चुनाव : तृणमूल और बीजेपी के बीच संघर्ष के पीछे की कहानी

    लोकसभा चुनाव : तृणमूल और बीजेपी के बीच संघर्ष के पीछे की कहानी

    पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने प्रचार करने पर रात के 10 बजे के बाद से रोक लगा दी है..यह चुनाव आयोग का एक ऐसा फैसला है जिसको लेकर बहस छिड़ गई है..कई लोग कह रहे हैं कि यदि चुनाव आयोग को प्रचार बंद ही करना था तो 15 तारीख के 10 बजे से ही बंद कर देना चाहिए था. उसे 34 घंटे क्यों बढ़ाया गया. क्या इसलिए कि बंगाल में प्रधानमंत्री को दो रैली होनी थीं. चुनाव आयोग अपने इस फैसले को लेकर विवाद के घेरे में आ गया है और उस पर पक्षपात करने का आरोप लग रहा है.

  • गोरखपुर की चुनावी जंग में कड़ा मुकाबला

    गोरखपुर की चुनावी जंग में कड़ा मुकाबला

    गोरखपुर पूर्वांचल की सबसे हॉट सीट मानी जाती है. वजह है कि गोरखपुर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सीट है. मुख्यमंत्री बनने के पहले योगी इस सीट से पांच बार सांसद बने. पहली बार 1998 में जीते थे 21 हजार वोटों से फिर उनका जीत का अंतर बढ़ता चला गया. उससे पहले महंत अवैद्यनाथ 1991 से 1998 तक बीजेपी के टिकट पर जीते और 1989 से 1990 में हिंदू महासभा से जीते. मगर योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद हुए उपचुनाव में प्रवीण निषाद साढ़े 21 हजार वोटों से जीते. निषाद सपा-बसपा के संयुक्त उम्मीदवार थे.

  • क्या आम आदमी पार्टी हाशिए पर आ गई है...

    क्या आम आदमी पार्टी हाशिए पर आ गई है...

    दिल्ली में 12 मई को वोट डाले जा चुके हैं और उसके बाद मैं निकला दिल्ली की गलियों में, लोगों से पूछने कि अब उनको क्या लगता है कि दिल्ली में क्या होने वाला है? मैं अपने प्रोग्राम 'बाबा के ढाबा' के लिए पहुंचा दिल्ली के मशहूर चांदनी चौक पर. वहां के लोगों से बात करके एक बात साफ थी कि इस लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी अपना जलवा खोती जा रही है. इस बार मुद्दा आम आदमी पार्टी था ही नहीं. लोगों से जब मैं यह पूछता था कि विधानसभा चुनाव में आपने तो आम आदमी पार्टी को 67 विधानसभा सीटों पर जितवा दिया, तो लोग चुप हो जाते थे.

  • प्रियंका गांधी क्या वायनाड या अमेठी से लड़ेंगी लोकसभा चुनाव?

    प्रियंका गांधी क्या वायनाड या अमेठी से लड़ेंगी लोकसभा चुनाव?

    प्रियंका गांधी वाड्रा के संसद में पहुंचने की संभावना अभी भी बनी हुई है. उनके बनारस से नहीं लड़ने के पीछे कई तरह के तर्क दिए गए... मायावती की न कहने, बड़े नेताओं के खिलाफ गांधी परिवार के किसी सदस्य के न लड़ने की परंपरा की दुहाई.. जैसी बातें भी कही गईं. यह भी कहा गया कि प्रियंका को अमेठी और मायावती पर ध्यान देने की जरूरत है. मगर इसका मतलब यह नहीं है कि प्रियंका सांसद नहीं बन सकती हैं.

  • बीजेपी के गढ़ गुजरात में कांग्रेस की बैठक के पीछे क्या है गणित

    बीजेपी के गढ़ गुजरात में कांग्रेस की बैठक के पीछे क्या है गणित

    2019 के लोकसभा चुनाव की लड़ाई को कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के घर तक ले गई है और इसी उम्मीद में कांग्रेस की पूरी कार्यसमिति गुजरात में इकट्ठा हुई है.

  • आधा दर्जन छोटे दलों के संपर्क में हैं प्रियंका

    आधा दर्जन छोटे दलों के संपर्क में हैं प्रियंका

    कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने पांव जमाने की कोशिश में लगी है. जब से पूर्वी उत्तर प्रदेश का जिम्मा प्रियंका गांधी को मिला है और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का ज्योतिरादित्य सिंधिया को, दोनों ने अपने-अपने ढंग से कांग्रेस को फिर से खड़ा करने के लिए काम करना शुरू कर दिया है. इसके लिए प्रियंका अपनी खास कोशिशों में जुट गई हैं. इसी रणनीति का हिस्सा है कि प्रियंका ने उत्तर प्रदेश के सभी छोटे-छोटे दलों की खोज खबर लेना शुरू कर दिया है.

  • गठबंधन : बीजेपी का दक्षिण दर्द

    गठबंधन : बीजेपी का दक्षिण दर्द

    बीजेपी ने तमिलनाडु में अपने गठबंधन की घोषणा कर दी है. एक ही दिन में महाराष्ट्र के बाद तमिलनाडु दूसरा राज्य है जहां बीजेपी ने गठबंधन बनाने में देरी नहीं की है. वहां बीजेपी और शिवसेना में लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ में लड़ने पर सहमति बन चुकी है.

  • सभी तरफ 'महामिलावट' का जमाना

    सभी तरफ 'महामिलावट' का जमाना

    देश में लोकसभा चुनाव की तैयारी राजनैतिक दलों ने युद्ध स्तर पर शुरू कर दी है और जैसे जंग के मैदान में होता है लड़ाई के लिए एक लकीर सी खींच दी गई है...दोनों तरफ गठबंधन करने की होड़ सी लगी हुई है. एक-एक दल और एक-एक राज्य के हिसाब से नफे नुकसान का जायजा लेने के बाद पार्टियां आपस में बात कर रही हैं.

  • प्रियंका गांधी वाड्रा: अपना भी टाइम आएगा

    प्रियंका गांधी वाड्रा: अपना भी टाइम आएगा

    तीन दिनों के अपने लखनऊ प्रवास के दौरान प्रियंका ने दिन रात बैठकें करके करीब चार हजार कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मुलाकात की. यदि उत्तर प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर की माने तो प्रियंका ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के चार हजार कार्यकत्ताओं से मुलाकात कर इन ईलाकों के लिए एक खाका तैयार कर लिया है और उनके पास एक रणनीति भी है जो कांग्रेस को इन ईलाकों में फिर से जिंदा कर सकती है.

  • राहुल गांधी के चौंकाने वाले फैसले

    राहुल गांधी के चौंकाने वाले फैसले

    राहुल गांधी द्वारा लिए गए कुछ फैसले काफी चौंकाने वाले हैं, अंग्रेजी में जिसे कहते हैं आउट ऑफ बॉक्स आइडिया यानि लीक से हट कर लिया गया फैसला. हाल के दिनों में लिए गए ये सभी फैसले कांग्रेस के हित में जाते दिख रहे हैं..

  • जींद की जंग में कौन मारेगा बाजी...

    जींद की जंग में कौन मारेगा बाजी...

    हरियाणा के जींद का उपचुनाव अब महज एक विधायक चुनने का चुनाव नहीं रह गया है क्योंकि कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और कैथल से विधायक रणदीप सुरजेवाला ने यहां से चुनाव लड़ने का फैसला कर इस उपचुनाव को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का बिषय बना दिया है.

  • प्रियंका के सहारे राहुल की राजनीति

    प्रियंका के सहारे राहुल की राजनीति

    प्रियंका गांधी ने आखिरकार ना-ना करते-करते हां कर ही दी. अब वे आधिकारिक तौर पर राजनीति में आ गई हैं और कांग्रेस की महासचिव बनाई गई हैं. प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश का जिम्मा दिया गया है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 34 सीटें आती हैं जिनमें से करीब 16 सीटें ऐसी हैं जहां यदि ब्राह्मण और मुस्लिम एक साथ आ जांए तो पासा पलटा जा सकता है.

  • लोकसभा चुनाव 2019 : नरेंद्र मोदी बनाम महागठबंधन

    लोकसभा चुनाव 2019 : नरेंद्र मोदी बनाम महागठबंधन

    उत्तरप्रदेश की राजनीति में सपा और बसपा ने साथ आकर कुछ ऐसा किया है जो करीब 25 साल पहले भी हुआ था, मगर इस बार इनका साथ आना काफी मायने रखता है. यह गठबंधन भारतीय राजनीति की तस्वीर बदलने वाला है. मायावती और अखिलेश दोनों ने अपने अहं को दरकिनार करते हुए साथ आने का फैसला लिया.

  • दिल्ली की जंग, शीला की जुबानी

    दिल्ली की जंग, शीला की जुबानी

    कांग्रेस ने शीला दीक्षित को एक बार फिर दिल्ली की कमान सौंप दी है. वैसे इस खबर की चर्चा कई दिनों से थी मगर जैसे ही यह खबर आई तो लोगों ने कई तरह के सवाल पूछने शुरू कर दिए कि इतनी उम्र में यह जिम्मेदारी क्यों? वैसे यह लाजिमी भी था क्योंकि शीला दीक्षित 80 को पार कर गई हैं और एक तरह से सक्रिय राजनीति से दूर हो गई थीं. मगर कांग्रेस के पास लगता है कोई चारा नहीं था.

  • संसद के गलियारे से : सवर्ण आरक्षण और आगे...

    संसद के गलियारे से : सवर्ण आरक्षण और आगे...

    संसदों में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि आखिर वे अगड़ों को 10 फीसदी का आरक्षण देने की बात पर सत्र के आखिरी दिन चर्चा क्यों कर रहे हैं. जाहिर है कोई भी इस बिल का विरोध नहीं कर सकता इसलिए सबको मिलकर इस बिल को पारित कराना ही होगा. मगर सबके मन में एक ही सवाल है कि अब क्या...लोकसभा का चुनाव सिर पर है और क्या ऐसे और भी मामले आने वाले हैं जिनके लिए उनको तैयार रहना चाहिए?

  • मायावती-जोगी ने दिलचस्प बनाया चुनाव...

    मायावती-जोगी ने दिलचस्प बनाया चुनाव...

    छत्तीसगढ़ में एक चरण के चुनाव के बाद बसपा नेता मायावती ने यह साफ किया है कि उनकी पार्टी चुनाव के बाद बीजेपी और कांग्रेस से समान दूरी बनाकर रखेगी. हालांकि उनके ही सहयोगी अजीत जोगी ने एक दिन पहले यह पूछे जाने पर कि क्या जरूरत पड़ी जो बीजेपी को अपना सर्मथन दे सकते हैं. इस पर उन्होंने कहा था कि राजनीति में कुछ भी संभव है मगर बाद में वे अपने बयान से पलट गए. जाहिर है मायावती चुनाव परिणाम से पहले अपने पत्ते नहीं खोलना चाहती है. जाहिर है इन चुनावों का 2019 के लोकसभा चुनाव पर भी काफी असर पड़ने वाला है. सभी पार्टियों को पता है कि अभी तक छत्तीसगढ में बीजेपी और कांग्रेस के बीच जीत का अंतर एक फीसदी से भी कम होता है. ऐसे में यहां एक-एक वोट कीमती होता है.

  • बिहार में कुशवाहा फैक्टर...

    बिहार में कुशवाहा फैक्टर...

    बिहार में एनडीए में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है...लोकसभा चुनाव के लिए हुए सीट बंटवारे में केवल दो सीटें मिलने से उपेंद्र कुशवाहा नाराज चल रहे हैं...कहा जा रहा है कि वे दिल्ली आ कर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिलने की कोशिश करेगें... उधर जेडीयू की तरफ से ताजा बयान यह है कि किसी के भी गठबंधन में आने या जाने से कोई भी फर्क नहीं पड़ता है, यानि जेडीयू ने यह तय कर लिया है कि मौजूदा एनडीए गठबंधन में कुशवाहा के लिए कोई जगह नहीं है...इसके पीछे का कारण समझना जरूरी है. आखिर नीतीश कुमार को उपेंद्र कुशवाहा क्यों पसंद नहीं हैं...वजह साफ है दोनों की राजनीति का आधार एक ही वोट बैंक है...